दृढ़ पिंड का संतुलन एवं आघूर्णों का सिद्धांत
किसी बिंदु कण के लिए कुल बाह्य बल का शून्य होना संतुलन की पर्याप्त शर्त है। परंतु एक विस्तृत दृढ़ पिंड (Rigid Body) के लिए शून्य परिणामी बल केवल यह सुनिश्चित करता है कि उसमें कोई स्थानांतरीय त्वरण नहीं है; वह असंतुलित बल आघूर्ण के प्रभाव में तेजी से घूर्णन कर सकता है। पूर्ण यांत्रिक स्थिरता हेतु स्थानांतरीय तथा घूर्णी दोनों संतुलन एक साथ संतुष्ट होने चाहिए।
1. यांत्रिक संतुलन की दो अनिवार्य शर्तें
कोई दृढ़ पिंड पूर्ण यांत्रिक संतुलन में तब कहलाता है जब उसका रैखिक संवेग तथा कोणीय संवेग दोनों समय के साथ नियत रहें:
शर्त 1: स्थानांतरीय संतुलन (परिणामी बल शून्य)
दृढ़ पिंड पर आरोपित सभी बाह्य बलों का सदिश योग शून्य होना चाहिए:
प्रभाव: Pकुल = नियतांक तथा द्रव्यमान केंद्र का रैखिक त्वरण शून्य होता है (Acm = 0)।
शर्त 2: घूर्णी संतुलन (परिणामी बल आघूर्ण शून्य)
किसी भी स्वेच्छ बिंदु के परितः दृढ़ पिंड पर कार्यरत सभी बाह्य बल आघूर्णों का सदिश योग शून्य होना चाहिए:
प्रभाव: Lकुल = नियतांक तथा कोणीय त्वरण शून्य होता है (α = 0)।
2. आघूर्णों का सिद्धांत एवं उत्तोलक (Principle of Moments & Levers)
उत्तोलक एक आदर्श दृढ़ छड़ है जो आलंब (Fulcrum) नामक एक स्थिर बिंदु के परितः घूमने के लिए स्वतंत्र होती है। इस पर दो बल कार्य करते हैं: आयास भुजा d1 पर लगाया गया आयास / प्रयास (Effort) F1 तथा भार भुजा d2 पर स्थित भार (Load) F2।
यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage - MA)
बल प्रवर्धन की क्षमता को यांत्रिक लाभ द्वारा व्यक्त किया जाता है:
- MA > 1: आयास भुजा > भार भुजा (जैसे सब्बल / क्राउबार, बोतल ओपनर, कार जैक) — कम बल से भारी वस्तु उठाई जा सकती है।
- MA < 1: आयास भुजा < भार भुजा (जैसे चिमटा / संदंश, मानव अग्रबाहु) — बल अधिक लगता है परंतु गति एवं विस्थापन का प्रवर्धन होता है।
- MA = 1: भौतिक तुला (समान भुजाएं)।
3. गुरुत्व केंद्र (CG) बनाम द्रव्यमान केंद्र (CM)
| लक्षण | द्रव्यमान केंद्र (Centre of Mass) | गुरुत्व केंद्र (Centre of Gravity) |
|---|---|---|
| परिभाषा | वह बिंदु जहां पिंड का संपूर्ण द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है (∑ mi ri = 0)। | वह बिंदु जिससे होकर पिंड का कुल भार कार्य करता है, तथा जहां परिणामी गुरुत्वीय बल आघूर्ण शून्य होता है (∑ τg = 0)। |
| निर्भरता | केवल पिंड में द्रव्यमान के ज्यामितीय वितरण पर निर्भर करता है। | द्रव्यमान वितरण के साथ-साथ स्थानीय गुरुत्वीय क्षेत्र g पर भी निर्भर करता है। |
| एकसमान g क्षेत्र | CG के साथ पूर्णतः संपाती (identically coincident) होता है। | CM के साथ पूर्णतः संपाती होता है। |
| असमान g क्षेत्र | ज्यामितीय द्रव्यमान केंद्र पर ही स्थिर रहता है। | प्रबल गुरुत्वीय क्षेत्र वाले भाग की ओर विस्थापित हो जाता है (CM से थोड़ा नीचे होता है)। |
4. दीवार पर सीढ़ी के संतुलन का मुक्त पिंड संचित्र
चित्र 6.4 — चिकनी दीवार के सहारे खड़ी सीढ़ी का मुक्त पिंड आरेख (FBD)
1. ऊर्ध्वाधर बल संतुलन: Ng − M g = 0 ⇒ Ng = M g
2. क्षैतिज बल संतुलन: fg − Nw = 0 ⇒ fg = Nw
3. फर्श के आधार बिंदु के परितः आघूर्ण संतुलन: Nw (L sin θ) − M g (L/2 cos θ) = 0 ⇒ Nw = (M g / 2) cot θ
फिसलन न होने की शर्त: fg ≤ μ Ng ⇒ (M g / 2) cot θ ≤ μ (M g) ⇒ tan θ ≥ 1 / (2μ)।
चरण-दर-चरण हल किए गए संख्यात्मक उदाहरण
प्रश्न: 20 kg द्रव्यमान तथा 5 m लंबाई की एकसमान सीढ़ी एक चिकनी ऊर्ध्वाधर दीवार के सहारे टिकी है और उसका आधार खुरदुरे क्षैतिज फर्श पर है। फर्श तथा सीढ़ी के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक μ = 0.4 है। सीढ़ी फर्श के साथ न्यूनतम कितना कोण θ बना सकती है जिससे कि वह न फिसले?
ऊर्ध्वाधर दिशा में: Nफर्श = M g = (20)(9.8) = 196 N।
क्षैतिज दिशा में: fघर्षण = Nदीवार।
चरण 2: फर्श के आधार के परितः आघूर्ण संतुलन:
दीवार की प्रतिक्रिया का वामावर्त आघूर्ण: Nदीवार (L sin θ)।
मध्य बिंदु पर भार का दक्षिणावर्त आघूर्ण: M g (L/2 cos θ)।
संतुलन हेतु: Nदीवार L sin θ = M g (L/2) cos θ ⇒ Nदीवार = (M g / 2) cot θ।
चरण 3: घर्षण सीमा की शर्त:
फिसलन रोकने हेतु आवश्यक घर्षण बल अधिकतम स्थैतिक घर्षण से कम या बराबर होना चाहिए:
f ≤ μ Nफर्श ⇒ (M g / 2) cot θ ≤ μ (M g)
cot θ ≤ 2μ ⇒ tan θ ≥ 1 / (2μ)।
मान रखने पर: tan θ ≥ 1 / (2 × 0.4) = 1 / 0.8 = 1.25 ⇒ θ ≥ 51.34°।
प्रश्न: 6 kg द्रव्यमान तथा 2 m लंबाई की एकसमान छड़ दोनों सिरों से 0.2 m की दूरी पर रखी दो क्षुर-धारों (knife-edges) पर क्षैतिज रूप से टिकी है। बाएं सिरे से 0.5 m की दूरी पर 4 kg का एक भार लटकाया जाता है। दोनों क्षुर-धारों पर प्रतिक्रिया बल R1 तथा R2 ज्ञात कीजिए (g = 10 m/s² लें)।
बायां सिरा x = 0 लें। क्षुर-धार 1: x = 0.2 m; क्षुर-धार 2: x = 1.8 m। धारों के बीच दूरी = 1.6 m।
लटकाया गया भार: W₁ = 4 × 10 = 40 N, x = 0.5 m पर (धार 1 से दूरी = 0.3 m)।
छड़ का स्वयं का भार: W₂ = 6 × 10 = 60 N, मध्य बिंदु x = 1.0 m पर (धार 1 से दूरी = 0.8 m)।
चरण 2: स्थानांतरीय संतुलन:
R1 + R2 = 40 + 60 = 100 N।
चरण 3: क्षुर-धार 1 के परितः आघूर्ण संतुलन:
R2(1.6) − 40(0.3) − 60(0.8) = 0
1.6 R2 = 12 + 48 = 60 ⇒ R2 = 37.5 N।
अतः R1 = 100 − 37.5 = 62.5 N।
5. हल किए गए NEET एवं JEE अभ्यास प्रश्न
A. केवल रैखिक गति
B. केवल घूर्णी गति
C. रैखिक एवं घूर्णी दोनों गतियां
D. कोई गति नहीं
A. tan θ = μ
B. tan θ = 2μ
C. tan θ = 1 / (2μ)
D. tan θ = 1 / μ
A. हाँ, सदैव
B. नहीं, एक बलयुग्म शून्य परिणामी बल के साथ भी बल आघूर्ण उत्पन्न कर सकता है
C. केवल तब जब पिंड गोलाकार हो
D. केवल तब जब पिंड स्थिर हो
A. 56 g
B. 66 g
C. 76 g
D. 86 g
सिक्कों का कुल द्रव्यमान m = 10 g, आलंब से दूरी d₂ = 45 − 12 = 33 cm।
आघूर्णों के सिद्धांत से: 10 × 33 = M × 5 ⇒ M = 330 / 5 = 66 g।
6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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