ऊर्जा समविभाजन का नियम, स्वतंत्रता की कोटि एवं गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्माएं
1. स्वतंत्रता की कोटि (Degrees of Freedom - f)
किसी गतिक निकाय की स्थिति तथा विन्यास को पूर्णतः निर्धारित करने हेतु आवश्यक स्वतंत्र निर्देशांकों अथवा स्वतंत्र पदों की कुल संख्या को स्वतंत्रता की कोटि कहते हैं।
1. एकपरमाणुक गैस (He, Ne, Ar, Kr)
एकपरमाणुक अणु एक बिंदु द्रव्यमान की भांति व्यवहार करता है। यह x, y और z अक्षों के अनुदिश गति कर सकता है (3 स्थानांतरीय विधाएं)। स्वयं के केंद्र के परितः इसका जड़त्व आघूर्ण नगण्य होता है।
2. द्विपरमाणुक गैस (O2, N2, H2, CO)
कमरे के सामान्य ताप पर अणु दृढ़ घूर्णी (Rigid Rotator) की भांति व्यवहार करते हैं। इनमें 3 स्थानांतरीय + 2 घूर्णी विधाएं होती हैं (अंतर-नाभिकीय अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण नगण्य होता है)।
उच्च ताप पर कंपन विधाएं भी सक्रिय हो जाती हैं। प्रत्येक कंपन विधा 2 स्वतंत्रता की कोटियां जोड़ती है (1 गतिज + 1 स्थितिज ऊर्जा):
3. रैखिक बहुपरमाणुक गैस (CO2, C2H2)
द्विपरमाणुक अणु के समान इनमें 3 स्थानांतरीय तथा 2 घूर्णी कोटियां होती हैं:
4. अरेखीय बहुपरमाणुक गैस (H2O, NH3, CH4)
इनमें 3 स्थानांतरीय तथा 3 स्वतंत्र घूर्णी अक्ष होते हैं:
2. ऊर्जा समविभाजन का नियम (Law of Equipartition of Energy)
इस शास्त्रीय नियम के अनुसार, परम ताप T पर तापीय साम्यावस्था में किसी निकाय की कुल ऊर्जा उसकी सभी स्वतंत्रता की कोटियों में समान रूप से विभाजित होती है:
- f स्वतंत्रता की कोटियों वाले अणु की औसत गतिज ऊर्जा: 〈E〉 = (f / 2) · kB · T।
- गैस के 1 मोल की कुल आंतरिक ऊर्जा: U = NA · (f / 2) kB T = (f / 2) · R · T।
3. मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएं (CV, CP) तथा रुद्धोष्म अनुपात (γ)
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से, स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा:
मेयर के संबंध (CP − CV = R) से स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा:
विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात (रुद्धोष्म सूचकांक γ):
4. गैसों की विशिष्ट ऊष्माओं की तुलनात्मक सारणी
| गैस का प्रकार | स्वतंत्रता की कोटि (f) | CV | CP | γ = CP / CV |
|---|---|---|---|---|
| एकपरमाणुक (He, Ar) | 3 (स्था.) | (3/2) R | (5/2) R | 5/3 ≈ 1.67 |
| द्विपरमाणुक (दृढ़) (O2, N2) | 5 (3 स्था. + 2 घूर्णी) | (5/2) R | (7/2) R | 7/5 = 1.40 |
| द्विपरमाणुक (कंपन युक्त) | 7 (3 स्था. + 2 घूर्णी + 2 कंपन) | (7/2) R | (9/2) R | 9/7 ≈ 1.29 |
| बहुपरमाणुक (अरेखीय, दृढ़) | 6 (3 स्था. + 3 घूर्णी) | 3 R | 4 R | 4/3 ≈ 1.33 |
5. ठोसों की विशिष्ट ऊष्मा धारिता: ड्यूलांग-पेटिट का नियम
किसी ठोस क्रिस्टल जालक में प्रत्येक परमाणु अपनी साम्यावस्था के परितः त्रिविम में दोलन कर सकता है। प्रत्येक दोलन विधा में 1 गतिज ऊर्जा तथा 1 स्थितिज ऊर्जा पद (2 स्वतंत्रता की कोटियां) होते हैं। अतः प्रत्येक परमाणु में 3 × 2 = 6 स्वतंत्रता की कोटियां होती हैं।
- प्रति परमाणु ऊर्जा = 6 × (1/2 kB T) = 3 kB T।
- प्रति मोल आंतरिक ऊर्जा: U = 3 NA kB T = 3 R T।
- ठोस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता:
यह ड्यूलांग तथा पेटिट का नियम (Dulong-Petit Law) कहलाता है, जो सामान्य ताप पर अधिकांश ठोसों हेतु सत्य सिद्ध होता है।
6. जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता
जल के अणु (H2O) में 3 परमाणु होते हैं। यदि प्रत्येक परमाणु की 3 दोलन विधाएं मानी जाएं, तो कुल 3 × 3 = 9 विधाएं होती हैं:
यह जल की असामान्य रूप से अत्यधिक विशिष्ट ऊष्मा धारिता की वैज्ञानिक व्याख्या करता है।
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