द्रव्यमान केंद्र एवं द्रव्यमान केंद्र की गति
वास्तविक भौतिक वस्तुएं केवल एक बिंदु कण नहीं होतीं, बल्कि वे परस्पर अंतःक्रिया करने वाले करोड़ों कणों का एक विस्तृत निकाय होती हैं। किसी निकाय का द्रव्यमान केंद्र (Centre of Mass - CM) वह अद्वितीय बिंदु होता है जहां निकाय का संपूर्ण द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है तथा स्थानांतरीय गति के विश्लेषण हेतु सभी बाह्य बलों को उसी बिंदु पर आरोपित माना जा सकता है।
1. द्रव्यमान केंद्र का गणितीय निरूपण
A. द्विकण विविक्त निकाय (Two-Particle Discrete System)
माना m1 तथा m2 द्रव्यमान के दो बिंदु कण x-अक्ष पर क्रमशः x1 तथा x2 निर्देशांकों पर स्थित हैं। उनके द्रव्यमान केंद्र की स्थिति Xcm निम्नलिखित सूत्र द्वारा दी जाती है:
यदि मूलबिंदु को कण m1 पर मान लिया जाए (अर्थात x1 = 0 और x2 = d), तो m1 से द्रव्यमान केंद्र की दूरी होगी:
r1 = [m2 / (m1 + m2)] d तथा r2 = [m1 / (m1 + m2)] d
यह मूलभूत व्युत्क्रमानुपाती द्रव्यमान नियम दर्शाता है: m1r1 = m2r2। द्रव्यमान केंद्र दोनों कणों को मिलाने वाली रेखा को उनके द्रव्यमानों के व्युत्क्रमानुपात में विभाजित करता है, अर्थात यह भारी कण के अधिक निकट होता है।
B. त्रिविमीय आकाश में N कणों का निकाय
n कणों के निकाय के लिए जिनके द्रव्यमान m1, m2, ..., mn तथा स्थिति सदिश r1, r2, ..., rn हैं:
कार्तीजीय घटकों में:
- Xcm = (m1x1 + m2x2 + ... + mnxn) / M
- Ycm = (m1y1 + m2y2 + ... + mnyn) / M
- Zcm = (m1z1 + m2z2 + ... + mnzn) / M
2. सतत द्रव्यमान वितरण एवं मानक ज्यामितियां
सतत द्रव्यमान वितरण वाले दृढ़ पिंडों के लिए योगफल (समेकन) को समाकलन द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है:
| मानक सममित पिंड | द्रव्यमान वितरण / अल्पांश | द्रव्यमान केंद्र की स्थिति (आधार अथवा केंद्र से) |
|---|---|---|
| एकसमान सीधी छड़ (लंबाई L) | रैखिक घनत्व λ = M/L | xcm = L / 2 (मध्य बिंदु) |
| अर्धवृत्ताकार तार (वलय, त्रिज्या R) | ऊपरी अर्धभाग में रैखिक तार | ycm = 2R / π ≈ 0.637 R |
| अर्धवृत्ताकार चकती (त्रिज्या R) | पृष्ठीय घनत्व σ = 2M/(πR²) | ycm = 4R / (3π) ≈ 0.424 R |
| खोखला अर्धगोला (त्रिज्या R) | खोखला पृष्ठ | ycm = R / 2 = 0.5 R |
| ठोस अर्धगोला (त्रिज्या R) | एकसमान आयतन घनत्व | ycm = 3R / 8 = 0.375 R |
| ठोस लंबवृत्तीय शंकु (ऊंचाई h) | आधार से आयतन समाकलन | ycm = h / 4 (समतल आधार से) |
| खोखला लंबवृत्तीय शंकु (ऊंचाई h) | आधार से पृष्ठीय समाकलन | ycm = h / 3 (समतल आधार से) |
गुहिका समस्याओं हेतु ऋणात्मक द्रव्यमान विधि
जब Mकुल द्रव्यमान वाले मूल सममित पिंड से mहटाया द्रव्यमान का भाग काटकर अलग कर दिया जाता है:
यह सुरुचिपूर्ण घटाव विधि असममित गुहा वाली संरचनाओं को ऋणात्मक द्रव्यमान वाले मानक दो-पिंड निकाय में रूपांतरित कर देती है।
3. द्रव्यमान केंद्र की शुद्धगतिकी एवं गतिकी
A. द्रव्यमान केंद्र का वेग एवं त्वरण
स्थिति सदिश Rcm का समय के सापेक्ष अवकलन करने पर:
- Vcm = dRcm/dt = (∑ mi vi) / M = Pकुल / M
- Acm = dVcm/dt = (∑ mi ai) / M = (∑ Fi) / M
B. कणों के निकाय हेतु न्यूटन का द्वितीय नियम
कणों पर लगने वाले बल आंतरिक बलों (परस्पर अंतःक्रिया) तथा बाह्य बलों (पर्यावरण द्वारा) का योग होते हैं:
∑ Fi = ∑ Fext + ∑ Fint
क्योंकि आंतरिक बल न्यूटन के तीसरे नियम का पालन करते हैं (समान, विपरीत एवं संरेखीय युग्म, Fij = −Fji), अतः सभी आंतरिक बलों का सदिश योग शून्य होता है: ∑ Fint = 0।
किसी निकाय का द्रव्यमान केंद्र इस प्रकार गति करता है मानो निकाय का संपूर्ण द्रव्यमान उसी बिंदु पर केंद्रित हो तथा सभी बाह्य बल सीधे उसी बिंदु पर आरोपित हों।
C. निकाय का रैखिक संवेग संरक्षण
जब किसी निकाय पर कुल बाह्य बल शून्य हो (Fext = 0):
यदि द्रव्यमान केंद्र प्रारंभ में स्थिर था (Vcm = 0), तो वह सदैव स्थिर रहेगा:
ΔRcm = (∑ mi Δri) / M = 0 ⇒ ∑ mi Δri = 0
यह प्रसिद्ध विस्थापन संबंध प्रदान करता है: m1 Δx1 + m2 Δx2 = 0 (जैसे घर्षणरहित जल में नाव पर चलता व्यक्ति)।
4. द्रव्यमान केंद्र विस्थापन एवं संवेग संरक्षण का रेखाचित्र
चित्र 6.1 — हवा में प्रक्षेप्य का विस्फोट बनाम द्रव्यमान केंद्र का प्रक्षेप पथ
चरण-दर-चरण हल किए गए संख्यात्मक उदाहरण
प्रश्न: R त्रिज्या तथा मूलबिंदु (0,0) पर केंद्र वाली एकसमान चकती में से r = R/2 त्रिज्या की एक छोटी वृत्ताकार चकती काटी जाती है जिसका केंद्र (R/2, 0) पर है। शेष भाग के द्रव्यमान केंद्र के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।
माना पृष्ठीय द्रव्यमान घनत्व σ है।
संपूर्ण मूल चकती का द्रव्यमान: M1 = σ · πR²
हटाए गए भाग का द्रव्यमान: M2 = σ · π(R/2)² = M1 / 4
शेष भाग का द्रव्यमान: Mशेष = M1 − M2 = 3M1 / 4।
चरण 2: ऋणात्मक द्रव्यमान सूत्र का प्रयोग:
मूल चकती का केंद्र: x1 = 0
हटाए गए छिद्र का केंद्र: x2 = R/2
Xcm = (M1x1 − M2x2) / (M1 − M2)
Xcm = [M1(0) − (M1/4)(R/2)] / [3M1/4] = [−M1 R / 8] / [3M1/4] = −R/6।
x-अक्ष के परितः सममिति के कारण Ycm = 0। अतः नया द्रव्यमान केंद्र (−R/6, 0) पर स्थित है।
प्रश्न: 50 kg द्रव्यमान का एक व्यक्ति 150 kg द्रव्यमान तथा 4 m लंबाई की स्थिर नाव के एक सिरे पर खड़ा है। नाव शांत घर्षणरहित जल पर तैर रही है। यदि व्यक्ति नाव के दूसरे सिरे पर चल कर जाता है, तो शांत जल के सापेक्ष नाव का विस्थापन ज्ञात कीजिए।
क्षैतिज दिशा में बाह्य बल शून्य है (जल घर्षणरहित है)। अतः निकाय के द्रव्यमान केंद्र का क्षैतिज विस्थापन शून्य होगा: ΔXcm = 0।
चरण 2: सापेक्ष विस्थापन मानना:
माना नाव जल के सापेक्ष x दूरी पीछे खिसकती है।
जल के सापेक्ष नाव का विस्थापन: Δxनाव = −x
नाव के सापेक्ष व्यक्ति का विस्थापन: +L = +4 m
जल के सापेक्ष व्यक्ति का विस्थापन: Δxव्यक्ति = 4 − x
चरण 3: द्रव्यमान केंद्र संरक्षण समीकरण:
m · Δxव्यक्ति + M · Δxनाव = 0
50(4 − x) + 150(−x) = 0
200 − 50x − 150x = 0 ⇒ 200x = 200 ⇒ x = 1.0 m।
नाव शांत जल के सापेक्ष 1.0 m पीछे की ओर खिसक जाएगी।
5. हल किए गए NEET एवं JEE अभ्यास प्रश्न
A. (7/12, √3/4)
B. (5/12, √3/2)
C. (1/2, √3/6)
D. (7/6, √3/2)
कुल द्रव्यमान M = 1 + 2 + 3 = 6 kg।
Xcm = [1(0) + 2(1) + 3(0.5)] / 6 = 3.5 / 6 = 7/12 m।
Ycm = [1(0) + 2(0) + 3(√3/2)] / 6 = (1.5√3) / 6 = √3/4 m।
A. 15 m/s
B. 15√2 m/s
C. 30√2 m/s
D. 45 m/s
दो लंबवत टुकड़ों का परिणामी संवेग = √(p₁² + p₂²) = √[(30m)² + (30m)²] = 30√2 m।
संवेग संरक्षण से: तीसरे टुकड़े का संवेग इसके बराबर तथा विपरीत होना चाहिए:
(2m) v₃ = 30√2 m ⇒ v₃ = 15√2 m/s।
A. R / 2
B. 2R / π
C. 3R / 8
D. 4R / (3π)
A. ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर गिरेगा
B. पूर्ववत परवलयाकार पथ पर आगे बढ़ता रहेगा
C. क्षैतिज दिशा में गति करेगा
D. तुरंत विराम में आ जाएगा
6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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