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कक्षा 11 · भौतिकीJEE MAIN × NEETEnglish
§ 11.2NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 11

ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम एवं विशिष्ट ऊष्मा धारिताएं

ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम वास्तव में ऊर्जा संरक्षण के सार्वत्रिक नियम का ऊष्मागतिकीय प्रणालियों पर अनुप्रयोग है। यह सिद्ध करता है कि ऊष्मा और यांत्रिक कार्य एक-दूसरे में परिवर्तनीय ऊर्जा के रूप हैं, तथा ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।

1. प्रथम नियम का गणितीय रूप

जब किसी निकाय को ऊष्मा ΔQ दी जाती है, तो वह दो रूपों में व्यय होती है:

  1. निकाय की आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि (ΔU) करने में।
  2. परिवेश के विरुद्ध बाह्य कार्य (ΔW) करने में।
ΔQ = ΔU + ΔW   ⇒   ΔU = ΔQ − ΔW

अवकल रूप में:

dQ = dU + dW = dU + P dV
मूल निष्कर्ष: यद्यपि dQ और dW दोनों ही पथ पर निर्भर करते हैं, परंतु उनका अंतर dU = dQ − dW पूर्णतः पथ-स्वतंत्र (Path-independent) होता है तथा केवल प्रारंभिक एवं अंतिम अवस्था पर निर्भर करता है।

2. गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएं

ठोसों तथा द्रवों में गर्म करने पर आयतन प्रसार नगण्य होता है, अतः उनकी विशिष्ट ऊष्मा का एक निश्चित मान होता है। गैसों के लिए, 1 मोल गैस का ताप 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा इस बात पर निर्भर करती है कि प्रक्रम के दौरान दाब अथवा आयतन को कैसे परिवर्तित होने दिया गया है:

C = (1 / n) · (dQ / dT)

गैसों के लिए दो प्रमुख मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएं परिभाषित की जाती हैं:

  • नियत आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (Cv): आयतन स्थिर रखते हुए 1 मोल गैस का ताप 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा। चूँकि dV = 0, अतः किया गया कार्य dW = 0 होता है:
    Cv = (1 / n) (dU / dT)   ⇒   dU = n Cv dT
  • नियत दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (Cp): दाब स्थिर रखते हुए 1 मोल गैस का ताप 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा। यहाँ दी गई ऊष्मा आंतरिक ऊर्जा बढ़ाने के साथ-साथ प्रसार कार्य भी करती है। अतः सदैव Cp > Cv होता है।

3. मेयर के संबंध का निगमन (Cp − Cv = R)

माना 1 मोल (n = 1) आदर्श गैस अवस्था समीकरण P V = R T का पालन करती है:

  1. नियत आयतन पर: dQv = dU = Cv dT.
  2. नियत दाब पर: dQp = Cp dT. प्रथम नियम से:
    dQp = dU + P dV = Cv dT + P dV
  3. नियत दाब P पर गैस समीकरण P V = R T का अवकलन करने पर:
    P dV = R dT
  4. यह मान रखने पर: Cp dT = Cv dT + R dT
  5. dT से भाग देने पर मेयर का प्रसिद्ध सूत्र प्राप्त होता है:
Cp − Cv = R
प्रति ग्राम विशिष्ट ऊष्मा के लिए: यदि विशिष्ट ऊष्मा धारिताएं प्रति एकांक द्रव्यमान (cp एवं cv) में हों, तो:
cp − cv = R / M = r
जहाँ M गैस का मोलर द्रव्यमान तथा r विशिष्ट गैस नियतांक है।

4. स्वातंत्र्य कोटि (Degrees of Freedom, f) एवं ऊर्जा समविभाजन नियम

किसी अणु की स्वातंत्र्य कोटि (f) उन स्वतंत्र निर्देशांकों या गतियों की कुल संख्या है जो आकाश में उसकी स्थिति और विन्यास को पूर्णतः निर्धारित करने के लिए आवश्यक होती हैं। ऊर्जा समविभाजन नियम के अनुसार, परम ताप T पर प्रत्येक स्वातंत्र्य कोटि से संबंधित औसत गतिज ऊर्जा प्रति अणु (1/2) kB T (या प्रति मोल (1/2) R T) होती है।

1 मोल गैस की कुल आंतरिक ऊर्जा: U = (f / 2) R T.

Cv = (dU / dT) = (f / 2) R

Cp = Cv + R = ((f + 2) / 2) R

γ = Cp / Cv = 1 + 2 / f

5. एकपरमाण्विक, द्विपरमाण्विक एवं बहुपरमाण्विक गैसों की तुलना

गैस की परमाण्विकताउदाहरणस्वातंत्र्य कोटि (f)CvCpγ = Cp/Cv
एकपरमाण्विक (Monoatomic) He, Ne, Ar 3 (3 स्थानांतरीय) (3/2) R (5/2) R 5/3 ≈ 1.67
द्विपरमाण्विक (दृढ़ रोटेटर) H2, O2, N2 (सामान्य ताप) 5 (3 स्थान. + 2 घूर्णन) (5/2) R (7/2) R 7/5 = 1.40
द्विपरमाण्विक (कंपनशील) Cl2, Br2 (उच्च ताप) 7 (3 स्थान. + 2 घूर्णन + 2 कंपन) (7/2) R (9/2) R 9/7 ≈ 1.29
बहुपरमाण्विक (अरेखीय) H2O, CH4, NH3 6 (3 स्थान. + 3 घूर्णन) 3 R 4 R 4/3 ≈ 1.33

6. अक्रियाशील आदर्श गैसों का मिश्रण

Cv,mix = (n1 Cv1 + n2 Cv2) / (n1 + n2)

Cp,mix = Cv,mix + R

γmix = Cp,mix / Cv,mix = (n1 Cp1 + n2 Cp2) / (n1 Cv1 + n2 Cv2)
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