रासायनिक साम्यावस्था, साम्य स्थिरांक (Kc, Kp) एवं ला-शातेलिए का नियम
बंद पात्र में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएं केवल एक दिशा में पूर्णता की ओर अग्रसर नहीं होतीं; बल्कि वे गतिक साम्यावस्था (Dynamic Equilibrium) की स्थिति प्राप्त करती हैं, जहाँ अग्र अभिक्रिया और पश्च अभिक्रिया की दरें परस्पर समान हो जाती हैं। इस स्थूल (macroscopic) ठहराव पर, सूक्ष्म स्तर पर अणुओं का रूपांतरण निरंतर जारी रहने के बावजूद अभिकारकों और उत्पादों की सांद्रताएं समय के साथ अपरिवर्तित रहती हैं।
1. साम्यावस्था की गतिक प्रकृति एवं रासायनिक साम्य का नियम
एक सामान्य उत्क्रमणीय समांगी गैसीय अभिक्रिया पर विचार करें:
a A(g) + b B(g) ⇔ c C(g) + d D(g)
गुल्डबर्ग तथा वागे के द्रव्य अनुपाती क्रिया के नियम (Law of Mass Action) के अनुसार, अग्र अभिक्रिया की दर rf = kf [A]a [B]b तथा पश्च अभिक्रिया की दर rb = kb [C]c [D]d होती है। गतिक साम्य पर, rf = rb:
Kc = kf / kb = [C]c [D]d / ([A]a [B]b)
जहाँ सांद्रताएं साम्यावस्था पर मोल प्रति लीटर (mol/L या M) में व्यक्त की जाती हैं।
2. आंशिक दाब के पदों में साम्य स्थिरांक (Kp) एवं Kc के साथ संबंध
गैसीय तंत्रों के लिए, डाल्टन के आंशिक दाब के नियम तथा आदर्श गैस समीकरण pi = (ni/V) R T = ci R T का उपयोग करके साम्य स्थिरांक को साम्य आंशिक दाबों के पदों में व्यक्त किया जा सकता है:
प्रत्येक आंशिक दाब pi के स्थान पर [i] R T प्रतिस्थापित करने पर मूलभूत संबंध प्राप्त होता है:
Kp = Kc (R T)Δng
जहाँ Δng = (c + d) − (a + b) गैसीय उत्पादों के कुल मोलों और गैसीय अभिकारकों के कुल मोलों का अंतर है। मुख्य निष्कर्ष:
- यदि Δng = 0 (उदा. H2(g) + I2(g) ⇔ 2HI(g)): Kp = Kc। दोनों स्थिरांक विमाहीन होते हैं और दाब परिवर्तन का साम्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- यदि Δng > 0 (उदा. PCl5(g) ⇔ PCl3(g) + Cl2(g), Δng = +1): Kp > Kc (जब RT > 1 हो)।
- यदि Δng < 0 (उदा. N2(g) + 3H2(g) ⇔ 2NH3(g), Δng = −2): Kp < Kc (जब RT > 1 हो)।
अभिक्रिया लब्धि Q बनाम साम्य स्थिरांक K एवं दिशा का निर्धारण
Q < K Q = K Q > K
[अभिकारक अधिक हैं] [गतिक रासायनिक साम्य] [उत्पाद अधिक हैं]
अग्र दिशा में विस्थापन → कोई कुल विस्थापन नहीं ← पश्च दिशा में विस्थापन
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Q = किसी भी समय पर सांद्रताओं का अनुपात: [उत्पाद]^st / [अभिकारक]^st
K = केवल और केवल साम्यावस्था पर सांद्रताओं का अनुपात: [उत्पाद]^st / [अभिकारक]^st
ऊष्मागतिक संबंध:
ΔG = ΔG° + R T ln Q
साम्यावस्था पर: ΔG = 0, Q = K ==> ΔG° = -R T ln K ==> K = exp(-ΔG° / RT)
3. विषमांगी साम्य एवं साम्य स्थिरांक के रूपांतरण नियम
शुद्ध ठोसों या शुद्ध द्रवों से युक्त विषमांगी साम्यों में उनका मोलर घनत्व नियत रहता है। फलस्वरूप, उनकी सक्रियता (active mass) को इकाई (1) मानकर साम्य व्यंजक में छोड़ दिया जाता है:
- CaCO3(s) ⇔ CaO(s) + CO2(g) ⇒ Kc = [CO2], Kp = pCO2
- NH4HS(s) ⇔ NH3(g) + H2S(g) ⇒ Kp = pNH3 · pH2S = (Pकुल / 2)2 = P2 / 4
साम्य समीकरण पर गणितीय संक्रियाओं का प्रभाव
| समीकरण पर संक्रिया | मूल समीकरण एवं स्थिरांक | नया समीकरण एवं नया स्थिरांक (K') |
|---|---|---|
| समीकरण को उलटने पर | A ⇔ B (K) | B ⇔ A ⇒ K' = 1 / K |
| गुणांक n से गुणा करने पर | A ⇔ B (K) | nA ⇔ nB ⇒ K' = Kn |
| गुणांक n से भाग देने पर (1/n से गुणा) | A ⇔ B (K) | (1/n)A ⇔ (1/n)B ⇒ K' = K1/n = n√K |
| दो समीकरणों को जोड़ने पर | A ⇔ B (K1), B ⇔ C (K2) | A ⇔ C ⇒ K' = K1 · K2 |
4. ला-शातेलिए का नियम (Le Chatelier's Principle)
ला-शातेलिए का नियम: यदि साम्यावस्था पर स्थित किसी निकाय की सांद्रता, दाब, आयतन अथवा ताप में कोई परिवर्तन किया जाए, तो साम्यावस्था उस दिशा में विस्थापित हो जाती है जिस दिशा में किए गए परिवर्तन का प्रभाव निरस्त या कम हो सके।
| किया गया परिवर्तन | साम्यावस्था के विस्थापन की दिशा | साम्य स्थिरांक (K) पर प्रभाव |
|---|---|---|
| अभिकारक मिलाना या उत्पाद हटाना | अग्र दिशा में विस्थापन (→) | K अपरिवर्तित रहता है |
| उत्पाद मिलाना या अभिकारक हटाना | पश्च दिशा में विस्थापन (←) | K अपरिवर्तित रहता है |
| दाब बढ़ाना / आयतन घटाना | कम गैसीय मोलों की दिशा में विस्थापन (कम Δng की ओर) | K अपरिवर्तित रहता है |
| दाब घटाना / आयतन बढ़ाना | अधिक गैसीय मोलों की दिशा में विस्थापन (अधिक Δng की ओर) | K अपरिवर्तित रहता है |
| ताप बढ़ाना (ΔH > 0, ऊष्माशोषी) | अग्र दिशा में विस्थापन (→) (ऊष्मा अवशोषित करता है) | K बढ़ जाता है |
| ताप बढ़ाना (ΔH < 0, ऊष्माक्षेपी) | पश्च दिशा में विस्थापन (←) (ऊष्मा अवशोषित करता है) | K घट जाता है |
| उत्प्रेरक मिलाना | कोई विस्थापन नहीं (अग्र व पश्च दरें समान रूप से बढ़ती हैं) | K अपरिवर्तित रहता है (साम्य शीघ्र स्थापित होता है) |
| स्थिर आयतन पर अक्रिय गैस मिलाना | कोई विस्थापन नहीं (आंशिक दाब व सांद्रताएं अपरिवर्तित) | K अपरिवर्तित रहता है |
| स्थिर दाब पर अक्रिय गैस मिलाना | अधिक गैसीय मोलों की दिशा में विस्थापन (Δng > 0 की ओर) | K अपरिवर्तित रहता है |
5. साम्य स्थिरांक की ताप पर निर्भरता: वान्ट हॉफ समीकरण
साम्य स्थिरांक K केवल और केवल ताप पर निर्भर करता है और यह सांद्रता, दाब या उत्प्रेरक से स्वतंत्र होता है। वान्ट हॉफ समीकरण के अनुसार:
समाकलित रूप: log10(K2 / K1) = [ΔH° / (2.303 R)] · [(T2 − T1) / (T1 T2)]
6. हल किए गए अभ्यास प्रश्न (JEE Main / Advanced / NEET)
1. Δng ज्ञात करें: Δng = 2 − (1 + 3) = 2 − 4 = −2।
2. संबंध लागू करें: Kp = Kc (R T)Δng = Kc (R T)−2 ⇒ Kc = Kp (R T)2।
3. मान प्रतिस्थापित करें: R T = 0.0821 × 673 ≈ 55.25।
4. Kc = (1.6 × 10−4) × (55.25)2 = (1.6 × 10−4) × 3052.5 ≈ 0.488 ≈ 0.49 mol⁻² L²।
1. प्रारंभ में ठोस वियोजित होकर NH3 और H2S के समान मोल देता है:
pNH3 = pH2S = Pकुल / 2 = 0.84 / 2 = 0.42 atm।
2. Kp की गणना करें: Kp = pNH3 · pH2S = (0.42) × (0.42) = 0.1764 atm2।
3. चूँकि ताप नियत है, अतः Kp = 0.1764 atm2 ही रहेगा।
4. नए साम्य पर p'NH3 = 0.70 atm:
Kp = p'NH3 · p'H2S ⇒ 0.1764 = (0.70) · p'H2S
p'H2S = 0.1764 / 0.70 = 0.252 atm।
7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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