विशिष्ट ऊष्मा धारिता एवं कैलोरीमिति – संपूर्ण नोट्स
जब किसी पदार्थ को ऊष्मा दी जाती है, तो या तो उसका ताप बढ़ता है (संवेद्य ऊष्मा) अथवा नियत ताप पर उसकी भौतिक अवस्था में परिवर्तन होता है (गुप्त ऊष्मा)। कैलोरीमिति (Calorimetry) ऊष्मा मापन का परिमाणात्मक विज्ञान है।
1. ऊष्मा धारिता एवं विशिष्ट ऊष्मा धारिता
ऊष्मा धारिता (S)
किसी संपूर्ण पिंड का ताप 1 °C (या 1 K) बढ़ाने हेतु आवश्यक ऊष्मा:
SI मात्रक: J K−1
यह एक विस्तीर्ण (Extensive) गुण है जो पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
विशिष्ट ऊष्मा धारिता (s या c)
पदार्थ के एकांक द्रव्यमान का ताप 1 °C बढ़ाने हेतु आवश्यक ऊष्मा:
SI मात्रक: J kg−1 K−1
यह पदार्थ का एक विशिष्ट गहन (Intensive) गुण है।
जल की विशिष्ट ऊष्मा का असाधारण उच्च मान
जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता अत्यधिक उच्च होती है: cw = 4186 J kg−1 K−1 ≈ 1.0 cal g−1 °C−1। प्रमुख प्रभाव:
- समुद्री जलवायु: थल की तुलना में समुद्र बहुत धीरे गर्म और ठंडा होता है, जिससे तटीय क्षेत्रों में सम जलवायु बनी रहती है।
- वाहनों का शीतलक: कारों के रेडिएटर में जल परिसंचरित कर इंजन की विपुल ऊष्मा को कम ताप वृद्धि के साथ अवशोषित किया जाता है।
- सिकाई हेतु गर्म पानी की बोतलें: उच्च ऊष्मा धारण क्षमता के कारण जल देर तक ऊष्मा प्रदान करता रहता है।
2. गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएं
गैसों को दी गई ऊष्मा इस बात पर निर्भर करती है कि प्रक्रम किस प्रकार कराया गया है:
- स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (Cv): Cv = (1/n) (ΔQ/ΔT)v = dU/dT = (f/2) R।
- स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (Cp): Cp = (1/n) (ΔQ/ΔT)p = Cv + R।
- मेयर का संबंध (Mayer's Relation): Cp − Cv = R (मोलर रूप में) अथवा cp − cv = r = R/M (विशिष्ट रूप में)।
- रुद्धोष्म निष्पत्ति: γ = Cp / Cv = 1 + 2/f।
3. कैलोरीमिति का सिद्धांत (मिश्रण की विधि)
कैलोरीमीटर तांबे का एक बर्तन होता है जिसे लकड़ी के बक्से में ग्लास-वूल की कुचालक परत के साथ रखा जाता है। विलगित निकाय में ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार:
जल का वह द्रव्यमान जो समान ताप वृद्धि के लिए कैलोरीमीटर के बराबर ऊष्मा ग्रहण करता है:
W = mcal × ccal / cw (ग्राम में W = mcal × ccal)।
कैलोरीमीटर व m1 द्रव्यमान के द्रव द्वारा ली गई कुल ऊष्मा: ΔQ = (m1 c1 + W cw) (Tमिश्रण − Tप्रारंभिक)।
4. अवस्था परिवर्तन एवं गुप्त ऊष्मा (Latent Heat)
नियत ताप पर किसी पदार्थ की भौतिक अवस्था (ठोस, द्रव, गैस) में परिवर्तन हेतु आवश्यक ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा कहते हैं:
ΔQ = m L
जहाँ L गुप्त ऊष्मा है। SI मात्रक: J kg−1।
गलन की गुप्त ऊष्मा (Lf)
गलनांक पर 1 kg ठोस को द्रव में बदलने हेतु आवश्यक ऊष्मा:
- 0 °C पर बर्फ के लिए: Lf = 3.33 × 105 J kg−1 ≈ 80 cal g−1।
- यह ऊर्जा बिना गतिज ऊर्जा बढ़ाए क्रिस्टल जालक के बंधनों को तोड़ने में व्यय होती है।
वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (Lv)
क्वथनांक पर 1 kg द्रव को वाष्प में बदलने हेतु आवश्यक ऊष्मा:
- 100 °C पर जल के लिए: Lv = 2.26 × 106 J kg−1 ≈ 540 cal g−1।
- यह अणुओं को परस्पर पूर्णतः अलग करने तथा बाह्य वायुमंडलीय दाब के विरुद्ध कार्य करने में व्यय होती है।
5. अवस्था परिवर्तन पर दाब का प्रभाव एवं पुनर्हिमायन
- गलनांक पर दाब का प्रभाव: जो पदार्थ पिघलने पर संकुचित होते हैं (जैसे बर्फ), दाब बढ़ाने पर उनका गलनांक कम हो जाता है। जो पिघलने पर फैलते हैं (जैसे मोम), दाब बढ़ाने पर उनका गलनांक बढ़ जाता है।
- पुनर्हिमायन (Regelation): दाब बढ़ाने पर बर्फ का पिघलना और दाब हटाते ही पुनः जम जाना। आइस-स्केटिंग में ब्लेड के उच्च दाब से बर्फ की सतह पर पानी की पतली परत बन जाती है जो स्नेहक (Lubricant) का कार्य करती है।
- क्वथनांक पर दाब का प्रभाव: बाह्य दाब बढ़ाने पर क्वथनांक बढ़ता है। प्रेशर कुकर में दाब ~ 2 atm तक बढ़ जाने से जल का क्वथनांक 120 °C हो जाता है, जिससे भोजन शीघ्र पकता है। पहाड़ों पर वायुमंडलीय दाब कम होने से जल 100 °C से नीचे ही उबलने लगता है, जिससे खाना देर से पकता है।
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