तरल गतिकी: सातत्य समीकरण, बर्नूली का प्रमेय एवं टोरिसेली का नियम
गतिशील तरलों के अध्ययन को तरल गतिकी (Fluid Dynamics / Hydrodynamics) कहा जाता है। जटिल प्रवाह तंत्रों के सरल एवं सटीक विश्लेषण हेतु हम आदर्श तरल (Ideal Fluid) की संकल्पना का उपयोग करते हैं, जो: (1) असंपीड्य (ρ = स्थिरांक), (2) अश्यान (η = 0), (3) अपरिवर्ती धारारेखीय प्रवाह में, तथा (4) अघूर्णी होता है।
1. धारारेखीय प्रवाह एवं सातत्य समीकरण
अपरिवर्ती या धारारेखीय प्रवाह (Streamline Flow) में तरल का प्रत्येक कण किसी निश्चित बिंदु से गुजरते समय उसी पथ का अनुसरण करता है तथा उसी वेग से गति करता है जिससे उससे पूर्ववर्ती कण गुजरा था। किसी धारारेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर तरल के वेग की दिशा व्यक्त करती है। दो धारारेखाएं कभी परस्पर प्रतिच्छेद नहीं कर सकतीं, अन्यथा प्रतिच्छेद बिंदु पर एक ही कण के दो भिन्न वेग हो जाएंगे।
सिरा 1 (प्रवेश) सिरा 2 (संकीर्ण कंठ)
क्षेत्रफल A1, वेग v1 क्षेत्रफल A2, वेग v2
+----------------- /----------------+
| / |
| -----> v1 _/ -----> v2 |
| [ संकरा भाग: A2 < A1 ] |
+-----------------/ -----------------+
v2 > v1
द्रव्यमान संरक्षण: A1 * v1 = A2 * v2
द्रव्यमान संरक्षण के नियमानुसार, समय अंतराल Δ t में नली में प्रवेश करने वाले तरल का द्रव्यमान उसी समय अंतराल में बाहर निकलने वाले द्रव्यमान के बराबर होना चाहिए:
असंपीड्य तरल के लिए (ρ1 = ρ2 = ρ):
2. बर्नूली के प्रमेय की व्युत्पत्ति
बर्नूली का प्रमेय (1738) वास्तव में किसी अश्यान, असंपीड्य तरल के अपरिवर्ती धारारेखीय प्रवाह के लिए कार्य-ऊर्जा प्रमेय का मूलभूत रूप है:
ऊंचाई h1 से h2 तक असमान नली में प्रवाहित असंपीड्य तरल पर विचार करें। समयांतराल Δ t में:
- प्रवेश सिरे पर दाब बल द्वारा किया गया कार्य: W1 = F1 Δ x1 = P1 A1 (v1 Δ t) = P1 Δ V।
- निर्गत सिरे पर दाब बल द्वारा किया गया कार्य: W2 = -F2 Δ x2 = -P2 A2 (v2 Δ t) = -P2 Δ V।
- दाब बलों द्वारा कुल किया गया कार्य: Wnet = (P1 - P2)Δ V।
- गतिज ऊर्जा में परिवर्तन: Δ K = 1/2Δ m (v22 - v12) = 1/2ρ Δ V (v22 - v12)।
- गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन: Δ U = Δ m g (h2 - h1) = ρ Δ V g (h2 - h1)।
कार्य-ऊर्जा प्रमेय लागू करने पर (Wnet = Δ K + Δ U):
पदों को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
शीर्ष (Head) के रूप में निरूपण
समीकरण को ρ g से विभाजित करने पर प्रत्येक पद लंबाई के मात्रक (मीटर) में प्राप्त होता है:
- P/(ρ g) = दाब शीर्ष (Pressure Head)
- v2/2g = वेग शीर्ष (Velocity Head)
- h = गुरुत्वीय / उच्चता शीर्ष (Elevation Head)
3. टोरिसेली का बहिःस्राव नियम एवं टंकी खाली होने का समय
कुल गहराई H तक द्रव से भरी एक बड़ी खुली टंकी की दीवार में मुक्त पृष्ठ से h गहराई नीचे बने सूक्ष्म छिद्र (क्षेत्रफल a, जहाँ a ≪ A) से द्रव के बहिःस्राव पर विचार करें:
मुक्त पृष्ठ: तल 1 (क्षेत्रफल A, P1 = P0, v1 लगभग 0)
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
| |
| | |
| | h |
| v |
| छिद्र: तल 2 (क्षेत्रफल a, P2 = P0) =====> बहिःस्राव वेग v2
| |
| (H - h) |
+---------------------------------------------------+
|<----------------- क्षैतिज परास R ----------------->|
मुक्त पृष्ठ (1) और छिद्र (2) के बीच बर्नूली समीकरण लागू करने पर:
सातत्य समीकरण से v1 = (a/A)v2 ≈ 0 रखने पर:
बहिःस्राव जेट की शुद्धगतिकी (Kinematics)
- फर्श तक पहुंचने का उड्डयन काल: ऊर्ध्वाधर ऊंचाई (H - h) से गिरने का समय:
t = √((2(H - h))/g)
- क्षैतिज परास (R):
R = v · t = √(2gh) × √((2(H - h))/g) = 2√(h(H − h))
- अधिकतम परास की शर्त: R का h के सापेक्ष अवकलन करने पर, परास तब अधिकतम होती है जब छिद्र ठीक मध्य गहराई (h = H/2) पर बनाया जाए:
Rmax = 2√((H/2)(H − H/2)) = H
- पूरक गहराइयां: h तथा (H - h) गहराइयों पर बने छिद्रों से प्राप्त क्षैतिज परास एकसमान (R1 = R2) होती है।
- टंकी को पूर्णतः खाली होने में लगा समय:
Tempty = (A/a)√(2H/g)
4. अनुप्रयोग: वेंचुरीमापी, वायुयान का पंख एवं मैग्नस प्रभाव
वेंचुरीमापी (Venturimeter)
वेंचुरीमापी नली में बहने वाले द्रव की प्रवाह दर Q मापने का उपकरण है। इसमें चौड़ी नली (क्षेत्रफल A1) एक संकीर्ण कंठ (क्षेत्रफल A2 < A1) से जुड़ी होती है:
सातत्य से v2 = (A1 / A2)v1 > v1। बर्नूली प्रमेय के अनुसार वेग बढ़ने से कंठ पर दाब घट जाता है (P2 < P1):
आयतन प्रवाह दर Q का सूत्र:
गतिक उत्थापक बल (वायुयान का पंख - Aerofoil)
हवाई जहाज के पंख का ऊपरी पृष्ठ उत्तल तथा निचला पृष्ठ लगभग समतल बनाया जाता है। आगे बढ़ने पर पंख के ऊपर धारारेखाएं घनी हो जाती हैं, जिससे ऊपर वायु का वेग बढ़ जाता है (vtop > vbottom)। बर्नूली के नियमानुसार ऊपर दाब घट जाता है (Ptop < Pbottom)। इस दाबांतर से ऊपर की ओर गतिक उत्थापक बल (Dynamic Lift) प्राप्त होता है:
JEE एवं NEET हल किए गए अभ्यास प्रश्न
1. सातत्य समीकरण से संकीर्ण भाग में वेग:
2. क्षैतिज नली के लिए बर्नूली समीकरण (h1 = h2):
(a) टोरिसेली के नियमानुसार बहिःस्राव वेग:
(b) फर्श पर क्षैतिज परास:
(c) समान परास देने वाली पूरक गहराई:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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