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कक्षा 11 · रसायन विज्ञानJEE MAIN × NEETEnglish
§ 8.1NCERT कक्षा 11 · रसायन विज्ञान · अध्याय 8

कार्बन की चतुःसंयोजकता एवं कार्बनिक यौगिकों का वर्गीकरण

कार्बन परमाणु की चतुःसंयोजकता (Tetravalence), संकरण (sp3, sp2, sp), संरचनात्मक निरूपण (पूर्ण, संघनित, आबंध-रेखा एवं वेज-डैश मॉडल) तथा कार्बनिक यौगिकों के व्यापक वर्गीकरण का संपूर्ण NCERT एवं JEE/NEET विश्लेषण।

1. कार्बन की चतुःसंयोजकता एवं संकरण

कार्बन परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तलस्थ अवस्था (ground state) में 1s2 2s2 2px1 2py1 2pz0 होता है। उत्तेजित अवस्था (excited state) में 2s कक्षक से एक इलेक्ट्रॉन अयुग्मित होकर रिक्त 2pz कक्षक में प्रोन्नत हो जाता है:

C* (उत्तेजित अवस्था) = 1s2 2s1 2px1 2py1 2pz1 (चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन)

ये चार कक्षक संकरित होकर समतुल्य ऊर्जा वाले संकर कक्षक निर्मित करते हैं, जिससे कार्बन चार सहसंयोजक आबंध बनाता है।

संकरण प्रकार आण्विक ज्यामिति आबंध कोण s-लक्षण (%) विशिष्ट उदाहरण
sp3 चतुष्फलकीय (Tetrahedral) 109° 28′ 25% मेथेन (CH4), एथेन (C2H6)
sp2 त्रिकोणीय समतलीय (Trigonal Planar) 120° 33.3% एथीन (CH2=CH2), बेन्जीन (C6H6)
sp रैखिक (Linear) 180° 50% एथाइन (CH≡CH), बेन्जाइन
s-लक्षण, आबंध सामर्थ्य एवं विद्युतऋणात्मकता संबंध:
जैसे-जैसे s-लक्षण बढ़ता है (sp3 < sp2 < sp):
  • कार्बन नाभिक की निकटता बढ़ने से विद्युतऋणात्मकता बढ़ती है: sp > sp2 > sp3। (यही कारण है कि टर्मिनल एल्काइन का −C≡C−H हाइड्रोजन अम्लीय होता है!)
  • आबंध लंबाई घटती है: C−C (154 pm) > C=C (134 pm) > C≡C (120 pm)।
  • आबंध वियोजन एन्थैल्पी बढ़ती है: C≡C (835 kJ/mol) > C=C (611 kJ/mol) > C−C (348 kJ/mol)।

2. कार्बनिक यौगिकों का संरचनात्मक निरूपण

A. पूर्ण एवं संघनित संरचना सूत्र

पूर्ण संरचना सूत्र में सभी सहसंयोजक आबंधों को रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। संघनित सूत्र (Condensed formula) में समान परमाणुओं को पादाक्षर (subscript) के साथ एक साथ लिखा जाता है, जैसे: CH3(CH2)4CH3 (हेक्सेन)।

B. आबंध-रेखा संरचना सूत्र (Bond-Line Formula)

इस निरूपण में कार्बन एवं हाइड्रोजन परमाणुओं को नहीं लिखा जाता है। केवल कार्बन कंकाल को टेढ़ी-मेढ़ी (zigzag) रेखाओं द्वारा दर्शाया जाता है। प्रत्येक सिरा एवं प्रत्येक मोड़ (vertex) एक कार्बन परमाणु को और उससे संतुष्ट आवश्यक हाइड्रोजन परमाणुओं को व्यक्त करता है। विषम परमाणु (N, O, S, Cl) स्पष्ट लिखे जाते हैं।

C. त्रिविम निरूपण: वेज एवं डैश सूत्र (Wedge-Dash Model)

  • ठोस वेज (Solid Wedge — ▸): दर्शक की ओर (कागज के तल से बाहर निकलता हुआ) आबंध दर्शाता है।
  • डैश वेज (Dashed Wedge — /////): दर्शक से दूर (कागज के तल के पीछे) स्थित आबंध दर्शाता है।
  • सामान्य ठोस रेखा (−): कागज के तल में स्थित आबंध को प्रदर्शित करती है।

3. कार्बनिक यौगिकों का व्यवस्थित वर्गीकरण

कार्बनिक यौगिकों को उनके कार्बन कंकाल की प्रकृति के आधार पर दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया जाता है:

1. अचक्रीय अथवा खुली श्रृंखला वाले यौगिक (ऐलिफैटिक यौगिक)

इनमें कार्बन परमाणु परस्पर जुड़कर सीधी अथवा शाखित खुली श्रृंखलाएं बनाते हैं:

  • संतृप्त यौगिक (एल्केन): केवल C−C एकल आबंध (जैसे एथेन, प्रोपेन, आइसोब्यूटेन)।
  • असंतृप्त यौगिक: C=C द्विआबंध युक्त (एल्कीन) अथवा C≡C त्रिआबंध युक्त (एल्काइन)।

2. चक्रीय अथवा संवृत श्रृंखला वाले यौगिक

  • समचक्रीय / कार्बचक्रीय यौगिक (Homocyclic / Carbocyclic): वलय केवल कार्बन परमाणुओं से निर्मित होती है।
    • ऐलिसाइक्लिक यौगिक: गुण ऐलिफैटिक यौगिकों के सदृश होते हैं (जैसे साइक्लोप्रोपेन, साइक्लोब्यूटेन, साइक्लोहेक्सेन)।
    • ऐरोमैटिक यौगिक: समतलीय, संयुग्मित, हकल के (4n+2)π नियम का पालन करने वाले अति-स्थायी यौगिक:
      • बेन्जेनॉइड यौगिक: कम से कम एक बेन्जीन वलय युक्त (जैसे बेन्जीन, टॉलूईन, नैफ्थलीन)।
      • गैर-बेन्जेनॉइड यौगिक: बिना बेन्जीन वलय के ऐरोमैटिक गुण युक्त (जैसे ट्रोपोलोन, एज्युलीन)।
  • विषमचक्रीय यौगिक (Heterocyclic Compounds): वलय में कार्बन के अतिरिक्त एक या अधिक विषम परमाणु (N, O, S) उपस्थित होते हैं:
    • ऐलिसाइक्लिक विषमचक्रीय: टेट्राहाइड्रोफ्यूरॉन (THF), ऑक्सिरेन (एथिलीन ऑक्साइड)।
    • ऐरोमैटिक विषमचक्रीय: फ्यूरॉन (O-युक्त), थायोफीन (S-युक्त), पिरोल (NH-युक्त), पिरिडीन (N-युक्त)।

4. अभ्यास प्रश्न एवं JEE/NEET महत्वपूर्ण अवधारणाएं

प्रश्न 1. यौगिक CH2=CH−C≡CH में उपस्थित σ एवं π आबंधों की कुल संख्या तथा प्रत्येक कार्बन का संकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
विस्तृत संरचना: H2C1=C2(H)−C3≡C4−H
• σ-आबंध: 3 (C−H) + 1 (C=C) + 1 (C−C) + 1 (C≡C) + 1 (C−H) = 7 σ-आबंध।
• π-आबंध: 1 (द्विआबंध में) + 2 (त्रिआबंध में) = 3 π-आबंध।
• संकरण: C-1 = sp2, C-2 = sp2, C-3 = sp, C-4 = sp.
प्रश्न 2. निम्नलिखित अणुओं में से विषमचक्रीय ऐरोमैटिक यौगिक की पहचान कीजिए: (a) साइक्लोहेक्सेन, (b) पिरिडीन, (c) बेन्जीन, (d) नैफ्थलीन।
उत्तर: (b) पिरिडीन (C5H5N).
कारण: पिरिडीन के 6-सदस्यीय वलय में 5 कार्बन परमाणु तथा 1 नाइट्रोजन विषम परमाणु होता है। यह समतलीय है तथा 6 विस्थानीकृत π-इलेक्ट्रॉन रखता है, जिससे यह हकल के (4n+2)π नियम का पालन करते हुए विषमचक्रीय ऐरोमैटिक यौगिक बनाता है।
प्रश्न 3. प्रोपीन (CH3−CH=CH2) में C1−C2 तथा C2−C3 आबंध लंबाइयों की तुलना कीजिए।
उत्तर: C1−C2 आबंध लंबाई (134 pm) < C2−C3 आबंध लंबाई (150 pm).
कारण: C1−C2 आबंध एक द्विआबंध है जिसमें σ तथा π दोनों आबंध उपस्थित हैं। C2−C3 एकल आबंध sp2 और sp3 कार्बन कक्षकों के अतिव्यापन से बना है, जो सामान्य C(sp3)−C(sp3) आबंध (154 pm) से थोड़ा छोटा किंतु द्विआबंध से बड़ा होता है।
प्रश्न 4. क्या साइक्लोऑक्टाटेट्राईन (COT) ऐरोमैटिक यौगिक है? कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: नहीं, साइक्लोऑक्टाटेट्राईन ऐरोमैटिक नहीं है (यह अ-ऐरोमैटिक / Non-aromatic है)।
कारण: इसमें 8 π-इलेक्ट्रॉन होते हैं (जो 4n नियम का पालन करते हैं, जिससे यह समतलीय होने पर ऐन्टी-ऐरोमैटिक हो जाता)। ऐन्टी-ऐरोमैटिक अस्थिरता से बचने के लिए यह अणु अपनी समतलीयता खोकर टब-जैसी (tub-shaped) असमलीय ज्यामिति ग्रहण कर लेता है, जिससे यह संयुग्मन विहीन अ-ऐरोमैटिक बन जाता है।
प्रश्न 5. कार्बन परमाणु अधिकतम 4 ही सहसंयोजक आबंध क्यों बना सकता है? क्या यह अपने अष्टक का प्रसार कर सकता है?
उत्तर: कार्बन आवर्त सारणी के द्वितीय आवर्त का सदस्य है। इसके संयोजकता कोश (n=2) में केवल 2s और तीन 2p कक्षक (कुल 4 कक्षक) उपस्थित होते हैं। इसमें रिक्त d-कक्षक अनुपस्थित होने के कारण यह अपने अष्टक का प्रसार नहीं कर सकता, अतः इसकी अधिकतम सहसंयोजकता 4 तक ही सीमित रहती है।
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