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कक्षा 11 · भौतिकीJEE MAIN × NEETEnglish
§ 6.2NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 6

सदिश गुणनफल (क्रॉस गुणनफल) एवं कोणीय वेग

स्थानांतरीय यांत्रिकी में कार्य एवं शक्ति हेतु अदिश (डॉट) गुणनफल का उपयोग होता है। इसके विपरीत, घूर्णी यांत्रिकी मूल रूप से सदिश (क्रॉस) गुणनफल द्वारा संचालित होती है, जो घूर्णन की प्रवृत्ति, लंबवत संबंधों तथा अक्षीय सदिशों (कोणीय वेग, बल आघूर्ण, कोणीय संवेग) को सटीक रूप से व्यक्त करता है।

1. सदिश गुणनफल की परिभाषा एवं मूलभूत गुणधर्म

दो सदिशों A तथा B का सदिश गुणनफल (क्रॉस गुणनफल) A × B एक ऐसा सदिश C होता है जिसका परिमाण दोनों सदिशों द्वारा निर्मित समांतर चतुर्भुज के क्षेत्रफल के बराबर होता है तथा दिशा दोनों सदिशों के तल के लंबवत होती है:

A × B = (A B sin θ) n̂   (0 ≤ θ ≤ π)

जहां A और B सदिशों के परिमाण हैं, θ उनके बीच का कोण है, तथा n̂ दोनों सदिशों के तल के लंबवत एकांक सदिश है जिसकी दिशा दाएं हाथ के अंगूठे के नियम से ज्ञात की जाती है।

सदिश गुणनफल के महत्वपूर्ण गणितीय नियम

  • क्रम-विनिमेय नियम का अभाव (प्रति-क्रमविनिमेय): A × B = −(B × A)। गुणन का क्रम बदलने पर ऋण चिन्ह आ जाता है।
  • योग पर वितरण नियम: A × (B + C) = (A × B) + (A × C)।
  • स्वयं के साथ सदिश गुणनफल: किसी भी सदिश का स्वयं के साथ (अथवा समांतर/प्रतिसमांतर सदिशों के साथ, θ = 0 या π) क्रॉस गुणनफल शून्य सदिश होता है: A × A = 0।
  • लंबकोणीय एकांक सदिश (Orthogonal Unit Vectors):
    • î × î = ĵ × ĵ = k̂ × k̂ = 0
    • दक्षिणावर्त चक्र (Clockwise): î × ĵ = k̂,   ĵ × k̂ = î,   k̂ × î = ĵ
    • वामावर्त चक्र (Anticlockwise): ĵ × î = −k̂,   k̂ × ĵ = −î,   î × k̂ = −ĵ

सारणिक (Determinant) द्वारा कार्तीजीय गणना

घटकों के रूप में दिए गए सदिशों A = Axî + Ayĵ + Azk̂ तथा B = Bxî + Byĵ + Bzk̂ हेतु:

A × B = | î     ĵ     k̂ |
| Ax   Ay   Az | = î(AyBz − AzBy) − ĵ(AxBz − AzBx) + k̂(AxBy − AyBx)
| Bx   By   Bz |

2. ज्यामितीय अनुप्रयोग: क्षेत्रफल की गणना

ज्यामितीय आकृति सदिश निवेश (Inputs) क्षेत्रफल सूत्र
समांतर चतुर्भुज (आसन्न भुजाएं) आसन्न भुजाएं A तथा B क्षेत्रफल = |A × B| = A B sin θ
समांतर चतुर्भुज (विकर्ण) विकर्ण d1 तथा d2 क्षेत्रफल = ½ |d1 × d2|
त्रिभुज दो आसन्न भुजाएं A तथा B क्षेत्रफल = ½ |A × B|

3. कोणीय वेग एवं रैखिक वेग में संबंध

जब कोई दृढ़ पिंड किसी स्थिर अक्ष के परितः घूर्णन करता है, तो उसका प्रत्येक कण अक्ष के लंबवत तल में वृत्तीय गति करता है जिसका केंद्र अक्ष पर होता है।

  • कोणीय वेग (ω): कोणीय विस्थापन की दर, ω = dθ/dt (मात्रक: rad/s)।
  • अक्षीय सदिश स्वभाव: कोणीय वेग ω एक अक्षीय सदिश है जो दाएं हाथ के पेंच नियमानुसार घूर्णन अक्ष के अनुदिश होता है।
  • रैखिक वेग से संबंध: घूर्णन अक्ष पर स्थित किसी बिंदु के सापेक्ष स्थिति सदिश r वाले कण हेतु:
v = ω × r   (रैखिक चाल v = ω r sin φ = ω r⊥)
NTA जाल (TRAP): कभी भी v = r × ω न लिखें! क्योंकि सदिश गुणनफल में क्रम बदलने पर दिशा उलट जाती है (r × ω = −v)। सही मानक सदिश रूप सदैव v = ω × r होता है।

घूर्णी गति में कुल रैखिक त्वरण के घटक

संबंध v = ω × r का समय के सापेक्ष अवकलन करने पर:

a = dv/dt = (α × r) + (ω × v)

यह त्वरण को दो परस्पर लंबवत भौतिक घटकों में वियोजित करता है:

  1. स्पर्शरेखीय त्वरण (Tangential Acceleration): at = α × r (परिमाण at = α r, चाल में परिवर्तन करता है)।
  2. अभिकेंद्रीय / त्रिज्य त्वरण (Centripetal Acceleration): ac = ω × v (परिमाण ac = ω² r = v²/r, केंद्र की ओर दिष्ट, दिशा में परिवर्तन करता है)।

कुल त्वरण का परिमाण: a = √(at² + ac²) = √((α r)² + (ω² r)²)।

4. दाएं हाथ के नियम एवं सदिश ज्यामिति का रेखाचित्र

चित्र 6.2 — सदिश गुणनफल एवं कोणीय वेग हेतु दाएं हाथ का नियम

^ C = A x B (घूर्णन अक्ष के अनुदिश: ω) | | अंगूठा लंबवत एकांक सदिश n̂ की दिशा दर्शाता है | +---+---+ / | / / | / / | / B (उंगलियां A से B की ओर मुड़ती हैं) / | / / / |/ / +---------O-----+---------> A \ / \ A और B का/ \ समतल / +-------+
परीक्षा अवलोकन बिंदु: ध्यान दें कि C एक ही समय में A और B दोनों के लंबवत होता है: C · A = 0 तथा C · B = 0।

चरण-दर-चरण हल किए गए संख्यात्मक उदाहरण

हल किया गया उदाहरण 1: क्रॉस गुणनफल एवं त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात करना

प्रश्न: दो सदिश A = 2î + 3ĵ − k̂ तथा B = î − 2ĵ + 2k̂ दिए गए हैं। ज्ञात कीजिए: (1) A × B, तथा (2) इन सदिशों द्वारा निर्मित त्रिभुज का क्षेत्रफल।

A × B = 4î − 5ĵ − 7k̂ · क्षेत्रफल = √90 / 2 ≈ 4.74 वर्ग इकाई
चरण 1: सारणिक द्वारा गुणनफल:
A × B = î[(3)(2) − (−1)(−2)] − ĵ[(2)(2) − (−1)(1)] + k̂[(2)(−2) − (3)(1)]
= î[6 − 2] − ĵ[4 + 1] + k̂[−4 − 3] = 4î − 5ĵ − 7k̂।

चरण 2: परिमाण:
|A × B| = √(4² + (−5)² + (−7)²) = √(16 + 25 + 49) = √90 ≈ 9.487।

चरण 3: त्रिभुज का क्षेत्रफल:
क्षेत्रफल = ½ |A × B| = ½ √90 = 3√10 / 2 ≈ 4.74 वर्ग इकाई।
हल किया गया उदाहरण 2: कोणीय वेग एवं स्थिति सदिश से रैखिक वेग ज्ञात करना

प्रश्न: एक कण कोणीय वेग ω = 3î − 4ĵ + k̂ rad/s से घूर्णन कर रहा है। घूर्णन केंद्र के सापेक्ष इसका स्थिति सदिश r = 5î − 6ĵ + 6k̂ m है। कण का रैखिक वेग सदिश ज्ञात कीजिए।

v = −18î − 13ĵ + 2k̂ m/s
चरण 1: सूत्र v = ω × r का प्रयोग:
| î     ĵ     k̂ |
| 3   −4    1 |
| 5   −6    6 |

चरण 2: सारणिक का विस्तार:
vx = (−4)(6) − (1)(−6) = −24 + 6 = −18
vy = −[(3)(6) − (1)(5)] = −[18 − 5] = −13
vz = (3)(−6) − (−4)(5) = −18 + 20 = +2

अतः v = −18î − 13ĵ + 2k̂ m/s।

5. हल किए गए NEET एवं JEE अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1. यदि दो सदिशों के सदिश गुणनफल का परिमाण उनके अदिश गुणनफल के परिमाण का √3 गुना हो, तो सदिशों के बीच का कोण है:

A. 30°
B. 45°
C. 60°
D. 90°

उत्तर: C
व्याख्या: |A × B| = √3 (A · B) ⇒ AB sin θ = √3 AB cos θ ⇒ tan θ = √3 ⇒ θ = 60° (π/3 rad)।
प्रश्न 2. सदिश गुणनफल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?

A. A × B = −(B × A)
B. A × A = 0
C. (A × B) · A = 0
D. A × (B × C) = (A × B) × C

उत्तर: D
व्याख्या: सदिश त्रिक गुणनफल सहचारी (associative) नहीं होता: A × (B × C) ≠ (A × B) × C। अतः कथन D असत्य है।
प्रश्न 3. एक पिंड एकसमान कोणीय वेग ω से घूर्णन कर रहा है। घूर्णन अक्ष से r दूरी पर स्थित कण का रैखिक वेग v है। यदि अक्ष से दूरी दोगुनी तथा कोणीय वेग आधा कर दिया जाए, तो रैखिक वेग होगा:

A. v
B. 2v
C. v / 2
D. 4v

उत्तर: A
व्याख्या: रैखिक चाल v = ω r। नया वेग v' = (ω/2)(2r) = v (अपरिवर्तित रहेगा)।
प्रश्न 4. 0.5 m त्रिज्या के वृत्त में गतिमान कण की कोणीय चाल 2 rad/s² की दर से बढ़ रही है। यदि t = 0 पर कण विरामावस्था में था, तो t = 2 s पर उसका कुल रैखिक त्वरण होगा:

A. 1 m/s²
B. 8 m/s²
C. √65 m/s²
D. 9 m/s²

उत्तर: C
व्याख्या: r = 0.5 m, α = 2 rad/s²। t = 2 s पर: ω = α t = 4 rad/s।
स्पर्शरेखीय त्वरण at = α r = (2)(0.5) = 1 m/s²।
अभिकेंद्रीय त्वरण ac = ω² r = (4²)(0.5) = 8 m/s²।
कुल त्वरण a = √(at² + ac²) = √(1² + 8²) = √65 m/s² ≈ 8.06 m/s²।

6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

कोणीय वेग को ध्रुवीय सदिश के स्थान पर अक्षीय सदिश क्यों माना जाता है?
ध्रुवीय सदिशों (जैसे वेग, बल) का एक निश्चित कार्यकारी बिंदु होता है और वे त्रिविम व्युत्क्रमण (parity: r → −r) पर चिन्ह बदलते हैं। कोणीय वेग किसी रेखा (अक्ष) के परितः घूर्णन को दर्शाता है जिसकी दिशा गणितीय परिपाटी (दाएं हाथ के पेंच नियम) से तय होती है। व्युत्क्रमण के तहत घूर्णन की दिशा अक्ष पर वही बनी रहती है, अतः यह एक अक्षीय सदिश (छद्म-सदिश) है।
तीन सदिशों A, B तथा C के एकतलीय होने की क्या शर्त है?
तीन सदिश एकतलीय (coplanar) होते हैं यदि उनका अदिश त्रिक गुणनफल शून्य हो: A · (B × C) = 0। ज्यामितीय रूप से यह उन सदिशों द्वारा बने समांतर षट्फलक का आयतन दर्शाता है; एक ही तल में होने पर आयतन शून्य होता है।
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