ठोसों का प्रत्यास्थ व्यवहार, प्रतिबल एवं विकृति
शुद्ध गतिकी एवं दृढ़ पिंड यांत्रिकी में पिंडों को आदर्श रूप से अपरिवर्तनीय माना गया था, जहां किसी भी बाह्य बल के प्रभाव में कणों के मध्य की दूरी नियत रहती है। वास्तविक जगत में सभी ठोस पिंड बाह्य बलों के अधीन विरूपित होते हैं। इस मॉड्यूल में हम प्रत्यास्थता की सूक्ष्मदर्शी उत्पत्ति, आंतरिक प्रत्यानयन बल की संकल्पना तथा प्रतिबल एवं विकृति की गणितीय परिभाषाओं का सविस्तार अध्ययन करेंगे।
1. प्रत्यास्थता एवं सुघट्यता: आणविक आधार
प्रत्येक ठोस पदार्थ परमाणुओं या अणुओं से निर्मित होता है जो अंतरपरमाण्विक अथवा अंतरआण्विक बलों द्वारा बंधे रहते हैं। साम्यावस्था की स्थिति में कण ऐसे स्थानों पर व्यवस्थित होते हैं जहां उनकी कुल स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम तथा परिणामी अंतरपरमाण्विक बल शून्य होता है।
प्रत्यास्थता (Elasticity) की परिभाषा
प्रत्यास्थता किसी पदार्थ का वह अंतर्निहित गुण है जिसके कारण वह बाह्य विरूपक बल को हटा लिए जाने पर अपनी प्रारंभिक आकृति तथा आकार को पुनः पूर्ण रूप से प्राप्त कर लेता है। यह प्रत्यानयन बल अंतरपरमाण्विक स्थिरवैद्युत विभव से उत्पन्न होता है।
उदाहरण: क्वार्ट्ज तंतु, फॉस्फर कांस्य, स्प्रिंग इस्पात का तार।
सुघट्यता (Plasticity) की परिभाषा
सुघट्यता (प्लास्टिसिटी) किसी पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण विरूपक बल हटा लिए जाने के उपरांत भी उसमें स्थायी विरूपण बना रहता है और वह अपनी मूल विमाओं को प्राप्त करने का कोई प्रयास नहीं दर्शाता।
उदाहरण: गीली मिट्टी, पुट्टी, च्युइंग गम, कमरे के तापमान पर सीसा (लेड)।
2. प्रतिबल (Stress) की संकल्पना एवं प्रकार
जब कोई बाह्य बल किसी ठोस पिंड को विरूपित करता है, तो पिंड के भीतर प्रत्येक सूक्ष्म काट पर विरूपण का विरोध करने वाले आंतरिक बल उत्पन्न हो जाते हैं। स्थैतिक साम्यावस्था में इस आंतरिक प्रत्यानयन बल का परिमाण आरोपित विरूपक बल के बराबर होता है।
मात्रक एवं विमाएं:
- SI मात्रक: न्यूटन प्रति वर्ग मीटर (N/m²) अथवा पास्कल (Pa)। (1 Pa = 1 N/m²; 1 MPa = 10⁶ Pa; 1 GPa = 10⁹ Pa)
- CGS मात्रक: डाइन प्रति वर्ग सेमी (dyne/cm²) (1 N/m² = 10 dyne/cm²)
- विमीय सूत्र: [M L⁻¹ T⁻²] (यह दाब के समतुल्य है, किंतु प्रतिबल स्पर्शीय रूप से भी कार्य कर सकता है)।
| प्रतिबल का वर्गीकरण | क्षेत्रफल के सापेक्ष बल की दिशा | पिंड की संरचना पर प्रभाव | मूल सूत्र |
|---|---|---|---|
| तनन प्रतिबल (Tensile Stress) | पृष्ठ के लंबवत बाहर की ओर | लंबाई में वृद्धि; अनुप्रस्थ काट में संकुचन | σ_t = F_perpendicular / A |
| संपीडन प्रतिबल (Compressive Stress) | पृष्ठ के लंबवत भीतर की ओर | लंबाई में कमी; अनुप्रस्थ काट का विस्तार | σ_c = F_perpendicular / A |
| अपरूपण / स्पर्शीय प्रतिबल (Shear Stress) | पृष्ठ तल के समांतर (स्पर्शीय) | समांतर परतों का सापेक्ष विस्थापन (आकृति परिवर्तन) | σ_s = F_parallel / A |
| जलीय / आयतन प्रतिबल (Hydraulic Stress) | सभी पृष्ठ अवयवों पर एकसमान लंबवत (द्रव दाब) | आकृति बदले बिना आयतन में एकसमान कमी | σ_v = ΔP = F_perpendicular / A_total |
3. विकृति (Strain) की संकल्पना एवं वर्गीकरण
प्रतिबल के कारण पिंड के आकार अथवा रूप में उत्पन्न आपेक्षिक परिवर्तन को विकृति कहते हैं। इसे विमा में परिवर्तन तथा प्रारंभिक विमा के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।
चूंकि विकृति दो समान भौतिक विमाओं का अनुपात है, इसलिए यह एक विमाहीन एवं मात्रकहीन भौतिक राशि है जिसका विमीय सूत्र [M⁰ L⁰ T⁰] होता है।
विकृति के तीन मूलभूत प्रकार:
-
अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal Strain): अभिलंब प्रतिबल (तनन या संपीडन) द्वारा उत्पन्न। यह लंबाई में भिन्नात्मक परिवर्तन है:
अनुदैर्ध्य विकृति = ΔL / Lतनन विकृति धनात्मक (ΔL > 0) तथा संपीडन विकृति ऋणात्मक (ΔL < 0) होती है।
-
अपरूपण विकृति (θ): स्पर्शीय प्रतिबल द्वारा उत्पन्न। जब L ऊंचाई के किसी घन के निचले पृष्ठ को स्थिर रखकर ऊपरी पृष्ठ पर स्पर्शीय बल F लगाया जाता है, तो ऊपरी पृष्ठ Δx विस्थापित हो जाता है:
अपरूपण विकृति = tan θ ≈ θ = Δx / L (रेडियन में)यहां θ अपरूपण कोण है जिससे स्थिर तल के लंबवत कोई रेखा घूम जाती है।
-
आयतन विकृति (Volume Strain): जलीय प्रतिबल द्वारा उत्पन्न। यह एकसमान दाब के अधीन पिंड के आयतन में भिन्नात्मक परिवर्तन है:
आयतन विकृति = ΔV / V
4. हल किए गए उदाहरण एवं संख्यात्मक अनुप्रयोग
चरण 1: तनन भार एवं अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल की गणना:
भार F = M × g = 2000 kg × 9.8 m/s² = 19,600 N।
त्रिज्या r = d / 2 = 1.0 cm = 1.0 × 10⁻² m।
क्षेत्रफल A = π r² = 3.1416 × (1.0 × 10⁻²)² = 3.1416 × 10⁻⁴ m²।
चरण 2: तनन प्रतिबल की गणना:
σ = F / A = 19,600 / (3.1416 × 10⁻⁴) = 6.24 × 10⁷ N/m² (62.4 MPa)।
चरण 3: लंबाई में वृद्धि ΔL की गणना:
यंग गुणांक की परिभाषा से, Y = σ / (ΔL / L) ⇒ ΔL = (σ × L) / Y।
ΔL = (6.24 × 10⁷ × 4.0) / (2.0 × 10¹¹) = 1.248 × 10⁻³ m = 1.25 मिमी।
चरण 1: विमाएं एवं स्पर्शीय क्षेत्रफल की पहचान:
स्पर्शीय बल का अनुभव करने वाले ऊपरी फलक का क्षेत्रफल: A = 0.50 m × 0.10 m = 0.05 m²।
स्थिर फलक के लंबवत ऊंचाई: L = 0.50 m।
चरण 2: अपरूपण प्रतिबल की गणना:
σ_s = F_tangential / A = (9.0 × 10⁴ N) / 0.05 m² = 1.8 × 10⁶ N/m²।
चरण 3: अपरूपण विकृति θ तथा पार्श्व विस्थापन Δx की गणना:
θ = σ_s / G = (1.8 × 10⁶) / (5.6 × 10⁹) = 3.214 × 10⁻⁴ रेडियन।
पार्श्व विस्थापन Δx = L × θ = 0.50 m × 3.214 × 10⁻⁴ = 1.607 × 10⁻⁴ m = 0.16 मिमी।
चरण 1: जलीय प्रतिबल तथा आयतन गुणांक का संबंध:
जलीय प्रतिबल ΔP = 1.1 × 10⁸ Pa।
Bulk Modulus B = - ΔP / (ΔV / V) ⇒ भिन्नात्मक आयतन संकुचन |ΔV / V| = ΔP / B।
चरण 2: भिन्नात्मक आयतन परिवर्तन:
|ΔV / V| = (1.1 × 10⁸) / (1.4 × 10¹¹) = 7.86 × 10⁻⁴ (अथवा 0.0786%)।
चरण 3: निरपेक्ष आयतन संकुचन ΔV:
ΔV = 7.86 × 10⁻⁴ × 0.5 m³ = 3.93 × 10⁻⁴ m³ (393 cm³)।
चरण 1: y ऊंचाई पर अनुप्रस्थ काट द्वारा समर्थित भार:
निचले सिरे से y दूरी पर स्थित काट पर तनाव बल केवल उसके नीचे स्थित भाग के भार के कारण होता है।
y लंबाई वाले भाग का द्रव्यमान: m(y) = (M / L) × y।
इस काट पर तनाव: T(y) = m(y) × g = (M g / L) × y।
चरण 2: तनन प्रतिबल σ(y) की गणना:
σ(y) = T(y) / A = (M g y) / (A L)।
चरण 3: सीमांत स्थितियों का विश्लेषण:
- निचले मुक्त सिरे पर (y = 0): σ(0) = 0।
- मध्य बिंदु पर (y = L/2): σ(L/2) = M g / (2 A)।
- शीर्ष अवलंबन बिंदु पर (y = L): σ_max = M g / A।
अतः प्रतिबल लंबाई के साथ रैखिक रूप से बढ़ता है तथा शीर्ष आलंब बिंदु पर अधिकतम होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
केवल इसी डिवाइस पर सेव — कोई अकाउंट या साइन-इन नहीं।