ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम: ऊष्मा इंजन एवं प्रशीतक
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण का प्रतिपादन करता है, परंतु यह प्रक्रम के स्वतः संपन्न होने की दिशा के विषय में मौन रहता है। उदाहरणार्थ, यदि ऊष्मा ठंडी वस्तु से गर्म वस्तु की ओर स्वतः बहने लगे, तो भी प्रथम नियम का उल्लंघन नहीं होगा। ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम प्रकृति में प्रक्रमों के होने की दिशा तथा ऊर्जा रूपांतरण की स्वाभाविक सीमाओं को निर्धारित करता है।
1. द्वितीय नियम के दो शास्त्रीय कथन
केल्विन-प्लांक का कथन (ऊष्मा इंजन)
"ऐसा कोई चक्रीय प्रक्रम संभव नहीं है जिसका एकमात्र परिणाम किसी ऊष्मा स्रोत से ऊष्मा अवशोषित कर उसे पूर्णतः यांत्रिक कार्य में परिवर्तित करना हो।"
निष्कर्ष: किसी भी ऊष्मा इंजन के लिए एक सिंक (अपेक्षाकृत निम्न ताप पर) का होना अनिवार्य है जिसमें वह अवशोषित ऊष्मा का कुछ भाग निष्कासित कर सके। 100% दक्ष ऊष्मा इंजन संभव नहीं है।
क्लॉसियस का कथन (प्रशीतक)
"बिना किसी बाह्य कार्य की सहायता के किसी स्वतः कार्य करने वाली युक्ति द्वारा ऊष्मा को निम्न ताप की वस्तु से उच्च ताप की वस्तु की ओर स्थानांतरित करना सर्वथा असंभव है।"
निष्कर्ष: ठंडी वस्तु से गर्म वस्तु की ओर ऊष्मा का स्वतः प्रवाह कभी नहीं होता; इसके लिए सदैव बाह्य कार्य की आवश्यकता होती है।
2. ऊष्मा इंजन (Heat Engine)
ऊष्मा इंजन एक चक्रीय युक्ति है जो ऊष्मा ऊर्जा को निरंतर यांत्रिक कार्य में परिवर्तित करती है। इसके तीन मुख्य भाग होते हैं:
- ऊष्मा स्रोत (Source): अनंत ऊष्मा धारिता वाला उच्च स्थिर ताप T1 का निकाय।
- कार्यकारी पदार्थ (Working Substance): गैस अथवा वाष्प जो ऊष्मा अवशोषित कर कार्य करती है।
- सिंक (Sink): अनंत ऊष्मा धारिता वाला निम्न स्थिर ताप T2 का निकाय (जहाँ T2 < T1)।
ऊष्मा इंजन की दक्षता (η)
एक चक्र में स्रोत से ली गई ऊष्मा Q1, किया गया शुद्ध कार्य W तथा सिंक को दी गई ऊष्मा Q2 हो, तो चक्रीय प्रक्रम में (ΔUcycle = 0):
ऊष्मा इंजन की ऊष्मीय दक्षता (η) किए गए कार्य तथा स्रोत से अवशोषित ऊष्मा का अनुपात होती है:
चूँकि Q2 > 0, अतः किसी भी वास्तविक इंजन की दक्षता 1 (या 100%) से सदैव कम होती है।
3. प्रशीतक (Refrigerator) एवं ऊष्मा पम्प
प्रशीतक विपरीत दिशा में कार्य करने वाला ऊष्मा इंजन है। इसमें कार्यकारी पदार्थ पर बाह्य कार्य W करके निम्न ताप T2 के शीत कक्ष से ऊष्मा Q2 अवशोषित की जाती है तथा उच्च ताप T1 के वातावरण को ऊष्मा Q1 निष्कासित की जाती है:
प्रशीतक का निष्पादन गुणांक (Coefficient of Performance, β)
प्रशीतक के शीतलन प्रभाव Q2 तथा किए गए बाह्य कार्य W का अनुपात निष्पादन गुणांक कहलाता है:
दक्षता (η) तथा निष्पादन गुणांक (β) में संबंध
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