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कक्षा 11 · रसायन विज्ञानJEE MAIN × NEETEnglish
§ 9.5NCERT कक्षा 11 · रसायन विज्ञान · अध्याय 9

बहुकेन्द्रीय हाइड्रोकार्बनों की कैंसरजन्यता एवं विषाक्तता

बेंजीन तथा संगलित वलय वाले हाइड्रोकार्बन विषैले होते हैं, किंतु जिन हाइड्रोकार्बनों में दो से अधिक बेंजीन वलय परस्पर संगलित (fused) होते हैं, उनमें अक्सर तीव्र कैंसरजन्य (Carcinogenic / कैंसर उत्पन्न करने वाले) गुण पाए जाते हैं। इन्हें बहुकेन्द्रीय ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (Polynuclear Aromatic Hydrocarbons - PAHs) कहा जाता है।

1. उत्पत्ति एवं पर्यावरणीय स्रोत

PAHs सजीव पौधों में प्राकृतिक रूप से नहीं बनते। ये कार्बनिक पदार्थों के अपूर्ण दहन (Incomplete Combustion) के फलस्वरूप उच्च ताप (500–900 °C) पर उत्पन्न होते हैं:

  • जीवाश्म ईंधनों (कोयला, डीजल, पेट्रोल) का अपूर्ण दहन एवं वाहनों का धुआं।
  • तंबाकू तथा सिगरेट का धुआं।
  • अंगीठी, चारकोल पर भुना हुआ मांस एवं कोलतार के उत्सर्जन।
  • वनों में लगने वाली आग एवं औद्योगिक कचरा भट्ठियां।

2. प्रमुख कैंसरजन्य बहुकेन्द्रीय हाइड्रोकार्बन

यौगिक का नाम संरचनात्मक विशेषताएं कैंसरजन्यता की तीव्रता
1,2-बेंज़ऐन्थ्रासीन ऐन्थ्रासीन के 1,2 पदों पर बेंजीन वलय का संगलन (4 संगलित वलय) मध्यम कैंसरजन्य
1,2-बेंज़पायरीन (बेंज़ो[a]पायरीन) 5 संगलित ऐरोमैटिक वलय; सिगरेट के धुएं एवं कोलतार का प्रमुख घटक अत्यधिक तीव्र कार्सिनोजेन (Group 1 मानव कैंसरकारक)
3-मेथिलकोलैन्थ्रीन 5 वलय युक्त तंत्र जिसमें एक पंचसदस्यीय वलय एवं मेथिल समूह उपस्थित प्रयोगशाला जंतुओं में ट्यूमर उत्पन्न करने की अत्यधिक क्षमता
9,10-डाइमेथिल-1,2-बेंज़ऐन्थ्रासीन डाइमेथिलीकृत बेंज़ऐन्थ्रासीन प्रबल कैंसरजन्य यौगिक
1,2:5,6-डाइबेंज़ऐन्थ्रासीन ऐन्थ्रासीन पर दो अतिरिक्त बेंजीन वलय संगलित फेफड़ों एवं त्वचा ट्यूमर का प्रबल प्रेरक

3. कैंसरजनन की जैव-रासायनिक क्रियाविधि

उपापचयी सक्रियण द्वारा वास्तविक कार्सिनोजेन का निर्माण

मूल PAH यौगिक रासायनिक रूप से सीधे डीएनए से क्रिया नहीं करते। किंतु जब ये मानव शरीर में सांस या भोजन द्वारा पहुंचते हैं, तो यकृत की डिटॉक्सिफिकेशन प्रणाली (मुख्य रूप से साइटोक्रोम P450 CYP1A1 एंजाइम) इन्हें जल में घुलनशील बनाने का प्रयास करती है:

  1. एपॉक्सीकरण: एंजाइम वलय के विशेष द्वि-आबंध को एपॉक्साइड में बदलता है।
  2. जलयोजन: एपॉक्साइड हाइड्रोलेज इसे डाइहाइड्रोडाइऑल में रूपांतरित करता है।
  3. द्वितीय ऑक्सीकरण: निकटवर्ती द्वि-आबंध के ऑक्सीकरण से डायोल-एपॉक्साइड (जैसे बेंज़ो[a]पायरीन-7,8-डाइऑल-9,10-एपॉक्साइड) बनता है।
  4. डीएनए से सहसंयोजक आबंधन: तनी हुई एपॉक्साइड वलय खुलकर एक प्रबल कार्बधनायन बनाती है जो डीएनए के ग्वानिन (Guanine) क्षारक के अमीनो समूह से सहसंयोजक बंध बना लेती है (DNA Adduct)।
  5. उत्परिवर्तन एवं कैंसर: इस डीएनए विकृति के कारण प्रतिकृतियन के समय त्रुटि (G → T म्यूटेशन) होती है, विशेषकर TP53 ट्यूमर सप्रेसर जीन में। इसके परिणामस्वरूप कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं और अंततः असाध्य कैंसर ट्यूमर का रूप ले लेती हैं।
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