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कक्षा 11 · भौतिकीJEE MAIN × NEETEnglish
§ 8.1NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 8

ठोसों का प्रत्यास्थ व्यवहार, प्रतिबल एवं विकृति

शुद्ध गतिकी एवं दृढ़ पिंड यांत्रिकी में पिंडों को आदर्श रूप से अपरिवर्तनीय माना गया था, जहां किसी भी बाह्य बल के प्रभाव में कणों के मध्य की दूरी नियत रहती है। वास्तविक जगत में सभी ठोस पिंड बाह्य बलों के अधीन विरूपित होते हैं। इस मॉड्यूल में हम प्रत्यास्थता की सूक्ष्मदर्शी उत्पत्ति, आंतरिक प्रत्यानयन बल की संकल्पना तथा प्रतिबल एवं विकृति की गणितीय परिभाषाओं का सविस्तार अध्ययन करेंगे।

1. प्रत्यास्थता एवं सुघट्यता: आणविक आधार

प्रत्येक ठोस पदार्थ परमाणुओं या अणुओं से निर्मित होता है जो अंतरपरमाण्विक अथवा अंतरआण्विक बलों द्वारा बंधे रहते हैं। साम्यावस्था की स्थिति में कण ऐसे स्थानों पर व्यवस्थित होते हैं जहां उनकी कुल स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम तथा परिणामी अंतरपरमाण्विक बल शून्य होता है।

प्रत्यास्थता (Elasticity) की परिभाषा

प्रत्यास्थता किसी पदार्थ का वह अंतर्निहित गुण है जिसके कारण वह बाह्य विरूपक बल को हटा लिए जाने पर अपनी प्रारंभिक आकृति तथा आकार को पुनः पूर्ण रूप से प्राप्त कर लेता है। यह प्रत्यानयन बल अंतरपरमाण्विक स्थिरवैद्युत विभव से उत्पन्न होता है।

उदाहरण: क्वार्ट्ज तंतु, फॉस्फर कांस्य, स्प्रिंग इस्पात का तार।

सुघट्यता (Plasticity) की परिभाषा

सुघट्यता (प्लास्टिसिटी) किसी पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण विरूपक बल हटा लिए जाने के उपरांत भी उसमें स्थायी विरूपण बना रहता है और वह अपनी मूल विमाओं को प्राप्त करने का कोई प्रयास नहीं दर्शाता।

उदाहरण: गीली मिट्टी, पुट्टी, च्युइंग गम, कमरे के तापमान पर सीसा (लेड)।

एनसीईआरटी संकल्पनात्मक तथ्य: प्रकृति में कोई भी पिंड न तो पूर्णतः प्रत्यास्थ है और न ही पूर्णतः सुघट्य। क्वार्ट्ज तंतु एवं फॉस्फर कांस्य लगभग पूर्ण प्रत्यास्थता के समीप हैं, जबकि गीली मिट्टी या पुट्टी लगभग पूर्ण सुघट्यता दर्शाते हैं।
+-----------------------------------------------------------------------------------+ | सूक्ष्मदर्शी स्प्रिंग-गोलक मॉडल एवं स्थितिज ऊर्जा कूप | +-----------------------------------------------------------------------------------+ तनन (खिंचाव) साम्यावस्था संपीडन (दबाव) (r > r0, आकर्षण बल) (r = r0, F_net = 0) (r < r0, तीव्र प्रतिकर्षण) (परमाणु 1) (परमाणु 2) (परमाणु 1) (परमाणु 2) (परमाणु 1)(परमाणु 2) (O)----/\/\/\----(O) (O)--/\/\/\--(O) (O)/\/\(O) <------- r -------> <---- r0 ----> <-- r --> F_प्रत्यानयन भीतर की ओर U(r) न्यूनतम है F_प्रत्यानयन बाहर की ओर स्थितिज ऊर्जा वक्र U(r): U(r) ^ | | \ प्रतिकर्षण शाखा | 0 +------\------------------------------------> r (अंतरपरमाण्विक दूरी) | \ /------------ आकर्षण शाखा | \ / -U0 | \_______/ ^ r = r0 (साम्य दूरी, F = -dU/dr = 0) +-----------------------------------------------------------------------------------+
चित्र 8.1: स्प्रिंग-गोलक लैटिस मॉडल तथा अंतरपरमाण्विक स्थितिज ऊर्जा वक्र जो तनन एवं संपीडन विरूपण के दौरान प्रत्यानयन बलों की व्याख्या करता है।

2. प्रतिबल (Stress) की संकल्पना एवं प्रकार

जब कोई बाह्य बल किसी ठोस पिंड को विरूपित करता है, तो पिंड के भीतर प्रत्येक सूक्ष्म काट पर विरूपण का विरोध करने वाले आंतरिक बल उत्पन्न हो जाते हैं। स्थैतिक साम्यावस्था में इस आंतरिक प्रत्यानयन बल का परिमाण आरोपित विरूपक बल के बराबर होता है।

प्रतिबल (σ) = आंतरिक प्रत्यानयन बल / अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल = F_int / A

मात्रक एवं विमाएं:

  • SI मात्रक: न्यूटन प्रति वर्ग मीटर (N/m²) अथवा पास्कल (Pa)। (1 Pa = 1 N/m²; 1 MPa = 10⁶ Pa; 1 GPa = 10⁹ Pa)
  • CGS मात्रक: डाइन प्रति वर्ग सेमी (dyne/cm²) (1 N/m² = 10 dyne/cm²)
  • विमीय सूत्र: [M L⁻¹ T⁻²] (यह दाब के समतुल्य है, किंतु प्रतिबल स्पर्शीय रूप से भी कार्य कर सकता है)।
प्रतिबल का वर्गीकरण क्षेत्रफल के सापेक्ष बल की दिशा पिंड की संरचना पर प्रभाव मूल सूत्र
तनन प्रतिबल (Tensile Stress) पृष्ठ के लंबवत बाहर की ओर लंबाई में वृद्धि; अनुप्रस्थ काट में संकुचन σ_t = F_perpendicular / A
संपीडन प्रतिबल (Compressive Stress) पृष्ठ के लंबवत भीतर की ओर लंबाई में कमी; अनुप्रस्थ काट का विस्तार σ_c = F_perpendicular / A
अपरूपण / स्पर्शीय प्रतिबल (Shear Stress) पृष्ठ तल के समांतर (स्पर्शीय) समांतर परतों का सापेक्ष विस्थापन (आकृति परिवर्तन) σ_s = F_parallel / A
जलीय / आयतन प्रतिबल (Hydraulic Stress) सभी पृष्ठ अवयवों पर एकसमान लंबवत (द्रव दाब) आकृति बदले बिना आयतन में एकसमान कमी σ_v = ΔP = F_perpendicular / A_total

3. विकृति (Strain) की संकल्पना एवं वर्गीकरण

प्रतिबल के कारण पिंड के आकार अथवा रूप में उत्पन्न आपेक्षिक परिवर्तन को विकृति कहते हैं। इसे विमा में परिवर्तन तथा प्रारंभिक विमा के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।

विकृति (ε) = विन्यास में परिवर्तन / प्रारंभिक विन्यास = Δξ / ξ

चूंकि विकृति दो समान भौतिक विमाओं का अनुपात है, इसलिए यह एक विमाहीन एवं मात्रकहीन भौतिक राशि है जिसका विमीय सूत्र [M⁰ L⁰ T⁰] होता है।

विकृति के तीन मूलभूत प्रकार:

  1. अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal Strain): अभिलंब प्रतिबल (तनन या संपीडन) द्वारा उत्पन्न। यह लंबाई में भिन्नात्मक परिवर्तन है:
    अनुदैर्ध्य विकृति = ΔL / L
    तनन विकृति धनात्मक (ΔL > 0) तथा संपीडन विकृति ऋणात्मक (ΔL < 0) होती है।
  2. अपरूपण विकृति (θ): स्पर्शीय प्रतिबल द्वारा उत्पन्न। जब L ऊंचाई के किसी घन के निचले पृष्ठ को स्थिर रखकर ऊपरी पृष्ठ पर स्पर्शीय बल F लगाया जाता है, तो ऊपरी पृष्ठ Δx विस्थापित हो जाता है:
    अपरूपण विकृति = tan θ ≈ θ = Δx / L (रेडियन में)
    यहां θ अपरूपण कोण है जिससे स्थिर तल के लंबवत कोई रेखा घूम जाती है।
  3. आयतन विकृति (Volume Strain): जलीय प्रतिबल द्वारा उत्पन्न। यह एकसमान दाब के अधीन पिंड के आयतन में भिन्नात्मक परिवर्तन है:
    आयतन विकृति = ΔV / V
+-----------------------------------------------------------------------------------+ | तीन विकृति अवस्थाओं की ज्यामितीय संरचना | +-----------------------------------------------------------------------------------+ (क) अनुदैर्ध्य विकृति: +=====================+ F ---> | प्रारंभिक लंबाई L |====================> +------+ +=====================+ | ΔL | विकृति = ΔL / L <------------------ L -----------------------><--ΔL-> (ख) अपरूपण विकृति (स्पर्शीय): F_स्पर्शीय ---> +----------------+ /----------------/ ऊपरी तल Δx विस्थापित /| /| / /| / | / | / / | +--+-------------+ | ==> +----------------+ | | | | | |θ\ | | tan θ ≈ θ = Δx / L L | +-------------+--+ | \-------------+--+ | / | / L | / | / |/ |/ | / |/ +----------------+ +-/--------------+ निचला तल स्थिर <------- L ------> <-- Δx --> (ग) आयतन विकृति (जलीय): | | | (P_द्रव) +-v-v-v-+ ---> | --- | <--- | | V | | आयतन एकसमान रूप से घटता है: V ---> V - ΔV ---> | --- | <--- आयतन विकृति = ΔV / V +-^-^-^-+ +-----------------------------------------------------------------------------------+
चित्र 8.2: अनुदैर्ध्य विस्तार, स्पर्शीय अपरूपण विरूपण तथा द्रव दाब के अधीन एकसमान आयतन संकुचन की ज्यामिति।

4. हल किए गए उदाहरण एवं संख्यात्मक अनुप्रयोग

उदाहरण 1: 4.0 मीटर लंबे तथा 2.0 सेमी व्यास वाले एक इस्पात के केबल से 2000 किग्रा द्रव्यमान का एक लिफ्ट केबिन लटकाया गया है। यदि g = 9.8 मी/से² हो, तो ज्ञात कीजिए: (क) केबल में उत्पन्न तनन प्रतिबल, तथा (ख) केबल की लंबाई में वृद्धि, दिया है इस्पात का यंग प्रत्यास्थता गुणांक Y = 2.0 × 10¹¹ N/m²।
हल:

चरण 1: तनन भार एवं अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल की गणना:

भार F = M × g = 2000 kg × 9.8 m/s² = 19,600 N।

त्रिज्या r = d / 2 = 1.0 cm = 1.0 × 10⁻² m।

क्षेत्रफल A = π r² = 3.1416 × (1.0 × 10⁻²)² = 3.1416 × 10⁻⁴ m²।

चरण 2: तनन प्रतिबल की गणना:

σ = F / A = 19,600 / (3.1416 × 10⁻⁴) = 6.24 × 10⁷ N/m² (62.4 MPa)।

चरण 3: लंबाई में वृद्धि ΔL की गणना:

यंग गुणांक की परिभाषा से, Y = σ / (ΔL / L) ⇒ ΔL = (σ × L) / Y।

ΔL = (6.24 × 10⁷ × 4.0) / (2.0 × 10¹¹) = 1.248 × 10⁻³ m = 1.25 मिमी।

उदाहरण 2: सीसे (लेड) की 50 सेमी भुजा तथा 10 सेमी मोटाई वाली एक वर्गाकार सिल्ली का एक संकरा फलक (50 सेमी × 10 सेमी) फर्श पर दृढ़ता से जड़ा गया है। इसके सामने वाले ऊपरी संकरे फलक पर 9.0 × 10⁴ N का स्पर्शीय बल लगाया जाता है। यदि सीसे का अपरूपण गुणांक 5.6 × 10⁹ N/m² हो, तो ऊपरी कोर का पार्श्व विस्थापन ज्ञात कीजिए।
हल:

चरण 1: विमाएं एवं स्पर्शीय क्षेत्रफल की पहचान:

स्पर्शीय बल का अनुभव करने वाले ऊपरी फलक का क्षेत्रफल: A = 0.50 m × 0.10 m = 0.05 m²।

स्थिर फलक के लंबवत ऊंचाई: L = 0.50 m।

चरण 2: अपरूपण प्रतिबल की गणना:

σ_s = F_tangential / A = (9.0 × 10⁴ N) / 0.05 m² = 1.8 × 10⁶ N/m²।

चरण 3: अपरूपण विकृति θ तथा पार्श्व विस्थापन Δx की गणना:

θ = σ_s / G = (1.8 × 10⁶) / (5.6 × 10⁹) = 3.214 × 10⁻⁴ रेडियन।

पार्श्व विस्थापन Δx = L × θ = 0.50 m × 3.214 × 10⁻⁴ = 1.607 × 10⁻⁴ m = 0.16 मिमी।

उदाहरण 3: तांबे के 0.5 m³ आयतन वाले एक ठोस गोले को मारियाना गर्त के तल पर ले जाया जाता है जहां जल का गेज दाब 1.1 × 10⁸ Pa है। यदि तांबे का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus) 1.4 × 10¹¹ N/m² हो, तो गोले के आयतन में भिन्नात्मक परिवर्तन तथा निरपेक्ष आयतन संकुचन ज्ञात कीजिए।
हल:

चरण 1: जलीय प्रतिबल तथा आयतन गुणांक का संबंध:

जलीय प्रतिबल ΔP = 1.1 × 10⁸ Pa।

Bulk Modulus B = - ΔP / (ΔV / V) ⇒ भिन्नात्मक आयतन संकुचन |ΔV / V| = ΔP / B।

चरण 2: भिन्नात्मक आयतन परिवर्तन:

|ΔV / V| = (1.1 × 10⁸) / (1.4 × 10¹¹) = 7.86 × 10⁻⁴ (अथवा 0.0786%)।

चरण 3: निरपेक्ष आयतन संकुचन ΔV:

ΔV = 7.86 × 10⁻⁴ × 0.5 m³ = 3.93 × 10⁻⁴ m³ (393 cm³)।

उदाहरण 4: लंबाई L, द्रव्यमान M तथा अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A वाली एक भारी एकसमान इस्पात की छड़ छत से ऊर्ध्वाधर लटकाई गई है। इसके निचले मुक्त सिरे से y दूरी पर स्थित बिंदु पर तनन प्रतिबल का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए तथा बताइए कि प्रतिबल कहां अधिकतम होगा।
हल:

चरण 1: y ऊंचाई पर अनुप्रस्थ काट द्वारा समर्थित भार:

निचले सिरे से y दूरी पर स्थित काट पर तनाव बल केवल उसके नीचे स्थित भाग के भार के कारण होता है।

y लंबाई वाले भाग का द्रव्यमान: m(y) = (M / L) × y।

इस काट पर तनाव: T(y) = m(y) × g = (M g / L) × y।

चरण 2: तनन प्रतिबल σ(y) की गणना:

σ(y) = T(y) / A = (M g y) / (A L)।

चरण 3: सीमांत स्थितियों का विश्लेषण:

  • निचले मुक्त सिरे पर (y = 0): σ(0) = 0।
  • मध्य बिंदु पर (y = L/2): σ(L/2) = M g / (2 A)।
  • शीर्ष अवलंबन बिंदु पर (y = L): σ_max = M g / A।

अतः प्रतिबल लंबाई के साथ रैखिक रूप से बढ़ता है तथा शीर्ष आलंब बिंदु पर अधिकतम होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. ठोसों में अपरूपण प्रत्यास्थता क्यों होती है जबकि द्रवों और गैसों में नहीं?
ठोसों में एक निश्चित जालक (लैटिस) संरचना होती है जिसमें दिशात्मक रासायनिक बंध उपस्थित होते हैं, जो परतों के खिसकने पर प्रत्यानयन बल उत्पन्न करते हैं। द्रवों और गैसों में निश्चित जालक बंध नहीं होते; कोई भी स्पर्शीय बल लगाने पर वे स्थिर प्रत्यानयन बल उत्पन्न किए बिना निरंतर प्रवाहित होने लगते हैं।
Q2. प्रतिबल एक अदिश राशि है अथवा सदिश?
प्रतिबल न तो शुद्ध अदिश है और न ही सामान्य सदिश; यह एक द्वितीय कोटि का प्रदिश (Second-rank Tensor) है, क्योंकि इसे पूर्णतः व्यक्त करने के लिए दो दिशाओं की आवश्यकता होती है: पृष्ठ के अभिलंब की दिशा तथा उस पृष्ठ पर कार्यरत बल की दिशा। प्रारंभिक स्तर पर किसी दिए गए तल के लिए इसे अदिश परिमाण के रूप में पढ़ा जाता है।
Q3. किसी तार का त्रोटन प्रतिबल (भंजन प्रतिबल) क्या होता है? क्या यह लंबाई या क्षेत्रफल पर निर्भर करता है?
त्रोटन प्रतिबल किसी पदार्थ द्वारा टूटने से पूर्व सहन किया जा सकने वाला अधिकतम प्रतिबल है। यह पदार्थ का एक अंतर्निहित विशिष्ट गुण है जो केवल पदार्थ की प्रकृति एवं तापमान पर निर्भर करता है। यह तार की लंबाई अथवा अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता। यद्यपि त्रोटन बल तार के क्षेत्रफल के समानुपाती होता है: F_break = σ_break × A।
Q4. तापमान का प्रत्यास्थ गुणों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
तापमान बढ़ाने पर परमाणुओं के कंपन का आयाम तथा उनके बीच की दूरी बढ़ती है, जिससे अंतरपरमाण्विक बंध दुर्बल हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप तापमान बढ़ने पर प्रत्यास्थता गुणांक (यंग, आयतन, अपरूपण) के मान घट जाते हैं। (इनवार इस्पात इसका एक दुर्लभ अपवाद है)।
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