§ 14.2NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 14
तरंगों का अध्यारोपण सिद्धान्त एवं परिसीमाओं पर परावर्तन
अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Superposition):
जब दो या दो से अधिक तरंगें माध्यम में एक साथ संचरित होकर परस्पर अतिव्याप्त होती हैं, तो किसी भी क्षण माध्यम के किसी कण का परिणामी विस्थापन प्रत्येक तरंग द्वारा उत्पन्न अलग-अलग विस्थापनों के सदिश योग (Vector Sum) के बराबर होता है:
y(x, t) = y1(x, t) + y2(x, t) + … + yn(x, t)
1. दो सरल आवर्त तरंगों का व्यतिकरण (Interference)
माना समान आवृत्ति एवं A1, A2 आयाम वाली दो तरंगों के मध्य नियत कलान्तर φ है:
परिणामी आयाम: Ares = √[ A12 + A22 + 2 A1 A2 cos φ ]
तीव्रता I ∝ A2 होने के कारण:
परिणामी तीव्रता: Ires = I1 + I2 + 2 √(I1 I2) cos φ
| स्थिति | कलान्तर (φ) | पथान्तर (Δx) | अधिकतम / न्यूनतम आयाम | तीव्रता |
|---|---|---|---|---|
| सम्पोषी व्यतिकरण (उच्चिष्ठ) | 2nπ (0, 2π, 4π…) | n λ | Amax = A1 + A2 | Imax = (√I1 + √I2)2 |
| विनाशी व्यतिकरण (निम्निष्ठ) | (2n − 1)π (π, 3π…) | (2n − 1) λ / 2 | Amin = |A1 − A2| | Imin = (√I1 − √I2)2 |
2. परिसीमाओं पर तरंगों का परावर्तन (Reflection at Boundaries)
1. दृढ़ परिसीमा (Rigid / Fixed End) पर परावर्तन
- दीवार या कसकर बन्धे सिरे पर विस्थापन सदैव शून्य होता है।
- न्यूटन के तृतीय नियमानुसार दीवार विपरीत प्रतिक्रिया बल लगाती है।
- परावर्तित तरंग में π रेडियन (180°) का कलान्तर उत्पन्न होता है।
- शृंग गर्त के रूप में तथा गर्त शृंग के रूप में परावर्तित होता है!
आपतित: yi = A sin(kx − ωt)
परावर्तित: yr = −A sin(kx + ωt) = A sin(kx + ωt + π)
परावर्तित: yr = −A sin(kx + ωt) = A sin(kx + ωt + π)
2. मुक्त परिसीमा (Free / Open End) पर परावर्तन
- मुक्त सिरा बिना किसी घर्षण के दोलन करने हेतु स्वतन्त्र होता है।
- परावर्तित तरंग में कोई कलान्तर उत्पन्न नहीं होता (Δφ = 0)।
- शृंग शृंग के रूप में ही वापस लौटता है।
आपतित: yi = A sin(kx − ωt)
परावर्तित: yr = A sin(kx + ωt)
परावर्तित: yr = A sin(kx + ωt)
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