अम्ल, क्षारक, जल का स्वतः आयनन (Kw), pH पैमाना एवं दुर्बल विद्युत अपघट्य
जलीय विलयनों में होने वाले परिवर्तनों का नियमन आयनिक साम्यावस्था द्वारा होता है। जैविक प्रक्रमों से लेकर औद्योगिक अम्ल-क्षारक अनुमापनों तक, हाइड्रोनियम आयनों के सांद्रण, आयनन स्थिरांकों (Ka, Kb) तथा लघुगणकीय pH पैमाने की मात्रात्मक समझ रसायन विज्ञान का विश्लेषणात्मक आधार बनाती है।
1. अम्ल एवं क्षारक की शास्त्रीय तथा आधुनिक अवधारणाएं
| सिद्धांत / मॉडल | अम्ल की परिभाषा | क्षारक की परिभाषा | सीमाएं एवं प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|---|
| ऑरेनियस सिद्धांत | जलीय विलयन में H+ (या H3O+) देता है (उदा. HCl, HNO3) | जलीय विलयन में OH− देता है (उदा. NaOH, KOH) | केवल जलीय विलायकों तक सीमित; NH3 की क्षारकीयता या AlCl3 की अम्लीयता नहीं समझा पाता। |
| ब्रान्स्टेड-लॉरी सिद्धांत | प्रोटॉन (H+) दाता | प्रोटॉन (H+) ग्राही | संयुग्मी अम्ल-क्षारक युग्म (Conjugate Pairs) प्रस्तुत करता है जिनमें केवल एक प्रोटॉन (H+) का अंतर होता है। |
| लुईस इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत | इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही (इलेक्ट्रॉन-रागी, रिक्त कक्षक, उदा. BF3, AlCl3, Fe3+) | इलेक्ट्रॉन-युग्म दाता (नाभिक-रागी, एकाकी युग्म, उदा. :NH3, H2O:, F−) | सर्वाधिक व्यापक सिद्धांत; प्रोटॉन स्थानांतरण के बिना गैसीय तथा अजलीय माध्यमों में भी लागू होता है। |
संयुग्मी अम्ल-क्षारक युग्म का नियम
किसी भी ब्रान्स्टेड अभिक्रिया में: HA + B ⇔ BH+ + A−। यहाँ A− स्पीशीज HA का संयुग्मी क्षारक है, और BH+ स्पीशीज B का संयुग्मी अम्ल है। मूलभूत सिद्धांत:
2. जल का स्वतः आयनन एवं आयनिक गुणनफल (Kw)
शुद्ध द्रव जल अत्यंत अल्प मात्रा में स्वतः आयनित होता है:
H2O(l) + H2O(l) ⇔ H3O+(aq) + OH−(aq) (ΔH > 0, ऊष्माशोषी)
इसके साम्य स्थिरांक का व्यंजक है:
Kw = [H+] [OH−] = 1.0 × 10−14 (298 K / 25°C पर)
ऋणात्मक लघुगणक लेने पर: pKw = pH + pOH = 14.00 (298 K पर)।
चूँकि जल का स्वतः आयनन ऊष्माशोषी है, ताप बढ़ाने पर Kw बढ़ता है (उदा. 373 K / 100°C पर Kw ≈ 5.5 × 10−13, जिससे pKw ≈ 12.26)। 100°C पर शुद्ध उदासीन जल में [H+] = [OH−] ≈ 7.4 × 10−7 M होता है, अर्थात 100°C पर उदासीन जल का pH लगभग 6.1 होता है, 7.0 नहीं! उदासीनता का वास्तविक अर्थ [H+] = [OH−] होना है, pH = 7 होना नहीं।
pH पैमाना एवं आयनिक सांद्रता स्पेक्ट्रम (298 K पर)
[H+] (M) 10^0 10^-2 10^-4 10^-6 10^-7 10^-8 10^-10 10^-12 10^-14
pH 0 2 4 6 7 8 10 12 14
|------- प्रबल अम्लीय --------| उदासीन |------- प्रबल क्षारकीय -------|
pOH 14 12 10 8 7 6 4 2 0
[OH-] (M) 10^-14 10^-12 10^-10 10^-8 10^-7 10^-6 10^-4 10^-2 10^0
--------------------------------------------------------------------------------
मूलभूत सूत्र: pH = -log10 [H3O+] | pOH = -log10 [OH-] | pH + pOH = pKw
3. दुर्बल एक-क्षारकीय अम्ल एवं ओस्टवाल्ड का तनुता नियम
दुर्बल अम्ल जलीय माध्यम में आंशिक रूप से वियोजित होते हैं:
HA(aq) ⇔ H+(aq) + A−(aq)
माना प्रारंभिक सांद्रता c तथा वियोजन की मात्रा α है (0 < α < 1):
- साम्य सांद्रताएं: [HA] = c(1 − α), [H+] = cα, [A−] = cα
- अम्ल आयनन स्थिरांक: Ka = (cα · cα) / [c(1 − α)] = cα2 / (1 − α)
जब α ≤ 0.05 (5% से कम वियोजन) हो, तो 1 − α ≈ 1 लिया जाता है। अतः:
α = √(Ka / c)
[H+] = c α = √(Ka · c)
pH = ½ [pKa − log c]
दुर्बल क्षारक एवं Kb
इसी प्रकार दुर्बल क्षारक BOH(aq) ⇔ B+(aq) + OH−(aq) के लिए:
pOH = ½ [pKb − log c] तथा pH = 14 − pOH
4. संयुग्मी युग्म संबंध एवं बहुक्षारकीय अम्ल
किसी भी संयुग्मी अम्ल-क्षारक युग्म (उदा. NH4+ व NH3, या CH3COOH व CH3COO−) के लिए:
Ka · Kb = Kw ⇒ pKa + pKb = pKw = 14.00 (298 K पर)
बहुक्षारकीय अम्लों का आयनन
एक से अधिक आयननीय प्रोटॉन वाले अम्ल उत्तरोत्तर पदों में वियोजित होते हैं:
- प्रथम पद: H2A ⇔ H+ + HA− (Ka1)
- द्वितीय पद: HA− ⇔ H+ + A2− (Ka2)
स्थिर-वैद्युत आकर्षण के कारण, एक ऋणावेशित ऋणायन (HA−) से धनावेशित प्रोटॉन को निकालना एक उदासीन अणु (H2A) से निकालने की तुलना में अत्यंत कठिन होता है। अतः:
द्विक्षारकीय अम्लों (जैसे H2S या H2CO3) के लिए जहाँ Ka1 ≫ Ka2 हो:
- विलयन का [H+] और pH लगभग पूरी तरह प्रथम आयनन पद द्वारा निर्धारित होता है: [H+] ≈ √(Ka1 · c)।
- द्विसंयोजी ऋणायन की सांद्रता [A2−] लगभग Ka2 के बराबर होती है, जो प्रारंभिक अम्ल सांद्रता c से स्वतंत्र होती है!
5. हल किए गए अभ्यास प्रश्न (JEE Main & NEET)
1. α की जांच करें: α = √(Ka / c) = √[(1.8 × 10−5) / 0.05] = √(3.6 × 10−4) = 0.019 (1.9%)।
2. चूँकि α = 1.9% < 5%, अतः (1 − α ≈ 1) सन्निकटन पूरी तरह मान्य है।
3. [H+] = cα = 0.05 × 0.019 = 9.5 × 10−4 M।
4. pH = −log(9.5 × 10−4) = 4 − log(9.5) = 4 − 0.978 = 3.02।
1. अत्यंत तनु क्षारीय विलयनों में जल के स्वतः आयनन से प्राप्त OH− की उपेक्षा नहीं की जा सकती।
2. माना जल से प्राप्त [OH−] = x।
कुल [OH−] = 10−8 + x, तथा [H+] = x।
3. Kw = [H+][OH−] = x(10−8 + x) = 10−14।
4. x2 + 10−8 x − 10−14 = 0 ⇒ x ≈ 0.95 × 10−7 M।
5. कुल [OH−] = 1.05 × 10−7 M ⇒ pOH = −log(1.05 × 10−7) ≈ 6.98।
6. pH = 14 − pOH = 14 − 6.98 = 7.02 (अल्प क्षारीय)।
6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
केवल इसी डिवाइस पर सेव — कोई अकाउंट या साइन-इन नहीं।