§ 13.2NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 13
सरल आवर्त गति में ऊर्जा एवं ऊर्जा संरक्षण
यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण: सरल आवर्त गति के दौरान दोलक की ऊर्जा निरंतर गतिज ऊर्जा (K) और स्थितिज ऊर्जा (U) के मध्य परस्पर रूपांतरित होती रहती है। अवमंदन बलों की अनुपस्थिति में दोलक की कुल यांत्रिक ऊर्जा (E = K + U) सदैव स्थिर (अचर) रहती है:
E = K + U = ½ k A2 = ½ m ω2 A2 = अचर (Constant)
1. दोलक की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy - K)
विस्थापन x के फलन के रूप में:
v = ω√(A2 − x2) प्रतिस्थापित करने पर:
K(x) = ½ m v2 = ½ k (A2 − x2)
- माध्य स्थिति पर (x = 0): Kmax = ½ k A2 = E।
- चरम स्थिति पर (x = ±A): K = 0।
समय t के फलन के रूप में:
v = Aω cos(ωt + φ) प्रतिस्थापित करने पर:
K(t) = ½ m ω2 A2 cos2(ωt + φ)
चूँकि cos2θ की कोणीय आवृत्ति 2ω होती है, अतः एक पूर्ण आवर्तकाल में गतिज ऊर्जा दो बार अपने अधिकतम मान पर पहुँचती है!
2. दोलक की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy - U)
प्रत्यानयन बल F = −kx के विरुद्ध कण को विस्थापित करने में किया गया कार्य प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है (माध्य स्थिति x = 0 पर U = 0 मानने पर):
विस्थापन x के फलन के रूप में:
U(x) = ½ k x2 = ½ m ω2 x2
- माध्य स्थिति पर (x = 0): U = 0 (न्यूनतम)।
- चरम स्थिति पर (x = ±A): Umax = ½ k A2 = E।
समय t के फलन के रूप में:
U(t) = ½ k A2 sin2(ωt + φ)
स्थितिज ऊर्जा भी 2ω कोणीय आवृत्ति (विस्थापन आवृत्ति की दोगुनी) से दोलन करती है।
3. समान ऊर्जा बिंदु (Cross-Over Points: जहाँ K = U)
समान ऊर्जा बिंदु: किस विस्थापन पर गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा के ठीक बराबर होती है?
K = U ⇒ ½ k (A2 − x2) = ½ k x2 ⇒ 2x2 = A2 ⇒ x = ± A / √2 ≈ ± 0.707 A
इस स्थिति पर K = U = E / 2 = ¼ k A2 होता है।
4. समय औसत बनाम स्थिति औसत ऊर्जा
| औसत निकालने की विधि | औसत गतिज ऊर्जा 〈K〉 | औसत स्थितिज ऊर्जा 〈U〉 | कुल ऊर्जा 〈E〉 |
|---|---|---|---|
| समय औसत (एक पूर्ण आवर्तकाल T पर) | ¼ k A2 = ½ E | ¼ k A2 = ½ E | E |
| स्थिति औसत (−A से +A विस्थापन पर) | (2/3) E = (1/3) k A2 | (1/3) E = (1/6) k A2 | E |
NEET/JEE महत्वपूर्ण संकल्पना:
- यदि SHM की आवृत्ति f है, तो गतिज ऊर्जा (K) तथा स्थितिज ऊर्जा (U) के दोलन की आवृत्ति 2f (दोगुनी) होती है।
- परंतु कुल ऊर्जा (E) समय से स्वतंत्र अचर होती है, अतः कुल ऊर्जा के दोलन की आवृत्ति शून्य होती है!
- यदि माध्य स्थिति पर अवशिष्ट स्थितिज ऊर्जा U0 हो, तो U(x) = U0 + ½ k x2 तथा E = U0 + ½ k A2। गतिज ऊर्जा अप्रभावित रहती है।
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