§ 12.5NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 12
माध्य मुक्त पथ, संघट्ट गतिकी, श्रांतिकाल एवं ब्राउनी गति
आण्विक संघट्ट गतिकी: यद्यपि गैस अणुओं की चाल सैकड़ों मीटर प्रति सेकंड होती है, फिर भी कमरे में गंध या धुएं को फैलने में कुछ समय लगता है। इसका कारण यह है कि अणु प्रति सेकंड अरबों टक्करें करते हैं और टेढ़े-मेढ़े (जिग-जैग) पथ पर चलते हैं।
1. माध्य मुक्त पथ की परिभाषा
किसी गैस अणु द्वारा दो क्रमागत टक्करों के बीच तय की गई औसत दूरी को माध्य मुक्त पथ (λ) कहते हैं।
2. माध्य मुक्त पथ के सूत्र का निगमन
- माना गैस के अणु d व्यास के दृढ़ गोले हैं।
- दो अणु तभी टकराते हैं जब उनके केंद्रों के बीच की दूरी d या उससे कम हो।
- औसत चाल 〈v〉 से गतिमान अणु Δt समय में σ = π d2 अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल का एक बेलन बनाता है।
- घिरे बेलन का आयतन: Vcyl = π d2 〈v〉 Δt।
- यदि प्रति एकांक आयतन अणुओं की संख्या (संख्या घनत्व) n हो, तो अन्य अणुओं को स्थिर मानने पर टक्करों की संख्या: n · π d2 〈v〉 Δt।
- परंतु वास्तव में सभी अणु गतिशील होते हैं, जिससे दो अणुओं के बीच सापेक्ष वेग vrel = √2 〈v〉 होता है।
- अतः प्रभावी संघट्ट दर = √2 n π d2 〈v〉।
λ = कुल दूरी / टक्करों की संख्या = (〈v〉 Δt) / (√2 n π d2 〈v〉 Δt) = 1 / (√2 · n · π · d2)
3. माध्य मुक्त पथ (λ) की ताप एवं दाब पर निर्भरता
आदर्श गैस समीकरण P · V = N · kB · T से संख्या घनत्व n का मान:
n = N / V = P / (kB · T)
n का मान सूत्र में रखने पर:
λ = (kB · T) / (√2 · π · d2 · P)
| परिस्थिति | निर्भरता संबंध | भौतिक परिणाम |
|---|---|---|
| स्थिर दाब पर (P = नियतांक) | λ ∝ T | दाब नियत रखकर ताप बढ़ाने पर गैस का प्रसरण होता है, संख्या घनत्व n घटता है जिससे माध्य मुक्त पथ बढ़ जाता है। |
| स्थिर ताप पर (T = नियतांक) | λ ∝ 1 / P | ताप नियत रखकर दाब बढ़ाने पर गैस संपीडित होती है, अणु पास आते हैं जिससे माध्य मुक्त पथ घट जाता है। |
| स्थिर आयतन पर (V = नियतांक) | λ = नियतांक | नियत आयतन पर अणुओं का संख्या घनत्व n = N/V स्थिर रहता है, अतः λ ताप या दाब पर निर्भर नहीं करता! |
4. संघट्ट आवृत्ति एवं श्रांतिकाल
- संघट्ट आवृत्ति (Collision Frequency - Z): किसी गैस अणु द्वारा प्रति सेकंड की जाने वाली टक्करों की संख्या:
Z = vavg / λ = √2 · n · π · d2 · vavg
- श्रांतिकाल (Relaxation Time - τ): दो क्रमागत टक्करों के मध्य लगा औसत समयांतराल:
τ = 1 / Z = λ / vavg
कमरे के ताप व वायुमंडलीय दाब पर, λ ≈ 10−7 m तथा τ ≈ 10−10 सेकंड होता है।
5. ब्राउनी गति (Brownian Motion)
वर्ष 1827 में वनस्पतिशास्त्री रॉबर्ट ब्राउन ने जल में निलंबित पराग कणों की निरंतर, टेढ़ी-मेढ़ी (अनियमित) गति का प्रेक्षण किया था।
- सैद्धांतिक व्याख्या: वर्ष 1905 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने सिद्ध किया कि ब्राउनी गति द्रव के अणुओं द्वारा निलंबित कणों पर किए जाने वाले असंतुलित व यादृच्छिक प्रहारों के कारण उत्पन्न होती है।
- महत्व: इसने पदार्थ की आण्विक संरचना तथा गतिज सिद्धांत की भौतिक सत्यता का प्रत्यक्ष एवं अकाट्य प्रमाण प्रस्तुत किया।
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