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कक्षा 11 · भौतिकीJEE MAIN × NEETEnglish
§ 9.2NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 9

आर्किमिडीज का सिद्धांत, उत्प्लावकता एवं प्लवन के नियम

जब किसी वस्तु को किसी द्रव में डुबोया जाता है, तो वह वायु की तुलना में हल्की प्रतीत होती है। दैनिक जीवन का यह अनुभव उत्प्लावकता (Buoyancy) का परिणाम है: अर्थात किसी स्थिर तरल द्वारा उसमें डूबी वस्तु पर ऊपर की ओर लगाया जाने वाला परिणामी बल। इसका मात्रात्मक अध्ययन ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सिराक्यूज के ग्रीक वैज्ञानिक आर्किमिडीज ने किया था।

1. उत्प्लावकता की भौतिक उत्पत्ति एवं व्युत्पत्ति

घनत्व ρf वाले द्रव में डूबे हुए ऊंचाई h और अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A वाले एक ठोस गुटके पर विचार करें:

       मुक्त पृष्ठ (द्रव तल)        ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
                                    |                     |
                                    |         h1         |
                                    |                     |
                     ऊपरी फलक:      +---------------------+  नीचे की ओर प्रणोद:
                                    |                     |  F1 = P1 * A
                                    |      ठोस पिंड       |  P1 = P0 + rhof * g * h1
                                    |      ऊंचाई h        |
                                    |      आयतन V         |
                     निचला फलक:     +---------------------+  ऊपर की ओर प्रणोद:
                                                             F2 = P2 * A
                                                             P2 = P0 + rhof * g * h2
             
         परिणामी ऊर्ध्वाधर बल (उत्प्लावन बल):
         FB = F2 - F1 = (P2 - P1) * A = rhof * g * (h2 - h1) * A = rhof * V * g
      
चित्र 9.2A: ऊर्ध्वाधर द्रवस्थैतिक दाबांतर (P2 > P1) से उत्प्लावन बल की व्युत्पत्ति।
  • ऊपरी फलक पर द्रवस्थैतिक दाब: P1 = P0 + ρf g h1 ⇒ नीचे की ओर बल F1 = P1 A।
  • निचले फलक पर द्रवस्थैतिक दाब: P2 = P0 + ρf g h2 ⇒ ऊपर की ओर बल F2 = P2 A।
  • पार्श्व बल सममित रूप से एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं।
  • परिणामी ऊपर की ओर बल (उत्प्लावन बल / उत्क्षेप FB):
    FB = F2 - F1 = (P2 - P1)A = ρf g (h2 - h1)A
  • चूंकि (h2 - h1)A = Vsubmerged:
    FB = Vsub ρf g = mdisp g = विस्थापित तरल का भार

2. आर्किमिडीज का सिद्धांत एवं आभासी भार

आर्किमिडीज का सिद्धांत (Archimedes' Principle): जब कोई वस्तु किसी स्थिर तरल में पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से डुबोई जाती है, तो उस पर ऊपर की दिशा में एक उत्प्लावन बल कार्य करता है जिसका परिमाण वस्तु द्वारा विस्थापित तरल के भार के ठीक बराबर होता है। यह उत्प्लावन बल विस्थापित तरल के गुरुत्व केंद्र से होकर गुजरता है, जिसे उत्प्लावकता केंद्र (Center of Buoyancy) कहते हैं।

डूबी वस्तु का आभासी भार (Apparent Weight)

जब वास्तविक द्रव्यमान m, आयतन V तथा घनत्व ρs वाले किसी ठोस को घनत्व ρf वाले द्रव (ρs > ρf) में कमानीदार तुला से लटकाया जाता है:

  • वायु/निर्वात में वास्तविक भार: W = mg = V ρs g।
  • ऊपर की ओर उत्प्लावन बल: FB = V ρf g।
  • आभासी भार (Wapp):
    Wapp = W - FB = V ρs g - V ρf g = V ρs g (1 - ρf/ρs)
    Wapp = W ( 1 - ρf/ρs )
  • भार में भिन्नात्मक कमी:
    (Δ W)/W = (W - Wapp)/W = ρf/ρs
  • ठोस का आपेक्षिक घनत्व (विशिष्ट गुरुत्व):
    RDs = ρs/ρw = (वायु में भार)/(जल में भार में कमी) = Wair/(Wair - Wwater)

3. प्लवन का नियम (Law of Floatation)

कोई वस्तु किसी द्रव में तभी तैरती है जब ऊपर की ओर लगने वाला उत्प्लावन बल वस्तु के नीचे की ओर लगने वाले गुरुत्वीय भार को संतुलित कर ले (FB = W):

स्थिति घनत्व संबंध बल संबंध साम्यावस्था प्रकृति
स्थिति 1: डूबना (Sinking) ρs > ρf W > FB,max पिंड a = g(1 - ρf/ρs)के त्वरण से नीचे गिरकर तली पर बैठ जाता है। तली की अभिलंब प्रतिक्रिया N = W - FB।
स्थिति 2: उदासीन प्लवन ρs = ρf W = FB,max पिंड द्रव के भीतर किसी भी गहराई पर पूर्णतः डूबकर उदासीन साम्यावस्था में तैरता रहता है।
स्थिति 3: आंशिक प्लवन ρs < ρf W = FB (Vin < V) पिंड का कुछ भाग बाहर रहता है तथा निमग्न आयतन अनुपात Vin/V = ρs/ρf के साथ तैरता है।

निमग्न आयतन सूत्र (Submerged Fraction)

कुल आयतन V तथा निमग्न आयतन Vin वाली तैरती वस्तु के लिए:

W = FB ⇒ V ρs g = Vin ρf g ⇒ Vin/V = ρs/ρf

द्रव के बाहर रहने वाले आयतन का अंश:

Vout/V = 1 - Vin/V = 1 - ρs/ρf = (ρf - ρs)/ρf
बर्फ जल पर क्यों तैरती है: 0°C पर शुद्ध बर्फ का घनत्व ρice ≈ 917 kg/m3 होता है, जबकि0°C पर द्रव जल का घनत्व ρw ≈ 1000 kg/m3 होता है।
Vin/V = 917/1000 ≈ 91.7%
अतः हिमशैल (iceberg) का लगभग 92% भाग जल के नीचे डूबा रहता है, और केवल ≈ 8% भाग ही समुद्र की सतह के ऊपर दिखाई देता है!

4. उन्नत प्लवन: स्तरित द्रव एवं पिघलती बर्फ

दो अमिश्रणीय द्रवों के अंतरापृष्ठ पर प्लवन

अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A और लंबाई L का ठोस बेलन घनत्व ρ1 और ρ2(ρ1 < ρs < ρ2) वाले दो अमिश्रणीय द्रवों की सीमा पर ऊर्ध्वाधर तैर रहा है, जहाँ लंबाई L1 ऊपरी द्रव में और L2 निचले द्रव में है (L = L1 + L2):

W = FB1 + FB2 ⇒ A L ρs g = A L1 ρ1 g + A L2 ρ2 g
L ρs = L1 ρ1 + L2 ρ2

तैरती हुई बर्फ के पिघलने पर जल स्तर में परिवर्तन

  • स्थिति A: शुद्ध जल में शुद्ध बर्फ: जल का स्तर अपरिवर्तित रहता है। m द्रव्यमान का तैरता बर्फ का टुकड़ा Vdisp = m / ρw आयतन का जल विस्थापित करता है। पिघलने पर बना जल भी m द्रव्यमान और Vmelt = m / ρw = Vdisp आयतन का होता है। पिघला जल ठीक उसी आयतन को भर देता है जो पहले विस्थापित था।
  • स्थिति B: बर्फ में वायु का बुलबुला समाहित हो: जल का स्तर अपरिवर्तित रहता है, क्योंकि वायु का द्रव्यमान नगण्य होता है।
  • स्थिति C: बर्फ में सीसे की गोली या पत्थर धंसा हो (ρlead > ρw): जल का स्तर गिर जाता है (नीचे आता है)! प्रारंभ में भारी पत्थर बर्फ के साथ तैरते हुए अपने भार के तुल्य जल विस्थापित करता है: V1 = mlead / ρw। पिघलने पर पत्थर तली में बैठ जाता है और केवल अपने आयतन के बराबर जल विस्थापित करता है: V2 = mlead / ρlead। चूंकि ρlead > ρw है, अतः V2 < V1, इसलिए जल स्तर गिर जाता है।
  • स्थिति D: बर्फ में कॉर्क का टुकड़ा धंसा हो (ρcork < ρw): जल स्तर अपरिवर्तित रहता है, क्योंकि बर्फ पिघलने के बाद भी कॉर्क तैरता रहता है।

JEE एवं NEET हल किए गए अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1: धातु के एक टुकड़े का वायु में भार 210 g, जल में भार 180 g तथा एक अज्ञात द्रव में भार 120 g है। गणना कीजिए: (a) धातु का आपेक्षिक घनत्व, तथा (b) अज्ञात द्रव का घनत्व।
हल:
(a) जल में भार में कमी:
Δ Ww = Wair - Wwater = 210 - 180 = 30 g-wt

चूंकि Δ Ww = V ρw g = 30 g-wt, अतः धातु का आयतन V = 30 cm3 है।
धातु का आपेक्षिक घनत्व:
RDmetal = Wair/(Δ Ww) = 210/30 = 7.0

(b) अज्ञात द्रव में भार में कमी:
Δ WL = Wair - WL = 210 - 120 = 90 g-wt

चूंकि Δ WL = V ρL g:
ρL = (Δ WL)/V = (90 g)/(30 cm3) = 3.0 g/cm3 = 3000 kg/m3
प्रश्न 2: घनत्व 900 kg/m3 तथा लंबाई 1 m का लकड़ी का एक बेलन जल (ρw = 1000 kg/m3) तथा तेल (ρoil = 800 kg/m3) वाले पात्र में ऊर्ध्वाधर तैरता है। यदि तेल की परत पर्याप्त गहरी हो, तो जल में डूबी बेलन की लंबाई ज्ञात कीजिए।
हल:
माना L = 1 m, जल में डूबी लंबाई Lw तथा तेल में डूबी लंबाई (1 − Lw)। प्लवन की शर्त (W = FB,जल + FB,तेल) से, A g से भाग देने पर:
(1)(900) = Lw(1000) + (1 − Lw)(800)

900 = 200 Lw + 800 ⇒ Lw = 0.5 m

अतः बेलन का आधा भाग (0.5 m) जल में तथा 0.5 m तेल में रहता है। जाँच: लकड़ी (900 kg/m3) तेल से भारी परंतु जल से हल्की है, इसलिए वह दोनों द्रवों की सीमा पर टिकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. उत्प्लावन बल का भौतिक कारण क्या है?
गुरुत्व के कारण द्रव में गहराई के साथ दाब बढ़ता है। डूबी वस्तु के निचले तल पर ऊपर की ओर प्रणोद ऊपरी तल के नीचे की ओर प्रणोद से अधिक होता है, जिससे परिणामी उत्प्लावन बल FB = V * rhof * g उत्पन्न होता है।
Q2. आर्किमिडीज का सिद्धांत क्या है?
तरल में डूबी वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल वस्तु द्वारा विस्थापित तरल के भार के ठीक बराबर होता है।
Q3. प्लवन की साम्यावस्था की शर्तें क्या हैं?
यदि ठोस का घनत्व द्रव से कम हो, तो वह आंशिक रूप से डूबकर तैरता है (Vin / V = rhos / rhof); यदि घनत्व समान हो, तो वह पूर्णतः निमग्न होकर तैरता है; यदि घनत्व अधिक हो, तो वह डूब जाता है।
Q4. तैरती बर्फ के पिघलने पर जल का स्तर क्यों नहीं बदलता?
तैरती बर्फ अपने द्रव्यमान के बराबर जल विस्थापित करती है। पिघलने पर बनी जल की मात्रा ठीक उसी विस्थापित आयतन को भर देती है, इसलिए स्तर अपरिवर्तित रहता है।
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