§ 11.3NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 11
ऊष्मागतिकीय प्रक्रम: समतापी, रुद्धोष्म, समदाबी एवं समआयतनिक
जब कोई ऊष्मागतिकीय निकाय अपने अवस्था चरों (P, V, T) में परिवर्तन के माध्यम से एक साम्यावस्था से दूसरी साम्यावस्था में जाता है, तो इस परिवर्तन को ऊष्मागतिकीय प्रक्रम (Thermodynamic Process) कहते हैं।
1. समतापी प्रक्रम (Isothermal Process: T = नियतांक)
वह प्रक्रम जिसमें पूरे प्रक्रम के दौरान निकाय का तापमान स्थिर रहता है (ΔT = 0)।
- अवस्था समीकरण: बॉयल का नियम:
P V = नियतांक⇒P1 V1 = P2 V2। - शर्तें: पात्र की दीवारें पूर्णतः ऊष्माचालक (सुचालक) होनी चाहिए तथा प्रक्रम अत्यंत धीमी गति से संपन्न होना चाहिए।
- आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन: ΔT = 0 होने के कारण आदर्श गैस के लिए
ΔU = n Cv ΔT = 0। - प्रथम नियम:
ΔQ = ΔW। दी गई संपूर्ण ऊष्मा कार्य में परिवर्तित होती है। - किया गया कार्य:
W = n R T ln(V2 / V1) = 2.303 n R T log10(V2 / V1) = 2.303 n R T log10(P1 / P2)
- P-V आरेख पर प्रवणता (Slope):
(dP / dV)समतापी = − P / V
2. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic Process: ΔQ = 0)
वह प्रक्रम जिसमें निकाय और परिवेश के मध्य ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता (ΔQ = 0)।
- शर्तें: पात्र की दीवारें पूर्णतः ऊष्मारोधी होनी चाहिए तथा प्रक्रम अत्यंत तीव्र (अचानक) होना चाहिए (जैसे टायर का फटना, वायु में ध्वनि तरंगों का संचरण)।
- पॉइसन के नियम:
P Vγ = नियतांक
T Vγ−1 = नियतांक
P1−γ Tγ = नियतांक - आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन: ΔQ = 0 ⇒
ΔU = −ΔW।
रुद्धोष्म प्रसार (W > 0) में गैस ठंडी होती है (ΔU < 0)।
रुद्धोष्म संपीडन (W < 0) में गैस गर्म होती है (ΔU > 0)। - किया गया कार्य:
W = (P1 V1 − P2 V2) / (γ − 1) = n R (T1 − T2) / (γ − 1)
- P-V आरेख पर प्रवणता:
(dP / dV)रुद्धोष्म = − γ (P / V) = γ × (dP / dV)समतापीचूँकि γ > 1, अतः रुद्धोष्म वक्र की ढाल समतापी वक्र की ढाल से γ गुना अधिक तीव्र होती है।
3. समदाबी प्रक्रम (Isobaric Process: P = नियतांक)
वह प्रक्रम जो स्थिर दाब पर संपन्न होता है (ΔP = 0)।
- समीकरण: चार्ल्स का नियम:
V / T = नियतांक। - कार्य:
W = P (V2 − V1) = n R ΔT। - आंतरिक ऊर्जा:
ΔU = n Cv ΔT। - दी गई ऊष्मा:
ΔQ = n Cp ΔT। - ऊष्मा का विभाजन:
आंतरिक ऊर्जा में बदलने वाला अंश: ΔU / ΔQ = 1 / γ
कार्य में बदलने वाला अंश: ΔW / ΔQ = (γ − 1) / γ
4. समआयतनिक प्रक्रम (Isochoric Process: V = नियतांक)
वह प्रक्रम जिसमें निकाय का आयतन स्थिर रहता है (ΔV = 0)।
- समीकरण: गे-लुसाक का नियम:
P / T = नियतांक। - कार्य: dV = 0 होने के कारण किया गया कार्य
W = 0होता है। - प्रथम नियम:
ΔQ = ΔU = n Cv ΔT। संपूर्ण ऊष्मा केवल आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि करती है। - P-V आरेख: उर्ध्वाधर सरल रेखा (ढाल = ∞)।
5. चारों प्रक्रमों की तुलना तालिका
| प्रक्रम | स्थिर राशि | समीकरण | किया गया कार्य (W) | ΔU | ΔQ |
|---|---|---|---|---|---|
| समआयतनिक | V = const | P / T = const | 0 | n Cv ΔT | n Cv ΔT |
| समदाबी | P = const | V / T = const | P ΔV = n R ΔT | n Cv ΔT | n Cp ΔT |
| समतापी | T = const | P V = const | n R T ln(V2/V1) | 0 | W |
| रुद्धोष्म | ΔQ = 0 (ऊष्मा विनिमय नहीं) | P Vγ = const | nR(T1−T2)/(γ−1) | −W | 0 |
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