QCC Notes
कक्षा 11 · भौतिकीJEE MAIN × NEETEnglish
§ 8.2NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 8

हुक का नियम एवं प्रतिबल-विकृति वक्र

किसी ठोस पदार्थ पर जब क्रमिक रूप से तनन भार लगाया जाता है, तो उसका यांत्रिक व्यवहार इंजीनियरिंग डिजाइन, संरचनात्मक सुरक्षा एवं सामग्री चयन का आधार बनता है। इस मॉड्यूल में हम हुक के नियम, तन्य धातुओं के संपूर्ण प्रतिबल-विकृति आरेख, स्थायी विरूपण, तन्य बनाम भंगुर पदार्थों तथा रबर में प्रत्यास्थ शैथिल्य का गहन विश्लेषण करेंगे।

1. हुक का नियम: प्रतिपादन एवं वैधता क्षेत्र

सन् 1676 में अंग्रेज वैज्ञानिक रॉबर्ट हुक ने प्रत्यास्थ विरूपणों के मूलभूत आनुपातिक संबंध की खोज की। प्रायोगिक रूप से जब धातु के तार पर धीरे-धीरे भार बढ़ाया जाता है, तो एक निश्चित सीमा तक लंबाई में वृद्धि आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होती है।

प्रतिबल ∝ विकृति  ⇒  प्रतिबल = E × विकृति  ⇒  E = प्रतिबल / विकृति

यहां समानुपाती नियतांक E को पदार्थ का प्रत्यास्थता गुणांक (Modulus of Elasticity) कहते हैं। इसका मात्रक N/m² अथवा पास्कल (Pa) तथा विमीय सूत्र [M L⁻¹ T⁻²] होता है।

आवश्यक सीमांकन: हुक का नियम कोई सार्वत्रिक या मूलभूत नियम नहीं है, बल्कि एक आनुभविक नियम है। यह केवल आनुपातिकता सीमा तक ही पूर्णतः सत्य रहता है। रबर तथा कई जैविक ऊतकों में अल्प प्रतिबलों पर भी प्रतिबल-विकृति संबंध अरैखिक होता है।

2. प्रतिबल-विकृति वक्र का पूर्ण क्षेत्रीय विश्लेषण

धातु के यांत्रिक गुणों का निर्धारण करने के लिए मानक नमूने (जैसे निश्चित लंबाई व व्यास की बेलनाकार छड़) को यूनिवर्सल टेस्टिंग मशीन (UTM) में खींचकर प्रतिबल एवं विकृति का आलेख खींचा जाता है।

+-----------------------------------------------------------------------------------+ | तन्य धातु के लिए विशिष्ट प्रतिबल-विकृति वक्र | +-----------------------------------------------------------------------------------+ प्रतिबल (σ) ^ | चरम तनन सामर्थ्य (D) | *-----* | / \ संकीर्णन अवस्था | प्रत्यास्थ सीमा (B) / * विभंजन बिंदु (E) | (पराभव बिंदु) / | * / | / \ / सुघट्य (प्लास्टिक) क्षेत्र | / \ / पराभव बल |.........* *---------* (σ_y) | A (आनुपातिकता सीमा) | / | / रैखिक प्रत्यास्थ क्षेत्र (OA) | / ढाल = यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Y) | / | / : | / : C से भार हटाने पर स्थायी विरूपण (OO') | / : O +------+----------------------------------------------------> विकृति (ε) O' (अवशिष्ट विकृति < 1%) +-----------------------------------------------------------------------------------+
चित्र 8.3: तन्य धातु का मानक प्रतिबल-विकृति वक्र जिसमें आनुपातिक सीमा A, पराभव बिंदु B, स्थायी विरूपण OO', चरम सामर्थ्य D तथा विभंजन बिंदु E दर्शाए गए हैं।

वक्र के विभिन्न क्षेत्रों का सविस्तार विश्लेषण:

  1. क्षेत्र OA (रैखिक प्रत्यास्थ क्षेत्र / हुक का नियम):
    मूल बिंदु O से बिंदु A तक प्रतिबल, विकृति के अनुक्रमानुपाती होता है (σ = Y ε)। ग्राफ एक सरल रेखा है। बिंदु A को आनुपातिकता सीमा (Proportional Limit) कहते हैं। OA की ढाल सीधे यंग गुणांक (Y) के बराबर होती है। यदि भार हटा लिया जाए, तो तार बिना किसी अवशिष्ट विकृति के पुनः बिंदु O पर लौट आता है।
  2. क्षेत्र AB (अरैखिक प्रत्यास्थ क्षेत्र):
    A से B के बीच प्रतिबल और विकृति अनुक्रमानुपाती नहीं रहते, फिर भी विरूपण पूर्णतः प्रत्यास्थ होता है। बिंदु B को प्रत्यास्थ सीमा (Elastic Limit) अथवा पराभव बिंदु (Yield Point) कहते हैं। इस बिंदु पर प्रतिबल को पराभव सामर्थ्य (σ_y या S_y) कहा जाता है। B पर भार हटाने पर वस्तु अपनी मूल लंबाई प्राप्त कर लेती है।
  3. क्षेत्र BC (प्लास्टिक विरूपण का आरंभ):
    बिंदु B से आगे प्रतिबल में अल्प वृद्धि करने पर भी विकृति में तीव्र वृद्धि होती है। यदि बिंदु C पर भार हटा लिया जाए, तो पदार्थ मूल वक्र का अनुसरण नहीं करता, बल्कि OA के समांतर एक रेखा के अनुदिश संकुचित होता है। इससे पदार्थ में स्थायी विरूपण (Permanent Set, OO') रह जाता है, जो सामान्यतः 1% से कम होता है।
  4. क्षेत्र CD (सुघट्य प्रवाह एवं चरम सामर्थ्य):
    बिंदु C से आगे क्रिस्टल जालक में विस्थापनों (Dislocations) के खिसकने से वृहद प्लास्टिक प्रवाह होता है। बिंदु D वक्र का उच्चतम बिंदु है, जिसे चरम तनन सामर्थ्य (Ultimate Tensile Strength, σ_u या S_u) कहते हैं। यह वह अधिकतम प्रतिबल है जिसे पदार्थ बिना टूटे सहन कर सकता है।
  5. क्षेत्र DE (संकीर्णन एवं विभंजन):
    बिंदु D से आगे नमूने के किसी एक स्थान पर अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल तेजी से घटने लगता है, जिसे संकीर्णन (Necking) कहते हैं। इसके बाद यदि आरोपित बल को कम भी कर दिया जाए, तो भी संकीर्ण भाग पर प्रतिबल बढ़ता रहता है और अंततः बिंदु E पर नमूना टूट जाता है। बिंदु E को विभंजन बिंदु (Fracture / Breaking Point) कहते हैं।

3. प्रतिबल-विकृति वक्र के आधार पर पदार्थों का वर्गीकरण

1. तन्य पदार्थ (Ductile Materials)

वे पदार्थ जिनमें पराभव बिंदु (B) तथा विभंजन बिंदु (E) के मध्य प्लास्टिक विरूपण का एक लंबा क्षेत्र होता है। इन्हें बिना टूटे पतले तारों में खींचा अथवा चद्दरों में ढाला जा सकता है।

उदाहरण: तांबा, एल्युमिनियम, मृदु इस्पात, सोना, चांदी।

2. भंगुर पदार्थ (Brittle Materials)

वे पदार्थ जिनमें विभंजन बिंदु (E), प्रत्यास्थ सीमा (B) के अत्यंत निकट होता है। इनमें कोई प्लास्टिक क्षेत्र नहीं होता; ये बिना संकीर्णन के अचानक टूट जाते हैं।

उदाहरण: कांच, ढलवां लोहा, चीनी मिट्टी (सिरेमिक), उच्च-कार्बन इस्पात।

4. प्रत्यास्थलक (Elastomers) एवं प्रत्यास्थ शैथिल्य

कुछ पदार्थ हुक के नियम का लगभग बिल्कुल पालन नहीं करते, फिर भी उन्हें खींचकर उनकी मूल लंबाई से कई गुना अधिक विकृत किया जा सकता है तथा भार हटाने पर वे वापस अपनी स्थिति में आ जाते हैं। ऐसे पदार्थों को प्रत्यास्थलक (Elastomers) कहते हैं (जैसे वल्कनीकृत रबर, महाधमनी का ऊतक)।

+-----------------------------------------------------------------------------------+ | वल्कनीकृत रबर में प्रत्यास्थ शैथिल्य लूप | +-----------------------------------------------------------------------------------+ प्रतिबल (σ) ^ | / (भारण वक्र - खींचते समय) | / | / | *----------* | / / | / / | / / | / (क्षेत्रफल)/ | / / | / / (भार-मुक्ति वक्र - सिकुड़ते समय) | *----------* | / O +--+--------------------------------------------------------> विकृति (ε) +-----------------------------------------------------------------------------------+
चित्र 8.4: वल्कनीकृत रबर का प्रत्यास्थ शैथिल्य लूप। लूप का क्षेत्रफल प्रति चक्र ऊष्मा के रूप में क्षयित ऊर्जा को दर्शाता है।
प्रत्यास्थ शैथिल्य का व्यावहारिक महत्व:
  • रबर में संकुचन (भार-मुक्ति) के दौरान किसी दी गई विकृति हेतु आवश्यक प्रतिबल, भारण के समय के प्रतिबल से कम होता है।
  • खींचने में किया गया कार्य, सिकुड़ते समय प्राप्त कार्य से अधिक होता है। दोनों का अंतर—लूप का क्षेत्रफल—पदार्थ के भीतर आंतरिक ऊष्मा में परिवर्तित हो जाता है।
  • गाड़ियों के टायर तथा कंपन रोधी पैड (Shock Absorbers) उच्च शैथिल्य वाले रबर से बनाए जाते हैं ताकि वे झटकों की यांत्रिक ऊर्जा को अवशोषित कर ऊष्मा के रूप में विसरित कर सकें।

5. हल किए गए उदाहरण एवं संख्यात्मक अनुप्रयोग

उदाहरण 1: दो पदार्थों A और B के प्रतिबल-विकृति वक्र दर्शाते हैं कि पदार्थ A की प्रारंभिक ढाल अधिक है तथा पराभव बिंदु व विभंजन बिंदु के बीच लंबा प्लास्टिक क्षेत्र है। पदार्थ B की प्रारंभिक ढाल कम है तथा उसका विभंजन बिंदु प्रत्यास्थ सीमा के तुरंत बाद स्थित है। बताइए: (क) किसका यंग गुणांक अधिक है? (ख) निलंबन पुलों के केबल बनाने हेतु कौन सा पदार्थ उपयुक्त है?
हल:

चरण 1: यंग प्रत्यास्थता गुणांक की तुलना:

यंग गुणांक Y = रैखिक प्रत्यास्थ क्षेत्र OA की ढाल = Δσ / Δε। चूंकि वक्र A की प्रारंभिक ढाल B से अधिक है, अतः पदार्थ A का यंग गुणांक पदार्थ B से अधिक है (Y_A > Y_B)।

चरण 2: तन्यता एवं संरचनात्मक उपयुक्तता:

पदार्थ A में पराभव बिंदु और विभंजन बिंदु के मध्य वृहद दूरी है, अतः यह तन्य (Ductile) है और टूटने से पहले खिंचकर पूर्व चेतावनी देता है।

पदार्थ B में कोई प्लास्टिक क्षेत्र नहीं है, अतः यह भंगुर (Brittle) है और अचानक टूट जाएगा।

अतः पुलों और क्रेन केबल हेतु पदार्थ A का चयन किया जाता है।

उदाहरण 2: 2.0 mm² अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले तांबे के तार का पराभव सामर्थ्य 2.5 × 10⁸ N/m² है। तार में बिना स्थायी विरूपण उत्पन्न किए उससे अधिकतम कितना द्रव्यमान लटकाया जा सकता है? (g = 9.8 मी/से² लें)।
हल:

चरण 1: पराभव सामर्थ्य तथा प्रत्यास्थ सीमा का संबंध:

स्थायी विरूपण से बचने हेतु प्रतिबल का मान पराभव सामर्थ्य σ_y से अधिक नहीं होना चाहिए।

σ_max = σ_y = 2.5 × 10⁸ N/m²।

चरण 2: अधिकतम अनुमेय बल की गणना:

क्षेत्रफल A = 2.0 mm² = 2.0 × 10⁻⁶ m²।

F_max = σ_max × A = (2.5 × 10⁸ N/m²) × (2.0 × 10⁻⁶ m²) = 500 N।

चरण 3: अधिकतम लटकाया जाने वाला द्रव्यमान:

M_max = F_max / g = 500 N / 9.8 m/s² = 51.02 किग्रा।

उदाहरण 3: 50.0 मिमी मूल गेज लंबाई तथा 12.5 मिमी व्यास वाले एक मृदु इस्पात के नमूने का तनन परीक्षण किया जाता है। आनुपातिकता सीमा 38.0 kN के भार पर तथा अधिकतम भार (चरम भार) 68.0 kN पर प्राप्त होता है। ज्ञात कीजिए: (क) आनुपातिकता सीमा प्रतिबल, तथा (ख) चरम तनन सामर्थ्य (UTS)।
हल:

चरण 1: अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल की गणना:

व्यास d = 12.5 मिमी = 1.25 × 10⁻² मीटर ⇒ त्रिज्या r = 6.25 × 10⁻³ मीटर।

क्षेत्रफल A = π r² = 3.1416 × (6.25 × 10⁻³)² = 1.227 × 10⁻⁴ m²।

चरण 2: आनुपातिकता सीमा प्रतिबल (σ_p):

σ_p = F_p / A = (38.0 × 10³ N) / (1.227 × 10⁻⁴ m²) = 3.10 × 10⁸ N/m² (310 MPa)।

चरण 3: चरम तनन सामर्थ्य (σ_u):

σ_u = F_max / A = (68.0 × 10³ N) / (1.227 × 10⁻⁴ m²) = 5.54 × 10⁸ N/m² (554 MPa)।

उदाहरण 4: 1.0 किग्रा के एक रबर ब्लॉक के प्रतिबल-विकृति आरेख के शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल 250 J/m³ पाया जाता है। यदि रबर का घनत्व 1.2 × 10³ kg/m³ तथा विशिष्ट ऊष्मा धारिता 1600 J/(kg·K) हो, तो 100 चक्रों के उपरांत रबर ब्लॉक के ताप में वृद्धि का परिकलन कीजिए (परिवेश में शून्य ऊष्मा हानि मानकर)।
हल:

चरण 1: प्रति एकांक आयतन क्षयित ऊर्जा:

प्रति चक्र प्रति एकांक आयतन ऊर्जा क्षय = 250 J/m³।

100 चक्रों में कुल आयतनी ऊष्मा q_v = 100 × 250 J/m³ = 25,000 J/m³।

चरण 2: प्रति द्रव्यमान कुल ऊष्मा Q की गणना:

ब्लॉक का आयतन V = M / ρ = 1.0 kg / (1.2 × 10³ kg/m³) = (1 / 1200) m³।

कुल ऊष्मा Q = q_v × V = 25,000 × (1 / 1200) = 20.83 जूल।

चरण 3: तापांतर ΔT की गणना:

Q = m × c × ΔT ⇒ ΔT = Q / (m × c) = 20.83 / (1.0 × 1600) = 0.013 °C।

(उच्च गति वाले वाहनों में लाखों चक्र होने पर टायरों का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. चरम तनन सामर्थ्य के बाद संकीर्णन (गला बनना) केवल तन्य पदार्थों में ही क्यों होता है?
चरम तनन सामर्थ्य तक धातु में कार्य-कठोरीकरण (Work-hardening) अनुप्रस्थ काट में आने वाली कमी की क्षतिपूर्ति करता रहता है। चरम बिंदु के बाद कार्य-कठोरीकरण की दर पतले होने की दर से कम हो जाती है, जिससे दुर्बलतम स्थान पर विरूपण केंद्रित हो जाता है और एक संकीर्ण गला (Neck) बन जाता है जहां से वस्तु टूटती है।
Q2. 'प्रमाण प्रतिबल' (0.2% Proof Stress) से क्या अभिप्राय है?
एल्युमिनियम, पीतल अथवा उच्च-तनन इस्पात में स्पष्ट पराभव बिंदु B दिखाई नहीं देता। अतः 0.002 (0.2%) की विकृति से रैखिक elastic ढाल के समांतर खींची गई रेखा जहां प्रतिबल-विकृति वक्र को काटती है, उस बिंदु के प्रतिबल को 0.2% प्रमाण प्रतिबल माना जाता है।
Q3. क्या किसी प्रत्यास्थलक (इलास्टोमर) में निश्चित प्लास्टिक क्षेत्र होता है?
नहीं। वल्कनीकृत रबर जैसे पदार्थों में उलझी हुई बहुलक शृंखलाओं के खुलने के कारण अत्यधिक प्रत्यास्थ खिंचाव (700–800% तक) होता है। भार हटाने पर वे लगभग मूल अवस्था में लौट आते हैं और उनमें कोई धातु जैसा सुघट्य प्रवाह नहीं होता। अतः इनमें निश्चित पराभव बिंदु या प्लास्टिक क्षेत्र नहीं होता।
Q4. प्रतिबल-विकृति वक्र की ढाल का क्या भौतिक महत्व है?
प्रारंभिक रैखिक क्षेत्र (आनुपातिकता सीमा) में वक्र की ढाल (dσ/dε) पदार्थ के यंग प्रत्यास्थता गुणांक (कड़ेपन या स्टिफनेस) को व्यक्त करती है। जितनी अधिक ढाल होगी, पदार्थ उतना ही अधिक प्रत्यास्थ और कड़ा होगा।
आपकी प्रगति

केवल इसी डिवाइस पर सेव — कोई अकाउंट या साइन-इन नहीं।