कार्नो इंजन, कार्नो चक्र एवं कार्नो प्रमेय
वर्ष 1824 में फ्रांसीसी इंजीनियर निकोलस लियोनार्ड सादी कार्नो ने एक सर्वथा आदर्श एवं पूर्णतः उत्क्रमणीय ऊष्मा इंजन की परिकल्पना प्रस्तुत की। कार्नो इंजन (Carnot Engine) दो नियत तापों के मध्य कार्य करने वाले किसी भी ऊष्मा इंजन की अधिकतम संभव सैद्धांतिक दक्षता की सीमा निर्धारित करता है।
1. उत्क्रमणीय बनाम अनुत्क्रमणीय प्रक्रम
उत्क्रमणीय प्रक्रम (Reversible Process)
वह प्रक्रम जिसे विपरीत दिशा में ठीक उसी पथ पर संचालित किया जा सके जिससे निकाय एवं परिवेश दोनों अपनी ठीक प्रारंभिक अवस्था में लौट आएं। आवश्यक शर्तें:
- प्रक्रम अत्यंत धीमा (स्थैतिक कल्प) होना चाहिए।
- घर्षण, श्यानता आदि अपव्ययी बलों का पूर्ण अभाव हो।
- ऊष्मा विनिमय अनंत सूक्ष्म तापांतर पर हो।
अनुत्क्रमणीय प्रक्रम (Irreversible Process)
वह प्रक्रम जिसे विपरीत दिशा में नहीं लौटाया जा सकता। प्रकृति के सभी स्वाभाविक प्रक्रम अनुत्क्रमणीय होते हैं क्योंकि उनमें घर्षण, श्यानता, सीमित तापांतर पर ऊष्मा प्रवाह तथा मुक्त प्रसार उपस्थित रहता है।
2. कार्नो चक्र के चार पद (Four Stages of Carnot Cycle)
कार्नो चक्र में आदर्श गैस चार क्रमिक उत्क्रमणीय प्रक्रमों से गुजरती है:
पद 1 → समतापी उत्क्रमणीय प्रसार (A से B, ताप T1 पर)
बेलन को स्रोत (ताप T1) पर रखा जाता है। गैस धीरे-धीरे प्रसारित होकर ऊष्मा Q1 अवशोषित करती है:
पद 2 → रुद्धोष्म उत्क्रमणीय प्रसार (B से C, ताप T1 से गिरकर T2)
बेलन को ऊष्मारोधी आधार पर रखा जाता है। गैस रुद्धोष्म रूप से फैलती है तथा ताप गिरकर T2 हो जाता है:
पद 3 → समतापी उत्क्रमणीय संपीडन (C से D, ताप T2 पर)
बेलन को सिंक (ताप T2) पर रखकर गैस को संपीडित किया जाता है। ऊष्मा Q2 सिंक को निष्कासित होती है:
पद 4 → रुद्धोष्म उत्क्रमणीय संपीडन (D से A, ताप T2 से बढ़कर T1)
बेलन को पुनः ऊष्मारोधी आधार पर रखकर गैस को संपीडित किया जाता है जिससे वह प्रारंभिक अवस्था (P1, V1, T1) में लौट आती है:
3. कार्नो इंजन की दक्षता का सूत्र
चूँकि W2 + W4 = 0, एक चक्र में किया गया कुल शुद्ध कार्य:
रुद्धोष्म संबंधों से यह सिद्ध होता है कि V2 / V1 = V3 / V4, जिससे:
अतः कार्नो इंजन की दक्षता का विश्वप्रसिद्ध सूत्र है:
4. कार्नो प्रमेय (Carnot's Theorem)
- दो निश्चित तापों T1 एवं T2 के मध्य कार्य करने वाले किसी भी वास्तविक इंजन की दक्षता उन्हीं तापों के मध्य कार्य करने वाले उत्क्रमणीय कार्नो इंजन की दक्षता से अधिक नहीं हो सकती।
- समान तापों के मध्य कार्य करने वाले समस्त उत्क्रमणीय इंजनों की दक्षता एकसमान होती है, चाहे कार्यकारी पदार्थ कोई भी क्यों न हो।
5. कार्नो प्रशीतक का निष्पादन गुणांक
यहाँ सभी तापमान सदैव केल्विन (Kelvin) में ही रखे जाने चाहिए।
केवल इसी डिवाइस पर सेव — कोई अकाउंट या साइन-इन नहीं।