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कक्षा 11 · रसायन विज्ञानJEE MAIN × NEETEnglish
§ 7.3NCERT कक्षा 11 · रसायन विज्ञान · अध्याय 7

रेडॉक्स अभिक्रियाओं के प्रकार एवं संतुलन विधियां

रासायनिक अभिक्रियाओं को परमाणुओं और इलेक्ट्रॉनों के पुनर्विन्यास के आधार पर विभिन्न रूपात्मक श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है। इस मॉड्यूल में हम रेडॉक्स अभिक्रियाओं के चार प्राथमिक प्रकारों, असमानुपातन की यांत्रिकी, तथा अम्लीय व क्षारीय दोनों माध्यमों में ऑक्सीकरण संख्या विधि और आयन-इलेक्ट्रॉन (अर्ध-अभिक्रिया) विधि का गहन अध्ययन करेंगे।

1. रेडॉक्स अभिक्रियाओं के चार मूलभूत प्रकार

1. संयोजन अभिक्रियाएं (Combination Reactions)

वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक रासायनिक स्पीशीज मिलकर एक एकल यौगिक का निर्माण करती हैं। किसी संयोजन अभिक्रिया के रेडॉक्स होने के लिए कम से कम एक अभिकारक का तात्विक (elemental) रूप में होना आवश्यक है।

  • C(s) [0] + O₂(g) [0] → CO₂(g) [C:+4, O:-2]
  • 3Mg(s) [0] + N₂(g) [0] → Mg₃N₂(s) [Mg:+2, N:-3]
  • CH₄(g) [C:-4] + 2O₂(g) [0] → CO₂(g) [C:+4] + 2H₂O(l) [O:-2]

2. अपघटन अभिक्रियाएं (Decomposition Reactions)

वह अभिक्रिया जिसमें कोई यौगिक टूटकर दो या दो से अधिक घटकों में विघटित हो जाता है। रेडॉक्स होने के लिए अपघटन उत्पादों में से कम से कम एक उत्पाद का तात्विक अवस्था में होना अनिवार्य है।

  • 2H₂O(l) → 2H₂(g) [0] + O₂(g) [0]
  • 2NaH(s) [H:-1] → 2Na(s) [0] + H₂(g) [0]
  • 2KClO₃(s) [Cl:+5, O:-2] → 2KCl(s) [Cl:-1] + 3O₂(g) [0]
  • गैर-रेडॉक्स उदाहरण: CaCO₃(s) → CaO(s) + CO₂(g) (सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण अवस्था में शून्य परिवर्तन!)।

3. विस्थापन अभिक्रियाएं (Displacement Reactions)

किसी यौगिक में उपस्थित एक परमाणु या आयन का किसी अन्य तत्व के परमाणु या आयन द्वारा प्रतिस्थापन: X + YZ → XZ + Y।

(क) धातु विस्थापन: अधिक विद्युतधनात्मक धातु कम विद्युतधनात्मक धातु आयन को अपचयित करती है:

  • CuSO₄ + Zn → ZnSO₄ + Cu
  • V₂O₅ + 5Ca → 2V + 5CaO (धात्विक अपचयन)
  • TiCl₄ + 2Mg → Ti + 2MgCl₂ (क्रोल प्रक्रम)

(ख) अधातु विस्थापन: सामान्यतः हाइड्रोजन अथवा हैलोजन विस्थापन:

  • 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂
  • Fe + 2HCl → FeCl₂ + H₂
  • Cl₂ + 2KBr → 2KCl + Br₂

4. असमानुपातन (Disproportionation / Auto-Redox)

वह अभिक्रिया जिसमें एक ही तत्व अपनी किसी मध्यवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था से एक साथ ऑक्सीकृत तथा अपचयित होता है।

मध्यवर्ती अवस्था X का तत्व → उच्च अवस्था Y (ऑक्सीकरण) + निम्न अवस्था Z (अपचयन)
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड:
    2H₂O₂ [O:-1] → 2H₂O [O:-2] + O₂ [O:0]
  • क्षार में श्वेत फॉस्फोरस:
    P₄ [0] + 3OH− + 3H₂O → PH₃ [P:-3] + 3H₂PO₂− [P:+1]
  • क्षार में सल्फर:
    S₈ [0] + 12OH− → 4S²− [S:-2] + 2S₂O₃²− [S:+2] + 6H₂O
  • ठंडे तनु क्षार में क्लोरीन:
    Cl₂ [0] + 2OH− → Cl− [-1] + ClO− [+1] + H₂O
  • गर्म सांद्र क्षार में क्लोरीन:
    3Cl₂ [0] + 6OH− → 5Cl− [-1] + ClO₃− [+5] + 3H₂O
+-----------------------------------------------------------------------------------+ | असमानुपातन अभिक्रिया: ऑक्सीकरण अवस्थाओं का शाखीय विभाजन | +-----------------------------------------------------------------------------------+ मध्यवर्ती अवस्था (जैसे P4 में P = 0) | +------------------------+------------------------+ | | v ऑक्सीकरण (इलेक्ट्रॉन त्यागना) v अपचयन (इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना) उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था H2PO2- (हाइपोफॉस्फाइट, P = +1) PH3 (फॉस्फीन, P = -3) * महत्वपूर्ण NCERT नियम: फ्लोरीन (F) कभी भी असमानुपातन नहीं दर्शा सकता! फ्लोरीन केवल 0 (F2) अथवा -1 (फ्लोराइड) में रहता है। इसकी कोई उच्च अवस्था नहीं होती। +-----------------------------------------------------------------------------------+
चित्र 7.4: असमानुपातन का योजनाबद्ध आरेख — एक ही उभयनिष्ठ मध्यवर्ती अवस्था से एक साथ ऑक्सीकरण व अपचयन।

2. रेडॉक्स समीकरणों के संतुलन की व्यवस्थित विधियां

चूंकि रेडॉक्स अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनों का वास्तविक आदान-प्रदान होता है, अतः इनके समीकरणों को संतुलित करते समय दो संरक्षण नियमों की एक साथ संतुष्टि अनिवार्य है: द्रव्यमान संरक्षण नियम (परमाणु संतुलन) तथा विद्युत आवेश संरक्षण नियम (इलेक्ट्रॉन संतुलन)।

विधि A: ऑक्सीकरण संख्या विधि (Oxidation Number Method)

  1. अभिक्रिया का कंकाली (skeletal) आण्विक अथवा आयनिक समीकरण लिखें।
  2. प्रत्येक तत्व की ऑक्सीकरण संख्या निर्धारित करें ताकि यह पहचाना जा सके कि किन परमाणुओं का ऑक्सीकरण और किनका अपचयन हो रहा है।
  3. प्रति परमाणु ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन की गणना करें और सूत्र इकाई में उपस्थित परमाणुओं की संख्या से गुणा करके कुल वृद्धि एवं कुल कमी ज्ञात करें।
  4. ऑक्सीकरण संख्या में कुल वृद्धि तथा कुल कमी को बराबर करने के लिए ऑक्सीकारक और अपचायक स्पीशीज को उपयुक्त पूर्णांक गुणांकों से गुणा करें।
  5. हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के अतिरिक्त अन्य सभी परमाणुओं को सामान्य निरीक्षण द्वारा संतुलित करें।
  6. ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए ऑक्सीजन की कमी वाले पक्ष में H₂O अणु जोड़ें।
  7. हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें:
    • अम्लीय माध्यम में: हाइड्रोजन की कमी वाले पक्ष में H+ आयन जोड़ें।
    • क्षारीय माध्यम में: हाइड्रोजन की कमी वाले पक्ष में H₂O अणु जोड़ें तथा ठीक विपरीत पक्ष में समान संख्या में OH− आयन जोड़ें।

विधि B: आयन-इलेक्ट्रॉन विधि (अर्ध-अभिक्रिया विधि)

  1. कंकाली समीकरण को दो पृथक अर्ध-अभिक्रियाओं में विभाजित करें: एक ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया तथा दूसरी अपचयन अर्ध-अभिक्रिया।
  2. प्रत्येक अर्ध-अभिक्रिया को निम्नलिखित कठोर चरणबद्ध क्रम में पृथक रूप से संतुलित करें:
    • चरण 1: ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के अतिरिक्त अन्य सभी तत्वों के परमाणुओं को संतुलित करें।
    • चरण 2: ऑक्सीजन को संतुलित करने के लिए कमी वाले पक्ष में H₂O जोड़ें।
    • चरण 3: हाइड्रोजन को संतुलित करने के लिए कमी वाले पक्ष में H+ जोड़ें।
    • चरण 4: (यदि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में हो): जितने H+ आयन उपस्थित हैं, समीकरण के दोनों पक्षों में उतने ही OH− आयन जोड़ें। जिस ओर H+ और OH− दोनों उपस्थित हों, उन्हें मिलाकर H₂O अणु बना दें और दोनों ओर से उभयनिष्ठ जल अणुओं को निरस्त करें।
    • चरण 5: अधिक धनात्मक आवेश वाले पक्ष में इलेक्ट्रॉन (e−) जोड़कर कुल विद्युत आवेश को संतुलित करें।
  3. दोनों संतुलित अर्ध-अभिक्रियाओं को उपयुक्त पूर्णांकों से इस प्रकार गुणा करें कि ऑक्सीकरण में त्यागे गए कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या अपचयन में ग्रहण किए गए इलेक्ट्रॉनों के ठीक बराबर हो जाए।
  4. दोनों अर्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ें; दोनों पक्षों से इलेक्ट्रॉनों तथा उभयनिष्ठ जल अणुओं को निरस्त कर दें।
  5. जांच करें कि दोनों पक्षों में द्रव्यमान (प्रत्येक तत्व के परमाणु) और कुल विद्युत आवेश पूर्णतः समान हैं या नहीं।

3. चरणबद्ध संतुलन उदाहरण (अम्लीय एवं क्षारीय माध्यम)

उदाहरण 1 (अम्लीय माध्यम): आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा अम्लीय जलीय विलयन में निम्नलिखित रेडॉक्स समीकरण को संतुलित करें:
MnO₄−(aq) + Fe²+(aq) → Mn²+(aq) + Fe³+(aq)
हल:

चरण 1: अर्ध-अभिक्रियाओं में विभाजन:

ऑक्सीकरण: Fe²+ → Fe³+

अपचयन: MnO₄− → Mn²+

चरण 2: ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया का संतुलन:

Fe परमाणु संतुलित हैं। दाईं ओर 1 e− जोड़कर आवेश संतुलित करें:

Fe²+ → Fe³+ + e−  ...(समीकरण 1)

चरण 3: अपचयन अर्ध-अभिक्रिया का संतुलन:

  • Mn परमाणु संतुलित हैं।
  • 4 O परमाणुओं को संतुलित करने हेतु दाईं ओर 4 H₂O जोड़ें: MnO₄− → Mn²+ + 4H₂O
  • 8 H परमाणुओं को संतुलित करने हेतु बाईं ओर 8 H+ जोड़ें: MnO₄− + 8H+ → Mn²+ + 4H₂O
  • आवेश संतुलन: बायाँ आवेश = (-1) + 8(+1) = +7; दायाँ आवेश = +2। बाईं ओर 5 e− जोड़ें:
  • MnO₄− + 8H+ + 5e− → Mn²+ + 4H₂O  ...(समीकरण 2)

चरण 4: इलेक्ट्रॉनों का समतुल्यीकरण एवं योग:

समीकरण 1 को 5 से गुणा करके समीकरण 2 में जोड़ें:

5Fe²+ → 5Fe³+ + 5e−

MnO₄− + 8H+ + 5e− → Mn²+ + 4H₂O

--------------------------------------------------------

अंतिम संतुलित समीकरण:

MnO₄−(aq) + 5Fe²+(aq) + 8H+(aq) → Mn²+(aq) + 5Fe³+(aq) + 4H₂O(l)

जांच: दोनों पक्षों में: 1 Mn, 5 Fe, 8 H, 4 O परमाणु। बायाँ आवेश = (-1) + 5(+2) + 8(+1) = +17; दायाँ आवेश = (+2) + 5(+3) = +17। (समीकरण पूर्णतः संतुलित है)।

उदाहरण 2 (अम्लीय माध्यम): अम्लीय माध्यम में डाइक्रोमेट आयन तथा सल्फर डाइऑक्साइड की अभिक्रिया को संतुलित करें:
Cr₂O₇²−(aq) + SO₂(g) → Cr³+(aq) + SO₄²−(aq)
हल:

चरण 1: अर्ध-अभिक्रियाओं का पृथक्करण:

ऑक्सीकरण: SO₂ → SO₄²−

अपचयन: Cr₂O₇²− → Cr³+

चरण 2: ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया का संतुलन:

  • O संतुलन हेतु बाईं ओर 2 H₂O जोड़ें: SO₂ + 2H₂O → SO₄²−
  • H संतुलन हेतु दाईं ओर 4 H+ जोड़ें: SO₂ + 2H₂O → SO₄²− + 4H+
  • आवेश संतुलन: बायाँ = 0; दायाँ = (-2) + 4 = +2। दाईं ओर 2 e− जोड़ें:
  • SO₂ + 2H₂O → SO₄²− + 4H+ + 2e−  ...(समीकरण 1)

चरण 3: अपचयन अर्ध-अभिक्रिया का संतुलन:

  • Cr परमाणुओं का संतुलन: Cr₂O₇²− → 2Cr³+
  • O संतुलन हेतु दाईं ओर 7 H₂O जोड़ें: Cr₂O₇²− → 2Cr³+ + 7H₂O
  • H संतुलन हेतु बाईं ओर 14 H+ जोड़ें: Cr₂O₇²− + 14H+ → 2Cr³+ + 7H₂O
  • आवेश संतुलन: बायाँ = -2 + 14 = +12; दायाँ = 2(+3) = +6। बाईं ओर 6 e− जोड़ें:
  • Cr₂O₇²− + 14H+ + 6e− → 2Cr³+ + 7H₂O  ...(समीकरण 2)

चरण 4: इलेक्ट्रॉनों का समतुल्यीकरण एवं योग:

समीकरण 1 को 3 से गुणा कर समीकरण 2 में जोड़ें:

3SO₂ + 6H₂O → 3SO₄²− + 12H+ + 6e−

Cr₂O₇²− + 14H+ + 6e− → 2Cr³+ + 7H₂O

शुद्ध समीकरण: Cr₂O₇²− + 3SO₂ + (14 - 12)H+ → 2Cr³+ + 3SO₄²− + (7 - 6)H₂O

अंतिम संतुलित समीकरण:

Cr₂O₇²−(aq) + 3SO₂(g) + 2H+(aq) → 2Cr³+(aq) + 3SO₄²−(aq) + H₂O(l)

उदाहरण 3 (क्षारीय माध्यम): आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा क्षारीय विलयन में निम्नलिखित अभिक्रिया को संतुलित करें:
MnO₄−(aq) + I−(aq) → MnO₂(s) + IO₃−(aq)
हल:

चरण 1: अर्ध-अभिक्रियाओं का विभाजन:

ऑक्सीकरण: I− → IO₃−  |  अपचयन: MnO₄− → MnO₂

चरण 2: ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया का संतुलन:

  • O संतुलन: I− + 3H₂O → IO₃−
  • H संतुलन: I− + 3H₂O → IO₃− + 6H+
  • दोनों पक्षों में 6 OH− जोड़ें: I− + 3H₂O + 6OH− → IO₃− + 6H₂O
  • 3 H₂O घटाने पर: I− + 6OH− → IO₃− + 3H₂O + 6e−  ...(समीकरण 1)

चरण 3: अपचयन अर्ध-अभिक्रिया का संतुलन:

  • O संतुलन: MnO₄− → MnO₂ + 2H₂O
  • H संतुलन: MnO₄− + 4H+ → MnO₂ + 2H₂O
  • दोनों पक्षों में 4 OH− जोड़ें: MnO₄− + 4H₂O → MnO₂ + 2H₂O + 4OH−
  • 2 H₂O घटाने पर: MnO₄− + 2H₂O + 3e− → MnO₂ + 4OH−  ...(समीकरण 2)

चरण 4: इलेक्ट्रॉनों का समतुल्यीकरण एवं योग:

समीकरण 2 को 2 से गुणा करें (6 e−) तथा समीकरण 1 में जोड़ें:

I− + 6OH− → IO₃− + 3H₂O + 6e−

2MnO₄− + 4H₂O + 6e− → 2MnO₂ + 8OH−

शुद्ध योग: 2MnO₄− + I− + (4 - 3)H₂O → 2MnO₂ + IO₃− + (8 - 6)OH−

अंतिम संतुलित समीकरण:

2MnO₄−(aq) + I−(aq) + H₂O(l) → 2MnO₂(s) + IO₃−(aq) + 2OH−(aq)

उदाहरण 4 (क्षार में असमानुपातन): क्षारीय माध्यम में श्वेत फॉस्फोरस के असमानुपातन से फॉस्फीन व हाइपोफॉस्फाइट आयन बनने की अभिक्रिया को संतुलित करें:
P₄(s) → PH₃(g) + H₂PO₂−(aq)
हल:

चरण 1: अर्ध-अभिक्रियाओं का विभाजन (P₄ दोनों में शामिल है):

अपचयन: P₄ → PH₃ (P की अवस्था 0 से -3 में जाती है)

ऑक्सीकरण: P₄ → H₂PO₂− (P की अवस्था 0 से +1 में जाती है)

चरण 2: अपचयन अर्ध-अभिक्रिया का संतुलन (P₄ → 4PH₃):

  • H संतुलन: P₄ + 12H+ → 4PH₃
  • दोनों पक्षों में 12 OH− जोड़ें: P₄ + 12H₂O + 12e− → 4PH₃ + 12OH−  ...(समीकरण 1)

चरण 3: ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया का संतुलन (P₄ → 4H₂PO₂−):

  • O संतुलन (8 O): P₄ + 8H₂O → 4H₂PO₂−
  • H संतुलन: बाईं ओर 16 H, दाईं ओर 8 H ⇒ दाईं ओर 8 H+ जोड़ें: P₄ + 8H₂O → 4H₂PO₂− + 8H+
  • दोनों पक्षों में 8 OH− जोड़ें: P₄ + 8H₂O + 8OH− → 4H₂PO₂− + 8H₂O ⇒ P₄ + 8OH− → 4H₂PO₂− + 4e−  ...(समीकरण 2)

चरण 4: इलेक्ट्रॉनों का समतुल्यीकरण एवं योग:

समीकरण 2 को 3 से गुणा करें (12 e−) तथा समीकरण 1 में जोड़ें:

P₄ + 12H₂O + 12e− → 4PH₃ + 12OH−

3P₄ + 24OH− → 12H₂PO₂− + 12e−

योग: 4P₄ + 12H₂O + 12OH− → 4PH₃ + 12H₂PO₂−

संपूर्ण समीकरण को उभयनिष्ठ भाजक 4 से भाग देने पर:

अंतिम संतुलित समीकरण:

P₄(s) + 3OH−(aq) + 3H₂O(l) → PH₃(g) + 3H₂PO₂−(aq)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs - कक्षा 11 एवं प्रतियोगी परीक्षाएं)

प्र1. ऑक्सीकरण संख्या विधि और आयन-इलेक्ट्रॉन विधि में मूलभूत अंतर क्या है?
ऑक्सीकरण संख्या विधि संपूर्ण सूत्र इकाइयों में औपचारिक ऑक्सीकरण अवस्थाओं में हुए परिवर्तनों का अनुसरण करती है और कुल वृद्धि को कुल कमी के बराबर करती है। जबकि आयन-इलेक्ट्रॉन विधि अभिक्रिया को वास्तविक ऑक्सीकरण और अपचयन अर्ध-अभिक्रियाओं में विभाजित करती है, तथा द्रव्यमान और वास्तविक विद्युत आवेश को इलेक्ट्रॉनों द्वारा स्पष्ट रूप से संतुलित करती है। जलीय आयनिक अभिक्रियाओं के लिए आयन-इलेक्ट्रॉन विधि अधिक सटीक और सरल सिद्ध होती है।
प्र2. अनुमापन में KMnO₄ विलयन को अम्लीकृत करने के लिए HCl या HNO₃ की अपेक्षा तनु H₂SO₄ को प्राथमिकता क्यों दी जाती है?
तनु H₂SO₄ अनुमापन की परिस्थितियों में एक निष्क्रिय अम्ल की भांति व्यवहार करता है; इसके सल्फेट आयन (SO₄²⁻) को KMnO₄ द्वारा आगे ऑक्सीकृत नहीं किया जा सकता। इसके विपरीत, HCl एक अपचायक के रूप में कार्य करता है (KMnO₄ क्लोराइड आयनों को विषैली Cl₂ गैस में ऑक्सीकृत कर देता है, जिससे अनुमापक की अनावश्यक खपत होती है)। वहीं सांद्र HNO₃ स्वयं एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो विश्लेष्य (analyte) को ऑक्सीकृत करने में KMnO₄ से प्रतिस्पर्धा करने लगता है।
प्र3. सह-समानुपातन (Comproportionation / Synproportionation) अभिक्रिया क्या है?
सह-समानुपातन अभिक्रिया असमानुपातन की ठीक विपरीत होती है: इसमें एक ही तत्व की दो भिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं वाले दो अभिकारक परस्पर क्रिया करके एक ही उत्पाद बनाते हैं जिसमें वह तत्व एक मध्यवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था प्राप्त कर लेता है। उदाहरण: Ag²⁺ + Ag(s) → 2Ag⁺; अथवा IO₃⁻ (+5) + 5I⁻ (-1) + 6H⁺ → 3I₂ (0) + 3H₂O।
प्र4. बिना पूर्ण संतुलन किए कैसे पहचानें कि कोई अभिक्रिया असमानुपातन है या नहीं?
अभिकारकों में किसी एक ऐसे तत्व का निरीक्षण करें जो एकल प्रारंभिक ऑक्सीकरण अवस्था में उपस्थित हो। यदि वही विशिष्ट तत्व उत्पादों में दो अलग-अलग स्पीशीज में विभाजित हो जाता है—एक में उच्चतर ऑक्सीकरण संख्या और दूसरी में निम्नतर ऑक्सीकरण संख्या—तो वह निश्चित रूप से एक असमानुपातन अभिक्रिया है।
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