ताप, ऊष्मा एवं तापमिति – संपूर्ण JEE एवं NEET मार्गदर्शिका
तापीय भौतिकी का प्रारंभ ऊष्मा (Heat) एवं ताप (Temperature) की संकल्पनाओं से होता है। दैनिक जीवन में यद्यपि इन्हें परस्पर पर्यायवाची मान लिया जाता है, किंतु भौतिकी में ये भिन्न राशियां हैं: ऊष्मा तापांतर के कारण स्थानांतरित होने वाली ऊर्जा है, जबकि ताप वह भौतिक राशि है जो ऊष्मा प्रवाह की दिशा निर्धारित करती है।
- ऊष्मा (Q): तापांतर के कारण एक वस्तु से दूसरी वस्तु में प्रवाहित होने वाली ऊर्जा। SI मात्रक: जूल (J); व्यावहारिक मात्रक: कैलोरी (cal) (1 cal = 4.186 J)।
- ताप (T): वह भौतिक राशि जो किसी वस्तु के गर्माहट या शीतलता की कोटि को मापती है। सूक्ष्मदर्शीय रूप से यह अणुओं की औसत यादृच्छिक स्थानांतरणीय गतिज ऊर्जा (Ek = (3/2) kB T) के अनुक्रमानुपाती होती है। SI मात्रक: केल्विन (K)।
1. तापीय साम्य एवं ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम
दो वस्तुएं परस्पर तापीय साम्य (Thermal Equilibrium) में कही जाती हैं जब तापीय संपर्क में होने पर भी उनके बीच ऊष्मा का कोई शुद्ध विनिमय नहीं होता, अर्थात दोनों का ताप एक समान होता है।
ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम (Zeroth Law of Thermodynamics)
“यदि दो निकाय A तथा B किसी तीसरे निकाय C के साथ पृथक-पृथक तापीय साम्य में हों, तो वे परस्पर भी तापीय साम्य में होंगे।”
यह नियम तापमापी के कार्य करने का सैद्धांतिक आधार है। निकाय C को तापमापी मान सकते हैं; यदि C निकाय A व B दोनों के साथ समान पाठ्यांक दर्शाता है, तो A और B परस्पर तापीय साम्य में हैं।
2. तापमिति एवं तापमापीय गुणधर्म
किसी वस्तु का ताप मापने के लिए प्रयुक्त उपकरण को तापमापी (Thermometer) कहते हैं। तापमापी पदार्थ के किसी ऐसे भौतिक गुणधर्म पर आधारित होता है जो ताप के साथ एकसमान रूप से बदलता है, जिसे तापमापीय गुणधर्म (X) कहते हैं।
| तापमापी का प्रकार | तापमापीय गुणधर्म (X) | कार्यकारी सूत्र | उपयोगी परास |
|---|---|---|---|
| पारा तापमापी | पारे के स्तंभ की लंबाई (L) | T = [(LT − L0) / (L100 − L0)] × 100 °C | −39 °C से 357 °C |
| स्थिर-आयतन गैस तापमापी | गैस का दाब (P) | T = [(PT − P0) / (P100 − P0)] × 100 °C | −270 °C से 1500 °C |
| प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी | तार का विद्युत प्रतिरोध (R) | RT = R0(1 + α T) | −200 °C से 1200 °C |
| ताप-वैद्युत युग्म तापमापी | सीबेक विद्युत वाहक बल (ε) | ε = a T + b T2 | −200 °C से 1600 °C |
| प्रकाशीय उत्तापमापी (Pyrometer) | उत्सर्जित विकिरण की तीव्रता | स्टीफन / वीन नियम अंशांकन | > 800 °C से 4000 °C (सूर्य ताप) |
3. मानक ताप पैमाने एवं रूपांतरण सूत्र
पारंपरिक रूप से ताप पैमाने दो संदर्भ बिंदुओं के मध्य अंशांकित किए जाते थे: हिमांक (बर्फ बिंदु – LFP) तथा क्वथनांक (भाप बिंदु – UFP)।
(पैमाने का पाठ्यांक − LFP) / (UFP − LFP) = नियतांक
C / 100 = (F − 32) / 180 = (K − 273.15) / 100 = R / 80
100 : 180 : 100 के अनुपात को सरल करने पर:
तापांतर (ΔT) का संबंध
ताप में परिवर्तन के लिए कोई अचर नहीं जोड़ा जाता:
- ΔC = ΔK (प्रत्येक प्रभाग का मान बराबर होता है)
- ΔF = (9/5) ΔC = 1.8 ΔC
- ΔC = (5/9) ΔF
उदाहरण: 20 °C की वृद्धि = 20 K की वृद्धि = 36 °F की वृद्धि।
JEE / NEET के महत्वपूर्ण संपाती बिंदु
- सेल्सियस व फारेनहाइट संपाती: C = F = −40° (−40 °C = −40 °F)।
- फारेनहाइट व केल्विन संपाती: F = K = 574.59° (574.59 °F = 574.59 K; K = C + 273 लेने पर 574.25)।
- सेल्सियस व केल्विन कभी संपाती नहीं होते: क्योंकि K = C + 273.15 में अंतर सदैव 273.15 रहता है।
4. परम ताप पैमाना एवं आदर्श गैस तापमापी
स्थिर-आयतन गैस तापमापी में विभिन्न विरल गैसों के दाब (P) तथा ताप (°C) के ग्राफ सरल रेखाएं होते हैं। जब इन रेखाओं को शून्य दाब (P → 0) की ओर पीछे बढ़ाया जाता है, तो सभी गैसों की रेखाएं ताप अक्ष को ठीक −273.15 °C पर काटती हैं।
यह बिंदु प्रकृति में न्यूनतम संभव ताप – परम शून्य (Absolute Zero: 0 K = −273.15 °C) कहलाता है, जहाँ अणुओं की यादृच्छिक गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है।
5. जल का त्रिक बिंदु (Triple Point of Water)
आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय मात्रक प्रणाली (SI) में केल्विन पैमाने को केवल एक ही स्थिर बिंदु – जल के त्रिक बिंदु द्वारा परिभाषित किया जाता है:
- ताप: Ttr = 273.16 K = 0.01 °C।
- दाब: Ptr = 611.65 Pa ≈ 4.58 mmHg ≈ 0.006 atm।
स्थिर-आयतन गैस तापमापी में किसी वस्तु का परम ताप T निम्न सूत्र द्वारा प्राप्त होता है:
दाब को शून्य की ओर प्रवृत्त करने से वास्तविक गैस आदर्श गैस की भांति व्यवहार करती है, जिससे पाठ्यांक गैस की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता।
केवल इसी डिवाइस पर सेव — कोई अकाउंट या साइन-इन नहीं।