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कक्षा 11 · भौतिकीJEE MAIN × NEETEnglish
§ 12.1NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 12

गैस नियम, आदर्श गैस अवस्था समीकरण एवं वास्तविक गैसों का व्यवहार

मूल संकल्पना: गैसों का अणुगति सिद्धांत गैसों के स्थूलदर्शीय गुणों (जैसे दाब, ताप और आयतन) की व्याख्या सूक्ष्मदर्शीय आण्विक गति के आधार पर करता है। आदर्श गैस वह काल्पनिक गैस है जिसके अणुओं का आयतन नगण्य होता है तथा उनके मध्य कोई अंतराआण्विक आकर्षण या प्रतिकर्षण बल कार्य नहीं करता।

1. मूलभूत गैस नियम

1. बॉयल का नियम (समतापीय नियम)

स्थिर ताप (T = नियतांक) पर किसी गैस के निश्चित द्रव्यमान का दाब P उसके आयतन V के व्युत्क्रमानुपाती होता है:

P ∝ 1 / V  ⇒  P · V = नियतांक  ⇒  P1V1 = P2V2

स्थिर ताप पर P और V के मध्य खींचा गया वक्र आयताकार अतिपरवलय होता है, जिसे समतापी वक्र (Isotherm) कहते हैं।

2. चार्ल्स का नियम (समदाबीय नियम)

स्थिर दाब (P = नियतांक) पर किसी गैस के निश्चित द्रव्यमान का आयतन V उसके परम ताप T के अनुक्रमानुपाती होता है:

V ∝ T  ⇒  V / T = नियतांक  ⇒  V1 / T1 = V2 / T2

स्थिर दाब पर V और T के मध्य खींची गई सरल रेखा परम शून्य ताप (−273.15 °C) से गुजरती है, जिसे समदाबी रेखा (Isobar) कहते हैं।

3. गे-लुसाक का नियम (दाब नियम)

स्थिर आयतन (V = नियतांक) पर किसी गैस के निश्चित द्रव्यमान का दाब P उसके परम ताप T के अनुक्रमानुपाती होता है:

P ∝ T  ⇒  P / T = नियतांक  ⇒  P1 / T1 = P2 / T2

स्थिर आयतन पर P और T के मध्य प्राप्त सरल रेखा समायतनी रेखा (Isochore) कहलाती है।

4. आवोगाद्रो की परिकल्पना

समान ताप और समान दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है:

V ∝ N  (स्थिर P तथा T पर)

मानक ताप व दाब (STP: 273.15 K एवं 1 atm = 1.013 × 105 Pa) पर किसी भी आदर्श गैस के 1 मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है।

2. आदर्श गैस अवस्था समीकरण

बॉयल, चार्ल्स तथा आवोगाद्रो के नियमों के संयोजन से व्यापक आदर्श गैस समीकरण प्राप्त होता है:

P · V = μ · R · T = (M / M0) · R · T = N · kB · T

जहां:

  • μ (या n): मोलों की संख्या = कुल द्रव्यमान M / मोलर द्रव्यमान M0 = कुल अणुओं की संख्या N / आवोगाद्रो संख्या NA।
  • R: सार्वत्रिक गैस नियतांक = 8.314 J · mol−1 · K−1 ≈ 2.0 cal · mol−1 · K−1 ≈ 0.0821 L · atm · mol−1 · K−1।
  • kB: बोल्ट्जमान नियतांक = R / NA = 1.38 × 10−23 J · K−1।
  • NA: आवोगाद्रो नियतांक = 6.022 × 1023 अणु · mol−1।

3. घनत्व के पदों में आदर्श गैस समीकरण

चूंकि μ = M / M0 तथा गैस का घनत्व ρ = M / V:

P = (ρ / M0) · R · T  ⇒  ρ = P · M0 / (R · T)

नियत ताप पर किसी गैस का घनत्व उसके दाब के अनुक्रमानुपाती होता है (ρ ∝ P)।

4. वास्तविक गैसें बनाम आदर्श गैस: आदर्श व्यवहार की शर्तें

प्रकृति में पाई जाने वाली वास्तविक गैसें (जैसे H2, He, N2, O2) आदर्श गैस समीकरण का पूर्णतः पालन नहीं करतीं। वास्तविक गैसें आदर्श गैस की भांति व्यवहार कब करती हैं?

JEE/NEET स्वर्णिम नियम: वास्तविक गैसें निम्न दाब एवं उच्च ताप (Low Pressure & High Temperature) पर आदर्श गैस की भांति व्यवहार करती हैं।
• निम्न दाब पर आयतन बहुत अधिक होता है, जिससे गैस अणुओं का वास्तविक आयतन पात्र के कुल आयतन की तुलना में नगण्य हो जाता है।
• उच्च ताप पर अणुओं की तीव्र गतिज ऊर्जा दुर्बल अंतराआण्विक आकर्षण बलों को निष्प्रभावी कर देती है।

5. डाल्टन का आंशिक दाब का नियम

परस्पर क्रिया न करने वाली आदर्श गैसों के मिश्रण का कुल दाब P, समान ताप व आयतन पर प्रत्येक गैस द्वारा लगाए गए आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है:

Ptotal = P1 + P2 + P3 + ... = (μ1 + μ2 + μ3 + ...) · (R · T / V)
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