न्यूटन का तृतीय गति नियम — क्रिया एवं प्रतिक्रिया (NCERT 4.6)
1. तृतीय नियम क्या बताता है?
न्यूटन का तृतीय नियम (Newton's third law) कहता है कि बल कभी भी अकेले (विगलित रूप में) उत्पन्न नहीं होते: यदि पिण्ड A, पिण्ड B पर कोई बल आरोपित करता है, तो B भी उसी क्षण A पर उसी रेखा के अनुदिश समान परिमाण तथा विपरीत दिशा में बल आरोपित करता है — FAB = −FBA। जहाँ द्वितीय नियम किसी एक पिण्ड को यह बताता है कि वह कुल बाह्य बल के प्रति कैसे अनुक्रिया करेगा, वहीं तृतीय नियम अन्योन्यक्रियाओं (interactions) के विषय में एक मौलिक कथन है: प्रकृति में प्रत्येक बल किसी युग्म का एक सदस्य होता है, और यह युग्म एक साथ ही उत्पन्न होता है तथा एक साथ ही समाप्त होता है। यह नियम सुनने में बहुत सरल प्रतीत होता है, किन्तु इस अध्याय का सर्वाधिक गलत समझा जाने वाला विषय है, क्योंकि इसका एकमात्र सबसे महत्वपूर्ण नियम 'अंकन अनुशासन (bookkeeping discipline)' है: प्रत्येक बल किसी एक विशिष्ट पिण्ड पर ही कार्य करता है, और किसी पिण्ड की गति केवल उस पिण्ड पर कार्य करने वाले बलों द्वारा निर्धारित होती है।
युग्म के नियमों की सूक्ष्मता से जाँच कीजिए — NTA परीक्षा में एक-एक करके इनकी परीक्षा लेता है। एक वास्तविक क्रिया–प्रतिक्रिया युग्म (action–reaction pair) की कसौटियाँ हैं: (i) परिमाण में समान, (ii) दिशा में विपरीत, (iii) संरेखीय (एक ही रेखा पर), (iv) तात्क्षणिक/समकालिक (एक साथ उत्पन्न और समाप्त होने वाले), (v) दो भिन्न पिण्डों पर कार्यरत, तथा (vi) समान प्रकृति का बल (दोनों संपर्क बल, दोनों गुरुत्वाकर्षण बल, अथवा दोनों स्थिरवैद्युत बल)। इनमें से किसी भी एक कसौटी पर विफल होने पर वे दो बल केवल सह-अस्तित्व में होते हैं — वे साथी युग्म नहीं होते। मेज पर रखी पुस्तक परीक्षा का मानक जाल (trap) है, और घोड़ा-गाड़ी विरोधाभास (horse-cart paradox) मानक वैचारिक प्रश्न है; दोनों का समाधान नीचे संख्यात्मक मानों के साथ किया गया है।
2. संपूर्ण सिद्धांत: युग्म, अ-युग्म, और बल परस्पर निरस्त क्यों नहीं होते
क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म परस्पर निरस्त (cancel) क्यों नहीं होते। बलों का निरसन केवल एक ही पिण्ड पर होने वाली एक संक्रिया है: मेज पर रखी पुस्तक इसलिए विरामावस्था में रहती है क्योंकि N और mg — दोनों पुस्तक पर ही कार्यरत हैं — जिनका सदिश योग शून्य होता है। एक क्रिया–प्रतिक्रिया युग्म इस शर्त को कभी पूरा नहीं करता, क्योंकि इसके दोनों सदस्य भिन्न-भिन्न पिण्डों पर कार्यरत होते हैं: आपके द्वारा लगाया गया धक्का दीवार पर कार्य करता है, और दीवार की प्रतिक्रिया आप पर कार्य करती है। प्रत्येक पिण्ड युग्म के ठीक एक बल का अनुभव करता है और द्वितीय नियम के अनुसार त्वरित होता है। जब आप "दीवार द्वारा वापस धक्का देने" का अनुभव करते हैं, तो वह दीवार आपके धक्के को निरस्त करने में आपकी सहायता नहीं कर रही होती — बल्कि वह आपके लगाए गए धक्के के ठीक बराबर मान से आपका विरोध कर रही होती है। NTA जिस सामान्य छात्र-त्रुटि पर प्रश्न बनाता है, वह FAB और FBA को सीधे जोड़कर यह दावा करना है कि "कुल बल शून्य है, अतः कोई वस्तु कभी गति ही नहीं कर सकती"; इसका सुधार मात्र एक वाक्य में निहित है — भिन्न-भिन्न पिण्डों पर लगने वाले बल कभी एक ही समीकरण का हिस्सा नहीं बनते।
वह अ-युग्म जिसे प्रत्येक छात्र युग्म समझ बैठता है। मेज पर रखी पुस्तक, चार बल, दो वास्तविक युग्म: (1) पृथ्वी पुस्तक को नीचे की ओर खींचती है (mg, पुस्तक पर) ⇔ पुस्तक पृथ्वी को ऊपर की ओर खींचती है (पृथ्वी पर, अत्यधिक क्षीण क्योंकि पृथ्वी का द्रव्यमान विशाल है); (2) पुस्तक मेज को नीचे दबाती है (मेज पर) ⇔ मेज पुस्तक को ऊपर की ओर धकेलती है (N, पुस्तक पर)। इस बीच N और mg — जो कि दोनों बल पुस्तक पर कार्यरत हैं — साम्यावस्था में एक-दूसरे को संतुलित तो करते हैं, किन्तु वे क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म नहीं हैं: वे भिन्न प्रकृति के बल हैं (संपर्क बल बनाम गुरुत्वाकर्षण बल), और मेज के ऊपर की ओर त्वरित होते ही (N बढ़ जाता है) अथवा पुस्तक और मेज के मुक्त रूप से गिरते ही (N शून्य हो जाता है, जबकि mg बना रहता है) उनका यह संतुलन टूट जाता है। "इस क्षण परिमाण में समान और दिशा में विपरीत होना" तृतीय नियम के युग्म की परिभाषा नहीं है — N और mg 'भिन्न पिण्डों' तथा 'समान प्रकृति' की कसौटियों पर विफल हो जाते हैं।
दैनिक जीवन के प्रदर्शन, परीक्षा-उन्मुख। पैदल चलना (Walking): आप अपने पैर से जमीन को पीछे की ओर धकेलते हैं (जमीन पर क्रिया); तृतीय नियम के अनुसार जमीन की घर्षण प्रतिक्रिया आपको आगे की ओर धकेलती है — आपको त्वरित करने वाला बल जमीन द्वारा आरोपित होता है, यही कारण है कि आप घर्षणहीन बर्फ पर नहीं चल सकते। तैरना/नाव चलाना (Swimming/rowing): पानी को पीछे धकेला जाता है → तैराक/नाव आगे की ओर धकेली जाती है। बंदूक से गोली दागना (Gun firing): बंदूक गोली को आगे धकेलती है → गोली बंदूक को पीछे धकेलती है (प्रतिक्षेप या recoil — इसका विस्तृत परिमाणात्मक विश्लेषण अगले पृष्ठ पर है)। रॉकेट (Rocket): रॉकेट निष्कासित गैसों को नीचे की ओर धकेलता है → गैसें रॉकेट को ऊपर की ओर धकेलती हैं; रॉकेट को "धक्का देने के लिए हवा" की आवश्यकता नहीं होती, जो कि NEET का एक पसंदीदा अभिकथन–कारण (assertion–reason) प्रश्न है। हाथ पर रखी पुस्तक का दबाव: आप पुस्तक के भार को अपनी हथेली पर नीचे की ओर दबाव के रूप में महसूस करते हैं — जो कि आपकी हथेली द्वारा लगाए गए ऊपर की ओर धक्के की प्रतिक्रिया है।
घोड़ा-गाड़ी विरोधाभास — समाधान। विरोधाभास यह है: घोड़ा गाड़ी को F बल से आगे खींचता है; गाड़ी घोड़े को उसी F बल से पीछे खींचती है (तृतीय नियम — चित्र में दर्शाया गया है)। चूँकि दोनों बल समान और विपरीत हैं, अतः "निकाय कभी त्वरित नहीं हो सकता"। इसका समाधान: गाड़ी का त्वरण गाड़ी पर लगने वाले बलों से तय होता है — घोड़े का खिंचाव ऋण गाड़ी के पहियों पर जमीन का घर्षण। घोड़े का त्वरण घोड़े पर लगने वाले बलों से तय होता है — उसके खुरों पर जमीन का आगे की ओर घर्षण ऋण गाड़ी का पीछे की ओर खिंचाव। तृतीय नियम का युग्म केवल संयुक्त (घोड़ा + गाड़ी) निकाय के कुल योग में परस्पर निरस्त होता है, जहाँ यह आंतरिक बल बन जाता है और समीकरण से हट जाता है; जो बाह्य बल बचता है, वह है घोड़े के खुरों पर जमीन द्वारा लगाया गया घर्षण, और वही पूरे निकाय को गति प्रदान करता है। उदाहरण 2 में इसे संख्यात्मक मानों से हल किया गया है।
3. दो पिण्डों और उनके युग्म का आरेखी निरूपण
चित्र 4.3 — एक युग्म, दो पिण्ड: बल कभी भी अपने साथी बल के साथ एक ही पिण्ड साझा नहीं करते
ऊपर: A, B को धकेलता है (लाल, B पर); B, A को धकेलता है (हरा, A पर) — समान, विपरीत, तथा भिन्न गुटकों पर। नीचे: मेज पर रखी पुस्तक के अ-युग्म का विश्लेषण।
परीक्षा निष्कर्ष (Exam read-out): युग्म की पहचान एक चेकलिस्ट है: समान? विपरीत? संरेखीय? तात्क्षणिक? भिन्न पिण्ड? समान प्रकृति? सभी छह प्रश्नों का उत्तर 'हाँ' होने पर ही वे साथी बल बनते हैं। N और mg 'भिन्न पिण्ड' और 'समान प्रकृति' की कसौटी पर विफल हो जाते हैं — और यही विफलता परीक्षा का सही उत्तर है।
4. हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1 — क्षैतिज मेज पर विरामावस्था में रखी 2 kg की पुस्तक पर कार्यरत बलों की सूची
एक क्षैतिज मेज पर विरामावस्था में रखी 2 kg की पुस्तक (g = 10 m s⁻²) पर और उसके द्वारा लगाए जाने वाले प्रत्येक बल की सूची बनाइए, तथा चिन्हित कीजिए कि कौन-से तृतीय-नियम के युग्म हैं और कौन-से केवल एक-दूसरे को संतुलित करते हैं।
हल (चरण-दर-चरण): पुस्तक पर कार्यरत बल: भार 20 N नीचे की ओर (पृथ्वी → पुस्तक) तथा अभिलम्ब बल 20 N ऊपर की ओर (मेज → पुस्तक) — ये बल एक-दूसरे को संतुलित करते हैं (ΣF = 0, अतः a = 0) किन्तु ये क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म नहीं हैं। पुस्तक द्वारा लगाए जाने वाले बल: पृथ्वी पर 20 N ऊपर की ओर (पुस्तक → पृथ्वी) तथा मेज पर 20 N नीचे की ओर (पुस्तक → मेज) — ये वे प्रतिक्रियाएँ हैं जो दो वास्तविक युग्मों को पूरा करती हैं: {पृथ्वी ↕ पुस्तक} तथा {पुस्तक ↕ मेज}। प्रभाव की विषमता पर ध्यान दें: पृथ्वी पर लगने वाला 20 N का बल अमूर्त/अमाप्य है क्योंकि पृथ्वी का द्रव्यमान ~6 × 10²⁴ kg है (समान बल, किन्तु कोई दृश्य त्वरण नहीं), जबकि मेज पर लगने वाला 20 N का बल उसकी सतह को सूक्ष्म रूप से संपीडित करता है — समान बल, किन्तु असमान दृश्य प्रभाव, क्योंकि त्वरण बल प्राप्त करने वाले पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
उदाहरण 2 — घोड़ा-गाड़ी विरोधाभास संख्यात्मक मानों के साथ
एक घोड़ा (400 kg) एक गाड़ी (400 kg) को 400 N बल से आगे की ओर खींचता है। घोड़े के खुरों पर जमीन का घर्षण 600 N आगे की ओर है; गाड़ी के पहियों पर घर्षण 200 N पीछे की ओर है। प्रत्येक पिण्ड का त्वरण ज्ञात कीजिए और समझाइए कि यह संयुक्त निकाय गति क्यों करता है।
हल: गाड़ी पर: आगे की ओर खिंचाव 400 N − 200 N घर्षण = 200 N कुल बल → acart = 200/400 = 0.5 m s⁻²। घोड़े पर: जमीन द्वारा आगे धक्का 600 N − गाड़ी का पीछे खिंचाव 400 N = 200 N कुल बल → ahorse = 200/400 = 0.5 m s⁻² — दोनों मान समान हैं, जो कि अनिवार्य है क्योंकि वे एक साथ गति कर रहे हैं। संपूर्ण निकाय (घोड़ा + गाड़ी): तृतीय नियम का युग्म (400 N ↔ 400 N) आंतरिक बल है और परस्पर निरस्त हो जाता है; कुल बाह्य बल = 600 − 200 = 400 N, कुल द्रव्यमान 800 kg पर → a = 0.5 m s⁻² ✓। यह निकाय घोड़े पर जमीन के घर्षण के कारण गति करता है — जो कि एक बाह्य बल है और इस क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म से पूर्णतः स्वतंत्र है। यहाँ कोई विरोधाभास नहीं है, केवल सावधानीपूर्वक बलों का सही लेखा-जोखा है।
5. अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1. 60 kg का एक धावक विरामावस्था से 3 s में 9 m/s का वेग प्राप्त करता है। उसे कौन-सा बल त्वरित करता है, कौन-सा पिण्ड यह बल आरोपित करता है, और इसमें प्रतिक्रिया की क्या भूमिका है?
उत्तर: a = 3 m s⁻²; F = ma = 180 N। यह बल जमीन का घर्षण बल है, जो ट्रैक द्वारा धावक पर आरोपित किया जाता है — यह ट्रैक पर धावक के 180 N के पीछे की ओर धक्के की प्रतिक्रिया है। धावक की मांसपेशियाँ जमीन पर धक्का उत्पन्न करती हैं; जमीन की प्रतिक्रिया उसे आगे त्वरित करती है। घर्षणरहित ट्रैक पर प्रतिक्रिया शून्य होगी और कोई क्षैतिज त्वरण संभव नहीं होगा।
प्रश्न 2 (MCQ). एक स्थिर लिफ्ट के भीतर वेइंग मशीन (तुला) पर एक व्यक्ति खड़ा है। मशीन उसका भार दर्शाती है क्योंकि: (a) उसका भार और मशीन का अभिलम्ब बल एक क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म बनाते हैं (b) द्वितीय नियम के परिणाम स्वरूप मशीन का अभिलम्ब बल उसके भार के बराबर होता है, जबकि उसके भार की वास्तविक प्रतिक्रिया पृथ्वी पर उसका गुरुत्वाकर्षण खिंचाव है (c) पृथ्वी उसे नीचे खींचती है और मशीन उसे युग्म के रूप में ऊपर धकेलती है (d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b) — पाठ्यांक N = mg व्यक्ति पर साम्यावस्था का समीकरण है, न कि तृतीय नियम का कथन। वास्तविक युग्म: {पृथ्वी व्यक्ति को खींचती है, व्यक्ति पृथ्वी को खींचता है} तथा {व्यक्ति तुला को दबाता है, तुला व्यक्ति को ऊपर धकेलती है}। विकल्प (a) और (c) में एक ही पिण्ड पर लगने वाले बलों को युग्म मानने का क्लासिक भ्रम है।
प्रश्न 3. 4 kg की बंदूक से 20 g की गोली 300 m/s के वेग से दागी जाती है। दोनों 0.002 s तक समान विस्फोट बल का अनुभव करते हैं। प्रत्येक पर लगने वाला बल, त्वरण, तथा बंदूक की प्रतिक्षेप चाल (recoil speed) ज्ञात कीजिए।
उत्तर: गोली पर आवेग: Δp = 0.02 × 300 = 6 kg m/s → F = 6/0.002 = 3000 N प्रत्येक पर (तृतीय नियम)। abullet = 3000/0.02 = 150 000 m s⁻²; agun = 3000/4 = 750 m s⁻² — समान बल, द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती त्वरण। प्रतिक्षेप चाल V = Δp_gun/M = 6/4 = 1.5 m/s पीछे की ओर (विस्तृत विवेचना संवेग संरक्षण वाले पृष्ठ पर)।
6. मुख्य सूत्र एवं महत्वपूर्ण निष्कर्ष
| संबंध / नियम | शर्त / टिप्पणी |
|---|---|
| FAB = −FBA | सदैव, प्रत्येक अन्योन्यक्रिया के लिए, एक ही क्षण |
| युग्म चेकलिस्ट: समान · विपरीत · संरेखीय · तात्क्षणिक · भिन्न पिण्ड · समान प्रकृति | सभी छह आवश्यक हैं; किसी एक की भी कमी युग्म को अमान्य करती है |
| N और mg कभी भी युग्म नहीं होते | एक ही पिण्ड, भिन्न बल प्रकृतियाँ — संतुलन ≠ तृतीय नियम |
| आंतरिक युग्म कभी भी निकाय के ΣF में शामिल नहीं होते | विलगित निकायों के संवेग संरक्षण का आधार |
| प्रत्येक पिण्ड पर अलग से a = F/m | समान बल → असमान त्वरण (गोली बनाम बंदूक) |
तृतीय नियम लेखांकन (accounting) का नियम है; अगला पृष्ठ वह ऑडिट है जिसे यह संभव बनाता है: किसी विलगित निकाय में प्रत्येक dp/dt का योग कीजिए, आंतरिक युग्म परस्पर निरस्त हो जाते हैं, और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
न्यूटन के गति के तृतीय नियम का कथन लिखिए।
यदि पिण्ड A, पिण्ड B पर कोई बल आरोपित करता है, तो पिण्ड B भी उसी क्षण पिण्ड A पर उसी रेखा के अनुदिश समान परिमाण तथा विपरीत दिशा में बल आरोपित करता है: F_AB = -F_BA। इन दोनों बलों को क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म कहा जाता है। क्रिया और प्रतिक्रिया परिमाण में समान, दिशा में विपरीत, संरेखीय, तात्क्षणिक (समकालिक) होती हैं, दो भिन्न पिण्डों पर कार्य करती हैं, तथा सदैव एक ही प्रकृति के बल होते हैं (दोनों संपर्क, दोनों गुरुत्वाकर्षण, दोनों चुंबकीय आदि)।
यदि क्रिया और प्रतिक्रिया सदैव समान और विपरीत होती हैं, तो वे एक-दूसरे को निरस्त क्यों नहीं करतीं?
क्योंकि युग्म के दोनों बल दो भिन्न-भिन्न पिण्डों पर कार्य करते हैं। बल केवल तभी एक-दूसरे को निरस्त करते हैं जब वे एक ही पिण्ड पर कार्यरत हों। क्रिया दूसरे पिण्ड को त्वरित करती है जबकि प्रतिक्रिया पहले पिण्ड को त्वरित करती है — प्रत्येक पिण्ड युग्म के ठीक एक बल का अनुभव करता है। उदाहरण के लिए, जब आप किसी दीवार को धक्का देते हैं, तो आपका धक्का दीवार पर कार्य करता है और दीवार की प्रतिक्रिया आप पर कार्य करती है; दीवार की गति केवल दीवार पर लगने वाले बलों द्वारा निर्धारित होती है और आपकी गति केवल आप पर लगने वाले बलों द्वारा। क्रिया को उसकी ही प्रतिक्रिया से जोड़ना भिन्न पिण्डों पर लगने वाले बलों को जोड़ना है — जो भौतिक रूप से अर्थहीन है।
क्या किसी पुस्तक पर लगने वाला अभिलम्ब बल और उसका भार एक क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म हैं?
नहीं। दोनों बल एक ही पिण्ड (पुस्तक) पर कार्य करते हैं, इसलिए वे तृतीय-नियम युग्म नहीं हो सकते — वे केवल साम्यावस्था में एक-दूसरे को संतुलित करते हैं। वास्तविक युग्म हैं: पृथ्वी पुस्तक को नीचे खींचती है (भार) और पुस्तक पृथ्वी को समान गुरुत्वाकर्षण बल से ऊपर खींचती है; तथा मेज पुस्तक को ऊपर धकेलती है (अभिलम्ब बल N) जबकि पुस्तक मेज को समान संपर्क बल से नीचे दबाती है। इस अंतर को पहचानना NEET और JEE Main में तृतीय नियम पर सर्वाधिक पूछा जाने वाला कौशल है।
तृतीय नियम के अनुसार पैदल चलना कैसे संभव होता है?
चलते समय आप अपने पैर से जमीन को पीछे और थोड़ा नीचे की ओर धकेलते हैं (क्रिया); तृतीय नियम के अनुसार जमीन आपको आगे और थोड़ा ऊपर की ओर धकेलती है (प्रतिक्रिया)। जमीन का यह घर्षण प्रतिक्रिया बल ही आपको आगे की ओर त्वरित करता है — बिना घर्षण के (चिकनी बर्फ पर) आप प्रभावी ढंग से धक्का नहीं दे सकते और चल नहीं सकते। आप पर आगे की ओर लगने वाला बल जमीन द्वारा लगाया जाता है, न कि सीधे आपकी मांसपेशियों द्वारा; आपकी मांसपेशियाँ केवल जमीन पर धक्का उत्पन्न करती हैं।
केवल इसी डिवाइस पर सेव — कोई अकाउंट या साइन-इन नहीं।