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कक्षा 11 · रसायन विज्ञानJEE MAIN × NEETEnglish
§ 6.3NCERT कक्षा 11 · रसायन विज्ञान · अध्याय 6

लवणों का जल-अपघटन एवं बफर विलयन: संपूर्ण गणितीय व्युत्पत्ति

जब लवण जल में घुलते हैं, तो उनके घटक आयन विलायक जल के अणुओं के साथ अन्योन्यक्रिया करते हैं। यदि कोई आयन दुर्बल अम्ल या दुर्बल क्षारक से उत्पन्न हुआ हो, तो वह संयुग्मी ब्रान्स्टेड साथी की भांति व्यवहार करता है और जल के उदासीन साम्य [H+] = [OH−] को विक्षुब्ध कर देता है — यह परिघटना लवण का जल-अपघटन (Salt Hydrolysis) कहलाती है। इसके विपरीत, बफर विलयन pH में तीव्र परिवर्तनों का विरोध करने की अनूठी क्षमता रखते हैं।

1. लवण जल-अपघटन के चार मुख्य वर्ग

लवण जल-अपघटन उदासीनीकरण अभिक्रिया का व्युत्क्रम प्रक्रम है: लवण + जल ⇔ अम्ल + क्षारक। जनक अम्ल एवं क्षारक की प्रकृति के आधार पर लवणों को चार वर्गों में विभाजित किया जाता है:

लवण का प्रकार जल-अपघटित होने वाला आयन विलयन की प्रकृति जल-अपघटन स्थिरांक (Kh) जल-अपघटन की मात्रा (h) विलयन का pH सूत्र (298 K पर)
1. प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक
(NaCl, KNO3, Na2SO4)
न तो धनायन और न ही ऋणायन जल-अपघटित होता है उदासीन
[H+] = [OH−]
Kh = 0 h = 0 pH = 7.00
2. दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक
(CH3COONa, KCN, Na2CO3)
ऋणायन जल-अपघटित होता है (ऋणायनिक जल-अपघटन) क्षारीय
[OH−] > [H+]
Kh = Kw / Ka h = √[Kw / (Ka c)] pH = 7 + ½ pKa + ½ log c
3. प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक
(NH4Cl, CuSO4, FeCl3)
धनायन जल-अपघटित होता है (धनायनिक जल-अपघटन) अम्लीय
[H+] > [OH−]
Kh = Kw / Kb h = √[Kw / (Kb c)] pH = 7 − ½ pKb − ½ log c
4. दुर्बल अम्ल + दुर्बल क्षारक
(CH3COONH4, NH4CN)
धनायन एवं ऋणायन दोनों साथ-साथ जल-अपघटित होते हैं Ka बनाम Kb पर निर्भर
(यदि Ka = Kb तो उदासीन)
Kh = Kw / (Ka Kb) h = √[Kw / (Ka Kb)]
(c से स्वतंत्र)
pH = 7 + ½ pKa − ½ pKb
(c से स्वतंत्र)

बफर क्रिया की कार्यविधि: मिलाए गए अम्ल एवं क्षारक का उदासीनीकरण

बाहरी H+ और OH- के विक्षोभ को अवशोषित करने वाला गतिक संयुग्मी भंडार
अम्लीय बफर तंत्र: CH3COOH (दुर्बल अम्ल भंडार) + CH3COO- (संयुग्मी क्षारक भंडार)
=============================================================================
स्थिति क: अल्प मात्रा में प्रबल अम्ल (H+) मिलाने पर:
         H+(मिलाया गया) + CH3COO-(भंडार) → CH3COOH(aq)
         [प्रबल अम्ल दुर्बल अन-आयनित ऐसीटिक अम्ल में बदल जाता है। pH में नगण्य गिरावट!]

स्थिति ख: अल्प मात्रा में प्रबल क्षारक (OH-) मिलाने पर:
         OH-(मिलाया गया) + CH3COOH(भंडार) → CH3COO-(aq) + H2O(l)
         [प्रबल क्षारक संयुग्मी क्षारक और जल में रूपांतरित हो जाता है। pH में नगण्य वृद्धि!]
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हेंडरसन-हेसेलबाख समीकरण:
pH = pKa + log10 ( [संयुग्मी क्षारक] / [दुर्बल अम्ल] ) = pKa + log10 ( [लवण] / [अम्ल] )
      
अधिकतम बफर क्षमता: बफर द्वारा pH परिवर्तन का प्रतिरोध तब सर्वाधिक होता है जब [संयुग्मी क्षारक] = [अम्ल] हो, अर्थात pH = pKa पर। बफर की प्रभावी कार्य-सीमा प्रायः pH = pKa ± 1 तक सीमित होती है।

2. बफर विलयन एवं हेंडरसन-हेसेलबाख समीकरण

वह विलयन जो अल्प मात्रा में प्रबल अम्ल, प्रबल क्षारक मिलाने पर अथवा जल द्वारा तनु करने पर अपने pH मान में होने वाले परिवर्तन का प्रबलता से विरोध करता है, बफर विलयन (Buffer Solution) कहलाता है।

1. अम्लीय बफर (Acidic Buffer)

यह दुर्बल अम्ल तथा प्रबल क्षारक के साथ इसके लवण का सममोलर अथवा लगभग सममोलर मिश्रण होता है (उदा. CH3COOH + CH3COONa, या HCN + NaCN):

अम्लीय बफर के लिए हेंडरसन-हेसेलबाख समीकरण:
pH = pKa + log10 ([संयुग्मी क्षारक] / [दुर्बल अम्ल]) = pKa + log10 (nलवण / nअम्ल)
ध्यान दें कि आयतन पद परस्पर कट जाता है: अतः इस अनुपात की गणना सीधे मोलों की संख्या (nलवण / nअम्ल) से की जा सकती है।

2. क्षारकीय बफर (Basic Buffer)

यह दुर्बल क्षारक तथा प्रबल अम्ल के साथ इसके लवण का मिश्रण होता है (उदा. NH4OH + NH4Cl):

क्षारकीय बफर के लिए हेंडरसन-हेसेलबाख समीकरण:
pOH = pKb + log10 ([संयुग्मी अम्ल] / [दुर्बल क्षारक]) = pKb + log10 (nलवण / nक्षारक)
pH = 14.00 − pOH (298 K पर)

3. बफर क्षमता (Buffer Capacity)

बफर क्षमता (β) किसी बफर विलयन द्वारा pH परिवर्तन के विरोध की मात्रात्मक माप है:

β = db / d(pH) = −da / d(pH)
जहाँ db बफर के एक लीटर विलयन में मिलाए गए प्रबल क्षारक के मोलों की संख्या है जिससे pH में d(pH) की वृद्धि होती है, और da मिलाए गए प्रबल अम्ल के मोलों की संख्या है।
जेईई सावधानी — बफर में प्रबल अभिकर्मक मिलाने पर:
यदि a मोल HA और s मोल NaA युक्त बफर में x मोल प्रबल अम्ल HCl मिलाया जाए:
  • दुर्बल अम्ल के नए मोल = (a + x)
  • संयुग्मी लवण के नए मोल = (s − x)
  • नया pH = pKa + log[(s − x) / (a + x)]
स्टॉइकियोमीट्रिक उदासीनीकरण किए बिना सीधे HCl से [H+] की गणना करने की भूल कभी न करें!

4. हल किए गए संख्यात्मक प्रश्न (JEE Main / NEET)

उदाहरण 1: 0.1 M सोडियम ऐसीटेट (CH3COONa) जलीय विलयन का pH परिकलित कीजिए। दिया गया है: ऐसीटिक अम्ल के लिए Ka = 1.8 × 10⁻⁵। (log 1.8 ≈ 0.255)
सही उत्तर: pH = 8.87
चरणबद्ध हल:
1. लवण के प्रकार की पहचान करें: CH3COONa दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक का लवण है ⇒ क्षारीय विलयन (pH > 7)।
2. pKa ज्ञात करें: pKa = −log(1.8 × 10−5) = 5 − 0.255 = 4.745।
3. यहाँ c = 0.1 M ⇒ log c = log(10−1) = −1।
4. जल-अपघटन सूत्र लागू करें: pH = 7 + ½ pKa + ½ log c
pH = 7 + ½ (4.745) + ½ (−1) = 7 + 2.3725 − 0.50 = 8.87।
उदाहरण 2: 50 mL 0.2 M CH3COOH और 50 mL 0.1 M CH3COONa को मिलाकर एक अम्लीय बफर बनाया गया। इस मिश्रण का प्रारंभिक pH क्या होगा? यदि इसमें 5 mL 0.1 M HCl मिला दिया जाए तो नया pH क्या होगा? (CH3COOH का pKa = 4.74)
सही उत्तर: प्रारंभिक pH = 4.44; HCl मिलाने के पश्चात नया pH = 4.37
चरणबद्ध हल:
1. प्रारंभिक मिलीमोल:
अम्ल (CH3COOH) = 50 × 0.2 = 10.0 mmol।
लवण (CH3COONa) = 50 × 0.1 = 5.0 mmol।
प्रारंभिक pH = pKa + log(लवण / अम्ल) = 4.74 + log(5.0 / 10.0) = 4.74 + log(0.5) = 4.74 − 0.301 = 4.44।
2. मिलाए गए HCl के मिलीमोल = 5 mL × 0.1 M = 0.5 mmol H+।
3. उदासीनीकरण रससमीकरणमिति:
CH3COO− + H+ → CH3COOH
लवण के नए मिलीमोल = 5.0 − 0.5 = 4.5 mmol।
अम्ल के नए मिलीमोल = 10.0 + 0.5 = 10.5 mmol।
4. नया pH = 4.74 + log(4.5 / 10.5) = 4.74 + log(3 / 7) = 4.74 − 0.368 = 4.37।
(बफर क्रियाशीलता देखें: प्रबल अम्ल मिलाने पर भी pH में केवल 0.07 इकाई की नगण्य कमी हुई!)।

5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या NH4Cl और NaOH का सममोलर मिश्रण बफर की तरह कार्य कर सकता है?
नहीं। सममोलर होने पर पूर्ण उदासीनीकरण हो जाता है: NH4Cl + NaOH → NH3 + NaCl + H2O। चूँकि दोनों 1:1 अनुपात में पूर्णतः समाप्त हो जाते हैं, अतः दुर्बल क्षारक NH3 के साथ संयुग्मी अम्ल NH4Cl शेष नहीं बचता। किंतु यदि NH4Cl आधिक्य में हो (उदा. 2 मोल NH4Cl + 1 मोल NaOH), तो 1 मोल NH4Cl शेष बचता है जो बने हुए 1 मोल NH3 के साथ मिलकर उत्तम क्षारकीय बफर बनाता है!
2. ताप बढ़ाने पर अमोनियम ऐसीटेट (CH3COONH4) विलयन के pH पर क्या प्रभाव पड़ता है?
CH3COONH4 के लिए pH = ½ pKw + ½ pKa − ½ pKb होता है। चूँकि ऐसीटिक अम्ल और अमोनियम हाइड्रॉक्साइड के लिए pKa ≈ pKb ≈ 4.74 होता है, अतः pH = ½ pKw रह जाता है। ताप बढ़ाने पर Kw बढ़ता है जिससे pKw घटता है; फलस्वरूप उदासीन विलयन का pH 7.00 से थोड़ा कम हो जाता है।
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