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कक्षा 11 · रसायन विज्ञानJEE MAIN × NEETEnglish
§ 8.5NCERT कक्षा 11 · रसायन विज्ञान · अध्याय 8

कार्बनिक यौगिकों का शोधन एवं गुणात्मक विश्लेषण

कार्बनिक यौगिकों के पृथक्करण व शुद्धिकरण की भौतिक विधियां (ऊर्ध्वपातन, क्रिस्टलन, विभिन्न आसवन तकनीकें, वर्णलेखन) तथा तत्वों (C, H, N, S, X, P) की गुणात्मक पहचान के रासायनिक परीक्षणों का संपूर्ण विवरण।

1. कार्बनिक यौगिकों के शोधन की विधियां

शोधन विधि का चयन यौगिक की प्रकृति, क्वथनांक, गलनांक, वाष्प दाब तथा विलेयता अंतर पर निर्भर करता है:

A. ऊर्ध्वपातन (Sublimation)

उन वाष्पशील ठोस पदार्थों के शोधन में प्रयुक्त होता है जो गर्म करने पर बिना द्रव अवस्था में बदले सीधे वाष्प अवस्था में परिवर्तित हो जाते हैं। उदाहरण: कपूर (Camphor), बेन्जोइक अम्ल, नैफ्थलीन, एंथ्रासीन तथा आयोडीन।

B. क्रिस्टलन (Crystallization)

यह विधि किसी उपयुक्त विलायक में यौगिक और अशुद्धियों की विलेयताओं में अंतर पर आधारित है। उपयुक्त विलायक वह होता है जिसमें यौगिक कक्ष ताप पर अल्प विलेय परंतु उच्च ताप पर अत्यधिक विलेय हो। रंगीन अशुद्धियों को दूर करने हेतु सक्रियित चारकोल (animal charcoal) मिलाया जाता है।

C. आसवन तकनीकें (Distillation Techniques)

आसवन विधि कार्य सिद्धांत अनुप्रयोग की शर्त महत्वपूर्ण उदाहरण
साधारण आसवन वाष्पशील द्रव गर्म करने पर वाष्पीकृत होकर संघनित होता है। बिना अपघटित हुए उबलने वाले द्रव जिनके क्वथनांकों में > 25 K का अंतर हो। ईथर (308 K) एवं टॉलूईन (384 K); क्लोरोफॉर्म (334 K) एवं ऐनिलीन (457 K)।
प्रभाजी आसवन प्रभाजी कॉलम में क्रमिक वाष्पन और संघनन की पुनरावृत्ति। मिश्रणीय द्रव जिनके क्वथनांकों का अंतर < 25 K हो। कच्चे पेट्रोलियम के प्रभाज; एसीटोन (329 K) एवं मेथिल ऐल्कोहॉल (338 K)।
कम दाब पर आसवन (निर्वात आसवन) दाब कम करने पर द्रव का क्वथनांक उसके सामान्य अपघटन ताप से नीचे आ जाता है। ऐसे द्रव जो अपने सामान्य क्वथनांक पर या उससे पूर्व ही अपघटित हो जाते हैं। ग्लिसरॉल का शोधन (सामान्य क्वथनांक 563 K पर अपघटित होता है; 12 mm Hg पर 453 K पर आसवित होता है)।
भाप आसवन मिश्रण तब उबलता है जब: Pकुल = Pजल + Pयौगिक = 1 atm. भाप-वाष्पशील, जल में अमिश्रणीय, तथा 373 K के निकट पर्याप्त वाष्प दाब रखने वाले द्रव। ऐनिलीन, नाइट्रोबेन्जीन, तथा o-नाइट्रोफीनॉल (जो भाप वाष्पशील है, p-नाइट्रोफीनॉल से पृथक्करण)।

D. वर्णलेखन (Chromatography)

मिश्रण के घटकों का स्थिर प्रावस्था (Stationary phase) और गतिशील प्रावस्था (Mobile phase) के मध्य विभेदक वितरण के आधार पर पृथक्करण:

  • अधिशोषण वर्णलेखन (Adsorption Chromatography): सिलिका जेल अथवा ऐलुमिना स्थिर अधिशोषक पर आधारित (कॉलम क्रोमैटोग्राफी एवं TLC)। पतली परत वर्णलेखन (TLC) में मंदन गुणांक / रिटेंशन फैक्टर (Rf) ज्ञात किया जाता है:
    Rf = (आधार रेखा से पदार्थ द्वारा चली गई दूरी) / (आधार रेखा से विलायक द्वारा चली गई दूरी)
  • विभाजन वर्णलेखन (Partition Chromatography): कागज वर्णलेखन (Paper chromatography), जिसमें स्थिर प्रावस्था कागज के रेशों में परिबद्ध जल होता है।

2. गुणात्मक तात्विक विश्लेषण (Qualitative Elemental Analysis)

A. कार्बन एवं हाइड्रोजन की पहचान (कॉपर ऑक्साइड परीक्षण)

शुष्क क्यूप्रिक ऑक्साइड (CuO) के साथ कार्बनिक यौगिक को गर्म करने पर कार्बन CO2 में तथा हाइड्रोजन H2O में ऑक्सीकृत होता है:

C + 2CuO → CO2↑ + 2Cu
2H + CuO → H2O + Cu
  • CO2 चूने के पानी को दूधिया कर देती है (CaCO3 अवक्षेप)।
  • H2O वाष्प निर्जल सफेद कॉपर सल्फेट को नीला कर देती है (CuSO4•5H2O)।

B. लैसाने परीक्षण (सोडियम निष्कर्ष / Lassaigne's Test)

सोडियम धातु के साथ प्रज्वलन नली में गलाने पर सहसंयोजक बंध आयनिक सोडियम लवणों में बदल जाते हैं:

Na + C + N → NaCN (सोडियम सायनाइड)
2Na + S → Na2S (सोडियम सल्फाइड)
Na + X → NaX (सोडियम हैलाइड, जहाँ X = Cl, Br, I)
Na + C + N + S → NaSCN (सोडियम थायोसाइनेट, जब N व S दोनों उपस्थित हों)

C. सोडियम निष्कर्ष से तत्वों की रासायनिक पहचान सारणी

तत्व अभिकर्मक एवं विधि प्रेक्षण एवं रासायनिक समीकरण
नाइट्रोजन (N) निष्कर्ष को ताजा बने FeSO4 के साथ उबालकर ठंडा करें, फिर सांद्र H2SO4 से अम्लीकृत करें। प्रशियन ब्लू (Prussian Blue) रंग/अवक्षेप:
Fe2+ + 6CN− → [Fe(CN)6]4−
4Fe3+ + 3[Fe(CN)6]4− → Fe4[Fe(CN)6]3•xH2O (प्रशियन ब्लू)
सल्फर (S) (a) सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड Na2[Fe(CN)5NO] विलयन मिलाएं।
(b) एसीटिक अम्ल से अम्लीकृत कर लेड एसीटेट मिलाएं।
(a) गहरा बैंगनी / जामुनी रंग:
S2− + [Fe(CN)5NO]2− → [Fe(CN)5NOS]4−
(b) काला अवक्षेप: PbS↓
N एवं S दोनों उपस्थित निष्कर्ष को अम्लीकृत कर FeCl3 विलयन मिलाएं। रक्त जैसा लाल (Blood Red) रंग:
Fe3+ + 3SCN− → [Fe(SCN)]2+ या Fe(SCN)3 (रक्त-लाल)
हैलोजन (Cl, Br, I) निष्कर्ष को सांद्र HNO3 के साथ उबालें, फिर ठंडा कर AgNO3 विलयन मिलाएं। • क्लोरीन: सफेद दही जैसा अवक्षेप (AgCl), जो NH4OH में पूर्ण विलेय है।
• ब्रोमीन: हल्का पीला अवक्षेप (AgBr), जो NH4OH में अल्प विलेय है।
• आयोडीन: गहरा पीला अवक्षेप (AgI), जो NH4OH में अविलेय है।
फॉस्फोरस (P) यौगिक को सोडियम परॉक्साइड के साथ गर्म कर जल निष्कर्ष बनाएं, सांद्र HNO3 से उबालकर अमोनियम मॉलिब्डेट मिलाएं। कैनरी पीला अवक्षेप (Canary Yellow ppt):
अमोनियम फॉस्फोमॉलिब्डेट (NH4)3PO4•12MoO3 निर्मित होता है।
सावधानी • हैलोजन परीक्षण से पूर्व सांद्र HNO3 के साथ उबालना क्यों आवश्यक है?
यदि यौगिक में नाइट्रोजन अथवा सल्फर उपस्थित हो, तो निष्कर्ष में NaCN तथा Na2S होंगे। AgNO3 मिलाने पर ये AgCN (सफेद) अथवा Ag2S (काला) का अवक्षेप दे देंगे जिससे हैलोजन की पहचान में बाधा उत्पन्न होगी। सांद्र HNO3 के साथ उबालने पर सायनाइड HCN के रूप में तथा सल्फाइड H2S गैस के रूप में निष्कासित हो जाते हैं!

3. अभ्यास प्रश्न एवं हल

प्रश्न 1. हाइड्रोक्सिलऐमीन (NH2OH) या हाइड्राजीन (NH2NH2) लैसाने परीक्षण में नाइट्रोजन का प्रशियन ब्लू परीक्षण क्यों नहीं देते?
कारण: प्रशियन ब्लू रंग बनने हेतु सायनाइड आयन (CN−) का बनना आवश्यक है, जिसके लिए यौगिक में कार्बन एवं नाइट्रोजन दोनों उपस्थित होने चाहिए। हाइड्राजीन तथा हाइड्रोक्सिलऐमीन में नाइट्रोजन तो है किंतु कार्बन नहीं है, अतः सोडियम के साथ संगलन पर NaCN नहीं बनता और N2 गैस उड़ जाती है।
प्रश्न 2. o-नाइट्रोफीनॉल तथा p-नाइट्रोफीनॉल के मिश्रण को किस विधि द्वारा पृथक किया जाता है?
उत्तर: भाप आसवन (Steam Distillation) द्वारा।
कारण: o-नाइट्रोफीनॉल में अंतःअणुक हाइड्रोजन आबंधन (intramolecular H-bonding) के कारण यह वाष्पशील (भाप-वाष्पशील) होता है। इसके विपरीत, p-नाइट्रोफीनॉल में अंतरा-अणुक हाइड्रोजन आबंधन के कारण आण्विक संगुणन हो जाता है, जिससे इसका क्वथनांक उच्च होता है और यह भाप-अवाष्पशील रहता है।
प्रश्न 3. TLC प्रयोग में विलायक 10 सेमी चला। यौगिक X 6.5 सेमी तथा यौगिक Y 8.2 सेमी चला। दोनों के Rf मान ज्ञात कीजिए।
हल:
Rf(X) = 6.5 सेमी / 10 सेमी = 0.65
Rf(Y) = 8.2 सेमी / 10 सेमी = 0.82
यौगिक X का Rf मान कम है, अर्थात यह अधिशोषक पर अधिक दृढ़ता से अधिशोषित होता है।
प्रश्न 4. सोडियम निष्कर्ष में सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड मिलाने पर बैंगनी रंग किस आयन/संकुल के कारण होता है?
उत्तर: सोडियम थायोनिट्रोप्रुसाइड संकुल [Fe(CN)5NOS]4− के बनने के कारण।
प्रश्न 5. कार्बनिक यौगिक के निष्कर्षण में एकल निष्कर्षण की तुलना में अल्प मात्रा वाले विलायक से बार-बार निष्कर्षण क्यों अधिक प्रभावी होता है?
कारण: नर्नस्ट वितरण नियम (Kd = Corganic / Caqueous) के अनुसार, जब विलायक की कुल मात्रा को कई छोटे-छोटे भागों में विभाजित करके निष्कर्षण किया जाता है, तो जलीय प्रावस्था में शेष अघुलित पदार्थ की मात्रा गणितीय रूप से एकल निष्कर्षण की तुलना में बहुत कम रह जाती है।
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