§ 13.4NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 13
अवमंदित दोलन, प्रणोदित दोलन एवं अनुनाद
दोलनों का भौतिक वर्गीकरण:
- मुक्त दोलन (Free Oscillations): जब कोई निकाय बिना किसी बाह्य या क्षयकारी घर्षण बल के केवल अपने आंतरिक प्रत्यानयन बल के अधीन अपनी स्वाभाविक आवृत्ति ω0 = √(k / m) तथा स्थिर आयाम से अनिश्चित काल तक दोलन करता है।
- अवमंदित दोलन (Damped Oscillations): वे दोलन जिनमें माध्यम के श्यान घर्षण बलों के कारण यांत्रिक ऊर्जा ऊष्मा के रूप में निरंतर क्षय होती है, जिससे समय के साथ आयाम चरघातांकी रूप से घटता जाता है।
- प्रणोदित दोलन (Forced Oscillations): ऊर्जा क्षय की क्षतिपूर्ति हेतु बाह्य आवर्ती बल लगाकर निरंतर बनाए रखे जाने वाले दोलन।
1. अवमंदित सरल आवर्त दोलन (Damped SHM)
श्यान माध्यम में गति करने पर दोलक पर वेग के समानुपाती एवं विपरीत दिशा में अवमंदन बल कार्य करता है: Fd = −b v = −b (dx/dt) (जहाँ b अवमंदन नियतांक है, मात्रक: kg/s अथवा N·s/m)।
कुल बल: Fnet = −kx − b(dx/dt) ⇒ m (d2x / dt2) + b (dx / dt) + kx = 0
विस्थापन एवं घटता आयाम
न्यून-अवमंदित दोलनों (b2 < 4mk) हेतु हल:
x(t) = A(t) cos(ω't + φ) = [A0 e−bt / (2m)] cos(ω't + φ)
- आयाम चरघातांकी रूप से घटता है: A(t) = A0 e−bt / (2m)।
- अवमंदित दोलन की कोणीय आवृत्ति:
ω' = √[ (k / m) − (b2 / 4m2) ] = √[ ω02 − γ2 ]जहाँ γ = b / (2m) अवमंदन गुणांक है। ध्यान दें कि ω' < ω0 (आवृत्ति तनिक घट जाती है)।
यांत्रिक ऊर्जा का क्षय
समय t पर अवमंदित दोलक की यांत्रिक ऊर्जा:
E(t) = ½ k A(t)2 = [½ k A02] e−bt / m = E0 e−bt / m
- ऊर्जा आयाम की तुलना में दोगुनी तेजी से घटती है!
- विश्रांति काल (τ): वह समय जिसमें ऊर्जा घटकर अपने प्रारंभिक मान की 1/e (≈ 36.8%) रह जाती है:
τ = m / b
2. प्रणोदित (चालित) दोलन (Forced Oscillations)
जब दोलक पर एक बाह्य आवर्ती चालक बल F(t) = F0 cos(ωd t) लगाया जाता है (जहाँ ωd चालक कोणीय आवृत्ति है):
m (d2x / dt2) + b (dx / dt) + kx = F0 cos(ωd t)
प्रारंभिक क्षणिक कंपन समाप्त होने पर निकाय स्थायी अवस्था में चालक बल की आवृत्ति (ωd) से नियत आयाम के साथ दोलन करता है:
A = F0 / √[ m2(ω02 − ωd2)2 + b2 ωd2 ]
3. अनुनाद की परिघटना (Resonance)
अनुनाद की शर्त: जब बाह्य चालक बल की आवृत्ति दोलनी निकाय की प्राकृतिक स्वाभाविक आवृत्ति के लगभग बराबर हो जाती है:
ωd ≈ ω0 = √(k / m)
पद (ω02 − ωd2) शून्य हो जाता है, और दोलन का आयाम अपने अधिकतम मान तक पहुँच जाता है:
Ares = F0 / (b ωd) ≈ F0 / (b ω0)
4. अनुनाद की तीक्ष्णता एवं विशेषता गुणांक (Q-Factor)
| पैरामीटर | अल्प अवमंदन (b → 0) | अधिक अवमंदन (b >> 0) |
|---|---|---|
| अनुनादी आयाम Ares | अत्यधिक उच्च (b = 0 पर सैद्धांतिक रूप से ∞) | कम / छोटा शिखर |
| शिखर की बनावट | अत्यधिक तीक्ष्ण व संकरा (Sharp) | सपाट व चौड़ा (Flat & Broad) |
| विशेषता गुणांक Q = ω0 / Δω | अत्यधिक उच्च: Q = (m ω0) / b | निम्न |
अनुनाद के व्यावहारिक उदाहरण:
- झूलते हुए पुल पर कदमताल: पुल पार करते समय सैनिकों को कदमताल तोड़कर चलने का आदेश दिया जाता है ताकि मार्चिंग की आवृत्ति पुल की प्राकृतिक आवृत्ति से मेल खाकर उसे ध्वस्त न कर दे (ब्रॉटन सस्पेंशन ब्रिज दुर्घटना, 1831)।
- रेडियो ट्यूनिंग: LCR परिपथ में संधारित्र का मान बदलकर परिपथ की प्राकृतिक आवृत्ति को स्टेशन की आवृत्ति के बराबर लाया जाता है, जिससे केवल उसी स्टेशन का संकेत प्रवर्धित होता है।
- भूकंप: वे भवन जिनकी प्राकृतिक आवृत्ति भूकंपीय तरंगों की आवृत्ति के समान होती है, अनुनाद के कारण सर्वाधिक तीव्रता से हिलकर ध्वस्त हो जाते हैं!
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