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कक्षा 11 · रसायन विज्ञानJEE MAIN × NEETEnglish
§ 5.1NCERT कक्षा 11 · रसायन विज्ञान · अध्याय 5

ऊष्मागतिकी के मूल पद एवं ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम

रासायनिक ऊष्मागतिकी (Chemical Thermodynamics) भौतिक रसायन की वह शाखा है जो रासायनिक अभिक्रियाओं एवं भौतिक रूपांतरणों के दौरान होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों, ऊष्मा के विनिमय तथा कार्य का अध्ययन करती है। यह निर्धारित करती है कि कोई अभिक्रिया संभव है या नहीं और वह किस सीमा तक संपन्न होगी।

1. मूल संकल्पनाएँ: निकाय, परिवेश एवं परिसीमा

ऊष्मागतिकी में संपूर्ण ब्रह्मांड को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है जो एक परिसीमा द्वारा पृथक होते हैं:

  • निकाय (System): ब्रह्मांड का वह विशिष्ट स्थूल भाग जिस पर ऊष्मागतिक प्रेक्षण या अध्ययन किया जा रहा हो (जैसे फ्लास्क में रखी अभिक्रिया मिश्रण)।
  • परिवेश (Surroundings): निकाय को छोड़कर ब्रह्मांड का शेष समस्त भाग जो निकाय के साथ अंतःक्रिया कर सकता है (व्यावहारिक रूप से निकाय का निकटवर्ती वातावरण)।
  • परिसीमा (Boundary): निकाय को परिवेश से पृथक करने वाली वास्तविक या काल्पनिक सतह। परिसीमा दृढ़ या गतिशील तथा ऊष्मा चालक (diathermic) या रुद्धोष्म (adiabatic) हो सकती है।
निकाय का प्रकार द्रव्य (पदार्थ) का विनिमय ऊर्जा (ऊष्मा/कार्य) का विनिमय वास्तविक रासायनिक उदाहरण
खुला निकाय (Open System) हाँ हाँ खुले बीकर में रखी अभिक्रिया; खुली केतली में उबलता जल
बंद निकाय (Closed System) नहीं हाँ धातु के सील बंद पात्र में जल; पिस्टन युक्त बंद फ्लास्क में गैस
विलगित निकाय (Isolated System) नहीं नहीं पूर्णतः ऊष्मारोधी थर्मस फ्लास्क में रखा गर्म द्रव

2. अवस्था फलन, पथ फलन तथा विस्तीर्ण व गहन गुण

क. निकाय की अवस्था एवं अवस्था फलन (State Functions)

निकाय की अवस्था का वर्णन उसके स्थूल चरों जैसे दाब (P), आयतन (V), ताप (T) और पदार्थ की मात्रा (n) द्वारा किया जाता है। अवस्था फलन निकाय का वह गुणधर्म होता है जिसका मान केवल निकाय की वर्तमान साम्यावस्था पर निर्भर करता है, इस बात पर नहीं कि वह अवस्था किस प्रकार प्राप्त की गई।

प्रमुख अवस्था फलन: दाब (P), आयतन (V), ताप (T), आंतरिक ऊर्जा (U), एन्थैल्पी (H), एन्ट्रॉपी (S), गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा (G)।
किसी भी चक्रीय प्रक्रम के लिए: ∮ dZ = 0, अतः ΔZ = Zfinal − Zinitial।

ख. पथ फलन (Path Functions)

पथ फलन वे गुणधर्म होते हैं जिनका मान प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं के बीच अपनाए गए विशिष्ट मार्ग या विधि पर निर्भर करता है। ऊष्मागतिकी के दो प्रमुख पथ फलन ऊष्मा (q) और कार्य (w) हैं। हम ΔU या ΔH लिखते हैं, परंतु कभी भी Δq या Δw नहीं लिखा जाता।

ग. विस्तीर्ण गुण (Extensive) बनाम गहन गुण (Intensive)

गुणधर्म वर्ग परिभाषा उदाहरण
विस्तीर्ण / मात्रात्मक गुण (Extensive) निकाय में उपस्थित पदार्थ के द्रव्यमान या मात्रा पर निर्भर करते हैं। ये योगात्मक (additive) होते हैं। द्रव्यमान (m), आयतन (V), आंतरिक ऊर्जा (U), एन्थैल्पी (H), एन्ट्रॉपी (S), गिब्ज़ ऊर्जा (G), ऊष्मा धारिता (C)।
गहन गुण (Intensive) निकाय में उपस्थित पदार्थ की कुल मात्रा या आकार से स्वतंत्र होते हैं। ये योगात्मक नहीं होते। ताप (T), दाब (P), घनत्व (ρ), अपवर्तनांक, मोलर आयतन (Vm), मोलर ऊष्मा धारिता (Cm), विशिष्ट ऊष्मा (c), श्यानता, मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°)।
NEET/JEE महत्वपूर्ण बिंदु: किन्हीं दो विस्तीर्ण गुणों का अनुपात सदैव एक गहन गुण होता है! उदाहरण: द्रव्यमान (विस्तीर्ण) / आयतन (विस्तीर्ण) = घनत्व (गहन); एन्थैल्पी (विस्तीर्ण) / मोल (विस्तीर्ण) = मोलर एन्थैल्पी (गहन)।

3. ऊष्मागतिक प्रक्रम: उत्क्रमणीय बनाम अनुत्क्रमणीय

  • समतापी प्रक्रम (Isothermal): प्रक्रम के दौरान ताप स्थिर रहता है (ΔT = 0; आदर्श गैस के लिए ΔU = 0)।
  • रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic): निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता (q = 0; ΔU = wad)।
  • समदाबी प्रक्रम (Isobaric): दाब स्थिर रहता है (ΔP = 0; कार्य w = −PΔV)।
  • समआयतनिक प्रक्रम (Isochoric): आयतन स्थिर रहता है (ΔV = 0; कार्य w = 0; ΔU = qv)।
  • चक्रीय प्रक्रम (Cyclic): निकाय विभिन्न परिवर्तनों के पश्चात पुनः अपनी प्रारंभिक अवस्था में लौट आता है (ΔU = 0, ΔH = 0)।

ऊष्मागतिक कार्य: उत्क्रमणीय बनाम अनुत्क्रमणीय P-V आरेख

बाह्य दाब के विरुद्ध गैस के प्रसार में किए गए कार्य की तुलना
उत्क्रमणीय समतापी प्रसार (अनंत पद)              अनुत्क्रमणीय प्रसार (एकल पद)
दाब (P)                                       दाब (P)
  ^                                             ^
P1|*                                          P1|*
  | \                                           |
  |  \  P_ext = P_int - dP                      |
  |   \   (अत्यंत धीमा प्रक्रम)                 |
  |    \                                        |
P2|-----\*                                    P2|-------* (P_ext = P2 स्थिर)
  |      |                                      |///////|
  +------+----> आयतन (V)                        +-------+----> आयतन (V)
  0      V1    V2                               0       V1   V2
वक्र के नीचे का क्षेत्रफल = अधिकतम कार्य       आयत का क्षेत्रफल = -P_ext * (V2 - V1)
|w_rev| > |w_irrev|                           निकाय द्वारा कम उपयोगी कार्य प्राप्त
      
भौतिक निष्कर्ष: उत्क्रमणीय प्रसार को अत्यंत धीमी गति से अनंत पदों में संपन्न किया जाता है जिससे प्रत्येक क्षण Pext ≈ Pint रहता है। इसमें निकाय द्वारा अधिकतम कार्य किया जाता है। इसके विपरीत, स्थिर बाह्य दाब के विरुद्ध एकल-पद अनुत्क्रमणीय प्रसार में कार्य की मात्रा कम होती है और ऊर्जा परिवेश में क्षयित होती है।

4. कार्य, ऊष्मा एवं ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम

क. प्रसार कार्य का सूत्र

जब कोई गैस बाह्य विरोधी दाब Pext के विरुद्ध आयतन V1 से V2 तक प्रसारित होती है:

सामान्य सूत्र: w = − ∫ Pext dV
  • स्थिर बाह्य दाब पर (अनुत्क्रमणीय प्रसार): w = −Pext (V2 − V1) = −Pext ΔV
  • निर्वात में मुक्त प्रसार (Pext = 0): w = 0 (निर्वात में कोई विरोधी दाब न होने के कारण कार्य शून्य होता है!)
  • आदर्श गैस का उत्क्रमणीय समतापी प्रसार (T = स्थिर):
    चूँकि P = nRT / V:
    wrev = − 2.303 nRT log10(V2 / V1) = − 2.303 nRT log10(P1 / P2)

ख. प्रथम नियम का गणितीय कथन

ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम वस्तुतः ऊर्जा संरक्षण का नियम है: ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरित किया जा सकता है।

प्रथम नियम का समीकरण: ΔU = q + w

जहाँ:

  • ΔU = निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन (जूल या kJ)
  • q = निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा (+ve यदि अवशोषित, −ve यदि उत्सर्जित)
  • w = निकाय पर किया गया कार्य (+ve यदि संपीड़न, −ve यदि प्रसार)

5. आदर्श गैसों के लिए प्रथम नियम की विशेष स्थितियाँ

प्रक्रम की स्थिति प्रतिबंध प्रथम नियम पर परिणाम (ΔU = q + w)
समआयतनिक प्रक्रम ΔV = 0 ⇒ w = 0 ΔU = qv (स्थिर आयतन पर अवशोषित ऊष्मा आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन के बराबर होती है)
रुद्धोष्म प्रक्रम q = 0 ΔU = wad (किया गया कार्य आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है; प्रसार पर गैस ठंडी होती है)
समतापी प्रक्रम ΔT = 0 ⇒ ΔU = 0 q = −w (अवशोषित समस्त ऊष्मा प्रसार कार्य में रूपांतरित होती है)
मुक्त प्रसार (समतापी) Pext = 0, ΔT = 0 w = 0, q = 0, ΔU = 0
चक्रीय प्रक्रम प्रारंभिक अवस्था पुनः प्राप्त ⇒ ΔU = 0 qnet = −wnet

6. हल किए गए महत्वपूर्ण संख्यात्मक उदाहरण एवं परीक्षा MCQs

उदाहरण 1 (JEE Main): एक गैस 3.0 atm के स्थिर बाह्य दाब के विरुद्ध 2.0 L से 6.0 L आयतन तक प्रसारित होती है। इस प्रसार के दौरान गैस द्वारा अवशोषित ऊष्मा 800 J है। गैस की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन (ΔU) ज्ञात कीजिए। (1 L·atm = 101.3 J लीजिए)
चरणबद्ध हल:
1. प्रसार कार्य की गणना: w = −Pext ΔV
ΔV = V2 − V1 = 6.0 L − 2.0 L = 4.0 L
w = −(3.0 atm) × (4.0 L) = −12.0 L·atm
2. कार्य को जूल में बदलिए: w = −12.0 × 101.3 J = −1215.6 J
3. अवशोषित ऊष्मा: q = +800 J
4. प्रथम नियम लागू करने पर: ΔU = q + w = +800 J + (−1215.6 J) = −415.6 J।
ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि निकाय की आंतरिक ऊर्जा में 415.6 J की कमी आती है।
अभ्यास MCQ 1 (NEET): 300 K ताप पर एक आदर्श गैस के 2 मोल 2 L से 20 L तक समतापी एवं उत्क्रमणीय रूप से प्रसारित होते हैं। गैस पर किया गया कार्य w (IUPAC चिह्न परिपाटी) क्या होगा? (R = 8.314 J K−1 mol−1)
(A) −11.49 kJ
(B) +11.49 kJ
(C) −5.74 kJ
(D) शून्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) −11.49 kJ
स्पष्टीकरण:
आदर्श गैस के समतापी उत्क्रमणीय प्रसार हेतु सूत्र:
wrev = −2.303 nRT log10(V2 / V1)
यहाँ n = 2 mol, T = 300 K, V2/V1 = 20/2 = 10, log10(10) = 1।
w = −2.303 × 2 × 8.314 × 300 × 1 = −11488 J = −11.49 kJ।
गैस परिवेश पर 11.49 kJ कार्य करती है, अतः w (गैस पर किया गया कार्य) = −11.49 kJ।
अभ्यास MCQ 2 (JEE Main): निम्नलिखित में से किस समुच्चय में केवल गहन (intensive) गुणधर्म उपस्थित हैं?
(A) आयतन, ताप, घनत्व
(B) आंतरिक ऊर्जा, एन्थैल्पी, ऊष्मा धारिता
(C) दाब, मोलर ऊष्मा धारिता, अपवर्तनांक
(D) द्रव्यमान, गिब्ज़ ऊर्जा, एन्ट्रॉपी
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) दाब, मोलर ऊष्मा धारिता, अपवर्तनांक
स्पष्टीकरण:
गहन गुण निकाय में उपस्थित पदार्थ के द्रव्यमान या परिमाण पर निर्भर नहीं करते। आयतन, आंतरिक ऊर्जा, एन्थैल्पी, ऊष्मा धारिता, द्रव्यमान, गिब्ज़ ऊर्जा और एन्ट्रॉपी विस्तीर्ण (मात्रात्मक) गुण हैं। विकल्प (C) में दाब, मोलर ऊष्मा धारिता (Cm = C/n) तथा अपवर्तनांक तीनों पूर्णतः गहन गुण हैं।

7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या किसी आदर्श गैस के रुद्धोष्म प्रसार में ताप परिवर्तित होता है?
हाँ। रुद्धोष्म प्रसार में q = 0 होता है, अतः ΔU = w। चूँकि गैस प्रसारित होती है, गैस द्वारा कार्य किया जाता है (w < 0), जिससे ΔU < 0 हो जाता है। आदर्श गैस के लिए ΔU = nCvΔT होता है, अतः ताप में गिरावट (ΔT < 0) आती है और गैस ठंडी हो जाती है।
2. मोलर ऊष्मा धारिता और विशिष्ट ऊष्मा धारिता में क्या अंतर है?
विशिष्ट ऊष्मा धारिता (c) किसी पदार्थ के 1 ग्राम का ताप 1 K (या 1 °C) बढ़ाने हेतु आवश्यक ऊष्मा की मात्रा है (इकाई: J g−1 K−1)। मोलर ऊष्मा धारिता (Cm) पदार्थ के 1 मोल का ताप 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा है (इकाई: J mol−1 K−1)। दोनों ही गहन गुण हैं।
3. क्या कोई निकाय बिना ऊष्मा अवशोषित किए कार्य कर सकता है?
हाँ, रुद्धोष्म प्रक्रम में (q = 0)। इस स्थिति में निकाय अपनी स्वयं की संचित आंतरिक ऊर्जा की कीमत पर कार्य करता है (−w = −ΔU)।
आपकी प्रगति

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