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कक्षा 11 · भौतिकीJEE MAIN × NEETEnglish
§ 7.1NCERT कक्षा 11 · भौतिकी · अध्याय 7

केप्लर के ग्रहीय गति के नियम एवं सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण

गुरुत्वाकर्षण ब्रह्मांड में किन्हीं भी दो द्रव्यमानों के मध्य कार्य करने वाला सार्वत्रिक आकर्षण बल है। ऐतिहासिक रूप से ग्रहीय गति की व्याख्या जोहान्स केप्लर के तीन आनुभविक नियमों से प्रारंभ होकर सर आइजैक न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम तक विकसित हुई जिसने खगोलीय एवं पार्थिव यांत्रिकी का सफल एकीकरण किया।

1. केप्लर के ग्रहीय गति के तीन नियम

टाइको ब्राहे के सूक्ष्म खगोलीय प्रेक्षणों का गणितीय विश्लेषण करके जोहान्स केप्लर ने ग्रहों की गति से संबंधित तीन मौलिक नियमों का प्रतिपादन किया:

1. कक्षाओं का नियम (प्रथम नियम)

प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर एक दीर्घवृत्ताकार कक्षा (elliptical orbit) में परिक्रमण करता है तथा सूर्य इस दीर्घवृत्त के किसी एक फोकस (नाभि) पर स्थित होता है। ग्रह की सूर्य से न्यूनतम दूरी को उपसौर (Perihelion, rp = a(1 − e)) तथा अधिकतम दूरी को अपसौर (Aphelion, ra = a(1 + e)) कहते हैं, जहाँ a अर्द्ध-दीर्घ अक्ष तथा e उत्केंद्रता है।

2. क्षेत्रफलों का नियम (द्वितीय नियम)

सूर्य और किसी ग्रह को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा समान समयांतरालों में समान क्षेत्रफल तय करती है। अर्थात् ग्रह का क्षेत्रीय वेग (Areal Velocity) सदैव नियत रहता है:

क्षेत्रीय वेग का गणितीय निरूपण:
dt समय में तय किया गया क्षेत्रफल: dA = ½ r (r dθ) = ½ r2 ω dt.
क्षेत्रीय वेग: dA / dt = ½ r2 ω = L / (2m) = नियतांक.
चूँकि गुरुत्वाकर्षण बल एक केंद्रीय बल है अतः सूर्य के परितः बल आघूर्ण शून्य होता है (τ = r × F = 0), जिससे ग्रह का कोणीय संवेग L संरक्षित रहता है। अतः उपसौर पर ग्रह की चाल अधिकतम तथा अपसौर पर न्यूनतम होती है:
rp vp = ra va.

3. आवर्तकालों का नियम (तृतीय नियम)

किसी भी ग्रह के सूर्य के परितः परिक्रमण काल का वर्ग (T2) उसकी दीर्घवृत्ताकार कक्षा के अर्द्ध-दीर्घ अक्ष (a) के घन के अनुक्रमानुपाती होता है:

T2 ∝ a3  ⇒  T2 / a3 = 4π2 / (G Ms) = सूर्य के सभी ग्रहों के लिए एक समान स्थिरांक।

दीर्घवृत्ताकार कक्षा एवं केंद्रीय बल यांत्रिकी

दीर्घवृत्त के पैरामीटर, उपसौर, अपसौर तथा समान क्षेत्रफल प्रगामी ज्यामिति
केप्लर की दीर्घवृत्ताकार कक्षा:
-----------------------------
                अपसौर (Aphelion)                                 उपसौर (Perihelion)
               (न्यूनतम चाल: va)                                 (अधिकतम चाल: vp)
                     *----------------------*----------------------*
                    ra = a(1+e)          सूर्य (फोकस)  rp = a(1-e)
                                           (F1)
              [------ अर्द्ध-दीर्घ अक्ष (a) ------]

क्षेत्रीय वेग का संरक्षण:
-------------------------
      क्षेत्रफल (खंड 1) = क्षेत्रफल (खंड 2) [समान समयांतराल dt के लिए]
      dA / dt = L / (2m) = नियतांक  -->  rp * vp = ra * va

न्यूटन का गोलीय कोश प्रमेय:
--------------------------
      1. कोश के बाहर स्थित बिंदु द्रव्यमान पर (r >= R):
         F = G M m / r²  (सम्पूर्ण द्रव्यमान M केंद्र पर संकेंद्रित माना जाता है)
      2. कोश के भीतर स्थित बिंदु द्रव्यमान पर (r < R):
         F = 0  (कोश के सभी तत्वों के गुरुत्वाकर्षण बल परस्पर निरस्त हो जाते हैं)
      
कोणीय संवेग संरक्षण सूत्र: केप्लर का द्वितीय नियम वस्तुतः केंद्रीय बल क्षेत्र के अंतर्गत कोणीय संवेग संरक्षण का ज्यामितीय रूप है। यदि कक्षा वृत्ताकार हो, तो अर्द्ध-दीर्घ अक्ष a कक्षा की त्रिज्या r के बराबर हो जाता है।

2. न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम

न्यूटन के अनुसार, ब्रह्मांड में प्रत्येक बिंदु द्रव्यमान प्रत्येक अन्य बिंदु द्रव्यमान को एक बल द्वारा आकर्षित करता है जो उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है:

अदिश रूप: F = G (m1 m2) / r2
सदिश रूप: F12 = −G (m1 m2 / r2) r̂21

जहाँ:

  • G सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक है, जिसका सर्वप्रथम प्रायोगिक मान हेनरी कैवेंडिश ने 1798 में ऐंठन तुला (torsion balance) द्वारा ज्ञात किया था: G = 6.674 × 10−11 N·m2/kg2 (विमीय सूत्र: [M−1L3T−2])।
  • गुरुत्वाकर्षण बल संरक्षी, केंद्रीय तथा क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म बनाते हैं (F12 = −F21)।
  • यह बल दोनों कणों के बीच उपस्थित माध्यम पर निर्भर नहीं करता।

3. अध्यारोपण का सिद्धांत एवं न्यूटन का गोलीय कोश प्रमेय

अध्यारोपण के सिद्धांत के अनुसार, किसी बिंदु द्रव्यमान पर अनेक द्रव्यमानों के कारण लगने वाला कुल गुरुत्वाकर्षण बल प्रत्येक द्रव्यमान द्वारा लगाए गए स्वतंत्र बलों के सदिश योग के बराबर होता है:

Fnet = F1 + F2 + F3 + ... = ∑ Fi

गोलीय पिंडों हेतु कोश प्रमेय (Shell Theorems)

पिंड का स्वरूप परीक्षण कण की स्थिति गुरुत्वाकर्षण बल एवं क्षेत्र
एकसमान पतला गोलीय कोश (द्रव्यमान M, त्रिज्या R) कोश के बाहर (r ≥ R) F = G M m / r2 (केंद्र पर बिंदु द्रव्यमान सदृश)
एकसमान पतला गोलीय कोश (द्रव्यमान M, त्रिज्या R) कोश के भीतर (r < R) F = 0 (प्रत्येक आंतरिक बिंदु पर बल सर्वत्र शून्य)
एकसमान ठोस गोला (द्रव्यमान M, त्रिज्या R) गोले के बाहर (r ≥ R) F = G M m / r2
एकसमान ठोस गोला (द्रव्यमान M, त्रिज्या R) गोले के भीतर (r < R) F = G M m r / R3 (केवल आंतरिक परिबद्ध द्रव्यमान बल लगाता है)
JEE विशेष चेतावनी: यदि किसी ठोस गोले के भीतर कोई उत्केंद्रित (off-center) गोलीय गुहिका (cavity) बनाई जाती है, तो उस गुहिका के भीतर गुरुत्वीय क्षेत्र शून्य नहीं होता, बल्कि परिमाण और दिशा में पूर्णतः एकसमान (Uniform) होता है!

4. हल सहित JEE / NEET उच्च-प्राथमिकता अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1: एक ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में गति करता है। जब इसकी सूर्य से दूरियां r1 तथा r2 होती हैं, तब इसकी चालें क्रमशः v1 तथा v2 होती हैं। अनुपात v1 / v2 का मान क्या होगा?
(A) r1 / r2
(B) r2 / r1
(C) (r1 / r2)²
(D) √(r1 / r2)
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) r2 / r1
चरणबद्ध हल:
1. गुरुत्वाकर्षण बल केंद्रीय बल होने के कारण सूर्य के परितः बाह्य बल आघूर्ण शून्य होता है (τ = 0)।
2. कोणीय संवेग L = m r v संरक्षित रहता है:
m r1 v1 = m r2 v2.
3. चालों का अनुपात:
v1 / v2 = r2 / r1.
प्रश्न 2: R त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमण करने वाले उपग्रह का आवर्तकाल T है। 4R त्रिज्या की कक्षा में इसका आवर्तकाल क्या होगा?
(A) 2T
(B) 4T
(C) 8T
(D) 16T
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) 8T
चरणबद्ध हल:
1. केप्लर के तृतीय नियम से: T2 ∝ R3 ⇒ T ∝ R3/2.
2. नई त्रिज्या R' = 4R के लिए अनुपात:
T' / T = (4R / R)3/2 = (4)3/2 = 23 = 8.
3. अतः T' = 8T.
प्रश्न 3: M द्रव्यमान तथा R त्रिज्या के एक पतले गोलीय कोश के केंद्र से R/2 दूरी पर एक बिंदु द्रव्यमान m रखा गया है। कोश द्वारा द्रव्यमान m पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल क्या होगा?
(A) G M m / (R/2)²
(B) 2 G M m / R²
(C) 0
(D) G M m / (2 R²)
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) 0
चरणबद्ध हल:
न्यूटन के गोलीय कोश प्रमेय के अनुसार, एकसमान गोलीय कोश के भीतर किसी भी बिंदु (r < R) पर स्थित कण पर कोश के सभी भागों द्वारा लगाए गए गुरुत्वाकर्षण बलों का सदिश परिणामी शून्य होता है।

5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक G तापमान अथवा दाब पर निर्भर करता है?
नहीं। G प्रकृति का एक सार्वत्रिक मूल स्थिरांक है। इसका मान तापमान, दाब, माध्यम अथवा पिंडों की रासायनिक संरचना पर तनिक भी निर्भर नहीं करता।
2. जब कोई ग्रह उपसौर (Perihelion) के समीप पहुँचता है तो उसकी चाल पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उपसौर पर सूर्य से दूरी r न्यूनतम होती है। कोणीय संवेग संरक्षण (L = m r v = नियतांक) के कारण दूरी घटने पर ग्रह की चाल बढ़कर अधिकतम हो जाती है।
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