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कक्षा 11 · भौतिकीJEE MAIN × NEETEnglish
§ 7.2NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 7

गुरुत्वीय त्वरण (g) एवं इसके विभिन्न परिवर्तन

पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के अधीन मुक्त रूप से गिरती हुई किसी वस्तु में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं, जिसे g द्वारा दर्शाया जाता है। पृथ्वी की सतह पर इसका मानक मान लगभग 9.8 m/s2 होता है। किंतु g कोई सार्वत्रिक स्थिरांक नहीं है; यह ऊंचाई, गहराई, अक्षांश तथा पृथ्वी की ज्यामितीय आकृति के अनुसार निरंतर बदलता रहता है।

1. गुरुत्वीय त्वरण g तथा सार्वत्रिक स्थिरांक G में संबंध

माना M द्रव्यमान तथा R त्रिज्या की पृथ्वी की सतह पर m द्रव्यमान का कोई पिंड रखा है। न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से उस पर कार्यरत गुरुत्वाकर्षण बल है:

F = G M m / R2

न्यूटन के द्वितीय नियम से F = m g। दोनों समीकरणों की तुलना करने पर मौलिक सूत्र प्राप्त होता है:

g = G M / R2

पृथ्वी के औसत घनत्व ρ के पदों में (आयतन V = 4/3 π R3 मानने पर):

g = G [4/3 π R3 ρ] / R2 = 4/3 π G ρ R

गुरुत्वीय त्वरण के परिवर्तनों का तुलनात्मक आरेख

ऊंचाई h, गहराई d तथा घूर्णन अक्षांश λ पर g के सूत्र एवं व्यवहार
ऊंचाई पर परिवर्तन (ALTITUDE h):                 गहराई पर परिवर्तन (DEPTH d):
------------------------------                 ----------------------------
gh = g [R / (R + h)]²                          gd = g [1 - (d / R)]
यदि h << R:                                    गहराई के साथ रैखिक कमी:
gh ≈ g [1 - (2h / R)]                          पृथ्वी के केंद्र पर (d = R):
प्रतिशत कमी: (2h / R) * 100%                   gd = 0 (केंद्र पर भारहीनता)

पृथ्वी का घूर्णन (अक्षांश λ):                   पृथ्वी की आकृति (दीर्घवृत्तज):
---------------------------                    ----------------------------
g' = g - ω² R cos² λ                          Re > Rp (विषुवत रेखा पर 21 किमी उभार)
विषुवत रेखा पर (λ = 0°):                        g = GM / R²
geq = g - ω² R  (न्यूनतम g)                     gp > geq
ध्रुवों पर (λ = 90°):                           ध्रुवों पर g अधिकतम,
gp = g          (अधिकतम g)                     विषुवत रेखा पर न्यूनतम
      
JEE परिवर्तन दर नियम: कम दूरियों (h = d ≪ R) के लिए पृथ्वी की सतह से ऊंचाई पर जाने पर g के घटने की दर गहराई में जाने की तुलना में ठीक दोगुनी होती है (Δgh = 2 Δgd)।

2. गुरुत्वीय त्वरण में परिवर्तनों का गणितीय विश्लेषण

1. पृथ्वी की सतह से ऊंचाई (h) के साथ परिवर्तन

सतह से h ऊंचाई पर स्थित बिंदु की केंद्र से दूरी r = R + h होती है:

gh = G M / (R + h)2 = [G M / R2] [1 + h/R]−2 = g (1 + h/R)−2

यदि h ≪ R हो, तो द्विपद प्रमेय (Binomial expansion) से:

gh ≈ g (1 − 2h/R)   (यह सन्निकटन केवल तभी मान्य है जब h < 5% of R, अर्थात् h < 320 किमी)

2. पृथ्वी की सतह से गहराई (d) के साथ परिवर्तन

सतह से d गहराई पर केंद्र से दूरी r = R − d होती है। गोलीय कोश प्रमेय के अनुसार d मोटाई का बाहरी कोश कोई बल नहीं लगाता। केवल (R − d) त्रिज्या का आंतरिक ठोस गोला ही आकर्षण बल लगाता है:

gd = g (1 − d/R)

विशेष तथ्य: ऊंचाई के सन्निकट सूत्र के विपरीत, गहराई का यह सूत्र सतह से केंद्र तक प्रत्येक गहराई के लिए पूर्णतः यथार्थ (exact) है। केंद्र पर d = R रखने पर g = 0 प्राप्त होता है।

3. पृथ्वी के घूर्णन (अक्षांश λ) के कारण परिवर्तन

पृथ्वी अपनी धुरी के परितः ω कोणीय वेग से घूर्णन करती है। λ अक्षांश पर स्थित वस्तु पर बाहर की ओर अपकेंद्री त्वरण कार्य करता है, जिससे आभासी गुरुत्वीय त्वरण घट जाता है:

g' = g − ω2 R cos2 λ

  • विषुवत रेखा पर (λ = 0°): cos 0° = 1 ⇒ geq = g − ω2 R (न्यूनतम मान)।
  • ध्रुवों पर (λ = 90°): cos 90° = 0 ⇒ gp = g (घूर्णन का कोई प्रभाव नहीं)।

3. गुरुत्वीय परिवर्तनों की तुलनात्मक सारणी

कारक गणितीय सूत्र ग्राफ की प्रकृति चरम मान
ऊंचाई (h) gh = g / (1 + h/R)2 व्युत्क्रम वर्ग क्षय (1/r2) h → ∞ पर g → 0
गहराई (d) gd = g (1 − d/R) सरल रेखीय ह्रास पृथ्वी के केंद्र पर g = 0
अक्षांश (λ) g' = g − ω2 R cos2 λ त्रिकोणमितीय (cos2 λ) ध्रुवों पर अधिकतम, विषुवत पर न्यूनतम
आकृति (चपटापन) Re − Rp ≈ 21 किमी त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती gp − ge ≈ 0.02 m/s2
JEE उच्च-प्राथमिकता प्रश्न: "पृथ्वी का कोणीय वेग कितना होना चाहिए ताकि विषुवत रेखा पर स्थित वस्तुएं भारहीन प्रतीत हों?"
विषुवत रेखा पर भारहीनता का अर्थ है geq = 0 ⇒ g − ω2 R = 0 ⇒ ω = √(g / R)। गणना करने पर ω ≈ 1.24 × 10−3 rad/s आता है, जो वर्तमान घूर्णन चाल का लगभग 17 गुना है (दिन केवल 1.4 घंटे का रह जाएगा)!

4. हल सहित JEE / NEET उच्च-प्राथमिकता अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1: पृथ्वी की सतह से कितनी ऊंचाई पर गुरुत्वीय त्वरण का मान सतह के मान का 1/4 रह जाएगा? (पृथ्वी की त्रिज्या = R)
(A) R / 4
(B) R / 2
(C) R
(D) 2R
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) R
चरणबद्ध हल:
1. यथार्थ सूत्र का प्रयोग करें (चूँकि 1/4 एक बड़ा परिवर्तन है, अतः सन्निकट सूत्र का प्रयोग नहीं कर सकते):
gh = g / (1 + h/R)2.
2. gh = g / 4 रखने पर:
g / 4 = g / (1 + h/R)2 ⇒ (1 + h/R)2 = 4.
3. वर्गमूल लेने पर:
1 + h/R = 2 ⇒ h/R = 1 ⇒ h = R.
अतः 6,400 किमी की ऊंचाई पर गुरुत्वीय त्वरण सतह का 25% रह जाता है।
प्रश्न 2: यदि पृथ्वी की सतह से h ऊंचाई पर g में होने वाला परिवर्तन सतह से d गहराई पर होने वाले परिवर्तन के बराबर हो (h << R), तो:
(A) d = h
(B) d = 2h
(C) d = h / 2
(D) d = h² / R
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) d = 2h
चरणबद्ध हल:
1. h ऊंचाई पर परिवर्तन: Δgh = 2g h / R.
2. d गहराई पर परिवर्तन: Δgd = g d / R.
3. दोनों को बराबर रखने पर: 2g h / R = g d / R ⇒ d = 2h.
प्रश्न 3: यदि पृथ्वी अपनी अक्ष पर घूमना अचानक बंद कर दे, तो विषुवत रेखा पर किसी वस्तु के गुरुत्वीय त्वरण में क्या परिवर्तन होगा?
(A) ω² R की वृद्धि होगी
(B) ω² R की कमी होगी
(C) कोई परिवर्तन नहीं होगा
(D) शून्य हो जाएगा
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) ω² R की वृद्धि होगी
चरणबद्ध हल:
1. घूर्णन करते समय विषुवत रेखा पर प्रभावी त्वरण: geq = g − ω2 R.
2. यदि घूर्णन बंद हो जाए (ω = 0), तो नया मान g होगा।
3. अतः मान में ω² R की वृद्धि होगी। ध्रुवों पर कोई परिवर्तन नहीं होगा।

5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. सन्निकट सूत्र g_h ≈ g(1 − 2h/R) का प्रयोग कब करना चाहिए?
इस सूत्र का उपयोग केवल तभी करना चाहिए जब ऊंचाई h पृथ्वी की त्रिज्या R की तुलना में नगण्य हो (प्रायः h < 320 किमी या h/R < 5%)। बड़ी ऊंचाइयों (जैसे h = R या 2R) के लिए सदैव यथार्थ सूत्र gh = g / (1 + h/R)2 का प्रयोग करें।
2. पृथ्वी के केंद्र से दूरी r के साथ g का आरेख कैसा दिखाई देगा?
केंद्र से सतह तक (r = 0 से R) g दूरी के साथ रैखिक रूप से बढ़ता है (मूलबिंदु से गुजरने वाली सरल रेखा: g ∝ r)। सतह पर (r = R) यह अधिकतम होता है। सतह के बाहर (r > R) यह व्युत्क्रम वर्ग नियम (g ∝ 1/r2) के अनुसार घटता है।
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