स्वतःप्रवर्तिता, एन्ट्रॉपी एवं ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम हमें यह बताता है कि प्रत्येक भौतिक और रासायनिक परिवर्तन में ऊर्जा संरक्षित रहती है, परंतु यह प्राकृतिक प्रक्रमों की दिशा के विषय में कोई जानकारी नहीं देता। ऊष्मा सदैव गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर ही स्वतः क्यों प्रवाहित होती है? कोई गैस निर्वात में स्वयं प्रसारित हो जाती है, परंतु कभी स्वतः संपीड़ित क्यों नहीं होती? इन प्रश्नों के उत्तर स्वतःप्रवर्तिता एवं एन्ट्रॉपी की अवधारणा में निहित हैं।
1. स्वतःप्रवर्तिता की संकल्पना एवं प्रेरक बल
स्वतःप्रवर्तित प्रक्रम (Spontaneous Process): वह प्राकृतिक अनुत्क्रमणीय प्रक्रम जो दी गई परिस्थितियों में बिना किसी निरंतर बाह्य सहायता के अपने आप संपन्न होता है। एक बार प्रारंभ होने के पश्चात अथवा स्वतः ही यह निकाय को साम्यावस्था की ओर ले जाता है।
- स्वतःप्रवर्तित प्रक्रमों के उदाहरण: पहाड़ से नीचे बहता जल, निर्वात में गैस का विसरण, गर्म जल में शर्करा का घुलना, नम वायु में लोहे पर जंग लगना।
- स्वतःप्रवर्तिता के पीछे कार्यरत प्रेरक बल:
- न्यूनतम ऊर्जा प्राप्त करने की प्रवृत्ति: अनेक ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ (ΔH < 0) स्वतः होती हैं क्योंकि निम्न ऊर्जा अवस्था अधिक स्थायी होती है।
- अधिकतम अव्यवस्था (यादृच्छिकता) प्राप्त करने की प्रवृत्ति: ऊष्माशोषी परिवर्तन भी (ΔH > 0, जैसे 25 °C पर बर्फ का पिघलना या द्रव का वाष्पीकरण) स्वतः होते हैं क्योंकि निकाय आणविक अव्यवस्था में वृद्धि प्राप्त करता है।
2. एन्ट्रॉपी (S): परिभाषा एवं भौतिक सार्थकता
एन्ट्रॉपी (S) एक ऊष्मागतिक अवस्था फलन है जो किसी निकाय की आणविक अव्यवस्था (disorder), यादृच्छिकता (randomness) अथवा उसके द्वारा ग्रहण की जा सकने वाली सूक्ष्म अवस्थाओं (Ω) की संख्या का परिमाणात्मक माप है: S = kB ln(Ω)।
परम ताप T पर अनंतसूक्ष्म उत्क्रमणीय ऊष्मा विनिमय dqrev हेतु:
dS = dqrev / T ⇒ ΔS = ∫ (dqrev / T)
इकाई: J K−1 mol−1 (जूल प्रति केल्विन प्रति मोल)।
| भौतिक अवस्था / प्रावस्था | सापेक्ष एन्ट्रॉपी | कारण |
|---|---|---|
| ठोस प्रावस्था (Solid) | न्यूनतम एन्ट्रॉपी (Sठोस) | कण निश्चित जालक बिंदुओं पर बंधे रहते हैं, केवल सीमित कंपन गति संभव। |
| द्रव प्रावस्था (Liquid) | मध्यम एन्ट्रॉपी (Sद्रव) | अणुओं को स्थानांतरीय तथा घूर्णी गति की स्वतंत्रता प्राप्त होती है। |
| गैसीय प्रावस्था (Gas) | उच्चतम एन्ट्रॉपी (Sगैस) | अणु अत्यंत तीव्र वेग से विशाल रिक्त स्थान में पूर्णतः स्वतंत्र विचरण करते हैं। |
प्रावस्था रूपांतरणों में एन्ट्रॉपी परिवर्तन
एन्ट्रॉपी (S)
^ / वाष्प अवस्था
| / (अत्यधिक एन्ट्रॉपी)
| +--------*
| | Δ_vap S = Δ_vap H / T_b
| द्रव अवस्था|
| +-------------*
| | Δ_fus S = Δ_fus H / T_m
| ठोस अवस्था |
| /
| /
+-------------+---------------+-------------+----------> ताप (T)
0 K T_गलनांक T_क्वथनांक
3. एन्ट्रॉपी परिवर्तनों के गणितीय सूत्र
क. साम्यावस्था पर प्रावस्था रूपांतरण (स्थिर T व P)
- गलन की एन्ट्रॉपी: ΔfusS = ΔfusH / Tf
- वाष्पन की एन्ट्रॉपी: ΔvapS = ΔvapH / Tb
- ऊर्ध्वपातन की एन्ट्रॉपी: ΔsubS = ΔsubH / Tsub = ΔfusS + ΔvapS
ख. आदर्श गैस के n मोल हेतु एन्ट्रॉपी परिवर्तन
प्रथम नियम (dqrev = dU + PdV = nCvdT + (nRT/V)dV) से:
ΔS = n Cv ln(T2 / T1) + n R ln(V2 / V1)
दाब के पदों में:
ΔS = n Cp ln(T2 / T1) − n R ln(P2 / P1)
- समतापी प्रक्रम (T1 = T2): ΔS = 2.303 n R log10(V2 / V1) = 2.303 n R log10(P1 / P2)
- समआयतनिक प्रक्रम (V1 = V2): ΔS = 2.303 n Cv log10(T2 / T1)
- समदाबी प्रक्रम (P1 = P2): ΔS = 2.303 n Cp log10(T2 / T1)
- उत्क्रमणीय रुद्धोष्म प्रक्रम (qrev = 0): ΔS = 0 (सम-एन्ट्रॉपी प्रक्रम / Isentropic Process)
4. ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम (Second Law of Thermodynamics)
ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम स्वतःप्रवर्तित परिवर्तनों की सार्वभौमिक कसौटी निर्धारित करता है:
ΔSकुल = ΔSनिकाय + ΔSपरिवेश > 0 (स्वतःप्रवर्तित / अनुत्क्रमणीय प्रक्रम)
ΔSकुल = ΔSनिकाय + ΔSपरिवेश = 0 (उत्क्रमणीय प्रक्रम / साम्यावस्था)
ΔSकुल < 0 (असंभव / अस्वतःप्रवर्तित प्रक्रम)
परिवेश की एन्ट्रॉपी में परिवर्तन
परिवेश स्थिर ताप T पर एक अनंत ऊष्मा कुंड के समान व्यवहार करता है:
ΔSपरिवेश = qपरिवेश / T = −qनिकाय / T = −ΔHनिकाय / T
अतः:
ΔSकुल = ΔSनिकाय − (ΔHनिकाय / T)
दोनों पक्षों को −T से गुणा करने पर: −TΔSकुल = ΔHनिकाय − TΔSनिकाय, जो सीधे गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा (ΔG) की ओर ले जाता है!
5. हल किए गए महत्वपूर्ण संख्यात्मक उदाहरण एवं परीक्षा MCQs
1. दिए गए मान:
ΔvapH = 40.66 kJ mol−1 = 40,660 J mol−1
Tb = 373 K
2. साम्यावस्था पर वाष्पन एन्ट्रॉपी सूत्र लागू करने पर:
ΔvapS = ΔvapH / Tb
ΔvapS = 40,660 J mol−1 / 373 K = +109.0 J K−1 mol−1।
धनात्मक मान यह दर्शाता है कि अणुओं के वाष्प प्रावस्था में जाने पर आणविक अव्यवस्था में भारी वृद्धि होती है।
उत्तर देखें
अभिक्रिया (B) में ठोस अभिकारक अपघटित होकर 1 मोल गैस उत्पन्न करता है: Δng = 1 − 0 = +1। गैस अणुओं की एन्ट्रॉपी ठोस की तुलना में अत्यंत अधिक होती है; अतः ΔS° > 0। विकल्प (A) एवं (C) में Δng ऋणात्मक है, जबकि (D) में वाष्प के द्रव में संघनन से एन्ट्रॉपी घटती है।
उत्तर देखें
आदर्श गैस के समतापी प्रक्रम हेतु सूत्र:
ΔS = 2.303 n R log10(V2 / V1)
ΔS = 2.303 × 1 × 8.314 × log10(100 / 10) = 2.303 × 8.314 × 1 = +19.15 J K−1।
6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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