§ 14.3NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 14
तनी हुई डोरी एवं आर्गन नलिकाओं में अप्रगामी तरंगें
अप्रगामी (Standing / Stationary) तरंगों का निर्माण:
जब समान आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य तथा आयाम वाली दो प्रगामी तरंगें एक ही चाल से किसी परिबद्ध माध्यम में परस्पर विपरीत दिशाओं में संचरित होकर अध्यारोपित होती हैं, तो माध्यम में एक स्थिर तरंग प्रतिरूप उत्पन्न होता है जिसे अप्रगामी तरंग कहते हैं।
y(x, t) = [ 2 A sin(kx) ] cos(ωt) = A(x) cos(ωt)
1. निष्पन्द (Nodes) एवं प्रस्पन्द (Antinodes)
1. निष्पन्द (Nodes - N)
- वे स्थान जहाँ कणों का दोलन आयाम सदैव शून्य होता है: sin(kx) = 0 ⇒ x = n λ/2 (0, λ/2, λ…)।
- निष्पन्द पर कण सदैव विराम में रहते हैं।
- प्रतिबल एवं दाब परिवर्तन निष्पन्द पर अधिकतम होता है!
2. प्रस्पन्द (Antinodes - A)
- वे स्थान जहाँ दोलन आयाम अधिकतम (2A) होता है: x = (2n − 1) λ/4 (λ/4, 3λ/4…)।
- कण अधिकतम वेग से दोलन करते हैं।
- प्रतिबल एवं दाब परिवर्तन प्रस्पन्द पर शून्य होता है!
दूरी सम्बन्धी महत्वपूर्ण नियम:
- दो क्रमागत निष्पन्दों (या प्रस्पन्दों) के बीच की दूरी = λ / 2
- एक निष्पन्द एवं समीपवर्ती प्रस्पन्द के बीच की दूरी = λ / 4
- अप्रगामी तरंग में माध्यम से होकर ऊर्जा का कोई शुद्ध संचरण नहीं होता; ऊर्जा निष्पन्दों के बीच परिबद्ध रहती है।
2. दोनों सिरों पर बन्धी तनी डोरी के संनादी
दोनों सिरों पर निष्पन्द बनते हैं: L = n (λ/2) ⇒ λ = 2L / n:
fn = n [ v / (2L) ] = (n / 2L) √(T / μ) (जहाँ n = 1, 2, 3…)
तनी डोरी में सभी सम एवं विषम संनादी उपस्थित होते हैं (अनुपात 1 : 2 : 3 : 4…)।
3. आर्गन नलिकाएं: खुली नलिका बनाम बन्द नलिका
खुली आर्गन नलिका (Open Pipe)
- दोनों खुले सिरों पर प्रस्पन्द (Antinodes) बनते हैं।
- लम्बाई L = n (λ/2)।
- आवृत्तियां: fn = n (v / 2L) (n = 1, 2, 3…)।
- सभी संनादी उपस्थित होते हैं (1 : 2 : 3 : 4…)। इसकी ध्वनि अधिक मधुर होती है।
बन्द आर्गन नलिका (Closed Pipe)
- बन्द सिरे पर निष्पन्द तथा खुले सिरे पर प्रस्पन्द बनता है।
- लम्बाई L = (2n − 1) (λ/4)।
- आवृत्तियां: fn = (2n − 1) [ v / (4L) ]।
- केवल विषम संनादी उपस्थित होते हैं (1 : 3 : 5 : 7…)।
- समान लम्बाई हेतु बन्द नलिका की मूल आवृत्ति खुली नलिका से आधी होती है।
4. सिरा संशोधन (End Correction) एवं अनुनाद नली
खुले सिरे पर वास्तविक प्रस्पन्द नली के सिरे से थोड़ा बाहर दूरी e पर बनता है:
e ≈ 0.6 r (जहाँ r नली की आंतरिक त्रिज्या है)
अनुनाद नली प्रयोग में दो क्रमागत अनुनादी लम्बाइयों l1 व l2 हेतु:
ध्वनि की चाल: v = 2 f (l2 − l1) एवं सिरा संशोधन: e = (l2 − 3 l1) / 2
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