गिब्ज़ ऊर्जा, रासायनिक साम्यावस्था एवं ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम
व्यावहारिक रसायन विज्ञान में रासायनिक अभिक्रियाएँ स्थिर ताप तथा स्थिर वायुमंडलीय दाब पर संपन्न कराई जाती हैं। परिवेश की एन्ट्रॉपी की गणना किए बिना सीधे अभिक्रिया की साध्यता (स्वतःप्रवर्तिता) ज्ञात करने के लिए जे. विलार्ड गिब्ज़ ने सर्वाधिक शक्तिशाली ऊष्मागतिक विभव गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा (G) का सूत्रपात किया।
1. गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा (G) एवं गिब्ज़-हेल्महोल्ट्ज़ समीकरण
गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा को गणितीय रूप से निम्न प्रकार परिभाषित किया जाता है:
जहाँ H एन्थैल्पी, T केल्विन में परम ताप तथा S एन्ट्रॉपी है। चूँकि H, T और S सभी अवस्था फलन हैं, इसलिए गिब्ज़ ऊर्जा भी एक विस्तीर्ण अवस्था फलन है।
स्थिर ताप (T = स्थिर) एवं स्थिर दाब पर होने वाले परिवर्तन के लिए:
गिब्ज़ ऊर्जा की भौतिक सार्थकता
स्थिर ताप व स्थिर दाब पर गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा में होने वाली कमी (−ΔG) निकाय द्वारा किए जाने वाले अधिकतम उपयोगी गैर-प्रसार कार्य (जैसे वैद्युतरसायनिक सेल में विद्युत कार्य) के बराबर होती है:
2. स्थिर T व P पर स्वतःप्रवर्तिता एवं साम्यावस्था की कसौटियाँ
| ΔG का चिन्ह | ऊष्मागतिक अर्थ | प्रक्रम की वास्तविक स्थिति |
|---|---|---|
| ΔG < 0 (ऋणात्मक) | स्वतःप्रवर्तित प्रक्रम (Spontaneous) | अभिक्रिया अग्र दिशा में स्वतः संपन्न होगी। |
| ΔG = 0 (शून्य) | साम्यावस्था (Equilibrium) | निकाय गतिक साम्यावस्था में है; कोई शुद्ध परिवर्तन नहीं होगा। |
| ΔG > 0 (धनात्मक) | अस्वतःप्रवर्तित प्रक्रम (Non-Spontaneous) | अग्र अभिक्रिया स्वतः नहीं होगी; विपरीत अभिक्रिया स्वतःप्रवर्तित होगी। |
अभिक्रिया निर्देशांक के साथ गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा वक्र
गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा (G)
^
| अभिकारक (G_reactants)
| | \ अग्र दिशा में स्वतःप्रवर्तित (ΔG < 0)
| | \ उत्पाद (G_products)
| \ /
| \ / विपरीत दिशा में स्वतःप्रवर्तित
| \ /
| \ /
| +----------+
| *
| साम्यावस्था: (dG/dξ) = 0, ΔG = 0
+--------------------------------------------------------> अभिक्रिया की प्रगति (ξ)
3. स्वतःप्रवर्तिता पर ताप का प्रभाव (चिन्ह विश्लेषण आव्यूह)
| ΔH | ΔS | ΔG = ΔH − TΔS | स्वतःप्रवर्तिता का स्वभाव | रासायनिक उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| − (ऊष्माक्षेपी) | + (अव्यवस्था वृद्धि) | सभी तापों पर सदैव − | सभी तापों पर स्वतःप्रवर्तित | 2H2O2(l) → 2H2O(l) + O2(g) |
| + (ऊष्माशोषी) | − (व्यवस्था वृद्धि) | सभी तापों पर सदैव + | किसी भी ताप पर स्वतःप्रवर्तित नहीं | 3O2(g) → 2O3(g) |
| − (ऊष्माक्षेपी) | − (व्यवस्था वृद्धि) | निम्न T पर −; उच्च T पर + | केवल निम्न ताप पर स्वतःप्रवर्तित (एन्थैल्पी प्रेरित) | N2(g) + 3H2(g) → 2NH3(g) |
| + (ऊष्माशोषी) | + (अव्यवस्था वृद्धि) | निम्न T पर +; उच्च T पर − | केवल उच्च ताप पर स्वतःप्रवर्तित (एन्ट्रॉपी प्रेरित) | CaCO3(s) → CaO(s) + CO2(g) |
Teq = ΔH / ΔS (सावधानी: ΔH और ΔS की इकाइयों को समान रखें — दोनों को जूल में!)
4. मानक गिब्ज़ ऊर्जा एवं साम्यावस्था स्थिरांक (K)
किसी सामान्य उत्क्रमणीय अभिक्रिया aA + bB ⇌ cC + dD के लिए वान्ट हॉफ समीकरण ΔG तथा अभिक्रिया भागफल Q को जोड़ता है:
ΔG = ΔG° + RT ln Q
गतिक साम्यावस्था पर ΔG = 0 तथा Q = K (साम्यावस्था स्थिरांक)। अतः:
- यदि ΔrG° < 0 ⇒ log10 K > 0 ⇒ K > 1 (साम्यावस्था पर उत्पाद प्रबल होंगे)।
- यदि ΔrG° > 0 ⇒ log10 K < 0 ⇒ K < 1 (साम्यावस्था पर अभिकारक प्रबल होंगे)।
- यदि ΔrG° = 0 ⇒ log10 K = 0 ⇒ K = 1।
5. ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम एवं निरपेक्ष एन्ट्रॉपी
वाल्थर नर्नस्ट एवं मैक्स प्लांक द्वारा प्रतिपादित: परम शून्य ताप (0 केल्विन) पर किसी भी शुद्ध एवं पूर्णतः क्रिस्टलीय पदार्थ की एन्ट्रॉपी शून्य होती है।
तृतीय नियम की सहायता से 0 K से लेकर किसी भी ताप T तक ऊष्मा धारिताओं का समाकलन करके पदार्थ की निरपेक्ष एन्ट्रॉपी की गणना की जाती है:
ST = ∫0T (Cp / T) dT
अवशिष्ट एन्ट्रॉपी (Residual Entropy)
कुछ पदार्थों में तीव्र शीतलन के कारण 0 K पर भी अणुओं के क्रिस्टलीय संकुलन में पूर्ण व्यवस्था प्राप्त नहीं हो पाती। 0 K पर बची इस अव्यवस्था को अवशिष्ट एन्ट्रॉपी कहते हैं।
अवशिष्ट एन्ट्रॉपी दर्शाने वाले प्रमुख उदाहरण: CO (द्विध्रुव अभिविन्यास की अनिश्चितता), NO, N2O तथा बर्फ (हाइड्रोजन आबंधों की स्थानिक विविधता)।
6. हल किए गए महत्वपूर्ण संख्यात्मक उदाहरण एवं परीक्षा MCQs
1. स्वतःप्रवर्तिता की शर्त: ΔG = ΔH − TΔS < 0
2. साम्यावस्था संक्रमण ताप Teq ज्ञात करने हेतु ΔG = 0 रखें:
Teq = ΔH / ΔS
3. इकाइयों को जूल में बदलिए:
ΔH = 35.5 × 1000 J mol−1 = 35,500 J mol−1
ΔS = 83.6 J K−1 mol−1
Teq = 35,500 / 83.6 = 424.6 K।
चूँकि ΔH और ΔS दोनों धनात्मक हैं, अतः अभिक्रिया 424.6 K (अथवा 151.6 °C) से अधिक ताप पर स्वतःप्रवर्तित होगी।
उत्तर देखें
सूत्र: ΔrG° = −2.303 RT log10 K
−5.71 kJ mol−1 = −(5.71 kJ mol−1) × log10 K
log10 K = 1 ⇒ K = 101 = 10।
उत्तर देखें
ठोस CO में द्विध्रुव आघूर्ण अत्यंत अल्प होता है। तीव्र शीतलन पर जालक में अणु यादृच्छिक रूप से (:C≡O: अथवा :O≡C:) अभिविन्यासित हो जाते हैं, जिससे 0 K पर भी S0 = R ln(2) ≈ 5.76 J K−1 mol−1 की अवशिष्ट एन्ट्रॉपी उपस्थित रहती है।
7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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