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कक्षा 11 · रसायन विज्ञानJEE MAIN × NEETEnglish
§ 7.1NCERT कक्षा 11 · रसायन विज्ञान · अध्याय 7

अपचयोपचय अभिक्रियाओं की पुरातन एवं इलेक्ट्रॉनिक संकल्पना

अपचयोपचय (रेडॉक्स) अभिक्रियाएं रासायनिक रूपांतरणों का एक अत्यंत विशाल एवं महत्वपूर्ण परिवार हैं। ईंधनों का दहन, धातुओं का संक्षारण, जैविक कोशिकीय श्वसन, औद्योगिक धातु निष्कर्षण तथा बैटरियों में रासायनिक ऊर्जा का विद्युत में रूपांतरण—ये सभी प्रक्रम रेडॉक्स अभिक्रियाओं पर आधारित हैं। इस परिचयात्मक मॉड्यूल में हम ऑक्सीजन/हाइड्रोजन स्थानांतरण की पुरातन धारणा से आधुनिक व्यापक इलेक्ट्रॉनिक अंतरण मॉडल तक के विकास का अध्ययन करेंगे।

1. ऑक्सीकरण एवं अपचयन की पुरातन (शास्त्रीय) संकल्पना

ऐतिहासिक रूप से 'ऑक्सीकरण' (उपचयन) शब्द का उपयोग फ्रांसीसी वैज्ञानिक लेवोशिए द्वारा किसी तत्व के ऑक्सीजन के साथ प्रत्यक्ष संयोग को दर्शाने हेतु किया गया था। कालांतर में अन्य ऋणविद्युती तथा धनविद्युती तत्वों के आधार पर इस परिभाषा का विस्तार किया गया।

पुरातन ऑक्सीकरण (उपचयन)

ऑक्सीकरण वह रासायनिक प्रक्रम है जिसमें निम्नलिखित में से कोई एक घटित होता है:

  1. ऑक्सीजन का योग:
    2Mg(s) + O₂(g) → 2MgO(s)
    S(s) + O₂(g) → SO₂(g)
  2. ऋणविद्युती तत्व का योग:
    Mg(s) + Cl₂(g) → MgCl₂(s)
    2Fe(s) + 3Cl₂(g) → 2FeCl₃(s)
  3. हाइड्रोजन का निष्कासन:
    2H₂S(g) + O₂(g) → 2S(s) + 2H₂O(l)
    CH₄(g) + 2O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(l)
  4. धनविद्युती तत्व का निष्कासन:
    2KI(aq) + H₂O₂(aq) → 2KOH(aq) + I₂(s)

पुरातन अपचयन

अपचयन वह रासायनिक प्रक्रम है जिसमें निम्नलिखित में से कोई एक घटित होता है:

  1. ऑक्सीजन का निष्कासन:
    CuO(s) + H₂(g) → Cu(s) + H₂O(l)
    Fe₂O₃(s) + 3CO(g) → 2Fe(s) + 3CO₂(g)
  2. ऋणविद्युती तत्व का निष्कासन:
    2FeCl₃(aq) + H₂(g) → 2FeCl₂(aq) + 2HCl(aq)
  3. हाइड्रोजन का योग:
    C₂H₄(g) + H₂(g) → C₂H₆(g)
    Cl₂(g) + H₂(g) → 2HCl(g)
  4. धनविद्युती तत्व का योग:
    2HgCl₂(aq) + SnCl₂(aq) → Hg₂Cl₂(s) + SnCl₄(aq)

2. अपचयोपचय अभिक्रियाओं की आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक संकल्पना

यद्यपि पुरातन ढांचा ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन युक्त अभिक्रियाओं की सफलतापूर्वक व्याख्या करता है, किंतु यह सोडियम और क्लोरीन के संयोग जैसी सरलतम अभिक्रियाओं या विलयन में होने वाली आयनिक अभिक्रियाओं को समझाने में असमर्थ रहता है।

आधुनिक रसायन विज्ञान में रेडॉक्स अभिक्रियाएं अनिवार्यतः इलेक्ट्रॉन अंतरण (स्थानांतरण) प्रक्रम हैं।

ऑक्सीकरण = इलेक्ट्रॉन का त्याग (वि-इलेक्ट्रॉनीकरण)  |  अपचयन = इलेक्ट्रॉन का ग्रहण (इलेक्ट्रॉनीकरण)
स्मरण सूत्र (Mnemonic): "OIL RIG" — Oxidation Is Loss of electrons (ऑक्सीकरण में इलेक्ट्रॉन त्यागे जाते हैं), Reduction Is Gain of electrons (अपचयन में इलेक्ट्रॉन ग्रहण किए जाते हैं)।

रेडॉक्स युग्म की संरचना:

सोडियम क्लोराइड के निर्माण पर विचार कीजिए:

2Na(s) + Cl₂(g) → 2NaCl(s)  ≡  2Na+Cl−(s)

इस समग्र अभिक्रिया को दो सूक्ष्म अर्ध-अभिक्रियाओं में विभाजित किया जा सकता है:

  • ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया: प्रत्येक सोडियम परमाणु अपना संयोजी इलेक्ट्रॉन त्यागता है:
    2Na(s) → 2Na+ + 2e− (इलेक्ट्रॉन त्यागना / ऑक्सीकरण)
  • अपचयन अर्ध-अभिक्रिया: क्लोरीन अणु इन दोनों त्यागे गए इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करता है:
    Cl₂(g) + 2e− → 2Cl− (इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना / अपचयन)
+-----------------------------------------------------------------------------------+ | रेडॉक्स अभिक्रिया में इलेक्ट्रॉन प्रवाह: "OIL RIG" | +-----------------------------------------------------------------------------------+ इलेक्ट्रॉन अंतरण (2 e-) ====================================> / +---------------+ +---------------+ | अपचायक | | ऑक्सीकारक | | (इलेक्ट्रॉन दाता) | | (इलेक्ट्रॉन ग्राही)| | उदा. 2 Na | | उदा. Cl2 | +---------------+ +---------------+ | | | इलेक्ट्रॉन त्यागता है | इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है v (ऑक्सीकरण) v (अपचयन) +---------------+ +---------------+ | ऑक्सीकृत रूप | | अपचयित रूप | | (2 Na+) | | (2 Cl-) | +---------------+ +---------------+ \ / ====================================> आयनिक क्रिस्टल: 2 NaCl +-----------------------------------------------------------------------------------+
चित्र 7.1: रेडॉक्स अभिक्रियाओं का आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप जो इलेक्ट्रॉन दाता एवं ग्राही के पूरक संबंध को दर्शाता है।
पद / संकल्पना इलेक्ट्रॉनिक परिभाषा ऑक्सीकरण अवस्था पर प्रभाव अभिक्रिया में भूमिका
ऑक्सीकरण (उपचयन) एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों का त्याग ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि निकाय को इलेक्ट्रॉन उपलब्ध कराता है
अपचयन एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों का ग्रहण ऑक्सीकरण संख्या में कमी निकाय से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है
अपचायक (Reductant) इलेक्ट्रॉन प्रदान (दान) करने वाली स्पीशीज स्वयं ऑक्सीकृत होता है दूसरे अभिकारक को अपचयित करता है
ऑक्सीकारक (Oxidant) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने वाली स्पीशीज स्वयं अपचयित होता है दूसरे अभिकारक को ऑक्सीकृत करता है

3. प्रतिस्पर्धात्मक इलेक्ट्रॉन अंतरण अभिक्रियाएं

विभिन्न तत्वों में इलेक्ट्रॉन त्यागने अथवा ग्रहण करने की प्रवृत्ति में स्पष्ट भिन्नता होती है। इस वरीयता क्रम को जलीय विलयनों में प्रतिस्पर्धात्मक विस्थापन प्रयोगों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है।

प्रयोग 1: CuSO₄ विलयन में जिंक की छड़

  • जब नीले कॉपर सल्फेट (Cu²+ आयन) विलयन में जिंक की छड़ डुबोई जाती है, तो स्वतः अभिक्रिया होती है।
  • जिंक घुलकर रंगहीन Zn²+ आयन बनाता है: Zn(s) → Zn²+(aq) + 2e−
  • Cu²+ आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर लाल-भूरे कॉपर के रूप में छड़ पर जमा होते हैं: Cu²+(aq) + 2e− → Cu(s)
  • विलयन का नीला रंग धीरे-धीरे उड़ जाता है।
  • निष्कर्ष: जिंक में कॉपर की तुलना में इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति अधिक है (Zn > Cu अपचायक क्षमता)।

प्रयोग 2: AgNO₃ विलयन में कॉपर की छड़

  • जब रंगहीन सिल्वर नाइट्रेट (Ag+ आयन) विलयन में कॉपर की छड़ डाली जाती है, तो कॉपर पर चांदी के चमकदार सुई जैसे क्रिस्टल निक्षेपित होते हैं।
  • जलयोजित Cu²+ आयनों के बनने से विलयन का रंग हल्का नीला हो जाता है।
  • कॉपर घुलता है: Cu(s) → Cu²+(aq) + 2e−
  • सिल्वर आयन अपचयित होते हैं: 2Ag+(aq) + 2e− → 2Ag(s)
  • निष्कर्ष: कॉपर में चांदी की तुलना में इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति अधिक है (Cu > Ag अपचायक क्षमता)।
+-----------------------------------------------------------------------------------+ | प्रतिस्पर्धात्मक इलेक्ट्रॉन विस्थापन के बीकर प्रयोग | +-----------------------------------------------------------------------------------+ (क) CuSO4 में जिंक की छड़: (ख) AgNO3 में कॉपर की छड़: [ जिंक की छड़ (Zn) ] [ कॉपर की छड़ (Cu) ] | | +-----+-----+ +-----+-----+ | Cu2+ aq | नीला रंग उड़ता है | Ag+ aq | रंगहीन से नीला होता है | (CuSO4) | लाल-भूरा Cu जमा | (AgNO3) | चमकदार Ag जमा होता है +-----------+ +-----------+ Zn + Cu2+ ---> Zn2+ + Cu Cu + 2Ag+ ---> Cu2+ + 2Ag Zn ऑक्सीकृत; Cu2+ अपचयित Cu ऑक्सीकृत; Ag+ अपचयित इलेक्ट्रॉन त्यागने की आपेक्षिक प्रवृत्ति: जिंक (Zn) > कॉपर (Cu) > सिल्वर (Ag) +-----------------------------------------------------------------------------------+
चित्र 7.2: प्रतिस्पर्धात्मक इलेक्ट्रॉन अंतरण जो Zn, Cu तथा Ag की आपेक्षिक अपचायक क्षमताओं को दर्शाता है।
विद्युत रसायन की ओर प्रस्थान: जब जिंक की ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया तथा कॉपर की अपचयन अर्ध-अभिक्रिया को दो अलग-अलग बीकरों में संपन्न कराकर उन्हें चालक तार तथा लवण सेतु द्वारा जोड़ दिया जाता है, तो इलेक्ट्रॉन बाह्य तार से बहने लगते हैं जिससे विद्युत धारा प्राप्त होती है। यही डेनियल सेल (गैल्वेनिक सेल) का मूलभूत आधार है।

4. हल किए गए उदाहरण एवं संख्यात्मक अनुप्रयोग

उदाहरण 1: अभिक्रिया: 2FeCl₃(aq) + SnCl₂(aq) → 2FeCl₂(aq) + SnCl₄(aq) में इलेक्ट्रॉनिक संकल्पना के आधार पर पहचानिए: (क) ऑक्सीकृत स्पीशीज, (ख) अपचयित स्पीशीज, (ग) ऑक्सीकारक, तथा (घ) अपचायक।
हल:

चरण 1: आयनिक समीकरण लिखना:

2Fe³+(aq) + Sn²+(aq) → 2Fe²+(aq) + Sn⁴+(aq)।

चरण 2: अर्ध-अभिक्रियाओं में विभक्त करना:

  • Sn²+(aq) → Sn⁴+(aq) + 2e− (इलेक्ट्रॉन त्यागना ⇒ ऑक्सीकरण)
  • 2Fe³+(aq) + 2e− → 2Fe²+(aq) (इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना ⇒ अपचयन)

निष्कर्ष:

(क) ऑक्सीकृत स्पीशीज: Sn²+ (अथवा SnCl₂)

(ख) अपचयित स्पीशीज: Fe³+ (अथवा FeCl₃)

(ग) ऑक्सीकारक: FeCl₃ (यह इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है)

(घ) अपचायक: SnCl₂ (यह इलेक्ट्रॉन त्यागता है)

उदाहरण 2: रेल पटरियों को जोड़ने हेतु प्रयुक्त थर्मिट अभिक्रिया: Fe₂O₃(s) + 2Al(s) → Al₂O₃(s) + 2Fe(l) को पुरातन तथा इलेक्ट्रॉनिक दोनों दृष्टिकोणों से रेडॉक्स अभिक्रिया के रूप में सिद्ध कीजिए।
हल:

पुरातन दृष्टिकोण:

  • ऐलुमिनियम में ऑक्सीजन का योग होता है ⇒ Al का ऑक्सीकरण होता है।
  • आयरन(III) ऑक्साइड से ऑक्सीजन निष्कासित होती है ⇒ Fe₂O₃ का अपचयन होता है।
  • अतः Al अपचायक तथा Fe₂O₃ ऑक्सीकारक है।

इलेक्ट्रॉनिक दृष्टिकोण:

  • धात्विक Al (अवस्था 0) 3 इलेक्ट्रॉन त्यागकर Al³+ बनाता है: Al → Al³+ + 3e− (वि-इलेक्ट्रॉनीकरण / ऑक्सीकरण)।
  • Fe₂O₃ में Fe³+ आयन 3 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर धात्विक Fe बनाते हैं: Fe³+ + 3e− → Fe (इलेक्ट्रॉनीकरण / अपचयन)।
  • दोनों परिभाषाएं पूर्णतः सामंजस्यपूर्ण हैं।
उदाहरण 3: क्या सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के बीच होने वाली उदासीनीकरण अभिक्रिया: NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H₂O(l) एक रेडॉक्स अभिक्रिया है? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
हल:

चरण 1: आयनिक रूप लिखना:

Na+(aq) + OH−(aq) + H+(aq) + Cl−(aq) → Na+(aq) + Cl−(aq) + H₂O(l)।

चरण 2: नेट आयनिक अभिक्रिया का परीक्षण:

H+(aq) + OH−(aq) → H₂O(l)।

चरण 3: ऑक्सीकरण अवस्थाओं का विश्लेषण:

  • Na की अवस्था दोनों ओर +1 रहती है।
  • Cl की अवस्था दोनों ओर -1 रहती है।
  • H की अवस्था H+ तथा H₂O दोनों में +1 रहती है।
  • O की अवस्था OH− तथा H₂O दोनों में -2 रहती है।

निष्कर्ष: इस प्रक्रम में किसी भी परमाणु के मध्य इलेक्ट्रॉनों का कोई स्थानांतरण नहीं होता। अतः यह रेडॉक्स अभिक्रिया नहीं है।

उदाहरण 4: क्या कोई पदार्थ एक अभिक्रिया में ऑक्सीकारक तथा दूसरी में अपचायक का कार्य कर सकता है? हाइड्रोजन परॉक्साइड (H₂O₂) के रासायनिक समीकरणों द्वारा समझाइए।
हल:

हां। वे पदार्थ जिनमें कोई प्रमुख तत्व मध्यवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था में उपस्थित होता है, वे दूसरे अभिकर्मक की प्रकृति के आधार पर ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों की भांति कार्य कर सकते हैं।

H₂O₂ में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 है (जो O₂ में 0 तथा H₂O में -2 के मध्य स्थित है)।

1. H₂O₂ ऑक्सीकारक के रूप में:

2Fe²+(aq) + H₂O₂(aq) + 2H+(aq) → 2Fe³+(aq) + 2H₂O(l)

ऑक्सीजन -1 से -2 में अपचयित होती है; Fe²+ का Fe³+ में ऑक्सीकरण होता है।

2. H₂O₂ अपचायक के रूप में:

2MnO₄−(aq) + 5H₂O₂(aq) + 6H+(aq) → 2Mn²+(aq) + 5O₂(g) + 8H₂O(l)

ऑक्सीजन -1 से 0 (O₂) में ऑक्सीकृत होती है; Mn(+7) का Mn(+2) में अपचयन होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. आवर्त सारणी में क्षार धातुएं सबसे प्रबल अपचायक क्यों होती हैं?
क्षार धातुओं (वर्ग 1: Li, Na, K, Rb, Cs) के बाह्यतम कोश में एक संयोजी इलेक्ट्रॉन होता है तथा इनकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी अत्यंत कम होती है। अतः वे अत्यंत सुगमता से इलेक्ट्रॉन त्याग देती हैं (तीव्र वि-इलेक्ट्रॉनीकरण), जिससे वे सर्वाधिक प्रबल अपचायक बन जाती हैं। (जलीय विलयन में लिथियम की जलयोजन एन्थैल्पी अत्यधिक उच्च होने के कारण यह सर्वाधिक प्रबल अपचायक है)।
Q2. तात्विक फ्लोरीन (F₂) सबसे प्रबल रासायनिक ऑक्सीकारक क्यों है?
फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता सर्वाधिक (4.0) है, F-F बंध वियोजन एन्थैल्पी कम है तथा सूक्ष्म फ्लोराइड आयन (F⁻) की जलयोजन ऊर्जा अत्यधिक उच्च है। इन कारकों के सम्मिलित प्रभाव से इसका मानक अपचयन विभव (+2.87 V) उच्चतम होता है, जिससे यह तीव्र गति से इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर सबसे प्रबल ऑक्सीकारक का कार्य करती है।
Q3. रेडॉक्स रसायन में विस्थापन अभिक्रिया और संयोजन अभिक्रिया में क्या अंतर है?
संयोजन अभिक्रिया में दो या अधिक तत्व/यौगिक मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं, जिसमें एक अभिकारक दूसरे को इलेक्ट्रॉन देता है (जैसे C + O₂ → CO₂)। विस्थापन अभिक्रिया में किसी यौगिक के परमाणु या आयन को अधिक क्रियाशील तत्व के परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है (जैसे Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu)।
Q4. क्या दो अधातुओं के मध्य भी विस्थापन अभिक्रिया हो सकती है?
हां। अधिक विद्युत ऋणात्मक अधातु कम विद्युत ऋणात्मक अधातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है। उदाहरणार्थ, पोटेशियम ब्रोमाइड विलयन में क्लोरीन गैस प्रवाहित करने पर क्लोरीन ब्रोमाइड आयनों को ब्रोमीन में ऑक्सीकृत कर देती है: Cl₂ + 2KBr → 2KCl + Br₂।
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