तरलों में दाब, द्रवस्थैतिक विरोधाभास एवं पास्कल का नियम
तरल (Fluid) वह पदार्थ है जो अपरूपण प्रतिबल (स्पर्शीय बल) लगाने पर निरंतर प्रवाहित होता है, चाहे आरोपित बल कितना भी सूक्ष्म क्यों न हो। तरलों के अंतर्गत द्रव (जो व्यावहारिक रूप से असंपीड्य होते हैं और जिनका आयतन निश्चित होता है) तथा गैसें (जो अत्यधिक संपीड्य होती हैं और पात्र का पूरा आयतन घेर लेती हैं) दोनों आते हैं। यांत्रिक साम्यावस्था में स्थित तरलों के अध्ययन को द्रवस्थैतिकी (Hydrostatics) कहा जाता है।
1. अभिलंब बल, प्रणोद एवं तरल दाब
विरामावस्था में स्थित तरल किसी भी प्रकार के स्पर्शीय (अपरूपण) प्रतिबल को सहन नहीं कर सकता; अतः विरामावस्था में किसी तरल द्वारा उसके संपर्क में स्थित किसी पृष्ठ पर लगाया गया बल सदैव उस पृष्ठ के अभिलंबवत (लंबवत) ही कार्य करता है। किसी तरल द्वारा संपर्क पृष्ठ पर आरोपित कुल लंबवत बल को द्रवस्थैतिक प्रणोद (Hydrostatic Thrust) कहते हैं।
तरल के भीतर किसी बिंदु पर दाब (P) को प्रति एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित अभिलंबवत प्रणोद के रूप में परिभाषित किया जाता है:
- अदिश प्रकृति (Scalar Nature): यद्यपि बल एक सदिश राशि है, परंतु दाब एक अदिश राशि है क्योंकि किसी स्थिर तरल के भीतर किसी दिए गए बिंदु पर दाब सभी दिशाओं में समान परिमाण के साथ कार्य करता है (समदैशिक प्रकृति)।
- SI मात्रक: न्यूटन प्रति वर्ग मीटर (N/m2) अथवा पास्कल (Pascal - Pa), जहाँ 1 Pa = 1 N·m-2।
- विमीय सूत्र: [P] = [M1 L-1 T-2]।
- प्रायोगिक एवं व्यावहारिक मात्रक:
- मानक वायुमंडलीय दाब (Standard Atmosphere): 1 atm = 1.01325 × 105 Pa ≈ 1.013 bar।
- बार (Bar): 1 bar = 105 Pa = 105 N/m2।
- टॉर (Torr): 1 torr = 1 mm of Hg = 133.322 Pa।
- 1 atm = 760 torr = 760 mm of Hg = 76 cm of Hg ≈ 10.33 m of water column।
2. गहराई के साथ द्रवस्थैतिक दाब में परिवर्तन
एकसमान घनत्व ρ वाले स्थिर द्रव के भीतर गहराई y1 और y2 के मध्य स्थित एक काल्पनिक बेलनाकार तरल अल्पांश (अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A तथा ऊंचाई h) के यांत्रिक संतुलन पर विचार करें:
मुक्त पृष्ठ (वायुमंडल) ======================== P0
| |
| | |
| v h |
| | |
तल 1: +--------------------+ P1 = P0
| [द्रव] |
| क्षेत्रफल A |
| भार = mg |
| (rho * A * h * g)|
तल 2: +--------------------+ P2 = P
ऊर्ध्वाधर बल संतुलन: P * A = P0 * A + rho * A * h * g
क्षेत्रफल A से भाग: P = P0 + rho * g * h
ऊर्ध्वाधर अक्ष के अनुदिश यांत्रिक साम्यावस्था के लिए (∑ Fy = 0):
संपूर्ण समीकरण को क्षेत्रफल A से विभाजित करने पर:
यदि तल 1 वायुमंडल के लिए खुला है (P1 = P0), तो मुक्त पृष्ठ से h गहराई नीचे निरपेक्ष दाब (Absolute Pressure) P निम्नलिखित होता है:
- निरपेक्ष दाब (P): पूर्ण निर्वात के सापेक्ष मापा गया कुल भौतिक दाब: P = P0 + ρ g h।
- गेज दाब (Pg): स्थानीय वायुमंडलीय दाब से अधिक अतिरिक्त दाब:
Pg = P - P0 = ρ g h
3. द्रवस्थैतिक विरोधाभास एवं अंतःसंबंधित पात्र
समान आधार क्षेत्रफल A वाले भिन्न-भिन्न आकृतियों के पात्रों (जैसे बेलनाकार, शंक्वाकार, अथवा फ्लास्क रूपी) में समान ऊंचाई h तक एक ही द्रव भरा जाए, तो:
- यद्यपि चौड़े शंक्वाकार पात्र में द्रव का कुल भार संकीर्ण पात्र की तुलना में बहुत अधिक होता है, फिर भी आधार पर लगने वाला दाब पूर्णतः समान होता है: P = ρ g h।
- परिणामस्वरूप, आधार पर आरोपित नीचे की ओर कुल प्रणोद F = P · A = ρ g h A सभी पात्रों में ठीक समान होता है।
- विरोधाभास का समाधान: बाहर की ओर फैली दीवारों वाले पात्र में अतिरिक्त द्रव का भार पात्र की तिरछी दीवारों द्वारा द्रव पर ऊपर की ओर लगाए गए अभिलंब प्रतिक्रिया बल के घटक द्वारा संतुलित होता है। भीतर की ओर झुकी दीवारों में दीवारें द्रव को नीचे दबाती हैं, जो कम भार की क्षतिपूर्ति करती हैं।
4. पास्कल का नियम एवं द्रवचालित मशीनें
ब्लेज पास्कल (1653) ने द्रवस्थैतिकी का मूलभूत सिद्धांत प्रतिपादित किया:
द्रवचालित उत्थापक (Hydraulic Lift)
द्रवचालित लिफ्ट में दो परस्पर जुड़ी हुई बेलनाकार नलियां होती हैं जिनमें असंपीड्य तेल भरा होता है। इनमें घर्षणरहित वायुरोधी पिस्टन लगे होते हैं जिनके अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल क्रमशः A1 (छोटा निवेशी पिस्टन) तथा A2 (बड़ा निर्गत पिस्टन) हैं:
निवेशी बल F1 निर्गत बल F2 (भारी वाहन)
| |
v v
[ पिस्टन A1 ] [ पिस्टन A2 ]
============== ==============
| तरल | | तरल |
| delta P |================================| delta P |
+------------+ असंपीड्य हाइड्रोलिक तेल +------------+
दाब संचरण: delta P = F1 / A1 = F2 / A2
छोटे पिस्टन पर निवेशी बल F1 लगाने से उत्पन्न अतिरिक्त दाब:
पास्कल के नियमानुसार, यह संपूर्ण दाब Δ P बड़े पिस्टन (क्षेत्रफल A2) पर संचरित हो जाता है:
अतः ऊपर की ओर प्राप्त होने वाला विशाल उत्थापक बल F2 है:
कार्य का संरक्षण: चूंकि द्रव असंपीड्य है, अतः छोटे पिस्टन द्वारा विस्थापित द्रव का आयतन बड़े पिस्टन द्वारा विस्थापित आयतन के बराबर होता है (A1 x1 = A2 x2)। इसलिए Win = F1 x1 = F2 x2 = Wout। बल का यह गुणन विस्थापन दूरी के समझौते पर प्राप्त होता है!
5. दाब मापन यंत्र: बैरोमीटर एवं मैनोमीटर
टोरिसेली का पारा बैरोमीटर (वायुदाबमापी)
पारे से पूरी तरह भरी एक मीटर लंबी कांच की नली को पारे से भरे एक पात्र में उल्टा खड़ा किया जाता है। नली में पारा तब तक नीचे गिरता है जब तक कि नली के पारे के स्तंभ का द्रवस्थैतिक दाब बाहर के वायुमंडलीय दाब के बराबर न हो जाए:
- मानक समुद्र तल पर: पारे के स्तंभ की ऊंचाई h = 0.76 m = 760 mm होती है।
- ρHg = 13.6 × 103 kg/m3,g = 9.8 m/s2:
P0 = (13600)(9.8)(0.76) = 1.013 × 105 N/m2
- टोरिसेली का निर्वात (Torricellian Vacuum): पारे के स्तंभ के ऊपर बंद सिरे का रिक्त स्थान 'टोरिसेली का निर्वात' कहलाता है, जिसमें केवल नगण्य पारे की वाष्प होती है (≈ 0.16 Pa), अतः Ptop ≈ 0।
खुली नली मैनोमीटर (दाबांतरमापी)
घनत्व ρ वाले द्रव से भरी U-आकार की नली की एक भुजा गैस कक्ष से जुड़ी होती है (दाब P) और दूसरी भुजा वायुमंडल में खुली होती है (P0):
6. त्वरित निर्देश तंत्रों में तरल
स्थिति A: क्षैतिज दिशा में त्वरण a से त्वरित पात्र
जब पात्र +x दिशा में त्वरण a से त्वरित होता है, तो द्रव के कणों पर -x दिशा में जड़त्वीय छद्म बल आरोपित होता है। कुल प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण g⃗eff = g⃗ - a⃗ = -aî - gk̂ होता है।
चूंकि तरल का मुक्त पृष्ठ सदैव g⃗eff के अभिलंबवत संतुलित होता है, अतः मुक्त पृष्ठ क्षैतिज से θ कोण पर झुक जाता है:
समान क्षैतिज गहराई पर L दूरी पर स्थित दो बिंदुओं के मध्य दाबांतर:
स्थिति B: ऊर्ध्वाधर दिशा में त्वरण a से त्वरित पात्र
- ऊपर की ओर त्वरण +a: प्रभावी गुरुत्व geff = g + a ⇒ P = P0 + ρ(g + a)h।
- नीचे की ओर त्वरण -a: प्रभावी गुरुत्व geff = g - a ⇒ P = P0 + ρ(g - a)h।
- स्वतंत्र रूप से गिरती लिफ्ट (a = g): geff = 0 ⇒ P = P0 (संपूर्ण द्रव में गेज दाब शून्य हो जाता है)।
JEE एवं NEET हल किए गए अभ्यास प्रश्न
उठाया जाने वाला निर्गत भार:
पास्कल के नियमानुसार:
व्यासों के मान रखने पर:
इस प्रकार, मात्र 490 N (लगभग 50 kg भार उठाने के बराबर) का प्रयास बल लगाकर पूरी 1800 kg की भारी कार को आसानी से उठाया जा सकता है।
1. जल के मुक्त पृष्ठ का क्षैतिज से झुकाव कोण:
2. तली पर क्षैतिज दूरी L = 4 m पर स्थित पिछली व अगली दीवारों के बीच दाबांतर:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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