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कक्षा 11 · भौतिकीJEE MAIN × NEETEnglish
§ 7.3NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 7

गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा, गुरुत्वीय विभव एवं पलायन चाल

गुरुत्वाकर्षण के अंतर्गत कार्य, स्थितिज ऊर्जा और पलायन चाल का अध्ययन उपग्रहों के प्रक्षेपण, रॉकेट गति तथा ग्रहीय वायुमंडल के अस्तित्व को समझने का आधार है। गुरुत्वाकर्षण बल संरक्षी एवं आकर्षक होने के कारण स्थितिज ऊर्जा का मानक शून्य स्तर अनंत पर माना जाता है।

1. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (U)

परस्पर r दूरी पर स्थित दो द्रव्यमानों M तथा m के निकाय की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा उस कार्य के बराबर होती है जो द्रव्यमान m को बिना त्वरित किए अनंत से दूरी r तक लाने में बाह्य कारक द्वारा किया जाता है:

U(r) = −G M m / r   (अनंत पर U(∞) = 0 मानते हुए)

स्थितिज ऊर्जा के प्रमुख गुणधर्म:

  • ऋण चिह्न दर्शाता है कि द्रव्यमान परस्पर गुरुत्वीय बंधन (bound system) में बंधे हैं। इन्हें अनंत तक अलग करने हेतु धनात्मक कार्य करना पड़ेगा।
  • जैसे-जैसे दूरी r बढ़ती है, U कम ऋणात्मक होता जाता है (अर्थात् स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है)।
  • जैसे-जैसे दूरी r घटती है, स्थितिज ऊर्जा घटती है।

किसी पिंड को h ऊंचाई तक उठाने में किया गया कार्य

जब m द्रव्यमान के किसी पिंड को पृथ्वी की सतह (r1 = R) से h ऊंचाई (r2 = R + h) तक उठाया जाता है, तो स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन है:

ΔU = U(R + h) − U(R) = [−G M m / (R + h)] − [−G M m / R]

व्यापक सूत्र: ΔU = m g h / (1 + h/R)
जब h ≪ R (पृथ्वी की सतह के अत्यंत निकट): 1 + h/R ≈ 1 ⇒ ΔU ≈ m g h (प्रारंभिक भौतिकी का परिचित सूत्र)।

गुरुत्वीय विभव कूप एवं पलायन चाल यांत्रिकी

स्थितिज ऊर्जा कूप तथा यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण द्वारा पलायन चाल का निगमन
गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कूप:
---------------------------
U = 0  --------------------------------------------- [r = ∞ पर (मुक्त अवस्था)]
               ^
               |   ΔU = m g h / (1 + h/R)
               |
U(R+h) --------+-------------------- [h ऊंचाई पर]
               |
               |
U(R)   --------+---------- [सतह r = R पर: U = -GMm/R]
               |
               v   (गहरा बद्ध कूप)

पलायन चाल हेतु यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण:
-------------------------------------
सतह पर कुल ऊर्जा = अनंत पर कुल ऊर्जा
(1/2) m ve² + U(R) = 0 + 0  -->  (1/2) m ve² - G M m / R = 0
==>  ve = √(2 G M / R) = √(2 g R)

पृथ्वी: ve ≈ 11.2 किमी/से | चंद्रमा: ve ≈ 2.38 किमी/से
      
चंद्रमा पर वायुमंडल क्यों नहीं है? किसी खगोलीय पिंड पर वायुमंडल केवल तभी रह सकता है जब गैस अणुओं की वर्ग-माध्य-मूल चाल (vrms) पिंड की पलायन चाल (ve) की तुलना में बहुत कम हो। चंद्रमा पर ve केवल 2.38 किमी/से है, जबकि दिन के तापमान पर हाइड्रोजन, ऑक्सीजन आदि गैसों की वर्ग-माध्य-मूल चाल इससे अधिक हो जाती है, जिससे सभी गैसें अंतरिक्ष में पलायन कर चुकी हैं।

2. गुरुत्वीय विभव (Gravitational Potential, V)

गुरुत्वीय क्षेत्र में किसी बिंदु पर गुरुत्वीय विभव एकांक परीक्षण द्रव्यमान को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किए गए कार्य के बराबर होता है:

V(r) = U(r) / m = −G M / r   (r ≥ R के लिए)

गुरुत्वीय क्षेत्र की तीव्रता I तथा विभव V में संबंध:

I = −dV / dr   अथवा   V(r) = −∫ I dr

एकसमान ठोस गोले (द्रव्यमान M, त्रिज्या R) के लिए गुरुत्वीय विभव

क्षेत्र दूरी शर्त गुरुत्वीय विभव का सूत्र
गोले के बाहर r ≥ R V(r) = −G M / r
गोले की सतह पर r = R Vs = −G M / R
गोले के भीतर r < R V(r) = −[G M / (2R3)] (3R2 − r2)
गोले के केंद्र पर r = 0 Vc = −3/2 (G M / R) = 1.5 Vs

3. पलायन चाल (Escape Speed, ve)

पलायन चाल वह न्यूनतम प्रारंभिक वेग है जिससे किसी पिंड को पृथ्वी की सतह से फेंके जाने पर वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पूर्णतः पार कर जाए और कभी वापस न लौटे।

यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण द्वारा निगमन

माना m द्रव्यमान के पिंड को पृथ्वी (द्रव्यमान M, त्रिज्या R) की सतह से ve चाल से प्रक्षेपित किया जाता है:

  • सतह पर प्रारंभिक यांत्रिक ऊर्जा: Ei = ½ m ve2 − G M m / R
  • अनंत पर अंतिम यांत्रिक ऊर्जा: Ef = 0

ऊर्जा संरक्षण से: ½ m ve2 − G M m / R = 0 ⇒ ½ m ve2 = G M m / R

ve = √(2 G M / R) = √(2 g R)

पलायन चाल के महत्वपूर्ण अभिलक्षण

  • पिंड के द्रव्यमान पर अनाश्रित: चाहे 1 ग्राम की सुई हो अथवा 1000 टन का रॉकेट, दोनों के लिए पृथ्वी से पलायन चाल समान (11.2 किमी/से) होती है।
  • प्रक्षेपण कोण पर अनाश्रित: चूँकि ऊर्जा एक अदिश राशि है, पिंड को ऊर्ध्वाधर, 30°, 45° या किसी भी कोण पर दागा जाए, पलायन चाल का परिमाण सदैव √(2gR) रहता है।
  • ग्रह के घनत्व ρ के पदों में: ve = R √(8/3 π G ρ) ∝ R √ρ।

4. हल सहित JEE / NEET उच्च-प्राथमिकता अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1: किसी m द्रव्यमान के पिंड को पृथ्वी की सतह से पृथ्वी की त्रिज्या के बराबर ऊंचाई (h = R) तक धीरे-धीरे उठाने में किया गया कार्य क्या होगा?
(A) m g R
(B) (1/2) m g R
(C) 2 m g R
(D) (1/4) m g R
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) (1/2) m g R
चरणबद्ध हल:
1. स्थितिज ऊर्जा परिवर्तन का यथार्थ सूत्र प्रयुक्त करें:
ΔU = m g h / (1 + h/R).
2. h = R रखने पर:
ΔU = m g R / (1 + R/R) = m g R / 2 = (1/2) m g R.
नोट: साधारण सूत्र ΔU = mgh = mgR लगाने पर 100% की त्रुटि आती है क्योंकि इतनी अधिक ऊंचाई पर g नियत नहीं रहता!
प्रश्न 2: किसी अन्य ग्रह पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी का दोगुना तथा उसकी त्रिज्या पृथ्वी की आधी है। उस ग्रह से पलायन चाल क्या होगी?
(A) 2 ve
(B) ve
(C) ve / 2
(D) √2 ve
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) ve
चरणबद्ध हल:
1. पलायन चाल का सूत्र: ve = √(2 g R).
2. नए ग्रह के लिए: g' = 2g तथा R' = R/2.
3. मान रखने पर:
v'e = √[2 (2g) (R/2)] = √[2 g R] = ve.
पलायन चाल में कोई परिवर्तन नहीं होगा!
प्रश्न 3: किसी पिंड को पृथ्वी की सतह से पलायन वेग के 3 गुने वेग (v = 3 ve) से प्रक्षेपित किया जाता है। अनंत (अंतरतारकीय अंतरिक्ष) में इसका शेष वेग क्या होगा?
(A) 2 ve
(B) 2√2 ve
(C) 3 ve
(D) √10 ve
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) 2√2 ve
चरणबद्ध हल:
1. यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण से: ½ m v2 − G M m / R = ½ m v∞2.
2. चूँकि G M m / R = ½ m ve2, अतः v∞2 = v2 − ve2.
3. v = 3 ve रखने पर:
v∞2 = (3 ve)2 − ve2 = 9 ve2 − ve2 = 8 ve2.
4. वर्गमूल लेने पर: v∞ = √8 ve = 2√2 ve.

5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. पृथ्वी के केंद्र पर गुरुत्वीय विभव का मान क्या होता है?
ठोस समांगी गोले के केंद्र पर गुरुत्वीय विभव Vc = −1.5 (G M / R) = 1.5 Vs होता है। अर्थात् केंद्र पर विभव का परिमाण सतह के विभव का 1.5 गुना होता है।
2. यदि किसी पिंड को क्षैतिज से 45° के कोण पर ve चाल से फेंका जाए, तो क्या वह पलायन कर पाएगा?
हाँ! पलायन वेग का निगमन शुद्ध रूप से अदिश यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण पर आधारित है। वायुमंडलीय घर्षण को नगण्य मानने पर, किसी भी दिशा में √(2gR) या उससे अधिक चाल से प्रक्षेपित पिंड अंतरिक्ष में पलायन कर जाएगा।
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