बल आघूर्ण (Torque) एवं कोणीय संवेग (Angular Momentum)
जिस प्रकार स्थानांतरीय गति में बल त्वरण उत्पन्न करता है और रैखिक संवेग गति की मात्रा को मापता है, ठीक उसी प्रकार घूर्णी गति में बल आघूर्ण (Torque) तथा कोणीय संवेग (Angular Momentum) उनके सटीक घूर्णी समकक्ष हैं। ये दृढ़ पिंड गतिकी के मूल स्तंभ हैं।
1. बल आघूर्ण एवं बलयुग्म (Torque and Couple)
जब किसी मूलबिंदु O के सापेक्ष स्थिति सदिश r वाले कण पर बल F आरोपित किया जाता है, तो बिंदु O के परितः बल आघूर्ण τ को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है:
अदिश परिमाण को दो अत्यंत महत्वपूर्ण भौतिक रूपों में लिखा जा सकता है:
- τ = r⊥ F, जहां r⊥ = r sin θ आघूर्ण भुजा (lever arm) है (मूलबिंदु से बल की क्रिया-रेखा पर लंबवत दूरी)।
- τ = r F⊥, जहां F⊥ = F sin θ स्थिति सदिश r के लंबवत बल का घटक है।
मात्रक एवं विमा: SI मात्रक न्यूटन-मीटर (N·m) है। विमीय सूत्र: [ML²T⁻²]। (सावधानी: यद्यपि कार्य और बल आघूर्ण की विमा समान है, परंतु कार्य एक अदिश राशि है (मात्रक जूल), जबकि बल आघूर्ण एक सदिश राशि है; बल आघूर्ण को कभी भी जूल में व्यक्त नहीं किया जाता)।
बलयुग्म (Couple) की अवधारणा
समान परिमाण तथा विपरीत दिशा वाले दो समानांतर बल जिनकी क्रिया-रेखाएं संपाती नहीं होतीं, एक बलयुग्म बनाते हैं:
- निकाय पर कुल स्थानांतरीय बल शून्य होता है: Fnet = F − F = 0 (कोई रैखिक त्वरण नहीं)।
- बलयुग्म का आघूर्ण मूलबिंदु के चयन से स्वतंत्र होता है: τबलयुग्म = बल × दोनों बलों के बीच लंबवत दूरी (बलयुग्म की भुजा)।
- दैनिक जीवन के उदाहरण: पानी का नल खोलना, बोतल का ढक्कन घुमाना, दोनों हाथों से स्टीयरिंग व्हील मोड़ना।
2. कण तथा निकाय का कोणीय संवेग
मूलबिंदु O के सापेक्ष v वेग (तथा रैखिक संवेग p = m v) से गतिमान m द्रव्यमान के कण का कोणीय संवेग L परिभाषित है:
अदिश परिमाण: L = p r⊥ = m v r⊥ (रैखिक संवेग × गति की रेखा पर लंबवत दूरी)।
मात्रक एवं विमा: SI मात्रक kg·m²/s अथवा जूल-सेकंड (J·s) है। विमीय सूत्र: [ML²T⁻¹] (प्लांक नियतांक h के समान)।
स्थिर अक्ष के परितः दृढ़ पिंड का कोणीय संवेग
किसी स्थिर अक्ष के परितः ω कोणीय वेग से घूर्णन करने वाले दृढ़ पिंड हेतु:
जहां I उस अक्ष के परितः पिंड का जड़त्व आघूर्ण है।
3. मूल संबंध: τ = dL/dt एवं कोणीय संवेग संरक्षण का नियम
कोणीय संवेग का समय के सापेक्ष अवकलन करने पर:
dL/dt = (dr/dt × p) + (r × dp/dt) = (v × m v) + (r × Fext)
चूंकि दो समानांतर सदिशों का क्रॉस गुणनफल शून्य होता है (v × m v = 0), अतः न्यूटन के द्वितीय नियम से:
कोणीय संवेग संरक्षण का सिद्धांत
यदि किसी निकाय पर कार्य करने वाला कुल बाह्य बल आघूर्ण शून्य हो (τext = 0):
जब आंतरिक द्रव्यमान पुनर्विन्यास से जड़त्व आघूर्ण I बदलता है, तो कोणीय वेग व्युत्क्रमानुपाती रूप से परिवर्तित होता है:
- घूर्णन करती नर्तकी (Ballet Dancer): हाथ फैलाने पर I बढ़ जाता है और घूर्णन धीमा हो जाता है। हाथ पास सिकोड़ने पर I घट जाता है और कोणीय चाल बहुत तेज हो जाती है।
- गोताखोर (Diver): हवा में कलाबाजियां खाते समय शरीर को मोड़कर I घटाता है जिससे घूर्णन की गति बढ़ जाती है।
- केप्लर का द्वितीय नियम: सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल केंद्रीय बल है (r × F = 0), अतः बल आघूर्ण शून्य है। फलस्वरूप L = m r v = const रहता है और क्षेत्रीय वेग dA/dt = L/(2m) नियत रहता है।
4. बल आघूर्ण द्वारा किया गया कार्य एवं घूर्णी शक्ति
जब बल आघूर्ण τ किसी पिंड को dθ कोण से घुमाता है:
चित्र 6.3 — कोणीय संवेग संरक्षण: घूर्णन करती नर्तकी
चरण-दर-चरण हल किए गए संख्यात्मक उदाहरण
प्रश्न: m द्रव्यमान के एक कण को u चाल से क्षैतिज से θ कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है। जब कण अपनी अधिकतम ऊंचाई H पर पहुंचता है, तो प्रक्षेपण बिंदु के परितः इसके कोणीय संवेग का परिमाण ज्ञात कीजिए।
उच्चतम बिंदु पर केवल क्षैतिज वेग होता है: v = u cos θ।
चरण 2: क्रिया-रेखा की लंबवत दूरी:
प्रक्षेपण बिंदु से उच्चतम बिंदु के क्षैतिज वेग की लंबवत दूरी अधिकतम ऊंचाई H के बराबर है:
H = (u² sin²θ) / (2g)।
चरण 3: कोणीय संवेग की गणना:
L = m v r⊥ = m (u cos θ) [ (u² sin²θ) / (2g) ]
L = (m u³ sin²θ cosθ) / (2g) (प्रक्षेप पथ के तल के लंबवत अंदर की ओर)।
प्रश्न: 2 kg द्रव्यमान तथा 0.2 m त्रिज्या की चकती अपनी ऊर्ध्वाधर केंद्रीय अक्ष के परितः 60 rpm की चाल से घूम रही है। 0.5 kg द्रव्यमान का एक मोम का टुकड़ा अक्ष से 0.1 m की दूरी पर चकती पर गिरकर चिपक जाता है। निकाय की नई घूर्णन चाल (rpm में) ज्ञात कीजिए।
I1 = ½ M R² = ½(2)(0.2)² = 0.04 kg·m²। N1 = 60 rpm।
चरण 2: अंतिम जड़त्व आघूर्ण:
मोम का जड़त्व आघूर्ण: Iमोम = m r² = (0.5)(0.1)² = 0.005 kg·m²।
कुल अंतिम I2 = 0.04 + 0.005 = 0.045 kg·m²।
चरण 3: कोणीय संवेग संरक्षण:
I1 N1 = I2 N2
(0.04)(60) = (0.045) N2 ⇒ N2 = 2.4 / 0.045 = 53.33 rpm।
5. हल किए गए NEET एवं JEE अभ्यास प्रश्न
A. 17î − 6ĵ − 13k̂ N·m
B. −17î + 6ĵ + 13k̂ N·m
C. 17î + 6ĵ − 13k̂ N·m
D. −17î − 6ĵ − 13k̂ N·m
î[(2)(4) − (3)(−3)] − ĵ[(3)(4) − (3)(2)] + k̂[(3)(−3) − (2)(2)]
= î[8 + 9] − ĵ[12 − 6] + k̂[−9 − 4] = 17î − 6ĵ − 13k̂ N·m।
A. त्रिज्या सदिश के अनुदिश
B. स्पर्शरेखा के अनुदिश
C. घूर्णन तल के लंबवत रेखा के अनुदिश
D. घूर्णन तल से 45° पर
A. 6 घंटे
B. 12 घंटे
C. 24 घंटे
D. 48 घंटे
बाह्य बल आघूर्ण शून्य होने से: L = I (2π/T) = नियतांक ⇒ T ∝ I।
अतः T' = T / 4 = 24 / 4 = 6 घंटे।
A. समय के साथ बढ़ता है
B. समय के साथ घटता है
C. परिमाण एवं दिशा दोनों में नियत रहता है
D. शून्य रहता है
6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
केवल इसी डिवाइस पर सेव — कोई अकाउंट या साइन-इन नहीं।