ऊष्मागतिकी के मूल पद एवं ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम
रासायनिक ऊष्मागतिकी (Chemical Thermodynamics) भौतिक रसायन की वह शाखा है जो रासायनिक अभिक्रियाओं एवं भौतिक रूपांतरणों के दौरान होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों, ऊष्मा के विनिमय तथा कार्य का अध्ययन करती है। यह निर्धारित करती है कि कोई अभिक्रिया संभव है या नहीं और वह किस सीमा तक संपन्न होगी।
1. मूल संकल्पनाएँ: निकाय, परिवेश एवं परिसीमा
ऊष्मागतिकी में संपूर्ण ब्रह्मांड को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है जो एक परिसीमा द्वारा पृथक होते हैं:
- निकाय (System): ब्रह्मांड का वह विशिष्ट स्थूल भाग जिस पर ऊष्मागतिक प्रेक्षण या अध्ययन किया जा रहा हो (जैसे फ्लास्क में रखी अभिक्रिया मिश्रण)।
- परिवेश (Surroundings): निकाय को छोड़कर ब्रह्मांड का शेष समस्त भाग जो निकाय के साथ अंतःक्रिया कर सकता है (व्यावहारिक रूप से निकाय का निकटवर्ती वातावरण)।
- परिसीमा (Boundary): निकाय को परिवेश से पृथक करने वाली वास्तविक या काल्पनिक सतह। परिसीमा दृढ़ या गतिशील तथा ऊष्मा चालक (diathermic) या रुद्धोष्म (adiabatic) हो सकती है।
| निकाय का प्रकार | द्रव्य (पदार्थ) का विनिमय | ऊर्जा (ऊष्मा/कार्य) का विनिमय | वास्तविक रासायनिक उदाहरण |
|---|---|---|---|
| खुला निकाय (Open System) | हाँ | हाँ | खुले बीकर में रखी अभिक्रिया; खुली केतली में उबलता जल |
| बंद निकाय (Closed System) | नहीं | हाँ | धातु के सील बंद पात्र में जल; पिस्टन युक्त बंद फ्लास्क में गैस |
| विलगित निकाय (Isolated System) | नहीं | नहीं | पूर्णतः ऊष्मारोधी थर्मस फ्लास्क में रखा गर्म द्रव |
2. अवस्था फलन, पथ फलन तथा विस्तीर्ण व गहन गुण
क. निकाय की अवस्था एवं अवस्था फलन (State Functions)
निकाय की अवस्था का वर्णन उसके स्थूल चरों जैसे दाब (P), आयतन (V), ताप (T) और पदार्थ की मात्रा (n) द्वारा किया जाता है। अवस्था फलन निकाय का वह गुणधर्म होता है जिसका मान केवल निकाय की वर्तमान साम्यावस्था पर निर्भर करता है, इस बात पर नहीं कि वह अवस्था किस प्रकार प्राप्त की गई।
किसी भी चक्रीय प्रक्रम के लिए: ∮ dZ = 0, अतः ΔZ = Zfinal − Zinitial।
ख. पथ फलन (Path Functions)
पथ फलन वे गुणधर्म होते हैं जिनका मान प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं के बीच अपनाए गए विशिष्ट मार्ग या विधि पर निर्भर करता है। ऊष्मागतिकी के दो प्रमुख पथ फलन ऊष्मा (q) और कार्य (w) हैं। हम ΔU या ΔH लिखते हैं, परंतु कभी भी Δq या Δw नहीं लिखा जाता।
ग. विस्तीर्ण गुण (Extensive) बनाम गहन गुण (Intensive)
| गुणधर्म वर्ग | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| विस्तीर्ण / मात्रात्मक गुण (Extensive) | निकाय में उपस्थित पदार्थ के द्रव्यमान या मात्रा पर निर्भर करते हैं। ये योगात्मक (additive) होते हैं। | द्रव्यमान (m), आयतन (V), आंतरिक ऊर्जा (U), एन्थैल्पी (H), एन्ट्रॉपी (S), गिब्ज़ ऊर्जा (G), ऊष्मा धारिता (C)। |
| गहन गुण (Intensive) | निकाय में उपस्थित पदार्थ की कुल मात्रा या आकार से स्वतंत्र होते हैं। ये योगात्मक नहीं होते। | ताप (T), दाब (P), घनत्व (ρ), अपवर्तनांक, मोलर आयतन (Vm), मोलर ऊष्मा धारिता (Cm), विशिष्ट ऊष्मा (c), श्यानता, मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°)। |
3. ऊष्मागतिक प्रक्रम: उत्क्रमणीय बनाम अनुत्क्रमणीय
- समतापी प्रक्रम (Isothermal): प्रक्रम के दौरान ताप स्थिर रहता है (ΔT = 0; आदर्श गैस के लिए ΔU = 0)।
- रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic): निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता (q = 0; ΔU = wad)।
- समदाबी प्रक्रम (Isobaric): दाब स्थिर रहता है (ΔP = 0; कार्य w = −PΔV)।
- समआयतनिक प्रक्रम (Isochoric): आयतन स्थिर रहता है (ΔV = 0; कार्य w = 0; ΔU = qv)।
- चक्रीय प्रक्रम (Cyclic): निकाय विभिन्न परिवर्तनों के पश्चात पुनः अपनी प्रारंभिक अवस्था में लौट आता है (ΔU = 0, ΔH = 0)।
ऊष्मागतिक कार्य: उत्क्रमणीय बनाम अनुत्क्रमणीय P-V आरेख
उत्क्रमणीय समतापी प्रसार (अनंत पद) अनुत्क्रमणीय प्रसार (एकल पद)
दाब (P) दाब (P)
^ ^
P1|* P1|*
| \ |
| \ P_ext = P_int - dP |
| \ (अत्यंत धीमा प्रक्रम) |
| \ |
P2|-----\* P2|-------* (P_ext = P2 स्थिर)
| | |///////|
+------+----> आयतन (V) +-------+----> आयतन (V)
0 V1 V2 0 V1 V2
वक्र के नीचे का क्षेत्रफल = अधिकतम कार्य आयत का क्षेत्रफल = -P_ext * (V2 - V1)
|w_rev| > |w_irrev| निकाय द्वारा कम उपयोगी कार्य प्राप्त
4. कार्य, ऊष्मा एवं ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम
क. प्रसार कार्य का सूत्र
जब कोई गैस बाह्य विरोधी दाब Pext के विरुद्ध आयतन V1 से V2 तक प्रसारित होती है:
- स्थिर बाह्य दाब पर (अनुत्क्रमणीय प्रसार): w = −Pext (V2 − V1) = −Pext ΔV
- निर्वात में मुक्त प्रसार (Pext = 0): w = 0 (निर्वात में कोई विरोधी दाब न होने के कारण कार्य शून्य होता है!)
- आदर्श गैस का उत्क्रमणीय समतापी प्रसार (T = स्थिर):
चूँकि P = nRT / V:
wrev = − 2.303 nRT log10(V2 / V1) = − 2.303 nRT log10(P1 / P2)
ख. प्रथम नियम का गणितीय कथन
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम वस्तुतः ऊर्जा संरक्षण का नियम है: ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरित किया जा सकता है।
जहाँ:
- ΔU = निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन (जूल या kJ)
- q = निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा (+ve यदि अवशोषित, −ve यदि उत्सर्जित)
- w = निकाय पर किया गया कार्य (+ve यदि संपीड़न, −ve यदि प्रसार)
5. आदर्श गैसों के लिए प्रथम नियम की विशेष स्थितियाँ
| प्रक्रम की स्थिति | प्रतिबंध | प्रथम नियम पर परिणाम (ΔU = q + w) |
|---|---|---|
| समआयतनिक प्रक्रम | ΔV = 0 ⇒ w = 0 | ΔU = qv (स्थिर आयतन पर अवशोषित ऊष्मा आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन के बराबर होती है) |
| रुद्धोष्म प्रक्रम | q = 0 | ΔU = wad (किया गया कार्य आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है; प्रसार पर गैस ठंडी होती है) |
| समतापी प्रक्रम | ΔT = 0 ⇒ ΔU = 0 | q = −w (अवशोषित समस्त ऊष्मा प्रसार कार्य में रूपांतरित होती है) |
| मुक्त प्रसार (समतापी) | Pext = 0, ΔT = 0 | w = 0, q = 0, ΔU = 0 |
| चक्रीय प्रक्रम | प्रारंभिक अवस्था पुनः प्राप्त ⇒ ΔU = 0 | qnet = −wnet |
6. हल किए गए महत्वपूर्ण संख्यात्मक उदाहरण एवं परीक्षा MCQs
1. प्रसार कार्य की गणना: w = −Pext ΔV
ΔV = V2 − V1 = 6.0 L − 2.0 L = 4.0 L
w = −(3.0 atm) × (4.0 L) = −12.0 L·atm
2. कार्य को जूल में बदलिए: w = −12.0 × 101.3 J = −1215.6 J
3. अवशोषित ऊष्मा: q = +800 J
4. प्रथम नियम लागू करने पर: ΔU = q + w = +800 J + (−1215.6 J) = −415.6 J।
ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि निकाय की आंतरिक ऊर्जा में 415.6 J की कमी आती है।
उत्तर देखें
आदर्श गैस के समतापी उत्क्रमणीय प्रसार हेतु सूत्र:
wrev = −2.303 nRT log10(V2 / V1)
यहाँ n = 2 mol, T = 300 K, V2/V1 = 20/2 = 10, log10(10) = 1।
w = −2.303 × 2 × 8.314 × 300 × 1 = −11488 J = −11.49 kJ।
गैस परिवेश पर 11.49 kJ कार्य करती है, अतः w (गैस पर किया गया कार्य) = −11.49 kJ।
उत्तर देखें
गहन गुण निकाय में उपस्थित पदार्थ के द्रव्यमान या परिमाण पर निर्भर नहीं करते। आयतन, आंतरिक ऊर्जा, एन्थैल्पी, ऊष्मा धारिता, द्रव्यमान, गिब्ज़ ऊर्जा और एन्ट्रॉपी विस्तीर्ण (मात्रात्मक) गुण हैं। विकल्प (C) में दाब, मोलर ऊष्मा धारिता (Cm = C/n) तथा अपवर्तनांक तीनों पूर्णतः गहन गुण हैं।
7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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