लवणों का जल-अपघटन एवं बफर विलयन: संपूर्ण गणितीय व्युत्पत्ति
जब लवण जल में घुलते हैं, तो उनके घटक आयन विलायक जल के अणुओं के साथ अन्योन्यक्रिया करते हैं। यदि कोई आयन दुर्बल अम्ल या दुर्बल क्षारक से उत्पन्न हुआ हो, तो वह संयुग्मी ब्रान्स्टेड साथी की भांति व्यवहार करता है और जल के उदासीन साम्य [H+] = [OH−] को विक्षुब्ध कर देता है — यह परिघटना लवण का जल-अपघटन (Salt Hydrolysis) कहलाती है। इसके विपरीत, बफर विलयन pH में तीव्र परिवर्तनों का विरोध करने की अनूठी क्षमता रखते हैं।
1. लवण जल-अपघटन के चार मुख्य वर्ग
लवण जल-अपघटन उदासीनीकरण अभिक्रिया का व्युत्क्रम प्रक्रम है: लवण + जल ⇔ अम्ल + क्षारक। जनक अम्ल एवं क्षारक की प्रकृति के आधार पर लवणों को चार वर्गों में विभाजित किया जाता है:
| लवण का प्रकार | जल-अपघटित होने वाला आयन | विलयन की प्रकृति | जल-अपघटन स्थिरांक (Kh) | जल-अपघटन की मात्रा (h) | विलयन का pH सूत्र (298 K पर) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक (NaCl, KNO3, Na2SO4) |
न तो धनायन और न ही ऋणायन जल-अपघटित होता है | उदासीन [H+] = [OH−] |
Kh = 0 | h = 0 | pH = 7.00 |
| 2. दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक (CH3COONa, KCN, Na2CO3) |
ऋणायन जल-अपघटित होता है (ऋणायनिक जल-अपघटन) | क्षारीय [OH−] > [H+] |
Kh = Kw / Ka | h = √[Kw / (Ka c)] | pH = 7 + ½ pKa + ½ log c |
| 3. प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक (NH4Cl, CuSO4, FeCl3) |
धनायन जल-अपघटित होता है (धनायनिक जल-अपघटन) | अम्लीय [H+] > [OH−] |
Kh = Kw / Kb | h = √[Kw / (Kb c)] | pH = 7 − ½ pKb − ½ log c |
| 4. दुर्बल अम्ल + दुर्बल क्षारक (CH3COONH4, NH4CN) |
धनायन एवं ऋणायन दोनों साथ-साथ जल-अपघटित होते हैं | Ka बनाम Kb पर निर्भर (यदि Ka = Kb तो उदासीन) |
Kh = Kw / (Ka Kb) | h = √[Kw / (Ka Kb)] (c से स्वतंत्र) |
pH = 7 + ½ pKa − ½ pKb (c से स्वतंत्र) |
बफर क्रिया की कार्यविधि: मिलाए गए अम्ल एवं क्षारक का उदासीनीकरण
अम्लीय बफर तंत्र: CH3COOH (दुर्बल अम्ल भंडार) + CH3COO- (संयुग्मी क्षारक भंडार)
=============================================================================
स्थिति क: अल्प मात्रा में प्रबल अम्ल (H+) मिलाने पर:
H+(मिलाया गया) + CH3COO-(भंडार) → CH3COOH(aq)
[प्रबल अम्ल दुर्बल अन-आयनित ऐसीटिक अम्ल में बदल जाता है। pH में नगण्य गिरावट!]
स्थिति ख: अल्प मात्रा में प्रबल क्षारक (OH-) मिलाने पर:
OH-(मिलाया गया) + CH3COOH(भंडार) → CH3COO-(aq) + H2O(l)
[प्रबल क्षारक संयुग्मी क्षारक और जल में रूपांतरित हो जाता है। pH में नगण्य वृद्धि!]
-----------------------------------------------------------------------------
हेंडरसन-हेसेलबाख समीकरण:
pH = pKa + log10 ( [संयुग्मी क्षारक] / [दुर्बल अम्ल] ) = pKa + log10 ( [लवण] / [अम्ल] )
2. बफर विलयन एवं हेंडरसन-हेसेलबाख समीकरण
वह विलयन जो अल्प मात्रा में प्रबल अम्ल, प्रबल क्षारक मिलाने पर अथवा जल द्वारा तनु करने पर अपने pH मान में होने वाले परिवर्तन का प्रबलता से विरोध करता है, बफर विलयन (Buffer Solution) कहलाता है।
1. अम्लीय बफर (Acidic Buffer)
यह दुर्बल अम्ल तथा प्रबल क्षारक के साथ इसके लवण का सममोलर अथवा लगभग सममोलर मिश्रण होता है (उदा. CH3COOH + CH3COONa, या HCN + NaCN):
pH = pKa + log10 ([संयुग्मी क्षारक] / [दुर्बल अम्ल]) = pKa + log10 (nलवण / nअम्ल)
ध्यान दें कि आयतन पद परस्पर कट जाता है: अतः इस अनुपात की गणना सीधे मोलों की संख्या (nलवण / nअम्ल) से की जा सकती है।
2. क्षारकीय बफर (Basic Buffer)
यह दुर्बल क्षारक तथा प्रबल अम्ल के साथ इसके लवण का मिश्रण होता है (उदा. NH4OH + NH4Cl):
pOH = pKb + log10 ([संयुग्मी अम्ल] / [दुर्बल क्षारक]) = pKb + log10 (nलवण / nक्षारक)
pH = 14.00 − pOH (298 K पर)
3. बफर क्षमता (Buffer Capacity)
बफर क्षमता (β) किसी बफर विलयन द्वारा pH परिवर्तन के विरोध की मात्रात्मक माप है:
जहाँ db बफर के एक लीटर विलयन में मिलाए गए प्रबल क्षारक के मोलों की संख्या है जिससे pH में d(pH) की वृद्धि होती है, और da मिलाए गए प्रबल अम्ल के मोलों की संख्या है।
यदि a मोल HA और s मोल NaA युक्त बफर में x मोल प्रबल अम्ल HCl मिलाया जाए:
- दुर्बल अम्ल के नए मोल = (a + x)
- संयुग्मी लवण के नए मोल = (s − x)
- नया pH = pKa + log[(s − x) / (a + x)]
4. हल किए गए संख्यात्मक प्रश्न (JEE Main / NEET)
1. लवण के प्रकार की पहचान करें: CH3COONa दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक का लवण है ⇒ क्षारीय विलयन (pH > 7)।
2. pKa ज्ञात करें: pKa = −log(1.8 × 10−5) = 5 − 0.255 = 4.745।
3. यहाँ c = 0.1 M ⇒ log c = log(10−1) = −1।
4. जल-अपघटन सूत्र लागू करें: pH = 7 + ½ pKa + ½ log c
pH = 7 + ½ (4.745) + ½ (−1) = 7 + 2.3725 − 0.50 = 8.87।
1. प्रारंभिक मिलीमोल:
अम्ल (CH3COOH) = 50 × 0.2 = 10.0 mmol।
लवण (CH3COONa) = 50 × 0.1 = 5.0 mmol।
प्रारंभिक pH = pKa + log(लवण / अम्ल) = 4.74 + log(5.0 / 10.0) = 4.74 + log(0.5) = 4.74 − 0.301 = 4.44।
2. मिलाए गए HCl के मिलीमोल = 5 mL × 0.1 M = 0.5 mmol H+।
3. उदासीनीकरण रससमीकरणमिति:
CH3COO− + H+ → CH3COOH
लवण के नए मिलीमोल = 5.0 − 0.5 = 4.5 mmol।
अम्ल के नए मिलीमोल = 10.0 + 0.5 = 10.5 mmol।
4. नया pH = 4.74 + log(4.5 / 10.5) = 4.74 + log(3 / 7) = 4.74 − 0.368 = 4.37।
(बफर क्रियाशीलता देखें: प्रबल अम्ल मिलाने पर भी pH में केवल 0.07 इकाई की नगण्य कमी हुई!)।
5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
केवल इसी डिवाइस पर सेव — कोई अकाउंट या साइन-इन नहीं।