प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा एवं व्यावहारिक अनुप्रयोग
जब किसी प्रत्यास्थ ठोस को विरूपित करने के लिए बाह्य यांत्रिक कार्य किया जाता है, तो यह कार्य आंतरिक अंतरपरमाण्विक प्रत्यानयन बलों के विरुद्ध संपन्न होता है। प्रत्यास्थता की सीमा के भीतर यह किया गया कार्य निकाय में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (विकृति ऊर्जा) के रूप में संचित हो जाता है। इस मॉड्यूल में हम संचित ऊर्जा एवं ऊर्जा घनत्व के सूत्रों की व्युत्पत्ति करेंगे तथा सिविल, मैकेनिकल व भूगर्भीय इंजीनियरिंग के चार महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों को समझेंगे।
1. प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा की गणितीय व्युत्पत्ति
माना प्रारंभिक लंबाई L तथा अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A वाला एक तार एक सिरे पर दृढ़ आलंब से बंधा है। माना किसी क्षण आरोपित चर बल F के कारण तार में खिंचाव x है।
यंग प्रत्यास्थता गुणांक की परिभाषा से खिंचाव x पर प्रत्यानयन बल है:
तार को अतिरिक्त दूरी dx तक खींचने में किया गया सूक्ष्म कार्य dW होगा:
अतः x = 0 से कुल खिंचाव x = ΔL तक खींचने में कुल कृत कार्य:
चूंकि अंतिम खिंचाव बल F = (Y A ΔL) / L है, अतः संचित स्थितिज ऊर्जा U है:
2. प्रत्यास्थ ऊर्जा घनत्व (प्रति एकांक आयतन संचित ऊर्जा)
पदार्थ के प्रति एकांक आयतन में संचित स्थितिज ऊर्जा को ऊर्जा घनत्व (u) कहते हैं (आयतन V = A × L):
हुक के नियम (σ = Y ε) द्वारा विभिन्न रूपांतरण:
- यंग गुणांक तथा विकृति के पदों में: u = ½ × Y × ε² = ½ × Y × (ΔL / L)²
- यंग गुणांक तथा प्रतिबल के पदों में: u = σ² / (2 Y)
- दृढ़ता गुणांक तथा अपरूपण विकृति के पदों में: u = ½ × G × θ² = τ² / (2 G)
- आयतन गुणांक तथा आयतन विकृति के पदों में: u = ½ × B × (ΔV / V)² = (ΔP)² / (2 B)
3. दंडों का बंकन एवं I-आकार के गर्डर की बनावट
दोनों सिरों पर क्षैतिज रूप से समर्थित तथा मध्य बिंदु पर W भार (अथवा M द्रव्यमान, W = Mg) द्वारा लदे हुए दंड में नीचे की ओर झुकाव या अवनमन (δ) उत्पन्न होता है।
अवनमन समीकरण का विश्लेषणात्मक अध्ययन:
- पदार्थ का प्रभाव: उच्च यंग गुणांक Y अवनमन को घटाता है (δ ∝ 1/Y)। इस्पात, लकड़ी या एल्युमिनियम से श्रेष्ठ है।
- गहराई बनाम चौड़ाई: अवनमन चौड़ाई के व्युत्क्रमानुपाती है (δ ∝ 1/b), किंतु गहराई के घन के व्युत्क्रमानुपाती है (δ ∝ 1/d³)। गहराई दोगुनी करने पर अवनमन 8 गुना घट जाता है! अतः दंडों को गहराई अधिक रखकर बनाया जाता है।
- वंकन (Buckling) की समस्या: बहुत गहरे और संकरे आयताकार दंड भार पड़ने पर तिरछे मुड़ जाते हैं, जिसे वंकन कहते हैं।
- I-गर्डर समाधान: I-काट शीर्ष व आधार पर चौड़े फ्लैंज प्रदान करता है जहां तनन व संपीडन प्रतिबल अधिकतम होते हैं, तथा पतला केंद्रीय वेब वंकन को रोकता है। इससे न्यूनतम भार व लागत में अधिकतम मजबूती मिलती है।
4. भूगर्भीय सीमा: पृथ्वी पर पर्वतों की अधिकतम ऊंचाई
पृथ्वी पर कोई भी पर्वत 10 किमी से अधिक ऊंचा क्यों नहीं है, जबकि मंगल ग्रह पर ओलंपस मॉन्स 22 किमी ऊंचा है? इसका कारण चट्टानों की प्रत्यास्थ सीमा में छिपा है।
माना h ऊंचाई तथा A आधार क्षेत्रफल वाला एक पर्वत ρ ≈ 3.0 × 10³ kg/m³ घनत्व वाली चट्टानों से बना है।
पर्वत के आधार पर नीचे की ओर गुरुत्वीय संपीडन दाब:
किनारों पर चट्टानें खुली होने के कारण यह ऊर्ध्वाधर दाब लगभग ρ g h के बराबर का पार्श्व अपरूपण प्रतिबल उत्पन्न करता है।
यदि ρ g h का मान चट्टानों के अपरूपण पराभव सामर्थ्य (σ_y) से अधिक हो जाए, तो आधार की चट्टानें भार नहीं सह पाएंगी; वे टूटकर प्लास्टिक रूप से बहने लगेंगी और पर्वत धंस जाएगा।
ग्रेनाइट व सिलिकेट चट्टानों के लिए σ_y ≈ 3.0 × 10⁸ N/m² होता है।
माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848.86 मीटर है, जो इस मूलभूत भौतिक सीमा के अत्यंत निकट है! मंगल ग्रह पर गुरुत्वीय त्वरण g_mars ≈ 3.7 m/s² होने के कारण वहां पर्वत लगभग 3 गुना अधिक ऊंचे हो सकते हैं।
5. क्रेन केबल्स का डिजाइन एवं सुरक्षा गुणांक
औद्योगिक क्रेनों में भारी भार M को a त्वरण के साथ उठाते समय केबल को सदैव प्रत्यास्थ सीमा के भीतर कार्य करना चाहिए।
गतिज झटकों तथा थकान से बचाव हेतु इंजीनियर सुरक्षा गुणांक (Factor of Safety, N) का उपयोग करते हैं (सामान्यतः N = 5 से 10):
6. हल किए गए उदाहरण एवं संख्यात्मक अनुप्रयोग
चरण 1: विमाएं एवं विकृति:
त्रिज्या r = 0.5 मिमी = 5.0 × 10⁻⁴ मीटर।
क्षेत्रफल A = π r² = 3.1416 × (5.0 × 10⁻⁴)² = 7.854 × 10⁻⁷ m²।
लंबाई L = 2.0 मीटर; खिंचाव ΔL = 2.0 मिमी = 2.0 × 10⁻³ मीटर।
विकृति ε = ΔL / L = (2.0 × 10⁻³) / 2.0 = 1.0 × 10⁻³।
चरण 2: ऊर्जा घनत्व (u) की गणना:
u = ½ × Y × ε² = 0.5 × (2.0 × 10¹¹) × (1.0 × 10⁻³)²
u = 1.0 × 10¹¹ × 1.0 × 10⁻⁶ = 1.0 × 10⁵ J/m³ (100 kJ/m³)।
चरण 3: कुल संचित स्थितिज ऊर्जा (U):
आयतन V = A × L = 7.854 × 10⁻⁷ × 2.0 = 1.571 × 10⁻⁶ m³।
U = u × V = (1.0 × 10⁵) × (1.571 × 10⁻⁶) = 0.157 जूल।
चरण 1: केबल में अधिकतम गतिज तनाव:
T = M × (g + a) = 10,000 × (9.8 + 2.0) = 10,000 × 11.8 = 118,000 N (118 kN)।
चरण 2: अनुमेय सुरक्षित प्रतिबल:
σ_perm = σ_y / N = (3.0 × 10⁸) / 6 = 5.0 × 10⁷ N/m² (50 MPa)।
चरण 3: न्यूनतम क्षेत्रफल एवं त्रिज्या:
A_min = T / σ_perm = 118,000 / (5.0 × 10⁷) = 2.36 × 10⁻³ m²।
r = √ [ A_min / π ] = √ [ (2.36 × 10⁻³) / 3.1416 ] = 0.0274 मीटर = 2.74 सेमी (व्यास ≈ 5.5 सेमी)।
चरण 1: अवनमन सूत्र से यंग गुणांक:
L = 4.0 m; b = 0.10 m; d = 0.20 m; W = 2000 N; δ₁ = 1.25 × 10⁻³ m।
δ = (W L³) / (4 Y b d³) ⇒ Y = (W L³) / (4 δ b d³)।
अंश = 2000 × (4.0)³ = 128,000 N·m³।
हर = 4 × (1.25 × 10⁻³) × 0.10 × (0.20)³ = 5.0 × 10⁻³ × 0.10 × 0.008 = 4.0 × 10⁻⁶।
Y = 128,000 / (4.0 × 10⁻⁶) = 3.2 × 10¹⁰ N/m² (32 GPa)।
चरण 2: चपटा लिटाने पर अवनमन (b' = 0.20 m, d' = 0.10 m):
चूंकि δ ∝ 1 / (b d³):
δ₂ / δ₁ = (b₁ d₁³) / (b₂ d₂³) = [ 0.10 × (0.20)³ ] / [ 0.20 × (0.10)³ ] = 0.0008 / 0.0002 = 4।
δ₂ = 4 × δ₁ = 4 × 1.25 मिमी = 5.0 मिमी।
(समान लकड़ी होने के बावजूद चपटा लिटाने पर अवनमन 400% बढ़ जाता है!)।
चरण 1: ऊर्जा संरक्षण सिद्धांत:
गिरती गेंद की स्थितिज ऊर्जा में कमी = छड़ की संचित विकृति ऊर्जा:
M g h ≈ ½ (Y A / L) ΔL²।
चरण 2: अधिकतम संपीडन ΔL:
ΔL² = (2 M g h L) / (Y A)।
M g h = 5.0 × 9.8 × 1.0 = 49.0 J।
Y A / L = (2.0 × 10¹¹ × 2.0 × 10⁻⁴) / 1.0 = 4.0 × 10⁷ N/m।
ΔL² = (2 × 49.0) / (4.0 × 10⁷) = 2.45 × 10⁻⁶ m² ⇒ ΔL = 1.565 × 10⁻³ m।
चरण 3: अधिकतम तात्क्षणिक प्रतिबल:
ε_max = ΔL / L = 1.565 × 10⁻³।
σ_max = Y × ε_max = (2.0 × 10¹¹) × (1.565 × 10⁻³) = 3.13 × 10⁸ N/m² (313 MPa)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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