§ 13.1NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 13
आवर्ती गति, दोलन एवं सरल आवर्त गति (SHM) की शुद्धगतिकी
मूलभूत भौतिकीय परिभाषाएं:
- आवर्ती गति (Periodic Motion): वह गति जो एक निश्चित समयांतराल (जिसे आवर्तकाल T कहते हैं) के पश्चात निरंतर दोहराई जाती है। उदाहरण: सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की परिक्रमा, घड़ी की सुइयों की गति।
- दोलनी अथवा कंपनिक गति (Oscillatory Motion): जब कोई वस्तु एक निश्चित बिंदु (जिसे माध्य अथवा साम्यावस्था स्थिति कहते हैं) के इर्द-गिर्द आगे-पीछे (to-and-fro) आवर्ती रूप से गति करती है। उदाहरण: सरल लोलक की गति, स्प्रिंग से लटके भार की गति।
- स्वर्ण नियम: "प्रत्येक दोलनी गति आवर्ती गति होती है, परंतु प्रत्येक आवर्ती गति दोलनी गति नहीं होती।" (वृत्तीय गति आवर्ती है, पर दोलनी नहीं)।
1. सरल आवर्त गति (SHM) का प्रतिबंध एवं अवकल समीकरण
सरल आवर्त गति दोलनी गति का सबसे सरल एवं आधारभूत रूप है। कोई कण रैखिक सरल आवर्त गति करता है यदि उसका त्वरण माध्य स्थिति से उसके विस्थापन के समानुपाती हो तथा उसकी दिशा सदैव माध्य स्थिति की ओर दिष्ट हो:
F = −k x ⇔ m (d2x / dt2) = −k x ⇔ d2x / dt2 + ω2x = 0
जहाँ:
- k = बल नियतांक या स्प्रिंग कारक (N/m)।
- m = दोलक का द्रव्यमान अथवा जड़त्व कारक (kg)।
- ω = √(k / m) = कोणीय आवृत्ति (rad/s)। आवर्तकाल T = 2π/ω = 2π√(m/k)।
2. रैखिक सरल आवर्त गति के शुद्धगतिक समीकरण
1. विस्थापन समीकरण x(t)
अवकल समीकरण का व्यापक हल:
x(t) = A sin(ωt + φ) अथवा A cos(ωt + φ)
- A: आयाम (माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन)।
- (ωt + φ): समय t पर कण की कला (Phase) (जो गति की अवस्था व दिशा दर्शाती है)।
- φ: प्रारंभिक कला अथवा इपोक (Epoch) (t = 0 पर कला कोण)।
2. वेग समीकरण v(t)
समय के सापेक्ष विस्थापन का अवकलन करने पर:
v(t) = dx/dt = Aω cos(ωt + φ) = ±ω √(A2 − x2)
- माध्य स्थिति पर (x = 0): वेग अधिकतम होता है → vmax = ωA।
- चरम स्थिति पर (x = ±A): वेग शून्य होता है → v = 0।
3. त्वरण समीकरण a(t)
समय के सापेक्ष वेग का अवकलन करने पर:
a(t) = dv/dt = −ω2 A sin(ωt + φ) = −ω2 x
- माध्य स्थिति पर (x = 0): त्वरण शून्य होता है → a = 0।
- चरम स्थिति पर (x = ±A): त्वरण अधिकतम होता है → amax = ω2A (सदैव माध्य स्थिति की ओर दिष्ट)।
3. विस्थापन, वेग एवं त्वरण के मध्य कला संबंध
| भौतिक राशि | गणितीय व्यंजक | विस्थापन x के सापेक्ष कला | अग्रगामी / पश्चगामी संबंध |
|---|---|---|---|
| विस्थापन (x) | A sin(ωt) | 0 | आधारभूत संदर्भ |
| वेग (v) | Aω cos(ωt) = Aω sin(ωt + π/2) | +π/2 rad (+90°) | वेग विस्थापन से π/2 rad अग्रगामी होता है |
| त्वरण (a) | −ω2A sin(ωt) = ω2A sin(ωt + π) | +π rad (+180°) | त्वरण विस्थापन से π rad विपरीत कला में होता है |
4. निर्देश वृत्त (Reference Circle Method)
प्रमेय: किसी वृत्त के व्यास पर एकसमान वृत्तीय गति (UCM) करने वाले कण का प्रक्षेप (Projection) सरल आवर्त गति को निरूपित करता है।
- निर्देश वृत्त की त्रिज्या = SHM का आयाम (A)।
- घूमते हुए कण की एकसमान कोणीय चाल = SHM की कोणीय आवृत्ति (ω)।
- x-अक्ष (व्यास) पर प्रक्षेप: x(t) = A cos(ωt + φ)।
- y-अक्ष (व्यास) पर प्रक्षेप: y(t) = A sin(ωt + φ)।
5. हल किए गए आदर्श JEE व NEET प्रश्न
उदाहरण 1: एक कण 10 cm आयाम तथा 4 s आवर्तकाल से सरल आवर्त गति कर रहा है। ज्ञात कीजिए: (i) अधिकतम वेग, (ii) माध्य स्थिति से 6 cm दूरी पर वेग, तथा (iii) x = 6 cm पर त्वरण।
हल: दिया है: A = 10 cm; T = 4 s ⇒ ω = 2π / T = 2π / 4 = π/2 rad/s ≈ 1.57 rad/s।
- (i) अधिकतम वेग: vmax = ωA = (π/2) × 10 = 5π cm/s ≈ 15.7 cm/s।
- (ii) x = 6 cm पर वेग: v = ω √(A2 − x2) = (π/2) √(102 − 62) = (π/2) × 8 = 4π cm/s ≈ 12.57 cm/s।
- (iii) x = 6 cm पर त्वरण: a = −ω2 x = −(π/2)2 × 6 = −1.5π2 cm/s2 ≈ −14.8 cm/s2।
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