§ 5.3NCERT कक्षा 11 · रसायन विज्ञान · अध्याय 5
ऊष्मारसायन, अभिक्रिया एन्थैल्पी एवं हेस का नियम
ऊष्मारसायन (Thermochemistry) भौतिक रसायन की वह शाखा है जो रासायनिक अभिक्रियाओं तथा प्रावस्था रूपांतरणों के दौरान अवशोषित या उत्सर्जित होने वाली ऊष्मा का अध्ययन करती है। यह अणुओं में आबंध सामर्थ्य, ईंधनों के ऊष्मीय मान तथा रासायनिक स्थायित्व के निर्धारण का सैद्धांतिक आधार प्रस्तुत करती है।
1. मानक अवस्था एवं मानक विरचन एन्थैल्पी (ΔfH°)
किसी पदार्थ की मानक अवस्था (Standard State) निर्दिष्ट ताप (सामान्यतः 298.15 K) और 1 बार मानक दाब पर उसका शुद्ध, सर्वाधिक स्थायी रूप होती है।
मानक विरचन एन्थैल्पी (ΔfH°): अपनी मानक संदर्भ अवस्था में उपस्थित तत्वों से किसी यौगिक के एक मोल के निर्माण में होने वाला एन्थैल्पी परिवर्तन।
सर्वमान्य परिपाटी: प्रत्येक तत्व की अपनी मानक संदर्भ अवस्था में ΔfH° = शून्य (0) मानी जाती है।
सर्वमान्य परिपाटी: प्रत्येक तत्व की अपनी मानक संदर्भ अवस्था में ΔfH° = शून्य (0) मानी जाती है।
| तत्व | मानक संदर्भ अवस्था (ΔfH° = 0) | गैर-संदर्भ अवस्था (ΔfH° ≠ 0) |
|---|---|---|
| कार्बन (C) | C(ग्रेफाइट) | C(हीरा) = +1.90 kJ mol−1, C60(फुलरीन) |
| ऑक्सीजन (O) | O2(गैस) | O3(ओजोन) = +142.7 kJ mol−1 |
| सल्फर (S) | S(विषमलम्बाक्ष / α-सल्फर) | S(एकनताक्ष / β-सल्फर) = +0.33 kJ mol−1 |
| फॉस्फोरस (P) | P(श्वेत फॉस्फोरस) | P(लाल फॉस्फोरस), P(काला फॉस्फोरस) |
| ब्रोमीन / आयोडीन | Br2(द्रव), I2(ठोस) | Br2(गैस), I2(गैस) |
मानक विरचन एन्थैल्पी द्वारा अभिक्रिया एन्थैल्पी की गणना
ΔrH° = ∑ ai ΔfH°(उत्पाद) − ∑ bj ΔfH°(अभिकारक)
2. हेस का स्थिर ऊष्मा संकलन का नियम (Hess's Law)
1840 में जर्मेन हेनरी हेस द्वारा प्रतिपादित: यदि कोई रासायनिक परिवर्तन एक पद में संपन्न हो या अनेक माध्यमिक पदों की श्रृंखला में, तो संपूर्ण प्रक्रम में होने वाला कुल एन्थैल्पी परिवर्तन सदैव समान रहता है, चाहे वह किसी भी मार्ग से क्यों न संपन्न कराया जाए।
गणितीय कथन: यदि अभिक्रिया A → D सीधे होने पर एन्थैल्पी परिवर्तन ΔHtotal हो, तथा माध्यमिक पदों A → B (ΔH1), B → C (ΔH2) एवं C → D (ΔH3) द्वारा हो, तो:
ΔHtotal = ΔH1 + ΔH2 + ΔH3
ΔHtotal = ΔH1 + ΔH2 + ΔH3
ऊष्मारसायनिक चक्र: हेस का नियम एवं NaCl का बॉर्न-हैबर चक्र
जालक एन्थैल्पी के अप्रत्यक्ष निर्धारण हेतु चरणबद्ध ऊर्जा चक्र
+---------------------------------------+
| Na(s) + 1/2 Cl2(g) |
+---------------------------------------+
| Δ_sub H° = +108.4 | v Na(g) | Δ_i H° = +495.8 | \ प्रत्यक्ष विरचन:
v \ Δ_f H°[NaCl(s)] = -411.2 kJ/mol
Na+(g) | | 1/2 Δ_bond H° = +121 kJ | -----------------------> | Cl(g) | | | | Δ_eg H° = -348.6 kJ v v v
[ Na+(g) + Cl-(g) ] ------------> NaCl(s)
जालक एन्थैल्पी
Δ_lattice H° = -788 kJ/mol
बॉर्न-हैबर चक्र का अनुप्रयोग: हेस के नियमानुसार:
ΔfH°[NaCl(s)] = ΔsubH°(Na) + ΔiH°(Na) + 0.5×ΔbondH°(Cl2) + ΔegH°(Cl) + ΔlatticeH°(NaCl)।
इस समीकरण से ठोस क्रिस्टल की जालक एन्थैल्पी (−788 kJ/mol) ज्ञात की जाती है, जिसे प्रत्यक्ष प्रायोगिक विधि द्वारा मापना संभव नहीं है।
ΔfH°[NaCl(s)] = ΔsubH°(Na) + ΔiH°(Na) + 0.5×ΔbondH°(Cl2) + ΔegH°(Cl) + ΔlatticeH°(NaCl)।
इस समीकरण से ठोस क्रिस्टल की जालक एन्थैल्पी (−788 kJ/mol) ज्ञात की जाती है, जिसे प्रत्यक्ष प्रायोगिक विधि द्वारा मापना संभव नहीं है।
3. आबंध वियोजन एन्थैल्पी एवं माध्य आबंध एन्थैल्पी
- आबंध वियोजन एन्थैल्पी: गैसीय अवस्था में किसी द्विपरमाणुक अणु के एक मोल आबंधों को तोड़कर गैसीय परमाणुओं में पृथक करने हेतु आवश्यक ऊर्जा (उदा. H2(g) → 2H(g), ΔH = +436 kJ mol−1)।
- माध्य आबंध एन्थैल्पी: बहुपरमाणुक अणुओं (जैसे CH4 या H2O) में क्रमिक आबंधों को तोड़ने की ऊर्जा भिन्न होती है। अतः सभी समान आबंधों की वियोजन ऊर्जाओं का औसत माध्य आबंध एन्थैल्पी कहलाता है (उदा. CH4 में ΔaH° / 4 = 1665 / 4 = 416.25 kJ mol−1)।
आबंध ऊर्जा द्वारा अभिक्रिया एन्थैल्पी:
ΔrH° = ∑ आबंध ऊर्जा(टूटे हुए अभिकारक आबंध) − ∑ आबंध ऊर्जा(निर्मित उत्पाद आबंध)
ΔrH° = ∑ आबंध ऊर्जा(टूटे हुए अभिकारक आबंध) − ∑ आबंध ऊर्जा(निर्मित उत्पाद आबंध)
NEET/JEE अत्यंत महत्वपूर्ण जाल:
विरचन एन्थैल्पी (ΔfH°) प्रयोग करते समय: ΔrH° = उत्पाद − अभिकारक।
आबंध वियोजन ऊर्जा (B.E.) प्रयोग करते समय: ΔrH° = अभिकारक − उत्पाद।
इन दोनों सूत्रों में अंतर न समझना परीक्षा में सर्वाधिक होने वाली त्रुटि है!
विरचन एन्थैल्पी (ΔfH°) प्रयोग करते समय: ΔrH° = उत्पाद − अभिकारक।
आबंध वियोजन ऊर्जा (B.E.) प्रयोग करते समय: ΔrH° = अभिकारक − उत्पाद।
इन दोनों सूत्रों में अंतर न समझना परीक्षा में सर्वाधिक होने वाली त्रुटि है!
4. प्रमुख विशिष्ट एन्थैल्पी परिवर्तन
| एन्थैल्पी का प्रकार | परिभाषा | सामान्य चिन्ह |
|---|---|---|
| दहन की मानक एन्थैल्पी (ΔcH°) | ऑक्सीजन के आधिक्य में पदार्थ के 1 मोल के पूर्ण दहन पर मुक्त ऊष्मा। | सदैव ऋणात्मक (ऊष्माक्षेपी; ΔH < 0) |
| कणन एन्थैल्पी (ΔaH°) | पदार्थ के 1 मोल के सभी आबंधों को तोड़कर गैसीय परमाणुओं में बदलने पर आवश्यक ऊर्जा। | सदैव धनात्मक (ऊष्माशोषी; ΔH > 0) |
| ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी (ΔsubH°) | 1 मोल ठोस के सीधे वाष्प में बदलने पर एन्थैल्पी परिवर्तन: ΔsubH° = ΔfusH° + ΔvapH°। | सदैव धनात्मक (ऊष्माशोषी) |
| उदासीनीकरण एन्थैल्पी | जलीय विलयन में 1 ग्राम तुल्यांक अम्ल के 1 ग्राम तुल्यांक क्षार द्वारा पूर्ण उदासीनीकरण पर मुक्त ऊष्मा। प्रबल अम्ल व प्रबल क्षार हेतु ΔH ≈ −57.1 kJ eq−1 (H+(aq) + OH−(aq) → H2O(l))। | सदैव ऋणात्मक (ऊष्माक्षेपी) |
5. हल किए गए महत्वपूर्ण संख्यात्मक उदाहरण एवं परीक्षा MCQs
उदाहरण 1 (JEE Main): निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए मानक एन्थैल्पी परिवर्तन (ΔrH°) ज्ञात कीजिए:
CH2=CH2(g) + H2(g) → CH3−CH3(g)
दी गई आबंध एन्थैल्पी:
C=C: 606 kJ mol−1, C−C: 347 kJ mol−1, C−H: 414 kJ mol−1, H−H: 436 kJ mol−1।
CH2=CH2(g) + H2(g) → CH3−CH3(g)
दी गई आबंध एन्थैल्पी:
C=C: 606 kJ mol−1, C−C: 347 kJ mol−1, C−H: 414 kJ mol−1, H−H: 436 kJ mol−1।
चरणबद्ध हल:
1. अभिकारकों में टूटने वाले आबंध:
• 1 मोल C=C द्विआबंध = 1 × 606 = 606 kJ
• 4 मोल C−H आबंध = 4 × 414 = 1656 kJ
• 1 मोल H−H आबंध = 1 × 436 = 436 kJ
आबंध तोड़ने हेतु कुल अवशोषित ऊर्जा = 606 + 1656 + 436 = 2698 kJ।
2. उत्पादों (C2H6) में बनने वाले नए आबंध:
• 1 मोल C−C एकल आबंध = 1 × 347 = 347 kJ
• 6 मोल C−H आबंध = 6 × 414 = 2484 kJ
आबंध निर्माण में कुल मुक्त ऊर्जा = 347 + 2484 = 2831 kJ।
3. ΔrH° = ∑ B.E.(अभिकारक) − ∑ B.E.(उत्पाद) लागू करने पर:
ΔrH° = 2698 kJ − 2831 kJ = −133 kJ mol−1।
(अभिक्रिया 133 kJ/mol ऊष्माक्षेपी है)।
1. अभिकारकों में टूटने वाले आबंध:
• 1 मोल C=C द्विआबंध = 1 × 606 = 606 kJ
• 4 मोल C−H आबंध = 4 × 414 = 1656 kJ
• 1 मोल H−H आबंध = 1 × 436 = 436 kJ
आबंध तोड़ने हेतु कुल अवशोषित ऊर्जा = 606 + 1656 + 436 = 2698 kJ।
2. उत्पादों (C2H6) में बनने वाले नए आबंध:
• 1 मोल C−C एकल आबंध = 1 × 347 = 347 kJ
• 6 मोल C−H आबंध = 6 × 414 = 2484 kJ
आबंध निर्माण में कुल मुक्त ऊर्जा = 347 + 2484 = 2831 kJ।
3. ΔrH° = ∑ B.E.(अभिकारक) − ∑ B.E.(उत्पाद) लागू करने पर:
ΔrH° = 2698 kJ − 2831 kJ = −133 kJ mol−1।
(अभिक्रिया 133 kJ/mol ऊष्माक्षेपी है)।
अभ्यास MCQ 1 (NEET): मानक विरचन एन्थैल्पी (ΔfH°) के मान दिए गए हैं:
CO2(g): −393.5 kJ mol−1, H2O(l): −285.8 kJ mol−1, CH4(g): −74.8 kJ mol−1।
मेथेन की मानक दहन एन्थैल्पी (ΔcH°) का मान क्या होगा?
CO2(g): −393.5 kJ mol−1, H2O(l): −285.8 kJ mol−1, CH4(g): −74.8 kJ mol−1।
मेथेन की मानक दहन एन्थैल्पी (ΔcH°) का मान क्या होगा?
(A) −890.3 kJ mol−1
(B) +890.3 kJ mol−1
(C) −604.5 kJ mol−1
(D) −965.1 kJ mol−1
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) −890.3 kJ mol−1
स्पष्टीकरण:
दहन अभिक्रिया: CH4(g) + 2O2(g) → CO2(g) + 2H2O(l)
ΔcH° = [ΔfH°(CO2) + 2ΔfH°(H2O)] − [ΔfH°(CH4) + 2ΔfH°(O2)]
ध्यान दें कि ΔfH°(O2(g)) = 0 (मानक संदर्भ अवस्था)।
ΔcH° = [−393.5 + 2(−285.8)] − [−74.8 + 0]
ΔcH° = [−393.5 − 571.6] + 74.8 = −965.1 + 74.8 = −890.3 kJ mol−1।
दहन अभिक्रिया: CH4(g) + 2O2(g) → CO2(g) + 2H2O(l)
ΔcH° = [ΔfH°(CO2) + 2ΔfH°(H2O)] − [ΔfH°(CH4) + 2ΔfH°(O2)]
ध्यान दें कि ΔfH°(O2(g)) = 0 (मानक संदर्भ अवस्था)।
ΔcH° = [−393.5 + 2(−285.8)] − [−74.8 + 0]
ΔcH° = [−393.5 − 571.6] + 74.8 = −965.1 + 74.8 = −890.3 kJ mol−1।
6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. दुर्बल अम्ल के प्रबल क्षार द्वारा उदासीनीकरण की ऊष्मा 57.1 kJ/eq से कम क्यों होती है?
दुर्बल अम्ल (जैसे CH3COOH) जलीय विलयन में पूर्णतः आयनित नहीं होते। उदासीनीकरण के दौरान मुक्त हुई ऊष्मा का एक भाग दुर्बल अम्ल को आयनों में पूर्णतः वियोजित करने (आयनन एन्थैल्पी) में खर्च हो जाता है। अतः प्रेक्षित शुद्ध ऊष्माक्षेपी ऊष्मा 57.1 kJ/eq से कम प्राप्त होती है।
2. क्या मानक विरचन एन्थैल्पी धनात्मक हो सकती है?
हाँ। धनात्मक ΔfH° वाले यौगिक (जैसे NO, NO2, C2H2, CS2) ऊष्माशोषी यौगिक कहलाते हैं। ये अपने संघटक तत्वों की तुलना में ऊष्मागतिक रूप से कम स्थायी होते हैं और स्वतः ऊष्मा उत्सर्जित करते हुए विघटित हो सकते हैं।
आपकी प्रगति
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