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कक्षा 11 · भौतिकीJEE MAIN × NEETEnglish
§ 9.3NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 9

तरल गतिकी: सातत्य समीकरण, बर्नूली का प्रमेय एवं टोरिसेली का नियम

गतिशील तरलों के अध्ययन को तरल गतिकी (Fluid Dynamics / Hydrodynamics) कहा जाता है। जटिल प्रवाह तंत्रों के सरल एवं सटीक विश्लेषण हेतु हम आदर्श तरल (Ideal Fluid) की संकल्पना का उपयोग करते हैं, जो: (1) असंपीड्य (ρ = स्थिरांक), (2) अश्यान (η = 0), (3) अपरिवर्ती धारारेखीय प्रवाह में, तथा (4) अघूर्णी होता है।

1. धारारेखीय प्रवाह एवं सातत्य समीकरण

अपरिवर्ती या धारारेखीय प्रवाह (Streamline Flow) में तरल का प्रत्येक कण किसी निश्चित बिंदु से गुजरते समय उसी पथ का अनुसरण करता है तथा उसी वेग से गति करता है जिससे उससे पूर्ववर्ती कण गुजरा था। किसी धारारेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर तरल के वेग की दिशा व्यक्त करती है। दो धारारेखाएं कभी परस्पर प्रतिच्छेद नहीं कर सकतीं, अन्यथा प्रतिच्छेद बिंदु पर एक ही कण के दो भिन्न वेग हो जाएंगे।

               सिरा 1 (प्रवेश)                                सिरा 2 (संकीर्ण कंठ)
               क्षेत्रफल A1, वेग v1                         क्षेत्रफल A2, वेग v2
               +-----------------                            /----------------+
               |                                            /                 |
               |  -----> v1       _/       -----> v2 |
               |                    [ संकरा भाग: A2 < A1 ]                   |
               +-----------------/                          -----------------+
                                         v2 > v1
                        द्रव्यमान संरक्षण: A1 * v1 = A2 * v2
      
चित्र 9.3A: असमान अनुप्रस्थ काट वाली नली में असंपीड्य तरल का प्रवाह, जो द्रव्यमान संरक्षण (सातत्य) को प्रदर्शित करता है।

द्रव्यमान संरक्षण के नियमानुसार, समय अंतराल Δ t में नली में प्रवेश करने वाले तरल का द्रव्यमान उसी समय अंतराल में बाहर निकलने वाले द्रव्यमान के बराबर होना चाहिए:

Δ m1 = Δ m2 ⇒ ρ1 A1 v1 Δ t = ρ2 A2 v2 Δ t

असंपीड्य तरल के लिए (ρ1 = ρ2 = ρ):

सातत्य समीकरण (Equation of Continuity):
A1 v1 = A2 v2 = Q = dV/dt = नियत आयतन प्रवाह दर
भौतिक निष्कर्ष: तरल का वेग अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है (v ∝ 1/A)। जहाँ नली संकीर्ण होती है वहाँ तरल का वेग बढ़ जाता है; जहाँ नली चौड़ी होती है वहाँ वेग घट जाता है।

2. बर्नूली के प्रमेय की व्युत्पत्ति

बर्नूली का प्रमेय (1738) वास्तव में किसी अश्यान, असंपीड्य तरल के अपरिवर्ती धारारेखीय प्रवाह के लिए कार्य-ऊर्जा प्रमेय का मूलभूत रूप है:

ऊंचाई h1 से h2 तक असमान नली में प्रवाहित असंपीड्य तरल पर विचार करें। समयांतराल Δ t में:

  • प्रवेश सिरे पर दाब बल द्वारा किया गया कार्य: W1 = F1 Δ x1 = P1 A1 (v1 Δ t) = P1 Δ V।
  • निर्गत सिरे पर दाब बल द्वारा किया गया कार्य: W2 = -F2 Δ x2 = -P2 A2 (v2 Δ t) = -P2 Δ V।
  • दाब बलों द्वारा कुल किया गया कार्य: Wnet = (P1 - P2)Δ V।
  • गतिज ऊर्जा में परिवर्तन: Δ K = 1/2Δ m (v22 - v12) = 1/2ρ Δ V (v22 - v12)।
  • गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन: Δ U = Δ m g (h2 - h1) = ρ Δ V g (h2 - h1)।

कार्य-ऊर्जा प्रमेय लागू करने पर (Wnet = Δ K + Δ U):

(P1 - P2)Δ V = 1/2ρ Δ V (v22 - v12) + ρ g Δ V (h2 - h1)

पदों को पुनर्व्यवस्थित करने पर:

बर्नूली का समीकरण:
P1 + 1/2ρ v12 + ρ g h1 = P2 + 1/2ρ v22 + ρ g h2
P + 1/2ρ v2 + ρ g h = धारारेखा के अनुदिश स्थिरांक

शीर्ष (Head) के रूप में निरूपण

समीकरण को ρ g से विभाजित करने पर प्रत्येक पद लंबाई के मात्रक (मीटर) में प्राप्त होता है:

P/(ρ g) + v2/2g + h = कुल शीर्ष (स्थिरांक)
  • P/(ρ g) = दाब शीर्ष (Pressure Head)
  • v2/2g = वेग शीर्ष (Velocity Head)
  • h = गुरुत्वीय / उच्चता शीर्ष (Elevation Head)

3. टोरिसेली का बहिःस्राव नियम एवं टंकी खाली होने का समय

कुल गहराई H तक द्रव से भरी एक बड़ी खुली टंकी की दीवार में मुक्त पृष्ठ से h गहराई नीचे बने सूक्ष्म छिद्र (क्षेत्रफल a, जहाँ a ≪ A) से द्रव के बहिःस्राव पर विचार करें:

       मुक्त पृष्ठ: तल 1 (क्षेत्रफल A, P1 = P0, v1 लगभग 0)
       ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
       |                                                   |
       |                   |                               |
       |                   | h                             |
       |                   v                               |
       |                छिद्र: तल 2 (क्षेत्रफल a, P2 = P0) =====> बहिःस्राव वेग v2
       |                                                   |
       |                                      (H - h)      |
       +---------------------------------------------------+
       |<----------------- क्षैतिज परास R ----------------->|
      
चित्र 9.3B: टोरिसेली की टंकी: h गहराई पर स्थित छिद्र से द्रव का बहिःस्राव तथा प्रक्षेप्य गति।

मुक्त पृष्ठ (1) और छिद्र (2) के बीच बर्नूली समीकरण लागू करने पर:

P0 + 1/2ρ v12 + ρ g H = P0 + 1/2ρ v22 + ρ g (H - h)

सातत्य समीकरण से v1 = (a/A)v2 ≈ 0 रखने पर:

ρ g h = 1/2ρ v22 ⇒ v = √(2gh)

बहिःस्राव जेट की शुद्धगतिकी (Kinematics)

  • फर्श तक पहुंचने का उड्डयन काल: ऊर्ध्वाधर ऊंचाई (H - h) से गिरने का समय:
    t = √((2(H - h))/g)
  • क्षैतिज परास (R):
    R = v · t = √(2gh) × √((2(H - h))/g) = 2√(h(H − h))
  • अधिकतम परास की शर्त: R का h के सापेक्ष अवकलन करने पर, परास तब अधिकतम होती है जब छिद्र ठीक मध्य गहराई (h = H/2) पर बनाया जाए:
    Rmax = 2√((H/2)(H − H/2)) = H
  • पूरक गहराइयां: h तथा (H - h) गहराइयों पर बने छिद्रों से प्राप्त क्षैतिज परास एकसमान (R1 = R2) होती है।
  • टंकी को पूर्णतः खाली होने में लगा समय:
    Tempty = (A/a)√(2H/g)

4. अनुप्रयोग: वेंचुरीमापी, वायुयान का पंख एवं मैग्नस प्रभाव

वेंचुरीमापी (Venturimeter)

वेंचुरीमापी नली में बहने वाले द्रव की प्रवाह दर Q मापने का उपकरण है। इसमें चौड़ी नली (क्षेत्रफल A1) एक संकीर्ण कंठ (क्षेत्रफल A2 < A1) से जुड़ी होती है:

सातत्य से v2 = (A1 / A2)v1 > v1। बर्नूली प्रमेय के अनुसार वेग बढ़ने से कंठ पर दाब घट जाता है (P2 < P1):

P1 - P2 = 1/2ρ (v22 - v12) = ρm g h

आयतन प्रवाह दर Q का सूत्र:

Q = A1 v1 = A1 A2 √((2(P1 - P2))/(ρ (A12 - A22))) = A1 A2 √((2ρm g h)/(ρ (A12 - A22)))

गतिक उत्थापक बल (वायुयान का पंख - Aerofoil)

हवाई जहाज के पंख का ऊपरी पृष्ठ उत्तल तथा निचला पृष्ठ लगभग समतल बनाया जाता है। आगे बढ़ने पर पंख के ऊपर धारारेखाएं घनी हो जाती हैं, जिससे ऊपर वायु का वेग बढ़ जाता है (vtop > vbottom)। बर्नूली के नियमानुसार ऊपर दाब घट जाता है (Ptop < Pbottom)। इस दाबांतर से ऊपर की ओर गतिक उत्थापक बल (Dynamic Lift) प्राप्त होता है:

Flift = (Pbottom - Ptop)A = 1/2ρ (vtop2 - vbottom2)A

JEE एवं NEET हल किए गए अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1: क्षैतिज नली में प्रवाहित जल का वेग 10 cm व्यास वाले स्थान पर 2 m/s तथा दाब 2 × 105 Pa है। 5 cm व्यास वाले संकीर्ण स्थान पर जल का दाब ज्ञात कीजिए। (ρ = 1000 kg/m3)।
हल:
1. सातत्य समीकरण से संकीर्ण भाग में वेग:
A1 v1 = A2 v2 ⇒ d12 v1 = d22 v2

v2 = v1 (d1/d2)2 = 2 × (10/5)2 = 2 × 4 = 8 m/s

2. क्षैतिज नली के लिए बर्नूली समीकरण (h1 = h2):
P1 + 1/2ρ v12 = P2 + 1/2ρ v22

P2 = P1 - 1/2ρ (v22 - v12) = 2 × 105 - 1/2(1000)(82 - 22)

P2 = 200000 - 500(64 - 4) = 200000 - 30000 = 1.70 × 105 Pa = 170 kPa
प्रश्न 2: H = 5 m ऊंचाई तक जल से भरे बेलनाकार टैंक में जल के मुक्त पृष्ठ से h = 1.25 m गहराई पर एक छोटा छिद्र खोला जाता है। ज्ञात कीजिए: (a) बहिःस्राव वेग, (b) फर्श पर जल की क्षैतिज परास, तथा (c) वह दूसरी गहराई जिस पर छिद्र करने पर समान परास प्राप्त होगी। (g = 10 m/s2 लें)।
हल:
(a) टोरिसेली के नियमानुसार बहिःस्राव वेग:
v = √(2gh) = √(2 × 10 × 1.25) = √(25) = 5 m/s

(b) फर्श पर क्षैतिज परास:
R = 2√(h(H − h)) = 2√(1.25 × (5 − 1.25)) = 2√(1.25 × 3.75) = 2√(4.6875) ≈ 4.33 m

(c) समान परास देने वाली पूरक गहराई:
h' = H - h = 5 - 1.25 = 3.75 m

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. आदर्श तरल के क्या गुण होते हैं?
आदर्श तरल असंपीड्य, अश्यान, धारारेखीय प्रवाह युक्त तथा अघूर्णी होता है।
Q2. बर्नूली का प्रमेय किस संरक्षण नियम पर आधारित है?
बर्नूली का प्रमेय ऊर्जा संरक्षण (कार्य-ऊर्जा प्रमेय) के नियम पर आधारित है।
Q3. टंकी में अधिकतम परास के लिए छिद्र कहाँ होना चाहिए?
अधिकतम क्षैतिज परास (Rmax = H) प्राप्त करने के लिए छिद्र टंकी के ठीक मध्य में (h = H/2) होना चाहिए।
Q4. मैग्नस प्रभाव क्या है?
घूमती हुई गेंद के दोनों ओर वायु के वेग में अंतर के कारण उत्पन्न दाबांतर से लगने वाला पाश्विक बल मैग्नस प्रभाव कहलाता है।
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