विलेयता गुणनफल (Ksp), अवक्षेपण गतिकी एवं गुणात्मक लवण विश्लेषण
किसी अल्प विलेय लवण के संतृप्त जलीय विलयन में अघुलित ठोस लवण और विलयन में उपस्थित उसके विलायकयोजित आयनों के मध्य एक विषमांगी गतिक साम्यावस्था स्थापित होती है। इस संतृप्ति सीमा का नियमन करने वाला साम्य स्थिरांक विलेयता गुणनफल स्थिरांक (Ksp) कहलाता है।
1. अल्प विलेय लवण एवं Ksp का सामान्य सूत्र
शुद्ध जल में घुल रहे एक सामान्य अल्प विलेय लवण AxBy पर विचार करें जिसकी मोलर विलेयता s (mol/L) है:
AxBy(s) ⇔ x Ay+(aq) + y Bx−(aq)
साम्यावस्था पर: [Ay+] = x s तथा [Bx−] = y s।
Ksp = [Ay+]x · [Bx−]y = (x s)x (y s)y = xx · yy · s(x+y)
मानक लवण संरचनाओं के लिए संबंध
| लवण संरचना प्रकार | प्रतिनिधि उदाहरण | उत्पन्न आयन | Ksp व्यंजक | मोलर विलेयता (s) |
|---|---|---|---|---|
| 1:1 प्रकार (AB) | AgCl, BaSO4, CaCO3 | A+ + B− | Ksp = s · s = s2 | s = √Ksp |
| 1:2 या 2:1 प्रकार (AB2 / A2B) | PbCl2, CaF2, Ag2CrO4 | A2+ + 2B− | Ksp = (s)(2s)2 = 4 s3 | s = (Ksp / 4)1/3 |
| 1:3 या 3:1 प्रकार (AB3 / A3B) | Al(OH)3, Fe(OH)3, Ag3PO4 | A3+ + 3B− | Ksp = (s)(3s)3 = 27 s4 | s = (Ksp / 27)1/4 |
| 2:3 प्रकार (A2B3) | As2S3, Ca3(PO4)2 | 2A3+ + 3B2− | Ksp = (2s)2(3s)3 = 108 s5 | s = (Ksp / 108)1/5 |
आयनिक गुणनफल (Qsp) बनाम विलेयता गुणनफल (Ksp) की कसौटी
Qsp < Ksp Qsp = Ksp Qsp > Ksp
[असंतृप्त विलयन] [संतृप्त साम्यावस्था] [अतिसंतृप्त अवस्था]
कोई अवक्षेप नहीं बनता कोई अवक्षेप नहीं बनता अवक्षेपण प्रारंभ होता है!
और अधिक ठोस घुल सकता है गतिक साम्य की स्थिति ठोस तब तक अलग होता है जब तक Qsp = Ksp
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सम-आयन प्रभाव द्वारा विलेयता का ह्रास:
संतृप्त AgCl विलयन में NaCl (सम-आयन Cl-) मिलाने पर:
[Cl-] अत्यधिक बढ़ता है → Qsp > Ksp → साम्य बाईं ओर विस्थापित ← → AgCl अवक्षेपित → विलेयता घटती है!
2. विलेयता पर सम-आयन प्रभाव (Common Ion Effect)
जब किसी अल्प विलेय लवण के संतृप्त विलयन में कोई ऐसा विलेय लवण मिलाया जाता है जिसमें एक उभयनिष्ठ (सम) आयन उपस्थित हो, तो ला-शातेलिए के नियमानुसार साम्य पश्च दिशा में विस्थापित हो जाता है, जिससे अल्प विलेय लवण की विलेयता में भारी कमी आ जाती है।
उदाहरण के लिए, 0.1 M NaCl विलयन में AgCl की विलेयता s' की गणना करें (जहाँ Ksp = 1.6 × 10−10):
- AgCl(s) ⇔ Ag+(aq) + Cl−(aq) [Ag+] = s', [Cl−] = s' + 0.1 ≈ 0.1 M
- Ksp = [Ag+][Cl−] = s'(0.1) = 1.6 × 10−10
- s' = 1.6 × 10−9 M
शुद्ध जल में इसकी विलेयता s = √(1.6 × 10−10) = 1.26 × 10−5 M थी। 0.1 M Cl− की उपस्थिति ने विलेयता को लगभग 10,000 गुना घटा दिया!
3. गुणात्मक अकार्बनिक लवण विश्लेषण में अनुप्रयोग (समूह पृथक्करण)
विभिन्न लवणों के विलेयता गुणनफलों में अत्यधिक अंतर तथा सम-आयन प्रभाव द्वारा नियंत्रित आयन सांद्रता क्षारीय मूलकों (धनायनों) के गुणात्मक विश्लेषण का वैज्ञानिक आधार है:
| विश्लेषणात्मक समूह | उपस्थित धनायन | समूह अभिकर्मक | अवक्षेपित रूप एवं अंतर्निहित सिद्धांत |
|---|---|---|---|
| समूह I | Ag+, Pb2+, Hg22+ | तनु HCl | अविलेय क्लोराइड (AgCl, PbCl2)। अत्यंत कम Ksp के कारण तत्काल अवक्षेपण। |
| समूह II | Cu2+, Pb2+, Hg2+, Bi3+, Cd2+, As3+ | तनु HCl की उपस्थिति में H2S गैस | अम्लीय माध्यम में सल्फाइड। HCl से प्राप्त H+ (सम-आयन) H2S के आयनन को दबा देता है। [S2−] अत्यंत कम रहता है जो केवल समूह II सल्फाइडों के अत्यंत न्यून Ksp को पार कर पाता है, जबकि समूह IV सल्फाइड घुले रहते हैं। |
| समूह III | Fe3+, Al3+, Cr3+ | ठोस NH4Cl की उपस्थिति में NH4OH | हाइड्रॉक्साइड (Fe(OH)3, Al(OH)3)। NH4Cl से प्राप्त NH4+ (सम-आयन) NH4OH के आयनन को दबाता है। [OH−] इतना कम रहता है कि केवल समूह III के हाइड्रॉक्साइड (Ksp ~ 10−38) अवक्षेपित होते हैं। |
| समूह IV | Ni2+, Co2+, Mn2+, Zn2+ | NH4OH की उपस्थिति में H2S गैस | क्षारीय माध्यम में सल्फाइड। OH− आयन H2S से H+ को हटाकर आयनन को अग्र दिशा में बढ़ाते हैं। उच्च [S2−] उच्च Ksp (~10−15 से 10−22) वाले समूह IV सल्फाइडों को अवक्षेपित करता है। |
| समूह V | Ba2+, Sr2+, Ca2+ | NH4OH + NH4Cl की उपस्थिति में (NH4)2CO3 | कार्बोनेट (BaCO3, SrCO3, CaCO3)। NH4Cl मिलाने से MgCO3 का असमय अवक्षेपण रुक जाता है। |
4. हल किए गए संख्यात्मक प्रश्न (JEE Main / Advanced / NEET)
1. Ag2CrO4 (A2B प्रकार) के लिए: Ksp = 4 s3।
s = (Ksp / 4)1/3 = [(1.1 × 10−12) / 4]1/3 = (2.75 × 10−13)1/3 = (275 × 10−15)1/3 ≈ 6.5 × 10⁻⁵ M।
2. AgCl (AB प्रकार) के लिए: Ksp = s2।
s = √(1.8 × 10−10) ≈ 1.34 × 10⁻⁵ M।
3. तुलना: यद्यपि Ag2CrO4 का Ksp छोटा है (1.1 × 10−12 बनाम 1.8 × 10−10), फिर भी इसकी मोलर विलेयता (6.5 × 10−5 M) AgCl (1.34 × 10−5 M) से लगभग 5 गुना अधिक है!
1. समान आयतन मिलाने पर कुल आयतन दोगुना हो जाता है, जिससे प्रत्येक आयन की सांद्रता आधी रह जाती है:
[Ca2+] = 0.002 / 2 = 1.0 × 10−3 M।
[SO42−] = 0.0004 / 2 = 2.0 × 10−4 M।
2. आयनिक गुणनफल Qsp परिकलित करें:
Qsp = [Ca2+] [SO42−] = (1.0 × 10−3) × (2.0 × 10−4) = 2.0 × 10⁻⁷।
3. Ksp से तुलना करें:
Qsp (2.0 × 10−7) < Ksp (2.4 × 10−5)।
चूँकि Qsp < Ksp है, अतः विलयन असंतृप्त रहेगा और CaSO4 का कोई अवक्षेप नहीं बनेगा।
5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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