अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्ध्य तरंगें, प्रगामी तरंग समीकरण एवं ध्वनि की चाल
तरंग किसी माध्यम में उत्पन्न वह विक्षोभ (disturbance) है जो बिना द्रव्य के वास्तविक स्थानांतरण के एक स्थान से दूसरे स्थान तक ऊर्जा एवं संवेग का संचरण करता है। माध्यम के कण अपनी साम्यावस्था के दोनों ओर केवल दोलन करते हैं।
1. अनुप्रस्थ तरंगें बनाम अनुदैर्ध्य तरंगें
1. अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves)
- माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् दोलन करते हैं।
- ये शृंग (Crest) एवं गर्त (Trough) के रूप में आगे बढ़ती हैं।
- इनके संचरण हेतु माध्यम में अपरूपण प्रत्यास्थता (Shear Modulus) का होना अनिवार्य है। अतः ये केवल ठोसों में तथा द्रवों की मुक्त सतह पर (पृष्ठ तनाव के कारण) संचरित हो सकती हैं। ये द्रवों एवं गैसों के भीतर संचरित नहीं हो सकतीं।
- उदाहरण: तनी हुई डोरी में तरंगें, विद्युत-चुम्बकीय तरंगें (प्रकाश, रेडियो), जल की सतह पर रिपल्स।
2. अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves)
- माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर (अनुदिश) दोलन करते हैं।
- ये एकांतर संपीड़न (उच्च दाब व घनत्व) एवं विरलन (निम्न दाब व घनत्व) के रूप में आगे बढ़ती हैं।
- इनके संचरण हेतु माध्यम में आयतन प्रत्यास्थता (Bulk Modulus) आवश्यक है। अतः ये ठोस, द्रव एवं गैस तीनों माध्यमों में संचरित हो सकती हैं।
- उदाहरण: वायु में ध्वनि तरंगें, द्रवों के भीतर दाब तरंगें।
2. प्रगामी (Travelling) तरंग का गणितीय निरूपण
धनात्मक X-दिशा में गतिमान एक सरल आवर्त प्रगामी तरंग का विस्थापन समीकरण:
जहाँ:
- A: तरंग का आयाम (कण का अधिकतम विस्थापन)।
- ω = 2π f = 2π / T: कोणीय आवृत्ति (rad/s)।
- k = 2π / λ: कोणीय तरंग संख्या या संचरण नियतांक (rad/m)।
- λ: तरंगदैर्ध्य (समान कला वाले दो क्रमागत कणों की दूरी)।
- तरंग की चाल (v): नियत कला के संचरण का वेग:
v = ω / k = f λ = λ / T
3. कण वेग बनाम तरंग वेग
किसी बिन्दु x पर माध्यम के कण का तात्क्षणिक वेग vp = ∂y / ∂t होता है:
कण का अधिकतम वेग: vp,max = ω A (माध्य स्थिति y = 0 पर)।
4. तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की चाल
तनाव T तथा एकांक लम्बाई के द्रव्यमान μ (रेखीय द्रव्यमान घनत्व = m / L = ρ π r2) वाली तनी डोरी में:
5. गैस में ध्वनि की चाल: न्यूटन का सूत्र एवं लाप्लास का संशोधन
न्यूटन का सूत्र (समतापी परिकल्पना)
न्यूटन ने माना कि संपीड़न व विरलन में ऊष्मा का आदान-प्रदान सुगमता से होता है जिससे तापमान स्थिर रहता है (समतापी प्रक्रम: PV = नियतांक ⇒ B = P):
प्रायोगिक मान (~332 m/s) से यह लगभग 16% कम था।
लाप्लास का संशोधन (रुद्धोष्म परिकल्पना)
लाप्लास ने स्पष्ट किया कि संपीड़न व विरलन इतनी तीव्रता से होते हैं कि ऊष्मा आदान-प्रदान का समय नहीं मिलता (रुद्धोष्म प्रक्रम: PVγ = नियतांक ⇒ B = γP):
यह प्रायोगिक मान से पूर्णतः मेल खाता है!
6. ध्वनि की चाल को प्रभावित करने वाले भौतिक कारक
| भौतिक कारक | ध्वनि की चाल पर प्रभाव | कारण एवं सम्बद्ध सूत्र |
|---|---|---|
| तापमान (T) | ताप बढ़ने पर चाल बढ़ती है | v ∝ √T (केल्विन में)। प्रति 1°C ताप वृद्धि पर चाल लगभग 0.61 m/s बढ़ती है (vt ≈ v0 + 0.61 t)। |
| दाब (P) | कोई प्रभाव नहीं (नियत ताप पर) | ताप नियत होने पर दाब बदलने से घनत्व ρ भी उसी अनुपात में बदलता है (P/ρ = RT/M = नियतांक)। |
| आर्द्रता (Humidity) | आर्द्र वायु में चाल अधिक होती है | जलवाष्प का अणुभार (18) शुष्क वायु (29) से कम होता है। आर्द्र वायु का घनत्व घट जाता है, अतः चाल v बढ़ जाती है। |
| वायु की दिशा (Wind) | दिशा पर निर्भर | हवा की दिशा में: veff = v + w cos θ। |
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