§ 13.3NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 13
स्प्रिंग-ब्लॉक निकाय एवं सरल लोलक
मूल सिद्धांत: किसी भी भौतिक दोलनी निकाय में लघु दोलनों का आवर्तकाल केवल दो भौतिक राशियों पर निर्भर करता है:
T = 2π √(जड़त्व कारक / स्प्रिंग कारक) = 2π √(m / k)
सरल आवर्त गति का आवर्तकाल आयाम से पूर्णतः स्वतंत्र होता है (समकालिकता गुणधर्म / Isochronous property)।
1. स्प्रिंग-ब्लॉक दोलक (Spring-Block Oscillator)
द्रव्यमानहीन स्प्रिंग (बल नियतांक k) से जुड़े m द्रव्यमान के गुटके पर विचार करें:
- क्षैतिज स्प्रिंग-ब्लॉक: प्रत्यानयन बल F = −kx होता है।
T = 2π √(m / k) • f = (1 / 2π) √(k / m)
- ऊर्ध्वाधर स्प्रिंग-ब्लॉक: गुरुत्वाकर्षण के कारण स्प्रिंग में प्रारंभिक साम्य विस्तार x0 = mg / k उत्पन्न होता है। साम्यावस्था से x विस्थापित करने पर कुल प्रत्यानयन बल −kx ही रहता है।
T = 2π √(m / k) = 2π √(x0 / g)महत्वपूर्ण संकल्पना: गुरुत्वाकर्षण ऊर्ध्वाधर स्प्रिंग-ब्लॉक निकाय के आवर्तकाल को बिल्कुल नहीं बदलता! यह केवल माध्य स्थिति को x0 = mg/k नीचे खिसका देता है।
2. स्प्रिंग का काटना एवं स्प्रिंगों का संयोजन
1. स्प्रिंग को काटना
किसी समरूप स्प्रिंग के लिए बल नियतांक एवं लंबाई का गुणनफल सदैव अचर रहता है:
k · L = नियतांक
यदि k नियतांक वाली स्प्रिंग को m : n अनुपात में दो टुकड़ों में काटा जाए, तो नए बल नियतांक होंगे:
k1 = k (m + n) / m • k2 = k (m + n) / n
उदाहरण: यदि दो बराबर भागों (1:1) में काटा जाए, तो प्रत्येक आधे टुकड़े का बल नियतांक 2k (दोगुना) हो जाएगा!
2. स्प्रिंगों का संयोजन
- श्रेणीक्रम संयोजन (Series): सिरे से सिरा जुड़ाव (प्रत्यानयन बल समान, विस्थापन जुड़ते हैं: x = x1 + x2):
1 / keq = 1 / k1 + 1 / k2 ⇒ keq = (k1 k2) / (k1 + k2)
- समांतर क्रम संयोजन (Parallel): दोनों स्प्रिंगों का विस्थापन समान रहता है (बल जुड़ते हैं: F = F1 + F2):
keq = k1 + k2
3. सरल लोलक (The Simple Pendulum)
सरल लोलक में लंबाई l की अवितान्य व द्रव्यमानहीन डोरी से बंधा m द्रव्यमान का एक बिंदुवत गोलक (bob) घर्षणरहित आधार से लटका होता है:
लघु कोणीय विस्थापन (θ ≤ 4°–5°) हेतु निगमन:
निलंबन बिंदु O के परितः प्रत्यानयन बल-आघूर्ण:
निलंबन बिंदु O के परितः प्रत्यानयन बल-आघूर्ण:
τ = −mg · (l sinθ) ≈ −mglθ (चूँकि लघु कोण हेतु sinθ ≈ θ रेडियन में)
τ = Iα = (ml2)α रखने पर:
ml2 α = −mglθ ⇒ α = −(g / l) θ = −ω2 θ
अतः गति कोणीय सरल आवर्त गति है, जिसका आवर्तकाल:
ω = √(g / l) ⇒ T = 2π √(l / g)
4. सेकंड लोलक एवं त्वरित तंत्रों में लोलक
| भौतिक स्थिति | प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण geff | नया आवर्तकाल T' | घड़ी की चाल पर प्रभाव |
|---|---|---|---|
| सेकंड लोलक (स्थिर अवस्था में) | g = 9.8 m/s2 | T = 2.0 s | लंबाई l ≈ 0.993 m ≈ 1 मीटर |
| लिफ्ट 'a' त्वरण से ऊपर जा रही हो | geff = g + a | T' = 2π√[l / (g + a)] | T घटेगा (घड़ी तेज चलेगी) |
| लिफ्ट 'a' त्वरण से नीचे आ रही हो | geff = g − a | T' = 2π√[l / (g − a)] | T बढ़ेगा (घड़ी सुस्त चलेगी) |
| लिफ्ट मुक्त पतन में हो (a = g) | geff = 0 | T' → ∞ | लोलक दोलन नहीं करेगा (भारहीनता) |
| वाहन 'a' क्षैतिज त्वरण से गतिमान हो | geff = √(g2 + a2) | T' = 2π√[l / √(g2 + a2)] | T घटेगा (झुकी हुई साम्यावस्था के परितः दोलन) |
NEET विशेष जाल • जल से भरे छिद्रित गोलक का दोलन:
जल से भरा हुआ खोखला गोलक दोलन कर रहा है और उसके नीचे स्थित सूक्ष्म छिद्र से पानी धीरे-धीरे बाहर रिस रहा है:
- प्रारंभ में जब पानी निकलता है, तो निकाय का द्रव्यमान केंद्र (CM) नीचे खिसकता है → प्रभावी लंबाई l बढ़ती है → T बढ़ता है!
- जब गोलक पूर्णतः खाली हो जाता है, तो CM पुनः खाली गोले के ज्यामितीय केंद्र पर आ जाता है → प्रभावी लंबाई l घटकर पुनः प्रारंभिक मान प्राप्त कर लेती है → T घटकर अपने मूल मान पर आ जाता है!
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