ऐल्काइन: विरचन, अम्लीय लक्षण एवं चक्रीय बहुलकन
ऐल्काइन असंतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें कम से कम एक कार्बन-कार्बन त्रि-आबंध (C≡C) उपस्थित होता है। इनका सामान्य सूत्र CnH2n−2 होता है। त्रि-आबंधित दोनों कार्बन परमाणु sp संकरित (रैखिक ज्यामिति, 180° आबंध कोण) होते हैं। त्रि-आबंध में एक अक्षीय σ-आबंध एवं दो परस्पर लंबवत π-आबंध होते हैं, जिससे बेलनाकार π-इलेक्ट्रॉन मेघ निर्मित होता है।
1. ऐल्काइन के विरचन की विधियां
A. कैल्शियम कार्बाइड से (औद्योगिक विधि)
चूना पत्थर (CaCO3) को कोक के साथ विद्युत भट्ठी में गर्म कर कैल्शियम कार्बाइड (CaC2) बनाया जाता है, जिसके जल-अपघटन पर एथाइन गैस प्राप्त होती है:
CaO + 3 C → (2273 K) → CaC2 + CO
CaC2 + 2 H2O → Ca(OH)2 + HC≡CH (एथाइन)
B. विसिनल डाइहैलाइडों के विहाइड्रोहैलोजनीकरण द्वारा
विसिनल डाइहैलाइड (जैसे 1,2-डाइब्रोमोएथेन) की पहले ऐल्कोहॉली KOH से क्रिया कराने पर विनाइल ब्रोमाइड बनता है, फिर प्रबल क्षार सोडामाइड (NaNH2) द्वारा दूसरा HBr अणु निष्कासित होकर ऐल्काइन बनती है:
CH2=CHBr + NaNH2 → HC≡CH + NaBr + NH3
2. टर्मिनल ऐल्काइनों की अम्लीय प्रकृति
sp संकरित कार्बन में 50% s-लक्षण होता है, जिससे इसकी विद्युत-ऋणात्मकता सर्वाधिक होती है। अतः C≡C–H आबंध के इलेक्ट्रॉन कार्बन द्वारा प्रबलता से आकर्षित होते हैं, जिससे प्रोटॉन (H+) का निष्कासन सरल हो जाता है। अम्लता का आपेक्षिक क्रम:
(एथाइन pKa ≈ 25 > एथीन pKa ≈ 44 > एथेन pKa ≈ 50)
अम्लीय लक्षण प्रदर्शित करने वाली अभिक्रियाएं:
- सोडियम धातु के साथ क्रिया: 2 HC≡CH + 2 Na → 2 HC≡C−Na+ (सोडियम ऐसीटिलाइड) + H2 ↑
- सोडामाइड के साथ क्रिया: CH3–C≡CH + NaNH2 → CH3–C≡C−Na+ + NH3 ↑
- टॉलेन अभिकर्मक के साथ श्वेत अवक्षेप: अमोनियामय AgNO3 के साथ टर्मिनल ऐल्काइन रजत ऐसीटिलाइड (AgC≡CAg) का श्वेत अवक्षेप देती हैं।
- क्यूप्रस क्लोराइड के साथ लाल अवक्षेप: अमोनियामय Cu2Cl2 के साथ कॉपर ऐसीटिलाइड (CuC≡CCu) का लाल अवक्षेप बनता है।
3. जल-योजन (कुचेरोव अभिक्रिया) एवं बहुलकन
A. कुचेरोव जल-योजन (Hydration)
333 K ताप पर 40% H2SO4 एवं 1% HgSO4 की उपस्थिति में ऐल्काइन पर जल का योग कराने पर ईनॉल मध्यवर्ती बनता है, जो तेजी से चलावयवीकृत होकर कार्बोनिल यौगिक देता है:
प्रोपाइन से ऐसीटोन प्राप्त होता है:
B. चक्रीय बहुलकन (ऐरोमैटिक त्रितयन)
जब एथाइन गैस को 873 K ताप पर रक्त-तप्त लोहे (या क्वार्ट्ज) की नली में से प्रवाहित किया जाता है, तो इसके तीन अणु चक्रीय रूप से बहुलकित होकर बेंजीन बनाते हैं:
इसी प्रकार प्रोपाइन के चक्रीय बहुलकन से 1,3,5-ट्राईमेथिलबेंजीन (मेसिटिलीन) प्राप्त होती है।
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